राज्य निर्वाचन आयोग क्या है? भारत निर्वाचन आयोग से अंतर और कौन सा चुनाव कौन कराता है

आपके सांसद और विधायक भारत निर्वाचन आयोग के तहत चुने जाते हैं, पर आपके सरपंच और पार्षद एक बिल्कुल अलग संस्था के तहत। मिलिए राज्य निर्वाचन आयोग से: इसके अनुच्छेद, शक्तियाँ, सीमाएँ और वे अदालती फ़ैसले जो इसे स्वतंत्र रखते हैं।
मूल बातेंराज्य निर्वाचन आयोग क्या है? अनुच्छेद 243K और 243ZA
243K. पंचायतों के लिए निर्वाचन।— (1) पंचायतों के लिए कराए जाने वाले सभी निर्वाचनों के लिए निर्वाचक-नामावली तैयार कराने का और उन सभी निर्वाचनों के संचालन का अधीक्षण, निदेशन और नियंत्रण एक राज्य निर्वाचन आयोग में निहित होगा, जिसमें राज्यपाल द्वारा नियुक्त एक राज्य निर्वाचन आयुक्त होगा।
(2) किसी राज्य के विधान-मंडल द्वारा बनाई गई किसी विधि के उपबंधों के अधीन रहते हुए, राज्य निर्वाचन आयुक्त की सेवा की शर्तें और पदावधि ऐसी होंगी जो राज्यपाल नियम द्वारा अवधारित करे: परंतु राज्य निर्वाचन आयुक्त को उसके पद से उसी रीति से और उन्हीं आधारों पर ही हटाया जाएगा, जिस रीति से और जिन आधारों पर उच्च न्यायालय के न्यायाधीश को हटाया जाता है, अन्यथा नहीं, और राज्य निर्वाचन आयुक्त की सेवा की शर्तों में उसकी नियुक्ति के पश्चात् उसके लिए अलाभकारी परिवर्तन नहीं किया जाएगा।
(3) जब राज्य निर्वाचन आयोग ऐसा अनुरोध करे तब किसी राज्य का राज्यपाल, राज्य निर्वाचन आयोग को उतने कर्मचारिवृंद उपलब्ध कराएगा जितने खंड (1) द्वारा उसे सौंपे गए कृत्यों के निर्वहन के लिए आवश्यक हों।
(4) इस संविधान के उपबंधों के अधीन रहते हुए, किसी राज्य का विधान-मंडल, विधि द्वारा, पंचायतों के निर्वाचनों से संबंधित या संसक्त सभी विषयों के संबंध में उपबंध कर सकेगा।
243ZA. नगरपालिकाओं के लिए निर्वाचन।— (1) नगरपालिकाओं के लिए कराए जाने वाले सभी निर्वाचनों के लिए निर्वाचक-नामावली तैयार कराने का और उन सभी निर्वाचनों के संचालन का अधीक्षण, निदेशन और नियंत्रण अनुच्छेद 243K में निर्दिष्ट राज्य निर्वाचन आयोग में निहित होगा।
(2) इस संविधान के उपबंधों के अधीन रहते हुए, किसी राज्य का विधान-मंडल, विधि द्वारा, नगरपालिकाओं के निर्वाचनों से संबंधित या संसक्त सभी विषयों के संबंध में उपबंध कर सकेगा।
1993 से पहले पंचायत और नगरपालिका चुनाव राज्य सरकारों की मर्ज़ी पर चलते थे: कई गाँवों में सालों तक चुनी हुई पंचायत नहीं होती थी। 73वें और 74वें संशोधन ने हर राज्य में एक राज्य निर्वाचन आयोग बनाकर यह ठीक किया, जो स्थानीय चुनावों का स्वतंत्र रेफ़री है। यह स्थानीय निकायों की वोटर लिस्ट बनाता है, तारीख़ें तय करता है, सीटों का चक्रानुक्रम आरक्षण करता है, रिटर्निंग अधिकारी नियुक्त करता है और नतीजे घोषित करता है।
🏠 रोज़मर्रा की मिसाल
भारत निर्वाचन आयोग राष्ट्रीय लीग का रेफ़री है; राज्य निर्वाचन आयोग राज्य और ज़िला टूर्नामेंट का रेफ़री है। नियम का विचार एक, रेफ़री अलग।
🇮🇳 असली भारतीय उदाहरण
सितंबर 2026 में राज्य निर्वाचन आयोग, राजस्थान ने 309 शहरी निकायों के चुनाव कराए, और 22 अक्टूबर 2026 से वह चार चरणों में पंचायत चुनाव करा रहा है। भारत निर्वाचन आयोग की इनमें कोई भूमिका नहीं थी।
अंतरराज्य निर्वाचन आयोग और भारत निर्वाचन आयोग में अंतर: 10 बिंदु
| बिंदु | भारत निर्वाचन आयोग | राज्य निर्वाचन आयोग |
|---|---|---|
| अनुच्छेद | 324 (भाग XV) | 243K (पंचायत), 243ZA (नगरपालिका) |
| कब से | 25 जनवरी 1950 | 1993-94, 73वें और 74वें संशोधन के बाद |
| कौन से चुनाव | लोकसभा, विधानसभा, राज्यसभा, विधान परिषद, राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति | ग्राम पंचायत, पंचायत समिति, ज़िला परिषद, नगर पालिका, नगर परिषद, नगर निगम |
| सदस्य | मुख्य चुनाव आयुक्त + 2 चुनाव आयुक्त | एक राज्य निर्वाचन आयुक्त |
| नियुक्ति | राष्ट्रपति, चयन समिति की सिफ़ारिश पर (2023 का अधिनियम) | राज्य के राज्यपाल |
| हटाना | CEC: सुप्रीम कोर्ट के जज की तरह (संसद, विशेष बहुमत) | हाई कोर्ट के जज की तरह (243K(2)) |
| किन क़ानूनों से | संसद के लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम 1950 और 1951 | राज्य क़ानून, जैसे राजस्थान पंचायती राज अधिनियम, 1994 और राजस्थान नगरपालिका अधिनियम, 2009 |
| वोटर लिस्ट | विधानसभा और लोकसभा की सूची बनाता है | अपनी वार्ड-वार सूची बनाता है, आम तौर पर ECI की विधानसभा सूची से |
| चुनाव विवाद | हाई कोर्ट में चुनाव याचिका (अनु. 329, RP Act 1951) | राज्य क़ानून में बताई अदालत या अधिकरण में चुनाव याचिका (अनु. 243O, 243ZG) |
| आपसी संबंध | पूरी तरह अलग। कोई किसी के अधीन नहीं। | पूरी तरह अलग। कोई किसी के अधीन नहीं। |
अनुच्छेद 324भारत निर्वाचन आयोग पंचायत चुनाव क्यों नहीं कराता: अनुच्छेद 324
324. निर्वाचनों के अधीक्षण, निदेशन और नियंत्रण का निर्वाचन आयोग में निहित होना।
(1) इस संविधान के अधीन संसद और प्रत्येक राज्य के विधान-मंडल के लिए कराए जाने वाले सभी निर्वाचनों के लिए तथा राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति के पदों के निर्वाचनों के लिए निर्वाचक-नामावली तैयार कराने का और उन सभी निर्वाचनों के संचालन का अधीक्षण, निदेशन और नियंत्रण एक आयोग में निहित होगा (जिसे इस संविधान में निर्वाचन आयोग कहा गया है)।
(2) निर्वाचन आयोग मुख्य निर्वाचन आयुक्त और उतने अन्य निर्वाचन आयुक्तों से, यदि कोई हों, जितने राष्ट्रपति समय-समय पर नियत करे, मिलकर बनेगा तथा मुख्य निर्वाचन आयुक्त और अन्य निर्वाचन आयुक्तों की नियुक्ति, संसद द्वारा इस निमित्त बनाई गई विधि के उपबंधों के अधीन रहते हुए, राष्ट्रपति द्वारा की जाएगी।
(5) संसद द्वारा बनाई गई किसी विधि के उपबंधों के अधीन रहते हुए, निर्वाचन आयुक्तों और प्रादेशिक आयुक्तों की सेवा की शर्तें और पदावधि ऐसी होंगी जो राष्ट्रपति नियम द्वारा अवधारित करे:
परंतु मुख्य निर्वाचन आयुक्त को उसके पद से उसी रीति से और उन्हीं आधारों पर ही हटाया जाएगा, जिस रीति से और जिन आधारों पर उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश को हटाया जाता है, अन्यथा नहीं और मुख्य निर्वाचन आयुक्त की नियुक्ति के पश्चात् उसकी सेवा की शर्तों में उसके लिए अलाभकारी परिवर्तन नहीं किया जाएगा:
परंतु यह और कि किसी अन्य निर्वाचन आयुक्त या प्रादेशिक आयुक्त को मुख्य निर्वाचन आयुक्त की सिफ़ारिश पर ही पद से हटाया जाएगा, अन्यथा नहीं।
अनुच्छेद 324 भारत निर्वाचन आयोग को संसद, राज्य विधानमंडलों, और राष्ट्रपति व उपराष्ट्रपति के पदों के चुनावों का नियंत्रण देता है। ध्यान दीजिए क्या नहीं है: पंचायत और नगरपालिका। यही ख़ाली जगह अनुच्छेद 243K और 243ZA भरते हैं।
कार्यराज्य निर्वाचन आयोग के कार्य क़दम-दर-क़दम
- 1स्थानीय निकायों की वोटर लिस्ट
विधानसभा सूची को वार्ड-वार बाँटकर प्रारूप और अंतिम सूची छापता है; दावे और आपत्तियाँ सुनी जाती हैं।
- 2चक्रानुक्रम आरक्षण
सीटें और सरपंच पद SC, ST, OBC और महिलाओं (कम से कम एक-तिहाई, राजस्थान में 50 प्रतिशत) के लिए लॉटरी और चक्रानुक्रम से आरक्षित होते हैं, जैसा राज्य क़ानून कहे (अनु. 243D, 243T)।
- 3कार्यक्रम और आचार संहिता
चरण घोषित करता है; उसी दिन से क्षेत्र में आदर्श आचार संहिता लागू।
- 4नामांकन और चिह्न
ज़मानत और ख़र्च सीमा तय करता है, कागज़ जाँचता है और मुक्त चिह्न देता है (राजस्थान में पंच-सरपंच चुनाव दलीय चिह्न पर नहीं होते)।
- 5मतदान और मतगणना
मतपत्र या EVM; पंच और सरपंच की गिनती उसी दिन पंचायत में होती है।
- 6अप्रत्यक्ष चुनाव
निर्वाचित सदस्यों द्वारा उपसरपंच, प्रधान, ज़िला प्रमुख, मेयर या सभापति का चुनाव कराता है।
अदालती फ़ैसलेराज्य निर्वाचन आयोग पर सुप्रीम कोर्ट: मुख्य फ़ैसले
| मामला | साल | सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा |
|---|---|---|
| किशनसिंह तोमर बनाम अहमदाबाद नगर निगम | 2006 | स्थानीय चुनाव पाँच साल का कार्यकाल ख़त्म होने से पहले पूरे होने चाहिए। इन चुनावों के लिए राज्य आयोग के पास भारत निर्वाचन आयोग जैसी शक्तियाँ हैं, और राज्य को उसे कर्मचारी और पैसा देना होगा। |
| गोवा राज्य बनाम फ़ौज़िया इम्तियाज़ शेख़ | 2021 | राज्य निर्वाचन आयुक्त एक स्वतंत्र व्यक्ति होना चाहिए। किसी सरकारी अधिकारी को यह पद अतिरिक्त प्रभार के रूप में नहीं दिया जा सकता। |
| विकास किशनराव गवली बनाम महाराष्ट्र राज्य | 2021 | स्थानीय निकायों में OBC आरक्षण के लिए ट्रिपल टेस्ट ज़रूरी: समर्पित आयोग, निकाय-वार आँकड़े, और कुल 50 प्रतिशत की सीमा। |
| सुरेश महाजन बनाम मध्य प्रदेश राज्य | 2022 | OBC आँकड़ों का काम लंबित हो तब भी स्थानीय निकाय चुनाव पाँच साल से आगे नहीं टाले जा सकते। |
अदालतें राज्यों को बार-बार एक बात याद दिलाती हैं: गाँव और शहर को चुने हुए प्रतिनिधियों के बिना नहीं छोड़ा जा सकता। जब कार्यकाल ख़त्म हो और चुनाव न हों, तो प्रशासक नाम के अधिकारी पंचायत चलाते हैं, और जनता की आवाज़ चली जाती है।
🇮🇳 असली भारतीय उदाहरण
राजस्थान: 14 नवंबर 2025 को राजस्थान हाई कोर्ट ने 15 अप्रैल 2026 तक पंचायत और नगरपालिका चुनाव कराने का आदेश दिया। वह तारीख़ निकलने पर अवमानना याचिकाएँ आईं, और जुलाई 2026 में कोर्ट ने राज्य निर्वाचन आयुक्त को तलब किया। आख़िरकार चुनाव सितंबर (शहर) और 22 अक्टूबर 2026 से (गाँव) हुए।
आपस में जोड़ेंआगे पढ़ें: जुड़े चुनाव नोट्स
- वोट की पूरी सीढ़ी, एक कहानी में: एक व्यक्ति कितनी बार वोट दे सकता है।
- भारत निर्वाचन आयोग की कहानी और 1950 से सभी CEC: भारत निर्वाचन आयोग।
- आयोग की शक्तियाँ: चुनाव आयोग के कार्य और शक्तियाँ।
- सरपंच कैसे चुना जाता है: सरपंच चुनाव कैसे होता है।
- शहरी निकाय: नगर निगम, नगर परिषद, नगर पालिका और पार्षद।
- अभी चल रहा है: राजस्थान पंचायत चुनाव 2026।
झटपट दोहरावएक-लाइन रिवीज़न पॉइंट (परीक्षा के लिए)
- पंचायतों के लिए राज्य आयोग: अनु. 243K; नगरपालिकाओं के लिए: अनु. 243ZA।
- राज्य निर्वाचन आयुक्त की नियुक्ति राज्यपाल करते हैं।
- हटाना सिर्फ़ हाई कोर्ट के जज की तरह।
- स्थानीय निकाय चुनाव में भारत निर्वाचन आयोग (अनु. 324) की कोई भूमिका नहीं।
- स्थानीय चुनावी मामलों में अदालती दख़ल पर रोक: अनु. 243O, 243ZG।
- किशनसिंह तोमर (2006): चुनाव समय पर, राज्य आयोग की शक्तियाँ भारत आयोग जैसी।
- गोवा बनाम फ़ौज़िया इम्तियाज़ शेख़ (2021): राज्य आयुक्त स्वतंत्र हो।
अभ्यास MCQअभ्यास MCQ (उत्तर सहित): राज्य निर्वाचन आयोग
राज्य निर्वाचन आयुक्त की नियुक्ति कौन करता है?
राज्य निर्वाचन आयुक्त को किसकी तरह हटाया जा सकता है?
कौन सा अनुच्छेद नगरपालिका चुनाव राज्य निर्वाचन आयोग को देता है?
कौन सा चुनाव भारत निर्वाचन आयोग नहीं कराता?
किस फ़ैसले में कहा गया कि सरकारी अधिकारी को राज्य निर्वाचन आयुक्त नहीं बनाया जा सकता?
शंका समाधानअक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
राज्य निर्वाचन आयोग और भारत निर्वाचन आयोग में क्या अंतर है?
भारत निर्वाचन आयोग (अनु. 324) लोकसभा, विधानसभा, राज्यसभा, परिषद, राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति के चुनाव कराता है। राज्य निर्वाचन आयोग (अनु. 243K, 243ZA) पंचायत और नगरपालिका चुनाव कराता है। दोनों अलग संस्थाएँ हैं।
राजस्थान के राज्य निर्वाचन आयुक्त कौन हैं?
2026 तक के रिकॉर्ड के अनुसार राजेश्वर सिंह। आयोग का कार्यालय जयपुर में है।
क्या भारत निर्वाचन आयोग पंचायत चुनाव करा सकता है?
नहीं। अनुच्छेद 324 में स्थानीय निकाय नहीं हैं; अनुच्छेद 243K और 243ZA इन्हें राज्य निर्वाचन आयोग को देते हैं।
पंचायत चुनाव की शिकायत कहाँ करें?
चुनाव के दौरान रिटर्निंग अधिकारी या राज्य निर्वाचन आयोग को। नतीजे के बाद, राज्य क़ानून में बताई अदालत में, उसकी समय-सीमा के भीतर चुनाव याचिका से।
स्रोत और आगे की पढ़ाईहमने जिन स्रोतों की जाँच की
तथ्य 25 अक्टूबर 2026 को जाँचे गए। अनुच्छेद 243K, 243ZA और 324 का हिंदी पाठ सरल रूपांतर है; अंग्रेज़ी पाठ प्रामाणिक है।
- Constitution of India, Part XV (Legislative Department)
- Constitution of India, Part IX (Panchayats) and Part IXA (Municipalities)
- Election Commission of India (official website)
- State Election Commission, Rajasthan (official website)
- The Statesman: Rajasthan HC asks state govt to conduct Panchayat, Municipal polls (2026)