भाग II ⚖️ नागरिकता लागू

अनुच्छेद 5: संविधान के प्रारंभ पर नागरिकता

भाग II यहाँ से शुरू होता है। अनुच्छेद 5 तय करता है कि संविधान लागू होने के दिन, 26 जनवरी 1950 को, भारत के पहले नागरिक कौन बने।

मूल पाठअनुच्छेद 5 का आधिकारिक पाठ

हिन्दी · आधिकारिक पाठ

5. संविधान के प्रारंभ पर नागरिकता—

इस संविधान के प्रारंभ पर प्रत्येक व्यक्ति जिसका भारत के राज्यक्षेत्र में अधिवास है और—

(क) जो भारत के राज्यक्षेत्र में जन्मा था, या

(ख) जिसके माता या पिता में से कोई भारत के राज्यक्षेत्र में जन्मा था, या

(ग) जो ऐसे प्रारंभ से ठीक पहले कम से कम पाँच वर्ष तक भारत के राज्यक्षेत्र में मामूली तौर से निवासी रहा है,

भारत का नागरिक होगा।

In Simple Words / आसान शब्दों में

26 जनवरी 1950 को भारत को नागरिकों की एक शुरुआती सूची चाहिए थी। अनुच्छेद 5 ने दो क़दम वाली आसान जाँच से यह सूची बनाई।

क़दम 1, अधिवास: व्यक्ति का स्थायी घर भारत में होना चाहिए, यानी वह भारत में रहता हो और हमेशा यहीं रहने का इरादा रखता हो।

क़दम 2, इनमें से कोई एक: (क) वह भारत में जन्मा हो, या (ख) उसकी माँ या पिता भारत में जन्मे हों, या (ग) वह 26 जनवरी 1950 से ठीक पहले कम से कम 5 साल से भारत में रह रहा हो।

दोनों क़दम पूरे होने पर व्यक्ति अपने आप भारत का नागरिक बन गया। इसके बाद अनुच्छेद 6 से 8 ने विभाजन से प्रभावित लोगों और विदेश में रहने वाले भारतीयों जैसे ख़ास समूहों के नियम बताए।

🏠 रोज़मर्रा की मिसाल

किसी नई हाउसिंग सोसाइटी के उद्घाटन का दिन सोचिए। संस्थापक सदस्य वे हैं जिनका वहाँ पहले से फ़्लैट है (अधिवास) और साथ ही जो उसी कॉलोनी में जन्मे, या जिनके माता-पिता वहाँ जन्मे, या जो 5 साल से वहाँ रह रहे हैं। बाद में जुड़ने वाले सोसाइटी के उपनियमों से चलते हैं, जो भारत के मामले में नागरिकता अधिनियम, 1955 है।

🇮🇳 असली भारतीय उदाहरण

मीरा का जन्म 1930 में नेपाल में हुआ, पर उसके पिता पटना में जन्मे थे और परिवार पटना में स्थायी रूप से बस गया था। 26 जनवरी 1950 को वह खंड (ख) के तहत भारत की नागरिक बन गई। उसके पड़ोसी जोसेफ़ का जन्म श्रीलंका में हुआ था, पर उसने 1942 में पटना को अपना स्थायी घर बना लिया था। आठ साल के निवास से वह खंड (ग) के तहत योग्य हुआ।

त्वरित दोहराईयाद रखने योग्य मुख्य बातें

  • अनुच्छेद 5 केवल 26 जनवरी 1950 पर लागू हुआ; यह बाद में जन्मे लोगों के लिए नियम नहीं है।
  • हर मामले में भारत में अधिवास अनिवार्य था।
  • साथ में इनमें से कोई एक: भारत में जन्म, माता/पिता का भारत में जन्म, या 5 वर्ष का मामूली निवास।
  • भारत में एकल नागरिकता है: पूरे देश के लिए एक भारतीय नागरिकता, राज्यों की अलग नागरिकता नहीं।
  • 1950 के बाद की नागरिकता नागरिकता अधिनियम, 1955 से तय होती है (देखें अनुच्छेद 11)।

UPSC · राज्य PSC · न्यायपालिकापरीक्षा कॉर्नर

  • जल्दी शुरुआत: अनुच्छेद 394 के तहत अनुच्छेद 5 से 9 26 नवंबर 1949 को, यानी संविधान अंगीकार होने के दिन ही लागू हो गए थे, 26 जनवरी 1950 को नहीं।
  • भाग II (अनुच्छेद 5 से 11) नागरिकता का स्थायी कानून नहीं देता। यह केवल प्रारंभ के समय के नागरिकों की पहचान करता है और बाकी संसद पर छोड़ता है।
  • एकल नागरिकता ब्रिटिश संविधान से ली गई है। इसके उलट अमेरिका में दोहरी (संघीय और राज्य) नागरिकता है।
  • अधिवास का अर्थ स्थायी घर है; स्थायी रहने के इरादे के बिना केवल निवास काफ़ी नहीं था।

अभ्यास प्रश्नख़ुद को परखें: अनुच्छेद 5

26 जनवरी 1950 को भारत में अधिवास रखने वाला व्यक्ति अनुच्छेद 5 के तहत नागरिक बना, यदि:

शंका समाधानअक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

क्या आज जन्मे बच्चे की नागरिकता अनुच्छेद 5 से तय होती है?

नहीं। अनुच्छेद 5 केवल 26 जनवरी 1950 के लोगों पर लागू था। आज जन्मे बच्चे को नागरिकता संसद द्वारा अनुच्छेद 11 के तहत बनाए गए नागरिकता अधिनियम, 1955 से मिलती है।

"अधिवास" का क्या अर्थ है?

अधिवास वह स्थान है जिसे व्यक्ति अपना स्थायी घर मानता है, जहाँ वह रहता है और अनिश्चित समय तक रहने का इरादा रखता है।

क्या भारत में राज्यों की अलग नागरिकता होती है?

नहीं। भारत में एकल नागरिकता है। हर नागरिक भारत का नागरिक है, चाहे वह किसी भी राज्य में रहे।