भाग I ⚖️ संघ और उसका राज्यक्षेत्र लागू

अनुच्छेद 2: नए राज्यों का प्रवेश या स्थापना

अनुच्छेद 2 संसद को यह शक्ति देता है कि वह भारत के बाहर की ज़मीन को संघ में शामिल करके उसे राज्य बना सके, उन शर्तों पर जो संसद तय करे।

मूल पाठअनुच्छेद 2 का आधिकारिक पाठ

हिन्दी · आधिकारिक पाठ

2. नए राज्यों का प्रवेश या स्थापना—

संसद, विधि द्वारा, ऐसे निबंधनों और शर्तों पर, जो वह ठीक समझे, संघ में नए राज्यों का प्रवेश या उनकी स्थापना कर सकेगी।

अनुच्छेद 2क पर टिप्पणी: अनुच्छेद 2क ("सिक्किम का संघ के साथ सहयुक्त किया जाना") 35वें संशोधन अधिनियम, 1974 द्वारा जोड़ा गया और 36वें संशोधन अधिनियम, 1975 द्वारा हटा दिया गया, जब सिक्किम पूर्ण राज्य बना।
In Simple Words / आसान शब्दों में

अनुच्छेद 2 उस ज़मीन के बारे में है जो अभी भारत का हिस्सा नहीं है। यह संसद को दो शक्तियाँ देता है:

1. प्रवेश: किसी ऐसे क्षेत्र को शामिल करना जो पहले से एक अलग राजनीतिक इकाई है, जैसे कोई रियासत, और उसे भारत का राज्य बनाना।
2. स्थापना: भारत को मिली ज़मीन से एक बिल्कुल नया राज्य बनाना।

दोनों ही मामलों में शर्तें संसद तय करती है, और यह काम साधारण बहुमत से पास एक सामान्य कानून से होता है। कोई विशेष संविधान संशोधन नहीं चाहिए (अनुच्छेद 4 यह साफ़ करता है)।

अंतर याद रखें: अनुच्छेद 2 बाहर की ज़मीन को अंदर लाता है। अनुच्छेद 3 उन राज्यों को बदलता है जो पहले से भारत के अंदर हैं।

🏠 रोज़मर्रा की मिसाल

सोचिए IPL में एक नई टीम जुड़ रही है। लीग (संसद) तय करती है कि कौन-सा शहर जुड़ेगा और किन शर्तों पर: होम ग्राउंड, खिलाड़ियों के नियम, एंट्री फ़ीस। शर्तें तय होते ही नई टीम बाकी सबकी तरह उसी टूर्नामेंट में खेलती है। नया राज्य भारत में जुड़े, तो अनुच्छेद 2 ठीक इसी तरह काम करता है।

🇮🇳 असली भारतीय उदाहरण

सिक्किम भारत के संरक्षण में एक छोटी हिमालयी रियासत था। 1974 में 35वें संशोधन ने उसे "सहयुक्त राज्य" बनाया। अप्रैल 1975 में हुए जनमत-संग्रह में वहाँ के लोगों ने भारत में मिलने के पक्ष में वोट दिया, जिसके बाद 36वें संशोधन से सिक्किम 16 मई 1975 को भारत का 22वाँ राज्य बना। उसकी विशेष शर्तें अनुच्छेद 371च में लिखी गईं, ठीक वैसी ही "शर्तें" जिनकी अनुच्छेद 2 अनुमति देता है।

त्वरित दोहराईयाद रखने योग्य मुख्य बातें

  • दो शक्तियाँ: किसी मौजूदा राजनीतिक इकाई का प्रवेश, या नए राज्य की स्थापना।
  • यह केवल भारत के बाहर के क्षेत्र पर लागू होता है। मौजूदा राज्यों में बदलाव अनुच्छेद 3 के तहत होते हैं।
  • संसद सामान्य कानून (साधारण बहुमत) से काम करती है। अनुच्छेद 4(2) के अनुसार इसे संविधान संशोधन नहीं माना जाता।
  • संसद नए राज्य के लिए विशेष शर्तें तय कर सकती है, जैसे सिक्किम के लिए अनुच्छेद 371च।
  • यह शक्ति केवल संसद के पास है, किसी राज्य विधान-मंडल के पास नहीं।

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  • अनुच्छेद 2 बनाम अनुच्छेद 3: अनुच्छेद 2 = जो राज्य अभी संघ में नहीं हैं; अनुच्छेद 3 = जो राज्य पहले से संघ में हैं।
  • सिक्किम की समयरेखा: 35वें संशोधन (1974) ने अनुच्छेद 2क और दसवीं अनुसूची के ज़रिए उसे सहयुक्त राज्य बनाया; 36वें संशोधन (1975) ने उसे पूर्ण राज्य बनाया और अनुच्छेद 2क हटा दिया।
  • अनुच्छेद 2 से ज़मीन दी नहीं जा सकती। भारतीय क्षेत्र किसी को देने के लिए अनुच्छेद 368 के तहत संशोधन चाहिए (बेरुबारी यूनियन, 1960)।
  • गोवा, दमन और दीव तथा पुडुचेरी पहले संघ राज्यक्षेत्र के रूप में जोड़े गए थे, अनुच्छेद 2 के तहत राज्य के रूप में नहीं।

अभ्यास प्रश्नख़ुद को परखें: अनुच्छेद 2

36वें संशोधन अधिनियम, 1975 द्वारा कौन-सा राज्य भारतीय संघ में शामिल किया गया?

शंका समाधानअक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अनुच्छेद 2 और अनुच्छेद 3 में क्या अंतर है?

अनुच्छेद 2 बाहर के नए क्षेत्रों को भारत में शामिल करने से जुड़ा है। अनुच्छेद 3 पहले से भारत में मौजूद राज्यों से नए राज्य बनाने या उनके क्षेत्र, सीमा या नाम बदलने से जुड़ा है।

कौन-सा राज्य अनुच्छेद 2 से जुड़े तरीके से भारत में शामिल हुआ?

सिक्किम। पहले अनुच्छेद 2क के तहत सहयुक्त राज्य रहने के बाद, 36वें संशोधन से वह 16 मई 1975 को भारत का 22वाँ राज्य बना।

क्या नया राज्य शामिल करने के लिए संसद को संविधान संशोधन करना पड़ता है?

नहीं। सामान्य कानून काफ़ी है। अनुच्छेद 4(2) कहता है कि ऐसा कानून अनुच्छेद 368 के तहत संविधान का संशोधन नहीं माना जाएगा, भले ही वह पहली और चौथी अनुसूची बदले।