संविधान की 12 अनुसूचियाँ: अनुच्छेदों और संशोधनों सहित पूरी सूची

सभी 12 अनुसूचियाँ एक तालिका में, 9वीं से 12वीं किस संशोधन से जुड़ीं, आठवीं अनुसूची की 22 भाषाएँ, दल-बदल विरोधी क़ानून, पाँचवीं बनाम छठी अनुसूची, और क्रम से याद रखने की ट्रिक।
अनुच्छेद 31Bसंविधान की अनुसूचियाँ क्या हैं: नौवीं अनुसूची और अनुच्छेद 31B
अनुसूची संविधान के अंत में जुड़ी एक सूची या तालिका है। अनुच्छेद नियम बताते हैं; अनुसूची लंबे ब्योरे रखती है (राज्यों के नाम, वेतन, शपथ के शब्द, विषयों की सूचियाँ, भाषाएँ), ताकि मुख्य पाठ पढ़ने लायक रहे। 1950 में संविधान 8 अनुसूचियों से शुरू हुआ; संशोधनों से चार और जुड़ीं, और आज 12 अनुसूचियाँ हैं। इनमें सबसे ज़्यादा बहस नौवीं अनुसूची पर होती है, जिसे नीचे दिया गया अनुच्छेद 31B बनाता है।
31B. कुछ अधिनियमों और विनियमों का विधिमान्यकरण। अनुच्छेद 31A के उपबंधों की व्यापकता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, नौवीं अनुसूची में दिए गए अधिनियमों और विनियमों में से कोई भी, या उसका कोई उपबंध, इस आधार पर शून्य नहीं माना जाएगा, और न कभी शून्य हुआ माना जाएगा, कि वह इस भाग के किसी उपबंध से असंगत है या उसके द्वारा दिए गए किसी अधिकार को छीनता या कम करता है; और किसी न्यायालय या अधिकरण के किसी विपरीत निर्णय, डिक्री या आदेश के होते हुए भी, ऐसा हर अधिनियम और विनियम, किसी सक्षम विधानमंडल की उसे निरस्त या संशोधित करने की शक्ति के अधीन रहते हुए, लागू बना रहेगा।
अनुच्छेद 31B कहता है: नौवीं अनुसूची में रखे गए किसी क़ानून को मौलिक अधिकारों के उल्लंघन के आधार पर रद्द नहीं किया जा सकता, चाहे अदालत उसे पहले ही अवैध कह चुकी हो। इसे 1951 के पहले संशोधन से जोड़ा गया, ताकि ज़मींदारी उन्मूलन और भूमि सुधार क़ानून बच सकें, जिन्हें अदालतें संपत्ति के अधिकार के आधार पर रद्द कर रही थीं।
पर यह कवच असीमित नहीं है। आई. आर. कोएल्हो बनाम तमिलनाडु राज्य (2007) में नौ जजों की पीठ ने कहा कि 24 अप्रैल 1973 के बाद (केशवानंद भारती फ़ैसले की तारीख़) नौवीं अनुसूची में जोड़े गए क़ानूनों को मूल ढाँचे की कसौटी पर परखा जा सकता है।
🏠 रोज़मर्रा की मिसाल
स्कूल की 'प्रिंसिपल द्वारा स्वीकृत' फ़ाइल सोचिए। उस फ़ाइल में रखी चीज़ पर क्लास मॉनिटर सवाल नहीं उठा सकते। पर अगर प्रिंसिपल हर चीज़ उसी फ़ाइल में डालने लगें, तो स्कूल बोर्ड फिर भी जाँच सकता है कि वह स्कूल के बुनियादी नियम तो नहीं तोड़ रही।
🇮🇳 असली भारतीय उदाहरण
तमिलनाडु के 69% आरक्षण क़ानून (1994) को 76वें संशोधन से नौवीं अनुसूची में रखा गया, ताकि इंदिरा साहनी (1992) की 50% सीमा से बचाया जा सके। कोएल्हो फ़ैसले के बाद ऐसे क़ानूनों की भी मूल ढाँचे के उल्लंघन पर समीक्षा हो सकती है।
सभी 12 एक नज़र मेंसंविधान की 12 अनुसूचियाँ: अनुच्छेदों सहित तालिका
| अनुसूची | इसमें क्या है | संबंधित अनुच्छेद |
|---|---|---|
| पहली | राज्यों और संघ राज्यक्षेत्रों के नाम और उनके क्षेत्र: आज 28 राज्य और 8 संघ राज्यक्षेत्र। | अनुच्छेद 1 और 4 |
| दूसरी | राष्ट्रपति, राज्यपाल, लोकसभा अध्यक्ष-उपाध्यक्ष, राज्यसभा सभापति-उपसभापति, राज्यों के पीठासीन अधिकारी, सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के जज, और नियंत्रक-महालेखापरीक्षक के वेतन, भत्ते और विशेषाधिकार। | अनुच्छेद 59, 65, 75, 97, 125, 148, 158, 164, 186, 221 |
| तीसरी | केंद्र और राज्य के मंत्रियों, संसद और विधानमंडल के उम्मीदवारों और सदस्यों, सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के जजों, और नियंत्रक-महालेखापरीक्षक की शपथ और प्रतिज्ञान के प्रारूप। (राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति की शपथ अनुच्छेद 60 और 69 में है, यहाँ नहीं।) | अनुच्छेद 75, 84, 99, 124, 146, 173, 188, 219 |
| चौथी | राज्यों और संघ राज्यक्षेत्रों को राज्यसभा की सीटों का आवंटन (मोटे तौर पर आबादी के आधार पर; सबसे ज़्यादा उत्तर प्रदेश की 31)। | अनुच्छेद 4 और 80 |
| पाँचवीं | असम, मेघालय, त्रिपुरा और मिज़ोरम को छोड़कर बाक़ी राज्यों में अनुसूचित क्षेत्रों और अनुसूचित जनजातियों का प्रशासन और नियंत्रण (10 राज्यों में ऐसे क्षेत्र हैं)। जनजाति सलाहकार परिषद; राज्यपाल की विशेष शक्तियाँ। | अनुच्छेद 244(1) |
| छठी | असम, मेघालय, त्रिपुरा और मिज़ोरम के जनजातीय क्षेत्रों का प्रशासन, चुनी हुई स्वायत्त ज़िला परिषदों (कुल 10) के ज़रिए, जिनके पास क़ानून, न्याय और कर की शक्तियाँ हैं। | अनुच्छेद 244(2), 275(1) |
| सातवीं | शक्तियों का बँटवारा: सूची I संघ, सूची II राज्य, सूची III समवर्ती (मूल रूप से 97, 66 और 47 प्रविष्टियाँ)। | अनुच्छेद 246 |
| आठवीं | संविधान द्वारा मान्य 22 भाषाएँ (मूल रूप से 14)। | अनुच्छेद 344(1), 351 |
| नौवीं (पहला संशोधन, 1951) | अधिनियम और विनियम (ज़्यादातर भूमि सुधार) जिन्हें मौलिक अधिकारों के आधार पर चुनौती से सुरक्षा; आज 280 से ज़्यादा क़ानून। | अनुच्छेद 31B |
| दसवीं (52वाँ संशोधन, 1985) | दल-बदल विरोधी क़ानून: दल बदलने वाले सांसदों और विधायकों की अयोग्यता। | अनुच्छेद 102(2), 191(2) |
| ग्यारहवीं (73वाँ संशोधन, 1992) | पंचायतों की शक्तियाँ: 29 विषय (कृषि, पेयजल, ग्रामीण आवास, प्राथमिक शिक्षा…)। | अनुच्छेद 243G |
| बारहवीं (74वाँ संशोधन, 1992) | नगरपालिकाओं की शक्तियाँ: 18 विषय (नगर नियोजन, जल आपूर्ति, जन स्वास्थ्य, अग्निशमन…)। | अनुच्छेद 243W |
बाद में जोड़ी गईं9वीं, 10वीं, 11वीं और 12वीं अनुसूची किस संशोधन से जुड़ी
| अनुसूची | किस संशोधन से | वर्ष | क्यों |
|---|---|---|---|
| नौवीं | पहला संशोधन | 1951 | भूमि सुधार और ज़मींदारी उन्मूलन क़ानूनों की रक्षा |
| दसवीं | 52वाँ संशोधन | 1985 | 'आया राम, गया राम' वाले दल-बदल को रोकना (राजीव गांधी सरकार) |
| ग्यारहवीं | 73वाँ संशोधन | 1992 | पंचायती राज को संवैधानिक दर्जा (24 अप्रैल 1993 से लागू) |
| बारहवीं | 74वाँ संशोधन | 1992 | शहरी स्थानीय निकायों को संवैधानिक दर्जा (1 जून 1993 से लागू) |
दसवीं अनुसूची: मुख्य नियम
- स्वेच्छा से पार्टी छोड़ने या पार्टी व्हिप के ख़िलाफ़ वोट देने पर सदस्य अयोग्य
- निर्दलीय सदस्य पार्टी में शामिल हो, या मनोनीत सदस्य 6 महीने बाद किसी पार्टी में जाए, तो अयोग्य
- अपवाद: विधायक दल के दो-तिहाई सदस्यों के समर्थन से विलय
संशोधन और अदालती फ़ैसले
- 91वें संशोधन (2003) ने एक-तिहाई 'विभाजन' वाला अपवाद हटाया और मंत्रिपरिषद का आकार 15% तक सीमित किया
- किहोतो होलोहन (1992): दसवीं अनुसूची वैध; अध्यक्ष के फ़ैसले की न्यायिक समीक्षा हो सकती है
- अयोग्यता याचिकाओं का फ़ैसला पीठासीन अधिकारी (अध्यक्ष या सभापति) करते हैं
आठवीं अनुसूचीआठवीं अनुसूची: 22 भाषाएँ और वे कब जोड़ी गईं
| वर्ष | संशोधन | जोड़ी गई भाषाएँ | कुल |
|---|---|---|---|
| 1950 | मूल संविधान | असमिया, बांग्ला, गुजराती, हिंदी, कन्नड़, कश्मीरी, मलयालम, मराठी, उड़िया (अब ओड़िया), पंजाबी, संस्कृत, तमिल, तेलुगु, उर्दू | 14 |
| 1967 | 21वाँ संशोधन | सिंधी | 15 |
| 1992 | 71वाँ संशोधन | कोंकणी, मणिपुरी, नेपाली | 18 |
| 2003 | 92वाँ संशोधन | बोडो, डोगरी, मैथिली, संथाली | 22 |
- 2011, 96वाँ संशोधन: 'उड़िया' का नाम बदलकर 'ओड़िया' किया गया। 2003 के बाद कोई नई भाषा नहीं जुड़ी; भोजपुरी, राजस्थानी, तुलु, भोटी आदि की माँगें गृह मंत्रालय के पास लंबित हैं (अक्टूबर 2026 तक)।
- आठवीं अनुसूची 'राष्ट्रभाषा' की सूची नहीं है: भारत की कोई राष्ट्रभाषा नहीं है। देवनागरी में हिंदी संघ की राजभाषा है (अनुच्छेद 343)।
- शामिल होने के फ़ायदे: राजभाषा आयोग (अनुच्छेद 344) में प्रतिनिधित्व, UPSC परीक्षाओं में उपयोग, और साहित्य अकादमी जैसी संस्थाओं से केंद्रीय सहायता।
- शास्त्रीय भाषा का दर्जा आठवीं अनुसूची से अलग है: यह संस्कृति मंत्रालय देता है (11 भाषाएँ, अक्टूबर 2024 में मराठी, पाली, प्राकृत, असमिया और बांग्ला जुड़ने के बाद)।
जनजातीय क्षेत्र और सूचियाँपाँचवीं बनाम छठी अनुसूची, और सातवीं अनुसूची की सूचियाँ
पाँचवीं अनुसूची
- 10 राज्यों में अनुसूचित क्षेत्र (जैसे झारखंड, छत्तीसगढ़, ओडिशा, मध्य प्रदेश, राजस्थान)
- राज्यपाल निर्देश दे सकते हैं कि केंद्र या राज्य का कोई क़ानून लागू न हो, या बदलाव के साथ लागू हो
- जनजाति सलाहकार परिषद (अधिकतम 20 सदस्य, तीन-चौथाई जनजातीय विधायक)
- पेसा अधिनियम, 1996 इन क्षेत्रों में ग्राम सभा की शक्तियों के साथ पंचायती राज लागू करता है
छठी अनुसूची
- केवल असम, मेघालय, त्रिपुरा और मिज़ोरम के जनजातीय क्षेत्र
- स्वायत्त ज़िला परिषदें (अधिकतम 30 सदस्य, 4 राज्यपाल द्वारा मनोनीत) भूमि, वन, विवाह, रीति-रिवाज पर क़ानून बना सकती हैं
- 10 परिषदें, जैसे बोडोलैंड प्रादेशिक परिषद (असम), गारो हिल्स (मेघालय)
- पाँचवीं अनुसूची से कहीं ज़्यादा स्वायत्तता
| सातवीं अनुसूची की सूची | क़ानून कौन बनाता है | उदाहरण |
|---|---|---|
| सूची I: संघ | केवल संसद | रक्षा, विदेश मामले, रेलवे, बैंकिंग, परमाणु ऊर्जा |
| सूची II: राज्य | राज्य विधानमंडल (विशेष स्थितियों में संसद भी, जैसे अनुच्छेद 249, 250, 252) | पुलिस, लोक व्यवस्था, जन स्वास्थ्य, कृषि, भूमि |
| सूची III: समवर्ती | दोनों; टकराव में केंद्र का क़ानून मान्य (अनुच्छेद 254) | आपराधिक क़ानून, विवाह, शिक्षा, वन (अंतिम दो 1976 में यहाँ आए) |
| अवशिष्ट विषय | संसद (अनुच्छेद 248, विचार कनाडा से) | जो किसी सूची में नहीं, जैसे साइबर क़ानून |
आपस में जोड़ेंअनुसूचियाँ संविधान के बाक़ी हिस्सों से कैसे जुड़ती हैं
- सातवीं अनुसूची की समवर्ती सूची ऑस्ट्रेलिया से और अवशिष्ट शक्तियाँ कनाडा से आईं: भारतीय संविधान के स्रोत देखें।
- 1950 में संविधान 8 अनुसूचियों से शुरू हुआ: संविधान सभा और संविधान निर्माण।
- चार अनुसूचियाँ संशोधन से जुड़ीं और कोएल्हो फ़ैसला नौवीं को सीमित करता है: महत्वपूर्ण संशोधन और मूल ढाँचा सिद्धांत पढ़ें।
- नौवीं अनुसूची क़ानूनों को अनुच्छेद 14 जैसे मौलिक अधिकारों से बचाती है; भाग III का अवलोकन देखें।
- अनुच्छेद 4 के तहत नए राज्य बनने पर पहली अनुसूची बदलती है; चौथी अनुसूची की सीटें परिसीमन से जुड़ी हैं।
- अनुसूचियों के सवालों का अभ्यास दैनिक MCQ क्विज़ में करें।
झटपट दोहरावएक-लाइन रिवीज़न पॉइंट (परीक्षा के लिए)
- मूल संविधान: 8 अनुसूचियाँ; आज: 12।
- पहली: राज्य और संघ राज्यक्षेत्र (28 + 8); दूसरी: वेतन; तीसरी: शपथ; चौथी: राज्यसभा सीटें।
- पाँचवीं: अनुसूचित क्षेत्र (10 राज्य); छठी: असम, मेघालय, त्रिपुरा, मिज़ोरम के जनजातीय क्षेत्र।
- सातवीं: संघ, राज्य और समवर्ती सूचियाँ (अनुच्छेद 246)।
- आठवीं: 22 भाषाएँ; अंतिम बार बोडो, डोगरी, मैथिली, संथाली जुड़ीं (92वाँ संशोधन, 2003)।
- नौवीं: पहला संशोधन, 1951, अनुच्छेद 31B; 24 अप्रैल 1973 के बाद जुड़े क़ानून आई. आर. कोएल्हो (2007) के बाद समीक्षा योग्य।
- दसवीं: दल-बदल विरोधी, 52वाँ संशोधन, 1985; विभाजन वाला प्रावधान 91वें (2003) से हटा।
- ग्यारहवीं: पंचायत, 29 विषय (73वाँ, 1992); बारहवीं: नगरपालिका, 18 विषय (74वाँ, 1992)।
- ट्रिक: अनुसूची 1 से 12 के लिए TEARS OF OLD PM।
अभ्यास MCQअभ्यास MCQ (उत्तर सहित): अनुसूचियाँ
संविधान की किस अनुसूची में दल-बदल के आधार पर अयोग्यता के उपबंध हैं?
नौवीं अनुसूची संविधान में किससे जोड़ी गई?
इनमें से कौन-सी भाषा 92वें संशोधन, 2003 से नहीं जोड़ी गई?
छठी अनुसूची किन राज्यों के जनजातीय क्षेत्रों पर लागू होती है?
राज्यसभा में सीटों का आवंटन किस अनुसूची में है?
शंका समाधानअक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
भारतीय संविधान में कितनी अनुसूचियाँ हैं?
आज 12 अनुसूचियाँ हैं। 1950 के मूल संविधान में 8 थीं; 9वीं, 10वीं, 11वीं और 12वीं संशोधनों से जुड़ीं।
नौवीं अनुसूची क्या है?
उन क़ानूनों की सूची जिन्हें अनुच्छेद 31B मौलिक अधिकारों के आधार पर चुनौती से बचाता है। यह पहले संशोधन, 1951 से जुड़ी। कोएल्हो (2007) के बाद 24 अप्रैल 1973 के बाद जुड़े क़ानूनों की मूल ढाँचे के उल्लंघन पर समीक्षा हो सकती है।
आठवीं अनुसूची में कितनी भाषाएँ हैं?
22। मूल 14 भाषाओं में 21वें (1967), 71वें (1992) और 92वें (2003) संशोधनों से भाषाएँ जुड़ीं। 2003 के बाद कोई भाषा नहीं जुड़ी।
दल-बदल विरोधी क़ानून किस अनुसूची में है?
दसवीं अनुसूची में, जिसे 52वें संशोधन, 1985 से जोड़ा गया और 91वें संशोधन, 2003 से मज़बूत किया गया।
पाँचवीं और छठी अनुसूची में क्या अंतर है?
पाँचवीं 10 राज्यों के अनुसूचित क्षेत्रों को राज्यपाल और जनजाति सलाहकार परिषदों के ज़रिए देखती है। छठी असम, मेघालय, त्रिपुरा और मिज़ोरम के जनजातीय क्षेत्रों को चुनी हुई स्वायत्त ज़िला परिषदों के ज़रिए कहीं ज़्यादा स्वायत्तता देती है।
स्रोत और आगे की पढ़ाईहमने जिन स्रोतों की जाँच की
अनुच्छेद 31B का पाठ भारत का संविधान (विधायी विभाग) से; हिंदी सरल रूपांतर है। तथ्य 18 अक्टूबर 2026 को जाँचे गए।