लद्दाख अनुच्छेद 371K: लद्दाख ने केंद्र का मसौदा क्यों ठुकराया, और पूर्ण राज्य व छठी अनुसूची का मतलब क्या है
बिना विधानसभा वाला केंद्र शासित प्रदेश बने सात साल हो गए, फिर भी लद्दाख अपने क़ानूनों में अपनी आवाज़ माँग रहा है। इस हफ़्ते लेह एपेक्स बॉडी और कारगिल डेमोक्रेटिक अलायंस ने नए अनुच्छेद 371K के लिए गृह मंत्रालय का मसौदा ठुकरा दिया। जानिए हर विकल्प का मतलब, संविधान दूसरे इलाक़ों को पहले से क्या देता है, और बातचीत क्यों अटकी है।

17 अक्टूबर 2026 को लद्दाख की बातचीत कहाँ खड़ी है
इस हफ़्ते लेह में हुई बातचीत में लेह एपेक्स बॉडी (LAB) और कारगिल डेमोक्रेटिक अलायंस (KDA) ने गृह मंत्रालय की उप-समिति का मसौदा ठुकरा दिया। यह मसौदा सितंबर 2026 के केंद्र के उस विचार पर बना है जिसमें संविधान के अनुच्छेद 371 में नया अध्याय K जोड़कर लद्दाख को एक निर्वाचित निकाय और अनुच्छेद 371क, 371च और 371छ (नागालैंड, सिक्किम, मिज़ोरम) जैसे सुरक्षा उपाय देने की बात है, पूर्ण राज्य या छठी अनुसूची की जगह। LAB के सह-अध्यक्ष छेरिंग दोरजे लकरुक ने कहा कि यह 22 मई 2026 की सैद्धांतिक सहमति से पीछे हटना है और इसमें असली विधानसभा नहीं है; KDA के असगर अली करबलाई ने इसे 1950 के दशक जैसी प्रशासनिक इकाई बताया और मुख्यमंत्री व मंत्रिमंडल की माँग की।
लद्दाख के मुख्य सचिव आशीष कुंद्रा ने इस अस्वीकृति को दुर्भाग्यपूर्ण कहा। उनके अनुसार संगठनों के अपने ज्ञापन में माँग थी कि संसद के क़ानून लद्दाख में लागू होने से पहले निर्वाचित निकाय की सहमति ली जाए, जिसे उन्होंने रद्द हो चुके अनुच्छेद 370 जैसा बताया, और कहा कि मसौदा सुझावों के लिए खुला है। अगले दौर की तारीख़ घोषित नहीं हुई है। संसद में अभी कोई संविधान संशोधन विधेयक पेश नहीं हुआ है।
पृष्ठभूमिलद्दाख पूर्ण राज्य की माँग: लद्दाख केंद्र शासित प्रदेश कैसे बना और विरोध क्यों
- 31 अक्टूबर 2019: जम्मू और कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम, 2019 ने पुराने राज्य को बाँटा। लद्दाख (लेह और कारगिल ज़िले) बिना विधानसभा वाला केंद्र शासित प्रदेश बना, जिसे अनुच्छेद 239 के तहत उपराज्यपाल चलाते हैं।
- 2019 से पहले लद्दाख से J&K विधानसभा में चार सदस्य जाते थे। अब इसका एक लोकसभा सांसद है, कोई विधायक नहीं।
- हिल काउंसिल: लेह (1995) और कारगिल (2003) की लद्दाख स्वायत्त पहाड़ी विकास परिषदें अब भी हैं, पर वे अपने लिए बने एक क़ानून के तहत चलती हैं, संविधान के तहत नहीं।
- चार माँगें (LAB और KDA): (1) पूर्ण राज्य, (2) छठी अनुसूची का संरक्षण, (3) लोक सेवा आयोग और स्थानीय लोगों के लिए नौकरियाँ, (4) लेह और कारगिल की अलग लोकसभा सीटें।
- 2023: गृह मंत्रालय ने बातचीत के लिए उच्चाधिकार प्राप्त समिति बनाई। जून 2025 के नए नियमों में ज़्यादातर सरकारी नौकरियाँ लद्दाख के निवासियों के लिए और हिल काउंसिल की एक-तिहाई सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित हुईं।
- 24 सितंबर 2025: लेह में एक प्रदर्शन हिंसक हुआ; चार लोगों की मौत हुई। जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम के तहत हिरासत में लिया गया, और सुप्रीम कोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश जस्टिस बी.एस. चौहान से न्यायिक जाँच का आदेश हुआ।
सोचिए एक हाउसिंग सोसाइटी जहाँ निवासी मेंटेनेंस देते हैं, पर हर नियम हेड ऑफ़िस से भेजा गया अफ़सर बनाता है। वे अपनी चुनी हुई कमेटी माँग रहे हैं। एक लाइन में लद्दाख की शिकायत यही है: कोई निर्वाचित विधानसभा नहीं, इसलिए ज़मीन, नौकरियों और नाज़ुक पहाड़ी पर्यावरण पर कोई स्थानीय आवाज़ नहीं।
मूल पाठअनुच्छेद 244, अनुच्छेद 371क और अनुच्छेद 239: लद्दाख के लिए संविधान के औज़ार
अनुच्छेद 244. अनुसूचित क्षेत्रों और जनजाति क्षेत्रों का प्रशासन।
(2) छठी अनुसूची के उपबंध असम, मेघालय, त्रिपुरा और मिज़ोरम राज्यों के जनजाति क्षेत्रों के प्रशासन को लागू होंगे।
अनुच्छेद 371क. नागालैंड राज्य के संबंध में विशेष उपबंध।
(1) इस संविधान में किसी बात के होते हुए भी,—
(क) (i) नागाओं की धार्मिक या सामाजिक प्रथाओं, (ii) नागा रूढ़िजन्य विधि और प्रक्रिया, (iii) नागा रूढ़िजन्य विधि के अनुसार विनिश्चयों से युक्त सिविल और दांडिक न्याय प्रशासन, (iv) भूमि और उसके संपत्ति स्रोतों के स्वामित्व और अंतरण, के संबंध में संसद का कोई अधिनियम नागालैंड राज्य को तब तक लागू नहीं होगा जब तक नागालैंड की विधान सभा संकल्प द्वारा ऐसा विनिश्चय नहीं करती है;
अनुच्छेद 239. संघ राज्यक्षेत्रों का प्रशासन।
(1) संसद द्वारा बनाई गई विधि द्वारा जैसा अन्यथा उपबंधित है उसके सिवाय, प्रत्येक संघ राज्यक्षेत्र का प्रशासन राष्ट्रपति द्वारा किया जाएगा और वह अपने द्वारा ऐसे पदनाम सहित, जो वह विनिर्दिष्ट करे, नियुक्त किए गए प्रशासक के माध्यम से उस मात्रा तक कार्य करेगा जितना वह ठीक समझता है।
अपनी ज़मीन और संस्कृति बचाना चाहने वाले इलाक़ों के लिए संविधान में पहले से तीन औज़ार हैं। अनुच्छेद 244 और छठी अनुसूची जनजातीय परिषदें बनाती है जो ज़मीन और रीति-रिवाज़ पर अपने क़ानून बनाती हैं, पर आज यह केवल चार पूर्वोत्तर राज्यों में है। अनुच्छेद 371क नागालैंड के लिए और आगे जाता है: नागा रीति-रिवाज़ और ज़मीन पर संसद के क़ानून तब तक लागू नहीं होते जब तक राज्य विधानसभा सहमति न दे। अनुच्छेद 239 की वजह से आज लद्दाख को राष्ट्रपति उपराज्यपाल के ज़रिए चलाते हैं।
🏠 रोज़मर्रा की मिसाल
परिवार की पुश्तैनी ज़मीन पर तीन तरह के ताले सोचिए: सोसाइटी की नियम-पुस्तिका जो कुछ ही इमारतों पर लागू है (छठी अनुसूची), एक ताला जो सिर्फ़ परिवार की अपनी चाबी से खुलता है (अनुच्छेद 371क), और बाहर से आया केयरटेकर जो इमारत चलाता है (अनुच्छेद 239)।
🇮🇳 असली भारतीय उदाहरण
नागालैंड में ज़मीन के हस्तांतरण पर कोई केंद्रीय क़ानून अपने आप लागू नहीं होता; पहले नागालैंड विधानसभा को संकल्प पास करना होता है। लद्दाख के संगठन लद्दाखी ज़मीन और नौकरियों के लिए ऐसी ही ढाल चाहते हैं।
तुलनालद्दाख के लिए पूर्ण राज्य बनाम छठी अनुसूची बनाम अनुच्छेद 371K
| सवाल | पूर्ण राज्य (अनुच्छेद 3) | छठी अनुसूची (अनुच्छेद 244(2)) | अनुच्छेद 371K (केंद्र का विचार) |
|---|---|---|---|
| कैसे होगा | अनुच्छेद 3 और 4 के तहत संसद का क़ानून (साधारण बहुमत) | संविधान संशोधन, क्योंकि अनुच्छेद 244(2) और अनुसूची में केवल चार राज्य हैं | अनुच्छेद 368 के तहत संशोधन से अनुच्छेद 371 में अध्याय K |
| निर्वाचित निकाय | विधानसभा, मुख्यमंत्री और मंत्रिपरिषद | स्वायत्त ज़िला परिषदें (अधिकतम 30 सदस्य, 26 निर्वाचित) | केंद्र शासित स्तर का निर्वाचित निकाय; नाम और शक्तियों पर विवाद |
| पुलिस और अफ़सरों पर नियंत्रण | राज्य सरकार | राज्य या UT सरकार; परिषदें स्थानीय विषय देखती हैं | अस्पष्ट; संगठन चाहते हैं मुख्य सचिव और पुलिस निर्वाचित प्रमुख के अधीन हों |
| ज़मीन और रीति-रिवाज़ का संरक्षण | ज़मीन पर राज्य के क़ानून | परिषदें ज़मीन, जंगल, उत्तराधिकार, विवाह, रीति-रिवाज़ पर क़ानून बनाती हैं | अनुच्छेद 371क, 371च और 371छ जैसे सुरक्षा उपाय |
| केंद्र की राय | सहमति नहीं | सहमति नहीं | सितंबर 2026 में प्रस्ताव; अक्टूबर 2026 में मसौदा साझा |
LAB और KDA क्या चाहते हैं
- मुख्यमंत्री और मंत्रिपरिषद वाली विधानसभा
- नौकरशाही, मुख्य सचिव की वार्षिक रिपोर्ट समेत, निर्वाचित प्रमुख के नियंत्रण में
- केंद्रीय क़ानून लागू होने से पहले निर्वाचित निकाय की सहमति
- पूर्ण राज्य और छठी अनुसूची अब भी उनका घोषित लक्ष्य
केंद्र का मसौदा क्या देता है (जैसा बताया गया)
- अनुच्छेद 371 में नया अध्याय K
- लद्दाख के लिए केंद्र शासित स्तर का निर्वाचित निकाय
- नागालैंड, सिक्किम और मिज़ोरम जैसे सुरक्षा उपाय
- न पूर्ण राज्य, न छठी अनुसूची; अनुच्छेद 370 जैसा सहमति नियम नहीं
बड़ी तस्वीरअनुच्छेद 371 विशेष उपबंध: किन राज्यों के पास हैं
| अनुच्छेद | राज्य | क्या संरक्षण देता है |
|---|---|---|
| 371 | महाराष्ट्र, गुजरात | विदर्भ, मराठवाड़ा, सौराष्ट्र, कच्छ के विकास बोर्ड |
| 371क | नागालैंड | नागा रीति-रिवाज़, रूढ़िजन्य विधि, ज़मीन: केंद्रीय क़ानून के लिए विधानसभा का संकल्प ज़रूरी |
| 371ख | असम | विधानसभा में जनजातीय क्षेत्रों के सदस्यों की समिति |
| 371ग | मणिपुर | विधानसभा की पहाड़ी क्षेत्र समिति |
| 371घ, 371ङ | आंध्र प्रदेश, तेलंगाना | नौकरियों और शिक्षा में स्थानीय कैडर; केंद्रीय विश्वविद्यालय |
| 371च | सिक्किम | पुराने क़ानून जारी; संघ और भूटिया-लेप्चा सीटें; ज़मीन |
| 371छ | मिज़ोरम | मिज़ो रीति-रिवाज़, रूढ़िजन्य विधि, ज़मीन: केंद्रीय क़ानून के लिए विधानसभा का संकल्प ज़रूरी |
| 371ज | अरुणाचल प्रदेश | क़ानून-व्यवस्था पर राज्यपाल की विशेष ज़िम्मेदारी |
| 371झ | गोवा | विधानसभा में कम से कम 30 सदस्य |
| 371ञ | कर्नाटक | कल्याण-कर्नाटक क्षेत्र बोर्ड, स्थानीय आरक्षण (98वाँ संशोधन, 2012) |
अनुच्छेद 371 संविधान की नाप लेकर कपड़े सिलने वाली दुकान है। सबके लिए एक साइज़ की जगह यह हर इलाक़े के इतिहास के हिसाब से विशेष उपबंध सिलता है। लद्दाख अगला अक्षर, 371K, बनेगा। झगड़ा इस पर है कि सूट में कितना कपड़ा लगे: नागालैंड और मिज़ोरम जैसी असली विधानसभा, या सीमित शक्तियों वाला छोटा निर्वाचित निकाय।
व्याख्याछठी अनुसूची आसान शब्दों में: स्वायत्त ज़िला परिषदें
- 1कहाँ लागू
असम, मेघालय, त्रिपुरा और मिज़ोरम के जनजातीय क्षेत्र (अनुच्छेद 244(2), 275(1))। आज 10 स्वायत्त ज़िला परिषदें हैं।
- 2परिषद में कौन
अधिकतम 30 सदस्य: अधिकतम 4 राज्यपाल द्वारा नामित, बाक़ी पाँच साल के लिए वयस्क मताधिकार से निर्वाचित।
- 3क़ानून बनाने की शक्ति
ज़मीन, जंगल (आरक्षित वनों को छोड़कर), खेती के लिए पानी, झूम खेती, गाँव का प्रशासन, उत्तराधिकार, विवाह, तलाक़ और सामाजिक रीति-रिवाज़।
- 4अदालत और कर
जनजातीय लोगों के आपसी मामलों के लिए ग्राम और ज़िला परिषद अदालतें; भू-राजस्व और कुछ कर वसूलने की शक्ति।
- 5लद्दाख क्यों माँगता है
लद्दाख के 90 प्रतिशत से ज़्यादा लोग अनुसूचित जनजाति हैं। 2019 में राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग ने लद्दाख को छठी अनुसूची में लाने की सिफ़ारिश की थी।
- 6अड़चन
छठी अनुसूची अब तक केवल पूर्वोत्तर में इस्तेमाल हुई है। लद्दाख को जोड़ने के लिए संविधान संशोधन चाहिए, और केंद्र सहमत नहीं है।
UPSC कॉर्नरUPSC प्रारंभिक और मुख्य परीक्षा के लिए लद्दाख, अनुच्छेद 371K और छठी अनुसूची
- प्रारंभिक तथ्य: J&K पुनर्गठन अधिनियम, 2019 के तहत 31 अक्टूबर 2019 को लद्दाख बिना विधानसभा वाला केंद्र शासित प्रदेश बना।
- प्रारंभिक तथ्य: अनुच्छेद 371 अभी 371 से 371ञ (371J) तक है; 371ञ (कर्नाटक) 98वें संशोधन अधिनियम, 2012 से जुड़ा।
- प्रारंभिक तथ्य: छठी अनुसूची असम, मेघालय, त्रिपुरा और मिज़ोरम के जनजातीय क्षेत्रों पर लागू है (अनुच्छेद 244(2)); पाँचवीं अनुसूची बाक़ी राज्यों के अनुसूचित क्षेत्रों के लिए है।
- प्रारंभिक तथ्य: अनुच्छेद 371क और 371छ के तहत रीति-रिवाज़ और ज़मीन पर संसद के क़ानून नागालैंड और मिज़ोरम में तभी लागू होते हैं जब उनकी विधानसभा संकल्प पास करे।
- प्रारंभिक तथ्य: नया राज्य बनाना या UT का दर्जा बदलना अनुच्छेद 3 और 4 के तहत साधारण क़ानून से हो सकता है; अनुच्छेद 371 या छठी अनुसूची में जोड़ने के लिए अनुच्छेद 368 के तहत संशोधन चाहिए।
- मुख्य परीक्षा (250 शब्द): "संवैधानिक असमरूपता भारतीय संघवाद की ताक़त है।" अनुच्छेद 371 और लद्दाख की माँगों के संदर्भ में चर्चा कीजिए।
- मुख्य परीक्षा (150 शब्द): पाँचवीं और छठी अनुसूची की तुलना कीजिए। लद्दाख जैसे क्षेत्र छठी अनुसूची का संरक्षण क्यों माँगते हैं?
अभ्यास MCQख़ुद को परखें: लद्दाख, अनुच्छेद 371K और छठी अनुसूची
भारत के संविधान के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: (1) छठी अनुसूची अभी असम, मेघालय, त्रिपुरा और मिज़ोरम के जनजातीय क्षेत्रों पर लागू है। (2) अनुच्छेद 371क के तहत नागा रूढ़िजन्य विधि पर संसद का अधिनियम नागालैंड में तभी लागू होगा जब उसकी विधानसभा संकल्प द्वारा ऐसा तय करे। (3) अनुच्छेद 371ञ (371J), जो अनुच्छेद 371 का सबसे नया अध्याय है, लद्दाख से संबंधित है। ऊपर दिए गए कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
शंका समाधानअक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
लद्दाख के लिए अनुच्छेद 371K क्या है?
यह अनुच्छेद 371 का एक प्रस्तावित नया अध्याय है जो गृह मंत्रालय ने सितंबर 2026 में सुझाया। इससे लद्दाख को केंद्र शासित स्तर का निर्वाचित निकाय और नागालैंड, सिक्किम व मिज़ोरम जैसे सुरक्षा उपाय मिलेंगे। यह अभी क़ानून नहीं है; इसके लिए संसद से पारित संविधान संशोधन चाहिए।
लद्दाख के संगठनों ने केंद्र का मसौदा क्यों ठुकराया?
लेह एपेक्स बॉडी और कारगिल डेमोक्रेटिक अलायंस ने कहा कि मसौदा 22 मई 2026 की सहमति से पीछे हटता है और इसमें मुख्यमंत्री व अफ़सरों पर नियंत्रण वाली असली विधानसभा नहीं है। केंद्र पक्ष ने कहा कि संगठन संसद के क़ानूनों पर सहमति का अधिकार चाहते थे, जो रद्द अनुच्छेद 370 जैसा है।
छठी अनुसूची क्या है?
संविधान की छठी अनुसूची, अनुच्छेद 244(2) के ज़रिए, असम, मेघालय, त्रिपुरा और मिज़ोरम के जनजातीय क्षेत्रों में स्वायत्त ज़िला परिषदें बनाती है। ये परिषदें ज़मीन, जंगल, उत्तराधिकार, विवाह और रीति-रिवाज़ पर क़ानून बनाती हैं।
क्या लद्दाख में विधानसभा है?
नहीं। 31 अक्टूबर 2019 से लद्दाख बिना विधानसभा वाला केंद्र शासित प्रदेश है, जिसे उपराज्यपाल चलाते हैं। इसका एक लोकसभा सांसद है और लेह व कारगिल में दो पहाड़ी विकास परिषदें हैं।
क्या लद्दाख राज्य बन सकता है?
हाँ, राष्ट्रपति द्वारा विधेयक भेजे जाने के बाद संसद अनुच्छेद 3 और 4 के तहत साधारण क़ानून से नया राज्य बना सकती है। यह राजनीतिक फ़ैसला है; केंद्र अब तक पूर्ण राज्य पर सहमत नहीं हुआ है।
स्रोत और आगे की पढ़ाईहमने जिन स्रोतों की जाँच की
इस पेज के समाचार तथ्य 18 अक्टूबर 2026 को नीचे दी गई रिपोर्टों से जाँचे गए। गृह मंत्रालय के मसौदे का पाठ सार्वजनिक नहीं हुआ है; उसका विवरण लद्दाख के संगठनों और UT प्रशासन के बताए अनुसार है।
- ETV Bharat, 17 Oct 2026: Ladakh groups reject Centre's draft proposal, allege backtracking on legislature and Article 371 safeguards
- ETV Bharat, 17 Oct 2026: Chief Secretary on Ladakh groups' proposed Article 370-type safeguard
- The Wire: Ladakh leaders reject Government's alternative to statehood as talks hit roadblock
- INSIGHTS, 10 Sep 2026: Proposed Article 371(K), Ladakh's new constitutional safeguard
- The Wire, May 2026: Ladakh groups reach 'in-principle understanding' with the Union Government
- Legislative Department: The Constitution of India (Articles 239, 244, 371 to 371J, Sixth Schedule)