मूल पाठअनुच्छेद 8 का आधिकारिक पाठ
8. भारत के बाहर रहने वाले भारतीय उद्भव के कुछ व्यक्तियों के नागरिकता के अधिकार—
अनुच्छेद 5 में किसी बात के होते हुए भी, कोई व्यक्ति जो या जिसके माता या पिता में से कोई अथवा पितामह या पितामही या मातामह या मातामही में से कोई (मूल रूप में यथा अधिनियमित) भारत शासन अधिनियम, 1935 में परिभाषित भारत में जन्मा था और जो इस प्रकार परिभाषित भारत के बाहर किसी देश में मामूली तौर से निवास कर रहा है, भारत का नागरिक समझा जाएगा, यदि वह नागरिकता प्राप्ति के लिए भारत डोमिनियन की सरकार द्वारा या भारत सरकार द्वारा विहित प्ररूप में और रीति से अपने द्वारा उस देश में, जहाँ वह तत्समय निवास कर रहा है, भारत के राजनयिक या कौंसलीय प्रतिनिधि को इस संविधान के प्रारंभ से पहले या उसके पश्चात् आवेदन किए जाने पर ऐसे राजनयिक या कौंसलीय प्रतिनिधि द्वारा भारत का नागरिक रजिस्ट्रीकृत कर लिया गया है।
अनुच्छेद 8 1950 के आसपास विदेश में रहने वाले भारतीय मूल के लोगों के लिए है, जो अनुच्छेद 5 की शर्त पूरी नहीं कर सकते थे क्योंकि भारत में उनका स्थायी घर नहीं था।
कौन योग्य था: व्यक्ति, उसके माता-पिता या दादा-दादी/नाना-नानी में से कोई (भारत शासन अधिनियम, 1935 में परिभाषित) अविभाजित भारत में जन्मा हो, और वह व्यक्ति किसी दूसरे देश में मामूली तौर से रह रहा हो।
कैसे: उन्हें जिस देश में वे रहते थे, वहाँ के भारतीय दूतावास, उच्चायोग या वाणिज्य दूतावास में आवेदन करना था। उस कार्यालय द्वारा रजिस्ट्रेशन होते ही वे भारत के नागरिक बन जाते थे। आवेदन 26 जनवरी 1950 से पहले या बाद में किया जा सकता था।
यानी अनुच्छेद 8 के तहत नागरिकता अपने आप नहीं मिलती थी। इसके लिए आवेदन और रजिस्ट्रेशन ज़रूरी था।
🏠 रोज़मर्रा की मिसाल
अपने स्कूल के उन पुराने छात्रों को सोचिए जो दूसरे शहरों में चले गए। आज के क्लास रजिस्टर में उनका नाम नहीं है, पर अगर वे सही तरीके से स्कूल ऑफ़िस को लिखें और अपना नाम दर्ज करवा लें, तो वे फिर से स्कूल परिवार के सदस्य गिने जाते हैं।
🇮🇳 असली भारतीय उदाहरण
रामलाल के दादा को 1905 में गिरमिटिया मज़दूर के रूप में बिहार से फ़िजी ले जाया गया था। रामलाल सूवा में जन्मे और वहीं रहे। 1951 में उन्होंने फ़िजी में भारत के कार्यालय में आवेदन किया और रजिस्टर हो गए, इसलिए भारत में कभी रहे बिना ही वे अनुच्छेद 8 के तहत भारत के नागरिक बन गए।
त्वरित दोहराईयाद रखने योग्य मुख्य बातें
- भारत के बाहर मामूली तौर से रहने वाले भारतीय मूल के व्यक्तियों के लिए।
- जुड़ाव की शर्त: स्वयं, माता-पिता या दादा-दादी/नाना-नानी का अविभाजित भारत में जन्म।
- नागरिकता केवल भारतीय राजनयिक या कौंसलीय प्रतिनिधि द्वारा रजिस्ट्रेशन के बाद।
- आवेदन संविधान के प्रारंभ से पहले या बाद में किया जा सकता था।
- अनुच्छेद 8 भी अनुच्छेद 5 पर प्रभावी है ("अनुच्छेद 5 में किसी बात के होते हुए भी")।
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- रजिस्ट्रेशन प्राधिकारी: भारत का राजनयिक या कौंसलीय प्रतिनिधि (दूतावास, उच्चायोग या वाणिज्य दूतावास), भारत में बैठा कोई अधिकारी नहीं।
- अनुच्छेद 8 को आज के ओवरसीज़ सिटिज़न ऑफ़ इंडिया (OCI) कार्ड से न मिलाएँ। नागरिकता अधिनियम की धारा 7क के तहत OCI आजीवन वीज़ा और अन्य लाभ देता है, पर यह नागरिकता नहीं है; OCI कार्डधारक न वोट दे सकते हैं, न संवैधानिक पद पा सकते हैं।
- अनुच्छेद 6 और 8 दोनों में दादा-दादी वाली शर्त और भारत शासन अधिनियम, 1935 की भारत की परिभाषा है।
- अनुच्छेद 9 उन लोगों के लिए अनुच्छेद 8 का लाभ ख़त्म करता है जिन्होंने स्वेच्छा से किसी विदेशी देश की नागरिकता ले ली।
अभ्यास प्रश्नख़ुद को परखें: अनुच्छेद 8
अनुच्छेद 8 के तहत विदेश में रहने वाला भारतीय मूल का व्यक्ति किसके पास रजिस्ट्रेशन कराकर भारत का नागरिक बन सकता था?
शंका समाधानअक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
क्या विदेश में रहने वाले भारतीय मूल के लोग 1950 में अपने आप नागरिक बन गए?
नहीं। अनुच्छेद 8 के तहत उन्हें अपने देश में भारत के राजनयिक या कौंसलीय कार्यालय में आवेदन करके रजिस्टर होना पड़ता था।
क्या OCI कार्डधारक भारत का नागरिक है?
नहीं। नागरिकता अधिनियम के तहत OCI कार्ड आजीवन वीज़ा जैसे लाभ देता है, पर यह नागरिकता नहीं है। OCI धारक न वोट दे सकते हैं, न चुनाव लड़ सकते हैं।
अनुच्छेद 8 के तहत किसी व्यक्ति का रजिस्ट्रेशन कौन कर सकता था?
उस देश में भारत का राजनयिक या कौंसलीय प्रतिनिधि, जहाँ वह व्यक्ति रह रहा था।