साइबर क्राइम की धाराएँ: BNS 2023 और IT एक्ट (चार्ट)

420 अब 318(4) है। एक चार्ट में वे सारी धाराएँ जो पुलिस ऑनलाइन ठगी, सेक्सटॉर्शन, पीछा करने और हैकिंग में लगाती है, पुरानी IPC संख्या और सज़ा के साथ।
BNS चार्टBNS 2023 में साइबर क्राइम की धाराएँ (पुरानी IPC के साथ)
| अपराध | BNS 2023 | पुरानी IPC | सज़ा (अधिकतम) |
|---|---|---|---|
| ऑनलाइन ठगी / छल जिससे पैसा दिलवाया गया | 318(4) | 420 | 7 साल + जुर्माना |
| किसी और का रूप धरकर छल | 319(2) | 419 | 5 साल + जुर्माना |
| पुलिस अफ़सर या लोक सेवक होने का दिखावा | 204 | 170 | 6 महीने से 3 साल + जुर्माना |
| उद्दापन, सेक्सटॉर्शन, फिरौती की माँग | 308(2) | 384 | 7 साल और/या जुर्माना |
| ऑनलाइन धमकी (आपराधिक अभित्रास) | 351(2), 351(3) | 506 | 2 साल; मौत या गंभीर चोट की धमकी पर 7 साल |
| सोशल मीडिया पर मानहानि | 356(2) | 500 | 2 साल, जुर्माना या सामुदायिक सेवा |
| महिला का ऑनलाइन पीछा करना | 78 | 354D | 3 साल + जुर्माना (पहली बार) |
| दृश्यरतिकता: महिला की निजी तस्वीरें लेना या फैलाना | 77 | 354C | 1 से 3 साल + जुर्माना (पहली बार) |
| छल के लिए कूटरचना: नक़ली दस्तावेज़, नक़ली वेबसाइट | 336(3) | 468 | 7 साल + जुर्माना |
| संगठित साइबर अपराध गिरोह | 111 | नया | 5 साल से आजीवन + कम से कम ₹5 लाख जुर्माना (मौत होने पर और ज़्यादा) |
IT एक्ट चार्टसाइबर क्राइम के लिए IT एक्ट 2000 की धाराएँ
| अपराध | IT एक्ट धारा | सज़ा (अधिकतम) |
|---|---|---|
| हैकिंग, डेटा चोरी, वायरस फैलाना (बेईमानी से) | 66 (43 के साथ) | 3 साल या ₹5 लाख जुर्माना, या दोनों |
| पहचान की चोरी: किसी का पासवर्ड, OTP, ई-हस्ताक्षर इस्तेमाल करना | 66C | 3 साल + ₹1 लाख जुर्माना |
| फ़ोन या कंप्यूटर से प्रतिरूपण द्वारा छल | 66D | 3 साल + ₹1 लाख जुर्माना |
| बिना सहमति किसी के निजी अंगों की तस्वीर लेना या छापना | 66E | 3 साल या ₹2 लाख जुर्माना, या दोनों |
| ऑनलाइन अश्लील सामग्री प्रकाशित करना | 67 | 3 साल + ₹5 लाख (पहली बार) |
| यौन रूप से स्पष्ट सामग्री | 67A | 5 साल + ₹10 लाख (पहली बार) |
| बच्चों के यौन शोषण की सामग्री | 67B | 5 साल + ₹10 लाख (पहली बार) |
| साइबर आतंकवाद | 66F | आजीवन कारावास |
कौन-सीआपके मामले में कौन-सी धारा लगेगी?
- 1
💸 UPI, OTP, KYC, नौकरी या निवेश फ्रॉड
आमतौर पर BNS 318(4) के साथ IT एक्ट 66C / 66D; नक़ली दस्तावेज़ या वेबसाइट हो तो 336(3); गिरोह हो तो 111।
- 2
📹 डिजिटल अरेस्ट या फ़र्ज़ी पुलिस कॉल
BNS 204 (लोक सेवक का प्रतिरूपण), 308 (उद्दापन), 318(4), 319(2) और IT एक्ट 66D। देखें फ़र्ज़ी पुलिस कॉल आए तो क्या करें।
- 3
📸 मॉर्फ़ फ़ोटो, सेक्सटॉर्शन, लीक निजी वीडियो
BNS 77, 308, 351 और IT एक्ट 66E, 67, 67A। बच्चों के मामले में POCSO एक्ट और IT एक्ट 67B भी।
- 4
📲 हैक अकाउंट, फ़र्ज़ी प्रोफ़ाइल
IT एक्ट 66 और 66C; फ़र्ज़ी प्रोफ़ाइल से ठगी हो तो BNS 319(2); बदनामी हो तो 356।
क़ानूनधारा 66C IT एक्ट और धारा 111 BNS
सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 · धारा 66C. पहचान की चोरी के लिए दंड। जो कोई कपटपूर्वक या बेईमानी से किसी अन्य व्यक्ति के इलेक्ट्रॉनिक हस्ताक्षर, पासवर्ड या किसी अन्य विशिष्ट पहचान चिह्न का उपयोग करता है, वह किसी भी भाँति के कारावास से, जिसकी अवधि तीन वर्ष तक हो सकेगी, दंडित किया जाएगा और एक लाख रुपये तक के जुर्माने का भी दायी होगा।
भारतीय न्याय संहिता, 2023 · धारा 111(1). किसी व्यक्ति या मिलकर काम करने वाले व्यक्तियों के समूह द्वारा, अकेले या संयुक्त रूप से, किसी संगठित अपराध सिंडिकेट के सदस्य के रूप में या उसकी ओर से, हिंसा, हिंसा की धमकी, डराने, दबाव या किसी अन्य अवैध साधन से प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष भौतिक लाभ (वित्तीय लाभ सहित) पाने के लिए की गई कोई भी निरंतर अवैध गतिविधि, जिसमें अपहरण, लूट, वाहन चोरी, उद्दापन, ज़मीन क़ब्ज़ा, सुपारी हत्या, आर्थिक अपराध, साइबर अपराध, व्यक्तियों, ड्रग्स, हथियारों या अवैध वस्तुओं या सेवाओं की तस्करी, वेश्यावृत्ति या फिरौती के लिए मानव तस्करी शामिल है, संगठित अपराध होगी।
1 जुलाई 2024 से BNS ने IPC की जगह ली है, इसलिए पुरानी 420 अब 318(4) है। कंप्यूटर या फ़ोन वाले अपराधों के लिए IT एक्ट साथ-साथ चलता है। पहली बार BNS ने साइबर अपराध को 'संगठित अपराध' में नाम से रखा है, इसलिए ठग गिरोह को आजीवन कारावास तक हो सकता है।
🏠 रोज़मर्रा की मिसाल
BNS किताब के नए संस्करण जैसा है: अध्याय वही, पेज नंबर बदल गए। 420 अब भी ठगी है, बस अब 318(4) पर है।
🇮🇳 असली भारतीय उदाहरण
मान लीजिए ठगी 15 जून 2024 को हुई और FIR 2026 में दर्ज हुई। FIR में BNS 318(4) नहीं, IPC 420 लगेगी, क्योंकि अपराध 1 जुलाई 2024 से पहले हुआ।
संविधानसाइबर कानून और संविधान
अनुच्छेद 20(1): पिछली तारीख़ से सज़ा नहीं
किसी को ऐसे कानून में सज़ा नहीं दी जा सकती जो काम के समय मौजूद नहीं था, न उस समय की सज़ा से ज़्यादा। इसीलिए 1 जुलाई 2024 से पहले के अपराधों पर IPC धाराएँ ही लगती हैं।
अनुच्छेद 21: निजता और गरिमा
दृश्यरतिकता, पीछा करने और निजता उल्लंघन की धाराएँ पुट्टस्वामी (2017) में माने गए निजता के अधिकार की रक्षा करती हैं।
अभ्यास MCQख़ुद को परखें: साइबर कानून
भारतीय न्याय संहिता, 2023 में छल करके बेईमानी से संपत्ति दिलवाना (पुरानी धारा 420 IPC) किस धारा में है?
शंका समाधानअक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
IPC 420 की नई धारा क्या है?
भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 318(4), जो 1 जुलाई 2024 से लागू है। सज़ा: 7 साल तक और जुर्माना।
ऑनलाइन ठगी पर IT एक्ट की कौन-सी धारा लगती है?
फ़ोन या कंप्यूटर से प्रतिरूपण कर छल पर धारा 66D, और पासवर्ड, OTP या ई-हस्ताक्षर के दुरुपयोग पर 66C।
क्या सेक्सटॉर्शन BNS में अपराध है?
हाँ। आमतौर पर इसे उद्दापन (BNS 308) और आपराधिक अभित्रास (351) के साथ, सामग्री के हिसाब से IT एक्ट 66E, 67 या 67A में दर्ज किया जाता है।
क्या पुरानी IPC धाराएँ अब भी लगती हैं?
हाँ, 1 जुलाई 2024 से पहले हुए अपराधों पर, क्योंकि अनुच्छेद 20(1) नए आपराधिक कानून को पिछली तारीख़ से लागू करने से रोकता है।
स्रोत और आगे की पढ़ाईहमने जिन स्रोतों की जाँच की
धाराएँ और सज़ा 23 अक्टूबर 2026 को India Code पर BNS 2023 और IT एक्ट 2000 के आधिकारिक पाठ से जाँची गईं। दिखाई गई सज़ा अधिकतम है (जहाँ दोबारा अपराध पर ज़्यादा सज़ा है, वहाँ पहली बार की)।