साइबर फ्रॉड शिकायत कैसे करें: डिजिटल अरेस्ट स्कैम में 1930 पर रिपोर्ट और पैसा वापसी

कोई पुलिस अफ़सर वीडियो कॉल पर गिरफ़्तार नहीं कर सकता। अगर 'डिजिटल अरेस्ट' कॉल से पैसा जा चुका है, तो पहले कुछ घंटों के ये स्टेप तय करते हैं कि पैसा वापस मिलेगा या नहीं।
स्टेप बाय स्टेपसाइबर फ्रॉड शिकायत कैसे करें: डिजिटल अरेस्ट स्कैम के बाद 7 स्टेप
अभी पैसा कटा है? पढ़ना रोकें और 1930 पर कॉल करें, या cybercrime.gov.in पर रिपोर्ट करें। हर मिनट क़ीमती है।
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📵 कॉल काटें, पैसा न भेजें, परिवार को बताएँ
पुलिस, CBI, ED, कस्टम या RBI कभी वीडियो कॉल पर गिरफ़्तार नहीं करतेअसली समन या नोटिस आप अपने नज़दीकी थाने में जाँच सकते हैंआप कॉल काट सकते हैं, बाहर जा सकते हैं, किसी से भी बात कर सकते हैंकोई एजेंसी पैसा 'सेफ़' या 'RBI वेरिफ़िकेशन' खाते में नहीं मँगातीकोई अधिकारी कैमरे पर बने रहने या परिवार से छिपाने का आदेश नहीं देतापैसे के बदले कोई कोर्ट ऑर्डर या वारंट WhatsApp पर नहीं आता - 2
☎️ गोल्डन ऑवर में 1930 पर कॉल करें
पैसा कटते ही, हो सके तो पहले घंटे के अंदर, राष्ट्रीय साइबर क्राइम हेल्पलाइन 1930 पर कॉल करें। ऑपरेटर आपकी शिकायत सिटिज़न फ़ाइनेंशियल साइबर फ्रॉड रिपोर्टिंग सिस्टम में दर्ज करता है, जो उन बैंकों और वॉलेट को अलर्ट भेजता है जहाँ आपका पैसा गया है, ताकि निकाले जाने से पहले उस पर रोक (होल्ड) लग सके। बैंक का नाम, ट्रांज़ैक्शन ID (UTR) और समय तैयार रखें।
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💻 cybercrime.gov.in पर पूरी शिकायत दर्ज करें
राष्ट्रीय साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल पर Report Cyber Crime → Financial Fraud चुनें, मोबाइल OTP से लॉग-इन करें और स्क्रीनशॉट, कॉल करने वाले के नंबर, नकली 'नोटिस' और हर ट्रांज़ैक्शन ID अपलोड करें। एक्नॉलेजमेंट नंबर लिख लें: बैंक और थाने में इसकी ज़रूरत पड़ेगी। अगर आपने पहले 1930 पर कॉल किया था, तो वह नंबर भी दें ताकि दोनों शिकायतें जुड़ जाएँ।
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🏦 उसी दिन बैंक को लिखित में बताएँ
कार्ड, UPI और नेट बैंकिंग ब्लॉक करवाएँ और एक्नॉलेजमेंट नंबर के साथ बैंक को लिखित शिकायत दें (प्रारूप नीचे है)। अगर पैसा आपकी अनुमति के बिना निकला (अकाउंट हैक, कार्ड क्लोन), तो RBI के नियमों में 3 कामकाजी दिन के अंदर बताने पर आपकी देनदारी शून्य है। अगर आपसे धोखे से ख़ुद पैसा भिजवाया गया, तो वापसी 1930 शिकायत के बाद लगे होल्ड से होती है।
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🚓 FIR दर्ज कराएँ (बड़ी रक़म पर e-Zero FIR)
डिजिटल अरेस्ट फ्रॉड संज्ञेय अपराध है, इसलिए पुलिस को किसी भी थाने में FIR दर्ज करनी होगी (ज़ीरो FIR, धारा 173 BNSS)। जहाँ नुकसान ₹10 लाख से ज़्यादा है, वहाँ जिन राज्यों में e-Zero FIR चालू है, आपकी 1930 या पोर्टल शिकायत अपने आप FIR बन जाती है; उस पर दस्तख़त करने के लिए 3 दिन के अंदर साइबर थाने जाएँ।
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💰 रोकी गई रक़म छुड़वाने के लिए कोर्ट में अर्ज़ी दें
होल्ड की गई रक़म तब तक उसी खाते में रहती है जब तक मजिस्ट्रेट उसे लौटाने का आदेश न दें। FIR, एक्नॉलेजमेंट नंबर और बैंक के होल्ड पत्र के साथ मजिस्ट्रेट के पास अर्ज़ी दें (आम तौर पर धारा 503 BNSS, पहले धारा 457 CrPC के तहत)। ज़िला विधिक सेवा प्राधिकरण से मुफ़्त क़ानूनी मदद मिलती है (हेल्पलाइन 15100)।
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📲 नंबर रिपोर्ट करें ताकि सबके लिए बंद हो
दूरसंचार विभाग के संचार साथी (चक्षु) पर फ्रॉड कॉल और WhatsApp नंबर रिपोर्ट करें, और WhatsApp के अंदर भी अकाउंट रिपोर्ट करें। इससे वह सिम और म्यूल खाते बंद होते हैं जिनसे अगला व्यक्ति फँसता।
स्कैम पहचानेंडिजिटल अरेस्ट स्कैम क्या है? ठगों की स्क्रिप्ट
डिजिटल अरेस्ट स्कैम वीडियो कॉल से होने वाली ठगी है। कोई पुलिस, CBI, ED, कस्टम, TRAI या RBI का अफ़सर बनकर कहता है कि आपका आधार, फ़ोन या कोई पार्सल अपराध से जुड़ा है, और आपको घंटों या दिनों तक कैमरे पर 'गिरफ़्तार' रखता है जब तक आप अपनी जमा-पूँजी ट्रांसफ़र न कर दें। भारतीय क़ानून में डिजिटल अरेस्ट नाम की कोई चीज़ नहीं है।
| कॉल करने वाला क्या कहता है | सच्चाई |
|---|---|
| 'आपके नाम के पार्सल में ड्रग्स / नकली पासपोर्ट हैं।' | कूरियर कंपनी कॉल पर आपको 'मुंबई पुलिस' से नहीं जोड़ती। फ़ोन काटें और कूरियर का आधिकारिक नंबर ख़ुद मिलाएँ। |
| 'आपका आधार / सिम मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़ा है।' | जाँच एजेंसियाँ लिखित नोटिस भेजती हैं; वे फ़ोन पर केस 'निपटाती' नहीं। |
| 'आप डिजिटल अरेस्ट में हैं। वीडियो पर बने रहें।' | भारतीय क़ानून में 'डिजिटल अरेस्ट' नाम की कोई चीज़ नहीं। गिरफ़्तारी के लिए गिरफ़्तारी मेमो, लिखित आधार और 24 घंटे में मजिस्ट्रेट के सामने पेशी ज़रूरी है। |
| 'वेरिफ़िकेशन के लिए जमा-पूँजी RBI खाते में डालें, वापस मिल जाएगी।' | RBI आम नागरिकों के खाते नहीं रखता। ऐसा हर खाता गिरोह का म्यूल खाता होता है। |
| 'किसी को मत बताना, यह गुप्त राष्ट्रीय सुरक्षा का मामला है।' | अकेला करना ही चाल है। परिवार या दोस्त से बात करते ही अक्सर जाल टूट जाता है। |
क़ानूनBNS और IT Act में डिजिटल अरेस्ट फ्रॉड
भारतीय न्याय संहिता, 2023 · धारा 318(1). छल। जो कोई किसी व्यक्ति को धोखा देकर, उस धोखा खाए व्यक्ति को कपटपूर्वक या बेईमानी से उत्प्रेरित करता है कि वह कोई संपत्ति किसी व्यक्ति को दे दे, या यह सहमति दे कि कोई व्यक्ति कोई संपत्ति रखे, या धोखा खाए व्यक्ति को जानबूझकर ऐसा कुछ करने या करने से रुकने के लिए उत्प्रेरित करता है जो वह धोखा न खाने पर न करता या न रुकता, और जिस कार्य या लोप से उस व्यक्ति के शरीर, मन, ख्याति या संपत्ति को नुकसान होता है या होने की संभावना है, वह "छल" करता है।
धारा 318(4). जो कोई छल करता है और इससे धोखा खाए व्यक्ति को बेईमानी से कोई संपत्ति किसी व्यक्ति को देने के लिए उत्प्रेरित करता है … वह किसी भी भाँति के कारावास से, जिसकी अवधि सात वर्ष तक हो सकेगी, दंडित किया जाएगा और जुर्माने का भी दायी होगा।
सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 · धारा 66D. कंप्यूटर संसाधन का उपयोग करके प्रतिरूपण द्वारा छल के लिए दंड। जो कोई किसी संचार उपकरण या कंप्यूटर संसाधन के माध्यम से प्रतिरूपण (किसी और का रूप धरकर) द्वारा छल करता है, वह किसी भी भाँति के कारावास से, जिसकी अवधि तीन वर्ष तक हो सकेगी, दंडित किया जाएगा और एक लाख रुपये तक के जुर्माने का भी दायी होगा।
गिरोह एक साथ दो अपराध करता है: छल (झूठ बोलकर आपसे पैसा लेना, धारा 318(4) BNS में 7 साल तक की जेल) और फ़ोन या कंप्यूटर से किसी और का रूप धरकर छल (वीडियो कॉल पर पुलिस अफ़सर बनना, धारा 66D IT Act में 3 साल तक की जेल और ₹1 लाख जुर्माना)। सरकारी कर्मचारी होने का नाटक करना अलग अपराध है (धारा 204 BNS), और जब पूरा नेटवर्क यह धंधा चलाता है तो उस पर संगठित अपराध (धारा 111 BNS) का केस बन सकता है। आप पीड़ित हैं, आरोपी नहीं: धोखा खाना कोई ग़लती नहीं है।
🏠 रोज़मर्रा की मिसाल
सोचिए, कोई आदमी उधार की पुलिस वर्दी पहनकर दरवाज़े पर 'जुर्माने' के नक़द पैसे माँगे। वर्दी पहनने से वह पुलिस नहीं बन जाता। नकली थाने के बैकग्राउंड, लोगो और 'जज' वाला वीडियो कॉल भी वही उधार की वर्दी है, बस स्क्रीन पर।
🇮🇳 असली भारतीय उदाहरण
सितंबर 2025 में अंबाला के एक बुज़ुर्ग दंपती से ठगों ने वीडियो पर सुप्रीम कोर्ट, ED और गिरफ़्तारी के नकली आदेश दिखाकर ₹1 करोड़ से ज़्यादा ठग लिए। उनकी मुख्य न्यायाधीश को लिखी चिट्ठी के बाद ही सुप्रीम कोर्ट ने पूरे देश के डिजिटल अरेस्ट स्कैम पर सुनवाई शुरू की।
सुप्रीम कोर्ट 2026डिजिटल अरेस्ट स्कैम पर सुप्रीम कोर्ट: निर्देश और आँकड़े
सुप्रीम कोर्ट ने In Re: Victims of Digital Arrest Related to Forged Documents में डिजिटल अरेस्ट स्कैम का ख़ुद संज्ञान लिया। 1 दिसंबर 2025 को कोर्ट ने जाँच पूरे देश में CBI को सौंपी और राज्यों से साइबर क्राइम समन्वय केंद्र बनाने को कहा। 4 अगस्त 2026 को मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने अंतरिम निर्देश दिए:
4 हफ़्ते में RBI की SOP
म्यूल और फ्रॉड से जुड़े खातों पर अस्थायी डेबिट होल्ड के नियम।
पैसा वापसी
राज्य गृह मंत्रालय की 2 जनवरी 2026 की SOP के शिकायत और पैसा-वापसी मॉड्यूल चलाएँ।
मुआवज़ा ढाँचा
सरकार साझा देनदारी और पीड़ित मुआवज़ा योजना पर विचार करे।
विधिक सेवा जागरूकता
राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण जागरूकता चलाएँ और पीड़ितों को पैसा वापस दिलाने में मदद करें।
कॉल 'किल स्विच' पर अध्ययन
MeitY, DoT और I4C ऑडियो-वीडियो कॉल को तय समय पर काटने की व्यवस्था की जाँच करें।
CBI की सीमा
CBI अपनी ₹10 करोड़ की सीमा घटाने और एक ही गिरोह के मामलों को जोड़ने पर विचार करे।
समय-सीमासाइबर फ्रॉड का पैसा वापस कैसे पाएँ: ज़रूरी समय-सीमा
| यह करें | कब तक | क्यों ज़रूरी |
|---|---|---|
| 1930 पर कॉल / पोर्टल पर रिपोर्ट | हो सके तो पहले घंटे में | पैसा कुछ ही घंटों में कई म्यूल खातों से निकल जाता है; होल्ड तभी काम करता है जब पैसा निकला न हो। |
| बैंक को लिखित शिकायत | उसी दिन; ज़्यादा से ज़्यादा 3 कामकाजी दिन | 3 कामकाजी दिन में बताए गए अनधिकृत लेन-देन पर शून्य देनदारी (RBI, 2017)। |
| साइबर थाने में e-Zero FIR पर दस्तख़त | 3 दिन के अंदर | इलेक्ट्रॉनिक रूप से दी गई सूचना 3 दिन में दस्तख़त होने पर FIR के रूप में दर्ज होती है (धारा 173(1) BNSS)। |
| बैंकिंग लोकपाल शिकायत (बैंक जवाब न दे तो) | बैंक शिकायत के 30 दिन बाद | RBI एकीकृत लोकपाल योजना में cms.rbi.org.in पर मुफ़्त शिकायत करें। |
संविधानसाइबर फ्रॉड के ख़िलाफ़ संविधान की ढाल
साइबर फ्रॉड सिर्फ़ पुलिस का मामला नहीं। यह संविधान के तीन वादों से जुड़ा है:
अनुच्छेद 21: जीवन, स्वतंत्रता, गरिमा और निजता
आपकी जमा-पूँजी, मन की शांति और निजी डेटा गरिमा के साथ जीने के अधिकार से सुरक्षित हैं; 2017 में (पुट्टस्वामी) सुप्रीम कोर्ट ने निजता को अनुच्छेद 21 का हिस्सा माना।
अनुच्छेद 22: असली गिरफ़्तारी कैसी होती है
असली गिरफ़्तारी में आपको कारण बताए जाते हैं, अपनी पसंद का वकील मिलता है और 24 घंटे में मजिस्ट्रेट के सामने पेशी होती है। इनमें से कुछ भी न हो तो 'वीडियो अरेस्ट' नकली है।
अनुच्छेद 32: रक्षक के रूप में सुप्रीम कोर्ट
डिजिटल अरेस्ट पर निर्देश सुप्रीम कोर्ट ने पूरे देश के नागरिकों के मौलिक अधिकारों की रक्षा के लिए दिए।
मुफ़्त प्रारूपबैंक को साइबर फ्रॉड शिकायत पत्र (कॉपी करें)
इसे प्रिंट करें या उसी दिन अपनी शाखा को ईमेल में पेस्ट करें। बैंक की रिसीविंग मोहर या ईमेल का जवाब संभालकर रखें।
सेवा में,
शाखा प्रबंधक,
__________ बैंक, __________ शाखा
विषय: साइबर फ्रॉड: खाते की सेवाएँ बंद करने, रक़म होल्ड करने और वापसी का अनुरोध (खाता संख्या __________)
महोदय / महोदया,
1. दिनांक __/__/2026 को लगभग __:__ बजे पुलिस / CBI / कस्टम अधिकारी बनकर कॉल करने वाले ने मेरे साथ धोखा किया ("डिजिटल अरेस्ट" फ्रॉड)।
2. धोखे से मेरे खाते से ये लेन-देन कराए गए:
- राशि ₹________ UTR / संदर्भ संख्या ____________ दिनांक व समय ____________
- राशि ₹________ UTR / संदर्भ संख्या ____________ दिनांक व समय ____________
3. मैंने इसकी शिकायत राष्ट्रीय साइबर क्राइम हेल्पलाइन 1930 / cybercrime.gov.in पर की है।
एक्नॉलेजमेंट नंबर: ____________________
4. कृपया (क) मेरा डेबिट कार्ड, UPI और नेट बैंकिंग तुरंत बंद करें, (ख) लाभार्थी बैंकों से संपर्क कर रक़म होल्ड करवाएँ,
(ग) इस शिकायत की लिखित पावती और मेरे खाते का स्टेटमेंट दें, और
(घ) ग्राहक देनदारी पर RBI के नियमों के अनुसार रक़म वापस करें।
संलग्न: स्क्रीनशॉट, कॉल विवरण, लेन-देन सूची, साइबर शिकायत की प्रति।
नाम: ____________ मोबाइल: ____________ हस्ताक्षर: ____________
दिनांक: __/__/2026अभ्यास MCQख़ुद को परखें: डिजिटल अरेस्ट
वीडियो कॉल पर कोई कहता है कि आप 'डिजिटल अरेस्ट' में हैं और 'RBI वेरिफ़िकेशन' के लिए पैसा भेजें। कौन-सा कथन सही है?
शंका समाधानअक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
डिजिटल अरेस्ट स्कैम क्या है?
एक ठगी जिसमें कॉल करने वाले वीडियो कॉल पर पुलिस, CBI, ED या कस्टम अफ़सर बनकर कहते हैं कि आप किसी अपराध से जुड़े हैं, आपको कैमरे पर 'गिरफ़्तार' रखते हैं और पैसा भिजवाते हैं। भारतीय क़ानून में डिजिटल अरेस्ट नहीं होता।
साइबर फ्रॉड की शिकायत कैसे करें?
तुरंत 1930 पर कॉल करें, फिर cybercrime.gov.in पर Financial Fraud में पूरी शिकायत दर्ज करें, बैंक को लिखित में बताएँ और किसी भी थाने में FIR दर्ज कराएँ।
क्या साइबर फ्रॉड का पैसा वापस मिल सकता है?
अक्सर हाँ, अगर आप जल्दी रिपोर्ट करें। 1930 शिकायत के बाद होल्ड हुई रक़म मजिस्ट्रेट के आदेश पर लौटती है। 3 कामकाजी दिन में बताए गए अनधिकृत डेबिट पर RBI नियमों में आपकी देनदारी शून्य है।
साइबर फ्रॉड में e-Zero FIR क्या है?
I4C की व्यवस्था जिसमें ₹10 लाख से ज़्यादा के वित्तीय साइबर फ्रॉड की 1930 या पोर्टल शिकायत अपने आप ज़ीरो FIR बन जाती है। उस पर दस्तख़त के लिए 3 दिन में साइबर थाने जाना होता है।
डिजिटल अरेस्ट स्कैम पर सुप्रीम कोर्ट ने क्या आदेश दिया?
1 दिसंबर 2025 को पूरे देश में CBI जाँच का आदेश दिया और 4 अगस्त 2026 को ठगी के पैसे को होल्ड करने के लिए RBI की SOP, हर राज्य में पैसा-वापसी मॉड्यूल और पीड़ित मुआवज़ा ढाँचे पर विचार के निर्देश दिए।
स्रोत और आगे की पढ़ाईहमने जिन स्रोतों की जाँच की
तथ्य 16 अक्टूबर 2026 को जाँचे गए। हेल्पलाइन नंबर और पोर्टल के मेनू बदल सकते हैं; सिर्फ़ .gov.in वाली सरकारी वेबसाइट ही इस्तेमाल करें।
- National Cyber Crime Reporting Portal (MHA)
- Sanchar Saathi: Chakshu, report suspected fraud communication (DoT)
- SCC Online: SC issues interim directions on digital arrest scams (4 Aug 2026 order)
- ThePrint: e-Zero FIR operational in 19 states, govt tells SC (4 Aug 2026)
- The Tribune: SC orders pan-India CBI probe into digital arrest scams (1 Dec 2025)
- RBI Integrated Ombudsman complaint portal