सांसद और विधायक की अयोग्यता: अनुच्छेद 102 और लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951

कौन सांसद या विधायक नहीं बन सकता या नहीं रह सकता, दो साल की सज़ा कैसे करियर ख़त्म करती है, हर तरह की अयोग्यता कौन तय करता है, और आपराधिक मामलों वाले उम्मीदवारों के नियम।
संविधानसांसद और विधायक की अयोग्यता: अनुच्छेद 102 और 191 की व्याख्या
102. सदस्यता के लिए निरर्हताएँ।— (1) कोई व्यक्ति संसद के किसी सदन का सदस्य चुने जाने के लिए और सदस्य होने के लिए निरर्हित होगा—
(क) यदि वह भारत सरकार के या किसी राज्य की सरकार के अधीन ऐसे पद को छोड़कर, जिसको धारण करने वाले का निरर्हित न होना संसद ने विधि द्वारा घोषित किया है, कोई लाभ का पद धारण करता है;
(ख) यदि वह विकृतचित्त है और सक्षम न्यायालय की ऐसी घोषणा विद्यमान है;
(ग) यदि वह अनुन्मोचित दिवालिया है;
(घ) यदि वह भारत का नागरिक नहीं है या उसने किसी विदेशी राज्य की नागरिकता स्वेच्छा से अर्जित कर ली है या वह किसी विदेशी राज्य के प्रति निष्ठा या अनुषक्ति को अभिस्वीकार किए हुए है;
(ङ) यदि वह संसद द्वारा बनाई गई किसी विधि द्वारा या उसके अधीन इस प्रकार निरर्हित कर दिया जाता है।
(2) कोई व्यक्ति संसद के किसी सदन का सदस्य होने के लिए निरर्हित होगा यदि वह दसवीं अनुसूची के अधीन इस प्रकार निरर्हित हो गया है।
संसद या विधानसभा में बैठने के लिए दो परीक्षाएँ पास करनी होती हैं। पहली, अर्हताएँ (अनुच्छेद 84 और 173): नागरिक हों, शपथ लें, कम से कम 25 (लोकसभा, विधानसभा) या 30 (राज्यसभा, परिषद) वर्ष के हों, और पंजीकृत मतदाता हों। दूसरी, आप अयोग्य न हों: सरकार के अधीन कोई वेतन वाला पद ('लाभ का पद') नहीं, घोषित विकृतचित्तता नहीं, अनुन्मोचित दिवालियापन नहीं, विदेशी नागरिकता नहीं, दल-बदल नहीं, और लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 के तहत अयोग्यता नहीं, ख़ासकर आपराधिक सज़ा के लिए।
🏠 रोज़मर्रा की मिसाल
क्रिकेट का चयनकर्ता टीम में खिलाड़ी भी नहीं हो सकता: यही 'लाभ के पद' का तर्क है। और मैच फ़िक्सिंग में प्रतिबंधित खिलाड़ी सिर्फ़ अपील दायर करके टीम में वापस नहीं आ सकता: यही लिली थॉमस का तर्क है।
🇮🇳 असली भारतीय उदाहरण
23 मार्च 2023 को सूरत की अदालत ने मानहानि मामले में राहुल गांधी को दो साल की सज़ा दी; अगले दिन लोकसभा ने उनकी अयोग्यता अधिसूचित की। 4 अगस्त 2023 को सुप्रीम कोर्ट ने दोषसिद्धि पर रोक लगाई और 7 अगस्त को उनकी सदस्यता बहाल हुई।
लोक प्रतिनिधित्व अधिनियमलोक प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 के तहत अयोग्यता: धारा 8 और लिली थॉमस
| धारा (लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951) | आधार | अवधि |
|---|---|---|
| 8(1) | सूचीबद्ध अपराधों में दोषसिद्धि (वैमनस्य फैलाना, रिश्वत, बलात्कार, अस्पृश्यता, आतंकवाद, दहेज, आदि) | सिर्फ़ जुर्माना: दोषसिद्धि से 6 साल। जेल: दोषसिद्धि से + रिहाई के बाद 6 साल |
| 8(3) | किसी भी अपराध में 2 साल या ज़्यादा की सज़ा | दोषसिद्धि से + रिहाई के बाद 6 साल |
| 8A | भ्रष्ट आचरण का दोषी पाया जाना (आयोग की राय पर राष्ट्रपति तय करते हैं) | 6 साल तक |
| 9 | भ्रष्टाचार या निष्ठाहीनता के लिए सरकारी सेवा से बर्ख़ास्त | 5 साल |
| 9A | सप्लाई या काम का सरकारी ठेका रखना | ठेका चलने तक |
| 10A | चुनाव ख़र्च का हिसाब न देना (चुनाव आयोग का आदेश) | 3 साल |
| 11 | आयोग दर्ज कारणों से अयोग्यता हटा या घटा सकता है (धारा 8A को छोड़कर) | — |
कौन तय करता हैअयोग्यता कौन तय करता है: राष्ट्रपति, अध्यक्ष या चुनाव आयोग?
| प्रकार | कौन तय करता है | अनुच्छेद / क़ानून |
|---|---|---|
| लाभ का पद, दिवालियापन, नागरिकता, विकृतचित्तता (मौजूदा सदस्य) | राष्ट्रपति (सांसद) या राज्यपाल (विधायक), चुनाव आयोग की राय से बाध्य | अनु. 103, 192 |
| आपराधिक दोषसिद्धि | दोषसिद्धि पर अपने-आप; सदन सचिवालय रिक्ति अधिसूचित करता है | धारा 8, लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 |
| दल-बदल | अध्यक्ष या सभापति, न्यायिक समीक्षा के अधीन (किहोतो होलोहन, 1992); लगभग तीन महीने में फ़ैसला करें (केशम मेघचंद्र सिंह, 2020) | दसवीं अनुसूची (52वाँ संशोधन, 1985) |
| ख़र्च का हिसाब न देना | चुनाव आयोग | धारा 10A |
आपराधिक मामलेआपराधिक उम्मीदवार: ख़ुलासे के नियम और रोक पर बहस
- 1नामांकन के साथ हलफ़नामा
हर उम्मीदवार लंबित आपराधिक मामले, दोषसिद्धि, संपत्ति, देनदारियाँ और शिक्षा घोषित करता है (भारत संघ बनाम ADR, 2002; फ़ॉर्म 26)।
- 2अख़बार और टीवी में प्रचार
उम्मीदवार और दल कम से कम तीन बार आपराधिक मामले प्रकाशित करें (पब्लिक इंटरेस्ट फ़ाउंडेशन, 2018)।
- 3दल कारण बताएँ
आपराधिक मामलों वाले उम्मीदवार को क्यों चुना, दल चयन के 48 घंटे में अपनी वेबसाइट पर बताएँ (रामबाबू सिंह ठाकुर, 13 फ़रवरी 2020)।
क्या आरोप-पत्र वालों पर रोक लगे?
- हाँ: साफ़ राजनीति; कई विजेताओं पर गंभीर मामले
- विधि आयोग (244वीं रिपोर्ट, 2014) ने गंभीर अपराधों में आरोप तय होने पर रोक का सुझाव दिया
नहीं
- दोष साबित होने तक निर्दोष
- विरोधियों पर झूठे मामले बढ़ेंगे
- नई अयोग्यता सिर्फ़ संसद जोड़ सकती है (अनु. 102(1)(ङ))
आपस में जोड़ेंआगे पढ़ें: जुड़े नोट्स
- आयोग की सलाहकारी भूमिका: चुनाव आयोग की शक्तियाँ।
- अदालत से विजेता को हटाना: चुनाव याचिका और अनुच्छेद 329।
- ख़र्च का हिसाब और धारा 10A: चुनाव चंदे के नियम।
- दल-बदल और दसवीं अनुसूची: संविधान की 12 अनुसूचियाँ।
- 52वाँ संशोधन संदर्भ में: महत्वपूर्ण संशोधन।
झटपट दोहरावएक-लाइन रिवीज़न पॉइंट (परीक्षा के लिए)
- सांसद: अनुच्छेद 102; विधायक: अनुच्छेद 191।
- आधार: लाभ का पद, विकृतचित्तता, दिवालियापन, विदेशी नागरिकता, संसद का कोई क़ानून, दल-बदल।
- धारा 8(3): 2 साल या ज़्यादा की सज़ा → रिहाई के 6 साल बाद तक अयोग्य।
- लिली थॉमस (10 जुलाई 2013) ने धारा 8(4) रद्द की।
- चुनाव आयोग की राय राष्ट्रपति पर बाध्यकारी: अनुच्छेद 103।
- दल-बदल: दसवीं अनुसूची (52वाँ संशोधन, 1985), अध्यक्ष तय करते हैं।
- ख़र्च न बताना: 3 साल (धारा 10A)।
- आपराधिक रिकॉर्ड ख़ुलासा: पब्लिक इंटरेस्ट फ़ाउंडेशन (2018), रामबाबू सिंह ठाकुर (2020)।
अभ्यास MCQअभ्यास MCQ (उत्तर सहित): सांसद और विधायक की अयोग्यता
किस मामले ने लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 8(4) रद्द की?
किसी मौजूदा सांसद को दो साल की जेल की सज़ा होती है। अयोग्यता कब शुरू होती है?
लाभ का पद रखने पर सांसद की अयोग्यता का प्रश्न कौन तय करता है?
किस संशोधन ने दसवीं अनुसूची (दल-बदल क़ानून) जोड़ी?
चुनाव ख़र्च का हिसाब न देने पर चुनाव आयोग किसी व्यक्ति को कितने समय के लिए अयोग्य कर सकता है?
शंका समाधानअक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
दोषसिद्धि के बाद सांसद कब अयोग्य होता है?
किसी भी अपराध में दो साल या ज़्यादा की सज़ा होने पर (या सूचीबद्ध अपराधों में दोषसिद्धि पर), दोषसिद्धि की तारीख़ से रिहाई के छह साल बाद तक।
लाभ का पद क्या है?
केंद्र या राज्य सरकार के अधीन ऐसा पद जिससे वेतन या लाभ मिल सकता है। इसे रखने पर विधायक अयोग्य होता है, जब तक संसद या राज्य विधानमंडल ने क़ानून से उस पद को छूट न दी हो।
क्या अयोग्य सांसद को सीट वापस मिल सकती है?
हाँ, अगर ऊपरी अदालत दोषसिद्धि पर रोक लगा दे या उसे रद्द कर दे, जैसा अगस्त 2023 में राहुल गांधी के साथ हुआ।
दल-बदल के मामले कौन तय करता है?
दसवीं अनुसूची के तहत सदन के अध्यक्ष या सभापति; फ़ैसले को अदालत में चुनौती दी जा सकती है।
स्रोत और आगे की पढ़ाईहमने जिन स्रोतों की जाँच की
तथ्य 21 अक्टूबर 2026 को जाँचे गए। अनुच्छेद 102 संविधान से उद्धृत है; लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम की धाराओं का सार दिया गया है।