भाग II ⚖️ नागरिकता लागू

अनुच्छेद 6: पाकिस्तान से भारत को प्रव्रजन करने वाले कुछ व्यक्तियों के नागरिकता के अधिकार

1947 के विभाजन ने लाखों परिवारों को अपना घर छोड़ने पर मजबूर किया। अनुच्छेद 6 ने सुनिश्चित किया कि जो लोग भारत आ गए, वे भारत के नागरिक बन सकें।

मूल पाठअनुच्छेद 6 का आधिकारिक पाठ

हिन्दी · आधिकारिक पाठ

6. पाकिस्तान से भारत को प्रव्रजन करने वाले कुछ व्यक्तियों के नागरिकता के अधिकार—

अनुच्छेद 5 में किसी बात के होते हुए भी, कोई व्यक्ति जिसने ऐसे राज्यक्षेत्र से जो इस समय पाकिस्तान के अंतर्गत है, भारत के राज्यक्षेत्र को प्रव्रजन किया है, इस संविधान के प्रारंभ पर भारत का नागरिक समझा जाएगा—

(क) यदि वह अथवा उसके माता या पिता में से कोई अथवा उसके पितामह या पितामही या मातामह या मातामही में से कोई (मूल रूप में यथा अधिनियमित) भारत शासन अधिनियम, 1935 में परिभाषित भारत में जन्मा था; और

(ख)(i) जबकि वह व्यक्ति ऐसा है जिसने 19 जुलाई, 1948 से पहले इस प्रकार प्रव्रजन किया है तब यदि वह अपने प्रव्रजन की तारीख से भारत के राज्यक्षेत्र में मामूली तौर से निवासी रहा है; या

(ii) जबकि वह व्यक्ति ऐसा है जिसने 19 जुलाई, 1948 को या उसके पश्चात् इस प्रकार प्रव्रजन किया है तब यदि वह नागरिकता प्राप्ति के लिए भारत डोमिनियन की सरकार द्वारा विहित प्ररूप में और रीति से उसके द्वारा इस संविधान के प्रारंभ से पहले ऐसे अधिकारी को, जिसे उस सरकार ने इस प्रयोजन के लिए नियुक्त किया है, आवेदन किए जाने पर उस अधिकारी द्वारा भारत का नागरिक रजिस्ट्रीकृत कर लिया गया है:

परंतु यदि कोई व्यक्ति अपने आवेदन की तारीख से ठीक पहले कम से कम छह मास भारत के राज्यक्षेत्र में निवासी नहीं रहा है तो वह इस प्रकार रजिस्ट्रीकृत नहीं किया जाएगा।

In Simple Words / आसान शब्दों में

अनुच्छेद 6 विभाजन के प्रवासियों के लिए विशेष नियम है, यानी वे लोग जो उस इलाक़े से भारत आए जो पाकिस्तान बना (पश्चिमी पाकिस्तान और पूर्वी पाकिस्तान, यानी आज का बांग्लादेश, दोनों)। यह तब भी लागू होता है जब वे अनुच्छेद 5 की अधिवास शर्त पूरी न कर पाएँ।

शर्त 1, अविभाजित भारत से जुड़ाव: व्यक्ति, उसके माता-पिता या दादा-दादी/नाना-नानी में से कोई भारत शासन अधिनियम, 1935 में परिभाषित अविभाजित भारत में जन्मा हो (जिसमें आज का पाकिस्तान और बांग्लादेश भी शामिल था)।

शर्त 2 आने की तारीख़ पर निर्भर है। 19 जुलाई 1948 से पहले आए? तो बस आने के बाद से भारत में रहना काफ़ी था: नागरिकता अपने आप मिल गई। 19 जुलाई 1948 को या उसके बाद आए? तो उन्हें 26 जनवरी 1950 से पहले सरकारी अधिकारी के पास आवेदन करके रजिस्ट्रेशन कराना था, और आवेदन से पहले कम से कम 6 महीने भारत में रहना ज़रूरी था।

19 जुलाई 1948 ही क्यों? उसी दिन भारत ने पाकिस्तान से आने-जाने के लिए परमिट व्यवस्था शुरू की थी, इसलिए बाद में आने वालों को काग़ज़ी प्रक्रिया से गुज़रना पड़ा।

🏠 रोज़मर्रा की मिसाल

सोचिए एक स्कूल दो कैंपस में बँट गया। जो छात्र पहली भीड़ में नए कैंपस आ गए, उनका दाख़िला अपने आप हो गया। जब स्कूल ने ट्रांसफ़र सर्टिफ़िकेट देना शुरू किया, तो उस तारीख़ के बाद आने वालों को फ़ॉर्म भरना पड़ा और दाख़िले से पहले छह महीने कैंपस में रहना पड़ा।

🇮🇳 असली भारतीय उदाहरण

हरबंस सिंह का परिवार सितंबर 1947 में लाहौर छोड़कर अमृतसर में बस गया। उनके दादा अविभाजित भारत के लायलपुर में जन्मे थे, और परिवार तब से भारत में ही रहा। वे खंड (ख)(i) के तहत अपने आप नागरिक बन गए। उनके चचेरे भाई, जो दिसंबर 1948 में ढाका से आए, उन्हें खंड (ख)(ii) के तहत अधिकारी के पास रजिस्ट्रेशन कराना पड़ा और भारत में छह महीने रहना दिखाना पड़ा।

भाग II एक नज़र मेंअनुच्छेद 6 और नागरिकता के बाक़ी अनुच्छेद (5 से 11) की तुलना

संविधान का भाग II (अनुच्छेद 5 से 11) सिर्फ़ एक सवाल का जवाब देता है: 26 जनवरी 1950 को भारत का नागरिक कौन था? विभाजन ने यह सवाल कठिन बना दिया था, इसलिए हर अनुच्छेद लोगों के एक समूह को सँभालता है:

  • अनुच्छेद 5: सामान्य नियम। भारत में अधिवास रखने वाला व्यक्ति जो भारत में जन्मा हो, या जिसके माता-पिता में से कोई भारत में जन्मा हो, या जो पाँच साल से यहाँ रह रहा हो।
  • अनुच्छेद 6: वे लोग जो पाकिस्तान से भारत आए। 19 जुलाई 1948 से पहले: अपने आप; उस दिन या बाद: रजिस्ट्रेशन।
  • अनुच्छेद 7: उलटा मामला। जो लोग 1 मार्च 1947 के बाद भारत से पाकिस्तान चले गए, वे नागरिक नहीं, जब तक वे पुनर्वास परमिट पर वापस न आए हों; तब उन्हें 19 जुलाई 1948 के बाद आए अनुच्छेद 6 के प्रवासी की तरह माना जाता है।
  • अनुच्छेद 8: विदेश में रहने वाले भारतीय मूल के लोग, जो भारतीय दूतावास या कॉन्सुलेट में रजिस्ट्रेशन करा सकते थे।
  • अनुच्छेद 9: जिसने 26 जनवरी 1950 से पहले अपनी मर्ज़ी से विदेशी नागरिकता ले ली, वह भारत का नागरिक नहीं।
  • अनुच्छेद 10 और 11: नागरिकता जारी रहती है, लेकिन आगे के सारे नियम संसद बनाती है। संसद ने यह नागरिकता अधिनियम, 1955 से किया।

याद रखने की ट्रिक: 5 = घर पर सब, 6 = भारत आए, 7 = भारत से गए, 8 = विदेश में रहने वाले, 9 = दूसरा देश चुना, 10-11 = आगे संसद तय करेगी।

आज अनुच्छेद 6आज अनुच्छेद 6: धारा 6A, असम समझौता और 2024 का सुप्रीम कोर्ट फ़ैसला

अनुच्छेद 6 का काम 26 जनवरी 1950 को पूरा हो गया, लेकिन प्रवासियों के लिए कट-ऑफ़ तारीख़ का उसका विचार आज भी भारतीय कानून में दिखता है। असम समझौते (1985) के बाद संसद ने नागरिकता अधिनियम, 1955 में धारा 6A जोड़ी:

  • जो भारतीय मूल के लोग बांग्लादेश (तब पूर्वी पाकिस्तान) से 1 जनवरी 1966 से पहले असम आए, वे नागरिक हैं।
  • जो 1 जनवरी 1966 से 25 मार्च 1971 से पहले तक आए, वे विदेशी के रूप में पहचाने जाने के बाद नागरिक के रूप में रजिस्ट्रेशन करा सकते हैं, लेकिन दस साल तक वोट नहीं दे सकते।
  • जो 25 मार्च 1971 को या बाद आए, वे इसमें शामिल नहीं।

याचिकाकर्ताओं ने कहा कि धारा 6A अनुच्छेद 6 और 7 की कट-ऑफ़ तारीख़ों को तोड़ती है। 17 अक्टूबर 2024 को पाँच जजों की संविधान पीठ ने 4:1 से धारा 6A को वैध ठहराया। बहुमत ने कहा कि अनुच्छेद 6 और 7 सिर्फ़ संविधान लागू होने के दिन की नागरिकता तय करते हैं; अनुच्छेद 11 के तहत संसद बाद के समूहों को नागरिकता दे सकती है। जस्टिस जे. बी. पारदीवाला ने असहमति जताई।

यही तर्क नागरिकता (संशोधन) अधिनियम, 2019 पर भी लागू होता है, जिसमें अफ़ग़ानिस्तान, बांग्लादेश और पाकिस्तान के छह अल्पसंख्यक समुदायों के लिए अपनी कट-ऑफ़ (31 दिसंबर 2014) है; इसके नियम मार्च 2024 में अधिसूचित हुए और इसके ख़िलाफ़ याचिकाएँ सुप्रीम कोर्ट में लंबित हैं।

त्वरित दोहराईयाद रखने योग्य मुख्य बातें

  • पाकिस्तान से भारत आए प्रवासियों पर लागू (आज के बांग्लादेश से आए लोग भी)।
  • जुड़ाव की शर्त: स्वयं, माता-पिता या दादा-दादी/नाना-नानी का अविभाजित भारत में जन्म (भारत शासन अधिनियम, 1935)।
  • 19 जुलाई 1948 से पहले आए: प्रव्रजन के बाद से मामूली निवास होने पर नागरिकता अपने आप।
  • 19 जुलाई 1948 को या बाद आए: रजिस्ट्रेशन और आवेदन से पहले 6 महीने का निवास ज़रूरी।
  • अनुच्छेद 6 अनुच्छेद 5 पर प्रभावी है ("अनुच्छेद 5 में किसी बात के होते हुए भी")।

UPSC · राज्य PSC · न्यायपालिकापरीक्षा कॉर्नर

  • मुख्य तिथि: 19 जुलाई 1948, जब पाकिस्तान से प्रव्रजन के लिए परमिट व्यवस्था शुरू हुई।
  • "(मूल रूप में यथा अधिनियमित) भारत शासन अधिनियम, 1935 में परिभाषित भारत" का अर्थ अविभाजित भारत (ब्रिटिश प्रांत और देसी रियासतें) है, जिसमें आज का पाकिस्तान और बांग्लादेश शामिल था; परीक्षाओं में यह वाक्यांश अक्सर पूछा जाता है।
  • रजिस्ट्रेशन 26 जनवरी 1950 से पहले भारत डोमिनियन सरकार के अधिकारी द्वारा होता था।
  • अनुच्छेद 6 और 7 एक जोड़ी हैं: अनुच्छेद 6 = भारत आए प्रवासी; अनुच्छेद 7 = पाकिस्तान गए प्रवासी।

अभ्यास प्रश्नख़ुद को परखें: अनुच्छेद 6

एक व्यक्ति 10 अगस्त 1948 को पाकिस्तान से भारत आया। संविधान के प्रारंभ पर नागरिकता के लिए अनुच्छेद 6 में क्या ज़रूरी था?

शंका समाधानअक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अनुच्छेद 6 में 19 जुलाई 1948 क्यों महत्वपूर्ण है?

यह कट-ऑफ़ तिथि है। इससे पहले आए लोग, अगर आने के बाद से भारत में रहे, तो अपने आप नागरिक बने। इस दिन या बाद आए लोगों को रजिस्ट्रेशन कराना पड़ा, क्योंकि उसी दिन परमिट व्यवस्था शुरू हुई।

क्या अनुच्छेद 6 पूर्वी पाकिस्तान (अब बांग्लादेश) से आए लोगों पर लागू था?

हाँ। 1950 में "जो इस समय पाकिस्तान के अंतर्गत है" का अर्थ पश्चिमी और पूर्वी पाकिस्तान दोनों था, इसलिए आज के बांग्लादेश से आए लोग भी इसमें शामिल थे।

बाद में आए प्रवासी को रजिस्ट्रेशन से पहले कितने समय भारत में रहना था?

आवेदन की तारीख़ से ठीक पहले कम से कम छह महीने।