भाग III ⚖️ मूल अधिकार लागू · कोई संशोधन नहीं

अनुच्छेद 14: विधि के समक्ष समता और विधियों का समान संरक्षण

अनुच्छेद 14 सभी समानता अधिकारों की जननी है। एक ही पंक्ति में यह भारत में हर व्यक्ति को दो वादे करता है: कोई भी कानून से ऊपर नहीं, और एक जैसी स्थिति वालों पर एक जैसा कानून।

मूल पाठअनुच्छेद 14 का आधिकारिक पाठ

हिन्दी · आधिकारिक पाठ

समता का अधिकार

14. विधि के समक्ष समता—राज्य, भारत के राज्यक्षेत्र में किसी व्यक्ति को विधि के समक्ष समता से या विधियों के समान संरक्षण से वंचित नहीं करेगा।

टिप्पणी: अनुच्छेद 14 में कभी संशोधन नहीं हुआ। यह किसी भी व्यक्ति की रक्षा करता है, नागरिक हो या विदेशी, मनुष्य हो या कंपनी। यह अनुच्छेद 12 में परिभाषित "राज्य" पर बाध्यकारी है।
In Simple Words / आसान शब्दों में

अनुच्छेद 14 के दो हिस्से हैं। "विधि के समक्ष समता" का मतलब है कि कानून किसी के आगे नहीं झुकता: मंत्री हो या रिक्शा चालक, दोनों पर एक ही कानून और एक ही अदालत। "विधियों का समान संरक्षण" का मतलब है समान लोगों के साथ समान व्यवहार, लेकिन असमान लोगों के साथ अलग व्यवहार किया जा सकता है।

इसलिए अनुच्छेद 14 यह नहीं कहता कि सबके साथ हूबहू एक जैसा व्यवहार हो। राज्य अलग-अलग समूहों के लिए अलग नियम बना सकता है (आयकर के स्लैब, वरिष्ठ नागरिकों को छूट, आरक्षण), बशर्ते वर्गीकरण समझदारी भरा हो और कानून के उद्देश्य से जुड़ा हो। इसे उचित वर्गीकरण कहते हैं।

अनुच्छेद 14 जिस चीज़ को रोकता है वह है वर्ग विधान (बिना ठोस कारण किसी समूह का पक्ष लेना) और मनमानी। 1974 से सुप्रीम कोर्ट कहता आया है कि मनमानी अपने आप में असमानता है, इसलिए कोई भी अन्यायपूर्ण, मनमौजी सरकारी कार्य अनुच्छेद 14 के तहत रद्द हो सकता है।

अनुच्छेद 14 हर व्यक्ति पर लागू होता है, केवल नागरिकों पर नहीं। गोवा में गिरफ़्तार कोई विदेशी पर्यटक भी इससे उतना ही सुरक्षित है।

🏠 रोज़मर्रा की मिसाल

एक क्रिकेट मैच सोचिए। "विधि के समक्ष समता" वह नियम है कि अंपायर का फ़ैसला कप्तान और बारहवें खिलाड़ी, दोनों पर लागू होता है। "समान संरक्षण" इसलिए है कि तेज़ गेंदबाज़ और स्पिनर के लिए फ़ील्डिंग अलग लगती है: उनकी स्थिति अलग है, इसलिए अलग नियम ठीक हैं। लेकिन अगर अंपायर केवल एक शहर के खिलाड़ियों को LBW दे, तो यह मनमानी है, और अनुच्छेद 14 इसे फ़ाउल कहता है।

🇮🇳 असली भारतीय उदाहरण

नवंबर 2024 में सुप्रीम कोर्ट ने "बुलडोज़र न्याय" पर रोक लगाई: किसी व्यक्ति पर अपराध का आरोप होने भर से राज्य उसका घर नहीं गिरा सकता। बिना मुकदमे के सज़ा देना, और कुछ ही आरोपियों को चुनकर उनका घर गिराना, विधि के शासन और अनुच्छेद 14 का उल्लंघन है। कोर्ट ने अवैध ढाँचे को गिराने से पहले 15 दिन का नोटिस और सुनवाई अनिवार्य की।

समता का अर्थसमता बनाम साम्या: अनुच्छेद 14 में औपचारिक और वास्तविक समानता

समानता का तात्पर्य उन अवसरों से है जिनके आधार पर न्याय स्थापित किया जाता है। समानता का संबंध तथ्यों से नहीं है, और समानता की संकल्पना में प्राकृतिक असमानताएँ अंतर्निहित हैं। उदाहरण के लिए काले-गोरे, मोटे-पतले के बीच उस अर्थ में समानता संभव नहीं है।

  • समानता का संबंध न्याय से है।
  • यह विशेषाधिकार की समाप्ति से संबंधित है।
  • यह एक प्रकार से राज्य के विरुद्ध नागरिकों को मिलने वाली गारंटी है; अन्याय के विरुद्ध न्याय का वादा।
  • इसका संबंध अवसरों से है, जिनके माध्यम से सामाजिक, आर्थिक और राजनैतिक समानता सुनिश्चित की जा सकती है।
  • इसके माध्यम से भेदभाव की समाप्ति होती है।

साम्या (इक्विटी) बनाम समता (इक्वालिटी)

साम्या (Equity)समता (Equality)
संविधान में शब्द के रूप में नहीं; यह न्याय का लक्ष्य हैसंविधान में लिखी है (अनुच्छेद 14 से 18)
एक साधन (mean): हर व्यक्ति को उसकी ज़रूरत के हिसाब से देनाएक साध्य (end): सबके लिए एक जैसे अधिकार और नियम
अमेरिका में अधिक (सकारात्मक कार्रवाई)ब्रिटेन में अधिक (सबके लिए एक कानून)
कमज़ोर को उठाने के लिए सकारात्मक भेदभावसबके लिए एक समान अवसर

कक्षा नोट्स का चित्र सबसे अच्छा समझाता है: अलग-अलग लंबाई के तीन लोग दीवार के पार मैच देख रहे हैं। समता सबको एक जैसा डिब्बा देती है, फिर भी सबसे छोटा नहीं देख पाता। साम्या ज़रूरत के हिसाब से डिब्बे देती है, ताकि तीनों देख सकें। भारत के संविधान में इक्विटी और इक्वालिटी दोनों को अपनाया गया है।

समानता के चार भाग

  • कानूनी समानता (औपचारिक): नियम-विनियम-कानून से प्राप्त। उदाहरण: स्वयं अनुच्छेद 14।
  • राजनैतिक समानता (औपचारिक): एक व्यक्ति, एक वोट। अनुच्छेद 326 वयस्क मताधिकार देता है और जनप्रतिनिधित्व कानून, 1951 की धारा 62 मतदाता सूची में दर्ज हर व्यक्ति को मत देने का अधिकार देती है।
  • सामाजिक समानता (वास्तविक/पर्याप्त): अनुच्छेद 15 और 17 में। केवल कानून से यह पूरी नहीं होती; इसके लिए अनौपचारिक पद्धति और समाज में आपसी संबंधों की बेहतरी भी ज़रूरी है।
  • आर्थिक समानता (वास्तविक/पर्याप्त): अनुच्छेद 16 की आरक्षण नीति और नीति निदेशक तत्वों में। सिर्फ़ राज्य के प्रयास से इसे सुनिश्चित नहीं किया जा सकता।
समता और साम्या (Equality vs Equity) चित्र: औपचारिक समानता (कानूनी, राजनीतिक) और वास्तविक समानता (सामाजिक, आर्थिक), अनुच्छेद 14 भारतीय संविधान UPSC नोट्स
समता बनाम साम्या, और संविधान की चार प्रकार की समानता।

दो हिस्सेविधि के समक्ष समता बनाम विधियों का समान संरक्षण, और उचित वर्गीकरण की कसौटी

अनुच्छेद 14 का पहला हिस्सा ब्रिटेन से लिया गया है, दूसरा अमेरिका से। (नोट्स में "विधि के समक्ष समान संरक्षण" लिखा है; सही शब्द हैं "विधियों का समान संरक्षण"।)

विधि के समक्ष समता (ब्रिटिश अवधारणा)विधियों का समान संरक्षण (अमेरिकी अवधारणा)
कानून के सामने सबके साथ एक जैसा व्यवहारसमान लोगों के साथ समान व्यवहार: एक जैसी स्थिति वालों पर एक जैसा कानून
उदाहरण: SC, ST, OBC या सामान्य, किसी भी वर्ग के व्यक्ति पर एक ही आपराधिक कानून लागूउदाहरण: एक ही वर्ग (जैसे सभी OBC उम्मीदवार) के भीतर कोई भेदभाव नहीं
नकारात्मक अवधारणा: राज्य अवसर देता है, बराबरी के लिए सक्रिय प्रयास नहीं करतासकारात्मक अवधारणा: राज्य असली समानता के लिए विशेष कानून बना सकता है (भारत में आरक्षण, अमेरिका में affirmative action)
ब्रिटिश संवैधानिक परंपरा (डायसी) सेअमेरिकी संविधान के 14वें संशोधन (1868) से
सभी व्यक्तियों के लिए समान नियमसमान स्थिति वालों के लिए समान नियम; उचित वर्गीकरण की अनुमति
उद्देश्य: सामान्य रूप से विशेषाधिकार और भेदभाव ख़त्म करनाउद्देश्य: न्यायपूर्ण वर्गीय व्यवस्था

उचित वर्गीकरण: दोहरी कसौटी

पश्चिम बंगाल राज्य बनाम अनवर अली सरकार (1952) से, समूहों के साथ अलग व्यवहार करने वाला कानून तभी वैध है जब:

  • बोधगम्य अंतर (intelligible differentia): समूह को साफ़, समझ में आने वाले आधार पर अलग किया गया हो (जैसे "60 वर्ष से अधिक आयु के लोग")।
  • तार्किक संबंध (rational nexus): उस आधार का कानून के उद्देश्य से सीधा संबंध हो (वरिष्ठ नागरिकों को सस्ता रेल टिकट, क्योंकि उनकी आय प्रायः कम होती है)।

अनवर अली सरकार मामले में बंगाल के एक कानून ने सरकार को किसी भी मुकदमे को छोटी प्रक्रिया वाली विशेष अदालत में भेजने की छूट दी थी, बिना बताए कि कौन-से मामले और क्यों। यह मनमाना चुनाव था, इसलिए कानून रद्द हुआ। इसके विपरीत चिरंजीत लाल चौधरी (1950) में एक ही कंपनी के लिए बना कानून भी वैध माना गया, क्योंकि उस कंपनी का विशेष कुप्रबंधन असली कारण था।

वर्गीकरण से मनमानी तक

  • ई.पी. रोयप्पा बनाम तमिलनाडु राज्य (1974): "समता और मनमानी कट्टर शत्रु हैं"। कोई भी मनमाना राज्य-कार्य अनुच्छेद 14 का उल्लंघन है।
  • मेनका गांधी बनाम भारत संघ (1978): अनुच्छेद 14, 19 और 21 का स्वर्ण त्रिभुज; प्रक्रिया न्यायपूर्ण, उचित और युक्तियुक्त होनी चाहिए।
  • शायरा बानो बनाम भारत संघ (2017): विधायिका का बनाया कानून भी स्पष्ट मनमानी (manifest arbitrariness) के आधार पर रद्द हो सकता है; तत्काल तीन तलाक़ रद्द।
  • नवतेज सिंह जौहर (2018) और जोसेफ़ शाइन (2018): धारा 377 (सहमति से वयस्कों पर) और व्यभिचार कानून आंशिक रूप से अनुच्छेद 14 के आधार पर गिरे।
  • ADR बनाम भारत संघ (15 फ़रवरी 2024): चुनावी बॉन्ड योजना रद्द; कंपनियों के असीमित गुप्त चंदे को स्पष्ट मनमानी माना गया।
  • अनुराग कृष्ण सिन्हा बनाम बिहार राज्य (10 मार्च 2026): 1924 के एक ट्रस्ट पुस्तकालय को एक रुपये में अपने कब्ज़े में लेने वाला 2015 का बिहार कानून अनुच्छेद 14 के तहत स्पष्ट मनमाना और अनुच्छेद 300क के तहत ज़ब्ती जैसा मानकर रद्द किया गया।
विधि के समक्ष समता बनाम विधियों का समान संरक्षण: ब्रिटेन (नकारात्मक) और अमेरिका (सकारात्मक) अवधारणा, उचित वर्गीकरण की दो कसौटियाँ, अनुच्छेद 14
विधि के समक्ष समता बनाम विधियों का समान संरक्षण, और उचित वर्गीकरण की दोहरी कसौटी।

डायसी और भारतविधि का शासन: कानून क्या है, डायसी की संकल्पना और प्रशासनिक कानून

कानून क्या होता है?

  • कानून (Law) शब्द लैटिन भाषा के शब्द लिगारे (ligare) से जुड़ा है, जिसका तात्पर्य बाँधना, बंधन में डालना होता है। यह उल्लेखनीय है कि कानून बंधन में नहीं डालता, बल्कि यह स्वतंत्रता प्रदान करता है।
  • यद्यपि कानून में कुछ बंधनकारी प्रभाव होते हैं, किंतु ऐसे प्रावधान नागरिक के व्यवहार में सुधार लाने के लिए होते हैं। जिन अपराधों में सुधार संभव नहीं, उनमें कानून मृत्युदंड का प्रावधान भी करता है, किंतु यह इसका मूल भाव नहीं है।
  • कानून की प्रकृति: कानून उदारवादी और सुधारात्मक होते हैं; कानून में जड़ता (rigidity) भी पाई जाती है; कानून मानवतावादी होता है; और कानून का अपना एक विशिष्ट क्षेत्राधिकार होता है (एक देश के कानून दूसरे देश में लागू नहीं होते)।
  • कानून के माध्यम से नैतिकता को भी सुनिश्चित किया जा सकता है, किंतु सिर्फ़ कानून के आधार पर नैतिक समाज की स्थापना नहीं हो सकती।

डायसी का विधि का शासन बनाम प्रशासनिक कानून

ब्रिटिश विधिवेत्ता ए.वी. डायसी (1885) ने अंग्रेज़ी विधि के शासन और फ्रांसीसी प्रशासनिक कानून में अंतर बताया:

विधि का शासन (डायसी)प्रशासनिक कानून (फ्रांस का droit administratif)
विधि सर्वोच्च है, शासक नहींआम नागरिक के लिए सामान्य कानून, प्रशासन के लिए विशिष्ट कानून
कानून के समक्ष समता: अधिकारी और नागरिक एक ही सामान्य अदालत मेंप्रशासन और नागरिक के विवाद का निपटारा अधिकरण (tribunal) द्वारा
नागरिकों के अधिकार ही संविधान के स्रोत हैं (न्यायाधीशों द्वारा विकसित)प्रशासनिक ग़लती/त्रुटि की भरपाई राज्य द्वारा
नागरिकों को संरक्षण देता हैप्रशासन को संरक्षण देता है

डायसी का तर्क: विधि का शासन नागरिकों को संरक्षण देता है, जबकि प्रशासनिक कानून प्रशासन को। अतः विधि के शासन को प्राथमिकता देनी चाहिए।

विधि के शासन के फ़ायदे

  • इससे नागरिकों के हितों को प्राथमिकता के साथ सुनिश्चित किया जाता है।
  • प्रशासन की तुलना में नागरिकों को अधिक महत्व दिया जाता है।
  • समानता के लक्ष्य को प्राप्त किया जाता है।
  • यह लोगों के बीच भेदभाव मिटाता है, क्योंकि कोई जाति, धर्म, वर्ग बड़ा नहीं है, बल्कि कानून सर्वोच्च है।
  • नागरिकों के अधिकारों को संरक्षित किया जाता है।
  • इससे लोकतंत्र की स्थापना की जा सकती है।
आज भारत में: सुप्रीम कोर्ट विधि के शासन को मूल ढाँचे का हिस्सा मानता है (इंदिरा नेहरू गांधी बनाम राज नारायण, 1975)। नवंबर 2024 में कोर्ट ने इसी आधार पर आरोपियों के घरों पर दंडात्मक "बुलडोज़र" कार्रवाई रोकी और कहा कि कार्यपालिका न्यायाधीश नहीं बन सकती।
विधि का शासन: डायसी के तीन स्तंभ (विधि की सर्वोच्चता, विधि के समक्ष समता, अधिकार संविधान का स्रोत) और भारत में अपवाद (अनुच्छेद 361, संसदीय विशेषाधिकार, राजनयिक)
डायसी के विधि के शासन के तीन स्तंभ और भारत में मुख्य अपवाद।

तुलनात्मक राजव्यवस्थाब्रिटेन बनाम भारत में विधि का शासन, और अमेरिका बनाम भारत में समानता का अधिकार

विधि के शासन की ब्रिटिश और भारतीय अवधारणा में अंतर

ब्रिटेन (UK)भारत
कानून सर्वोच्च, लेकिन प्रथा-परंपरा (conventions) का भी बहुत महत्वकानून सर्वोच्च; अनुच्छेद 13 की "विधि" में प्रथा भी शामिल, पर ब्रिटेन जितनी अहम नहीं
विधि के समक्ष समता पर बलविधि के समक्ष समता और विधियों के समान संरक्षण दोनों पर बल
नागरिकों के अधिकार संविधान के स्रोत (अधिकार पहले)संविधान अधिकारों का स्रोत है, और उसमें सामाजिक आकांक्षाएँ भी हैं (उद्देशिका, नीति निदेशक तत्व, आरक्षण)
विधि के शासन के अधिक अपवादअपवाद कम, और अदालतें उन्हें परख सकती हैं
संसदीय संप्रभुता: अंतिम शब्द संसद कान्यायपालिका को अधिक महत्व: न्यायिक पुनर्विलोकन और मूल ढाँचा

भारत और अमेरिका में समानता के अधिकार में अंतर

अमेरिकाभारत
मूल संविधान (1787) में नहीं था; 14वें संशोधन (1868) से जोड़ा गयामूल संविधान के भाग III में, अनुच्छेद 14 से 18 के बीच
मुख्यतः औपचारिक समानता (कानूनी और राजनीतिक) पर बलऔपचारिक और वास्तविक दोनों समानता (कानूनी, राजनीतिक, सामाजिक, आर्थिक)
विधियों के समान संरक्षण पर बलविधि के समक्ष समता और समान संरक्षण दोनों पर बल
सकारात्मक कार्रवाई कमज़ोर (कॉलेज दाख़िले में नस्ल आधारित नीति 2023 के SFFA बनाम हार्वर्ड फ़ैसले से ख़त्म)सकारात्मक भेदभाव अधिक प्रभावी: SC, ST, OBC और EWS के लिए आरक्षण
भेदभाव रोकने के स्पष्ट प्रावधान मुख्यतः सिविल राइट्स एक्ट, 1964 जैसे कानूनों सेसंविधान स्वयं अनुच्छेद 15, 16, 17 और 18 में भेदभाव रोकने के स्पष्ट प्रावधान करता है

मेन्स के लिए निष्कर्ष: भारतीय प्रतिमान अधिक समग्र है। यह डायसी का मूल विचार (कोई कानून से ऊपर नहीं) रखता है, अमेरिका का समान संरक्षण जोड़ता है, और अनुच्छेद 15 से 17, आरक्षण तथा नीति निदेशक तत्वों के ज़रिए सामाजिक-आर्थिक न्याय तक जाता है, जिसकी रक्षा स्वतंत्र न्यायपालिका करती है।

पूर्ण नहींभारत में विधि के शासन और अनुच्छेद 14 के अपवाद

भारत में भी कुछ लोगों को विशेष संरक्षण मिलता है, यानी विधि के शासन में भी अपवाद दिखाई देते हैं:

  • राष्ट्रपति और राज्यपाल (अनुच्छेद 361): अपने पदीय कार्यों के लिए किसी अदालत के प्रति उत्तरदायी नहीं; कार्यकाल में उन पर आपराधिक मामले नहीं चलाए जा सकते; कार्यकाल में उनकी गिरफ़्तारी या कारावास के लिए कोई अदालत आदेश जारी नहीं कर सकती, न ही उन्हें सम्मन किया जा सकता।
  • उनके व्यक्तिगत कार्यों पर दीवानी मामले कार्यकाल में दो महीने की पूर्व लिखित सूचना देकर ही चलाए जा सकते हैं (अनुच्छेद 361(4))।
  • सांसद और विधायक (अनुच्छेद 105 और 194): संसद और विधान-मंडल में कहे गए शब्दों/कथनों या दिए गए वोट पर कोई मुकदमा, यानी मानहानि का दावा, नहीं किया जा सकता। सिविल प्रक्रिया संहिता की धारा 135क के तहत सत्र चलते समय और उसके 40 दिन पहले व 40 दिन बाद तक दीवानी मामलों में गिरफ़्तारी नहीं हो सकती। (रिश्वत को संरक्षण नहीं: सीता सोरेन, 2024।)
  • विदेशी शासक, राजदूत और राजनयिक अंतरराष्ट्रीय कानून (वियना कन्वेंशन, जिसे राजनयिक संबंध अधिनियम, 1972 लागू करता है) के तहत भारतीय आपराधिक और दीवानी क्षेत्राधिकार से मुक्त हैं।
  • लोक सेवक (IAS, IPS, पुलिस, वन अधिकारी आदि) पर पदीय कर्तव्य के दौरान किए कार्यों के लिए मुकदमा चलाने से पहले सरकार की पूर्व स्वीकृति चाहिए (BNSS की धारा 218, पहले CrPC की धारा 197)।
  • अनुच्छेद 31ग: अनुच्छेद 39(ख) और (ग) को लागू करने वाले कानूनों को अनुच्छेद 14 के आधार पर चुनौती नहीं दी जा सकती।
ये अपवाद सीमित और तर्कसंगत हैं: ये पद की रक्षा करते हैं, व्यक्ति की नहीं, और अदालतें इनकी सख़्त व्याख्या करती हैं। इसीलिए भारत में विधि के शासन के अपवाद ब्रिटेन से कम हैं।

त्वरित दोहराईयाद रखने योग्य मुख्य बातें

  • अनुच्छेद 14 राज्य के विरुद्ध हर व्यक्ति की रक्षा करता है, नागरिक हो या न हो।
  • विधि के समक्ष समता (ब्रिटिश, नकारात्मक) + विधियों का समान संरक्षण (अमेरिकी, सकारात्मक)।
  • उचित वर्गीकरण की अनुमति है; वर्ग विधान की नहीं (दोहरी कसौटी, 1952)।
  • मनमानी अपने आप में अनुच्छेद 14 का उल्लंघन है (रोयप्पा 1974; स्पष्ट मनमानी, शायरा बानो 2017)।
  • डायसी का विधि का शासन: विधि की सर्वोच्चता, विधि के समक्ष समता, अधिकार संविधान के स्रोत।
  • अपवाद: अनुच्छेद 361, अनुच्छेद 105/194, राजनयिक, लोक सेवकों के लिए स्वीकृति, अनुच्छेद 31ग।
  • संविधान समता और साम्या दोनों अपनाता है: औपचारिक और वास्तविक समानता।

मुकदमों की समयरेखाअदालतों के ज़रिए अनुच्छेद 14 का विकास

वर्षफ़ैसला और निष्कर्ष
1950चिरंजीत लाल चौधरी: ठोस कारण हो तो एक कंपनी के लिए बना कानून भी वैध हो सकता है।
1952पश्चिम बंगाल राज्य बनाम अनवर अली सरकार: उचित वर्गीकरण की दोहरी कसौटी।
1974ई.पी. रोयप्पा: मनमानी समता की विरोधी है।
1975इंदिरा नेहरू गांधी बनाम राज नारायण: विधि का शासन और समता मूल ढाँचे का हिस्सा।
1978मेनका गांधी: अनुच्छेद 14, 19 और 21 का स्वर्ण त्रिभुज।
2017शायरा बानो: स्पष्ट मनमानी के आधार पर कानून रद्द हो सकता है; तत्काल तीन तलाक़ अवैध।
2024ADR (चुनावी बॉन्ड, 15 फ़रवरी) और ध्वस्तीकरण फ़ैसला (13 नवंबर): अनुच्छेद 14 और विधि का शासन लागू।
2026अनुराग कृष्ण सिन्हा बनाम बिहार राज्य (10 मार्च): ट्रस्ट पुस्तकालय पर कब्ज़े का कानून स्पष्ट मनमानी के कारण रद्द।

UPSC · राज्य PSC · न्यायपालिकाअनुच्छेद 14: UPSC परीक्षा कॉर्नर

  • प्रीलिम्स जाल: "अनुच्छेद 14 केवल नागरिकों को उपलब्ध है।" ग़लत। यह विदेशियों और कंपनियों सहित हर व्यक्ति को मिलता है।
  • प्रीलिम्स जाल: "विधियों का समान संरक्षण" ब्रिटेन से लिया गया है। ग़लत। यह अमेरिकी संविधान से है; "विधि के समक्ष समता" ब्रिटिश अवधारणा है।
  • मेन्स (250 शब्द): विधि के शासन और प्रशासनिक कानून के संदर्भ में डायसी की संकल्पना का प्रस्तुतीकरण करते हुए इसके भारतीय प्रतिरूप का विश्लेषण करें।
  • मेन्स (250 शब्द): विधि के शासन के ब्रिटिश और भारतीय प्रतिमानों का तुलनात्मक विवेचन करें और बताएँ कि भारतीय प्रतिमान अधिक समग्र है।
  • मेन्स (150 शब्द): इक्विटी और इक्वालिटी में अंतर बताते हुए स्पष्ट करें कि भारत के संविधान में इन दोनों का प्रभाव देखने को मिलता है।
  • जुड़े विषय: आच्छादन और पृथक्करणीयता का सिद्धांत (अनुच्छेद 13), मूल ढाँचा, और आरक्षण (अनुच्छेद 16)।

अभ्यास प्रश्नख़ुद को परखें: अनुच्छेद 14

अनुच्छेद 14 के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. यह विदेशियों को भी उपलब्ध है। 2. "विधि के समक्ष समता" अमेरिका से ली गई सकारात्मक अवधारणा है। 3. वर्गीकरण तभी वैध है जब उसमें बोधगम्य अंतर और कानून के उद्देश्य से तार्किक संबंध हो। कौन-से सही हैं?

शंका समाधानअक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भारतीय संविधान का अनुच्छेद 14 क्या है?

अनुच्छेद 14 कहता है कि राज्य भारत के राज्यक्षेत्र में किसी व्यक्ति को विधि के समक्ष समता या विधियों के समान संरक्षण से वंचित नहीं करेगा। यह समता के अधिकार (अनुच्छेद 14 से 18) का पहला प्रावधान है।

विधि के समक्ष समता और विधियों के समान संरक्षण में क्या अंतर है?

विधि के समक्ष समता (ब्रिटेन से) का अर्थ है कोई कानून से ऊपर नहीं और सब एक ही अदालत के सामने। विधियों का समान संरक्षण (अमेरिका से) का अर्थ है समान लोगों से समान व्यवहार, इसलिए उचित वर्गीकरण और कमज़ोर वर्गों के लिए विशेष प्रावधान की अनुमति है।

क्या अनुच्छेद 14 विदेशियों को उपलब्ध है?

हाँ। अनुच्छेद 14 "किसी व्यक्ति" शब्द का प्रयोग करता है, इसलिए यह विदेशियों और कंपनियों जैसे विधिक व्यक्तियों की भी रक्षा करता है।

डायसी के अनुसार विधि का शासन क्या है?

डायसी ने तीन विचार दिए: विधि की सर्वोच्चता (कोई मनमानी शक्ति नहीं), विधि के समक्ष समता (अधिकारी और नागरिक एक ही सामान्य अदालत में) और यह कि अदालतों द्वारा तय नागरिकों के अधिकार ही संविधान के स्रोत हैं।

अनुच्छेद 14 के अपवाद क्या हैं?

राष्ट्रपति और राज्यपालों की उन्मुक्ति (अनुच्छेद 361), संसदीय विशेषाधिकार (अनुच्छेद 105 और 194), विदेशी राजनयिकों की उन्मुक्ति, लोक सेवकों पर मुकदमे के लिए स्वीकृति, और अनुच्छेद 31ग से संरक्षित कानून।