मूल पाठअनुच्छेद 9 का आधिकारिक पाठ
9. विदेशी राज्य की नागरिकता स्वेच्छा से अर्जित करने वाले व्यक्तियों का नागरिक न होना—
यदि किसी व्यक्ति ने किसी विदेशी राज्य की नागरिकता स्वेच्छा से अर्जित कर ली है तो वह अनुच्छेद 5 के आधार पर भारत का नागरिक नहीं होगा अथवा अनुच्छेद 6 या अनुच्छेद 8 के आधार पर भारत का नागरिक नहीं समझा जाएगा।
अनुच्छेद 9 का संदेश साफ़ है: आप एक साथ दो देशों के प्रति वफ़ादार नहीं हो सकते।
अगर किसी व्यक्ति ने स्वेच्छा से (अपनी मर्ज़ी से) किसी दूसरे देश की नागरिकता ले ली थी, तो वह अनुच्छेद 5, 6 या 8 के तहत भारत का नागरिक नहीं बन सकता था, भले ही बाकी सारी शर्तें पूरी करता हो।
"स्वेच्छा से" शब्द अहम है। किसी दूसरे देश के कानून द्वारा बिना मर्ज़ी के थोपी गई नागरिकता, ख़ुद आवेदन करके ली गई नागरिकता से अलग है।
अनुच्छेद 9 ख़ुद 26 जनवरी 1950 से पहले ली गई नागरिकता पर लागू है। उसके बाद के मामलों में यही विचार नागरिकता अधिनियम, 1955 की धारा 9 से लागू होता है: जो भारतीय स्वेच्छा से दूसरे देश का नागरिक बनता है, वह भारत का नागरिक नहीं रहता।
🏠 रोज़मर्रा की मिसाल
क्रिकेट मैच में आप केवल एक टीम के लिए बल्लेबाज़ी कर सकते हैं। अगर आपने अपनी मर्ज़ी से दूसरी टीम की जर्सी पहन ली है, तो आप भारत के लिए बल्लेबाज़ी करने नहीं उतर सकते। अनुच्छेद 9 नागरिकता पर यही नियम लागू करता है।
🇮🇳 असली भारतीय उदाहरण
जालंधर में जन्मे सुरेश लंदन चले गए और 1948 में ब्रिटिश नागरिकता ले ली। भारत में जन्म होने के बावजूद अनुच्छेद 9 के कारण वे 1950 में भारत के नागरिक नहीं बन सके। आज, पुणे की प्रिया अगर अमेरिकी नागरिकता लेती है, तो नागरिकता अधिनियम की धारा 9 के तहत उसकी भारतीय नागरिकता ख़त्म हो जाती है और उसे भारतीय पासपोर्ट लौटाना पड़ता है। इसकी जगह वह OCI कार्ड के लिए आवेदन कर सकती है।
त्वरित दोहराईयाद रखने योग्य मुख्य बातें
- स्वेच्छा से विदेशी नागरिकता = अनुच्छेद 5, 6 या 8 के तहत भारतीय नागरिकता नहीं।
- संविधान के प्रारंभ से पहले ली गई नागरिकता पर लागू; बाद के मामले नागरिकता अधिनियम, 1955 की धारा 9 के तहत।
- मुख्य शब्द है "स्वेच्छा से"।
- यह भारत की दोहरी नागरिकता नहीं वाली नीति का संवैधानिक आधार है।
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- अनुच्छेद 9 बनाम धारा 9: अनुच्छेद 9 = 26 जनवरी 1950 से पहले; नागरिकता अधिनियम की धारा 9 = उसके बाद।
- इज़हार अहमद ख़ान बनाम भारत संघ (1962): सुप्रीम कोर्ट ने धारा 9 और उस नियम को सही ठहराया कि विदेशी पासपोर्ट लेना उस देश की नागरिकता स्वेच्छा से लेने का निर्णायक सबूत है।
- किसी भारतीय ने विदेशी नागरिकता ली या नहीं और कब ली, यह धारा 9(2) के तहत केंद्र सरकार तय करती है।
- OCI दोहरी नागरिकता नहीं है। यह सीमित लाभों वाली एक रजिस्ट्रेशन योजना है।
अभ्यास प्रश्नख़ुद को परखें: अनुच्छेद 9
अनुच्छेद 9 के तहत कोई व्यक्ति भारत का नागरिक नहीं रहता, यदि वह:
शंका समाधानअक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
क्या भारत दोहरी नागरिकता की अनुमति देता है?
नहीं। अनुच्छेद 9 (1950 से पहले के लिए) और नागरिकता अधिनियम, 1955 की धारा 9 (बाद के मामलों के लिए) का अर्थ है कि जो भारतीय स्वेच्छा से दूसरे देश की नागरिकता लेता है, वह भारत का नागरिक नहीं रहता।
"स्वेच्छा से" शब्द क्यों मायने रखता है?
क्योंकि अनुच्छेद 9 तभी लागू होता है जब व्यक्ति ने विदेशी नागरिकता ख़ुद चुनी हो। बिना मर्ज़ी के किसी दूसरे देश द्वारा थोपी गई नागरिकता को अलग तरह से देखा जाता है।
विदेशी नागरिकता लेने के बाद पूर्व भारतीय नागरिक किसके लिए आवेदन कर सकता है?
वह ओवरसीज़ सिटिज़न ऑफ़ इंडिया (OCI) कार्ड के लिए आवेदन कर सकता है, जो आजीवन वीज़ा और अन्य लाभ देता है, पर वोट का अधिकार नहीं।