भारत निर्वाचन आयोग (चुनाव आयोग): इतिहास, ढाँचा और सभी मुख्य चुनाव आयुक्तों की सूची

दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र का अंपायर, आसान भाषा में: चुनाव आयोग क्या है, कैसे बना है, 1950 से इसकी कहानी, और सुकुमार सेन से ज्ञानेश कुमार तक हर मुख्य चुनाव आयुक्त।
क्या हैभारत निर्वाचन आयोग क्या है? अनुच्छेद 324 आसान शब्दों में
भारत निर्वाचन आयोग (ECI) वह संवैधानिक संस्था है जो संसद, राज्य विधानमंडलों और राष्ट्रपति व उपराष्ट्रपति पदों के चुनाव कराती है। इसकी स्थापना 25 जनवरी 1950 को हुई, संविधान लागू होने से एक दिन पहले, अनुच्छेद 324 के तहत। इसका कार्यालय निर्वाचन सदन, नई दिल्ली में है।
324. निर्वाचनों के अधीक्षण, निदेशन और नियंत्रण का निर्वाचन आयोग में निहित होना।
(1) इस संविधान के अधीन संसद और प्रत्येक राज्य के विधान-मंडल के लिए कराए जाने वाले सभी निर्वाचनों के लिए तथा राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति के पदों के निर्वाचनों के लिए निर्वाचक-नामावली तैयार कराने का और उन सभी निर्वाचनों के संचालन का अधीक्षण, निदेशन और नियंत्रण एक आयोग में निहित होगा (जिसे इस संविधान में निर्वाचन आयोग कहा गया है)।
(2) निर्वाचन आयोग मुख्य निर्वाचन आयुक्त और उतने अन्य निर्वाचन आयुक्तों से, यदि कोई हों, जितने राष्ट्रपति समय-समय पर नियत करे, मिलकर बनेगा तथा मुख्य निर्वाचन आयुक्त और अन्य निर्वाचन आयुक्तों की नियुक्ति, संसद द्वारा इस निमित्त बनाई गई विधि के उपबंधों के अधीन रहते हुए, राष्ट्रपति द्वारा की जाएगी।
(5) संसद द्वारा बनाई गई किसी विधि के उपबंधों के अधीन रहते हुए, निर्वाचन आयुक्तों और प्रादेशिक आयुक्तों की सेवा की शर्तें और पदावधि ऐसी होंगी जो राष्ट्रपति नियम द्वारा अवधारित करे:
परंतु मुख्य निर्वाचन आयुक्त को उसके पद से उसी रीति से और उन्हीं आधारों पर ही हटाया जाएगा, जिस रीति से और जिन आधारों पर उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश को हटाया जाता है, अन्यथा नहीं और मुख्य निर्वाचन आयुक्त की नियुक्ति के पश्चात् उसकी सेवा की शर्तों में उसके लिए अलाभकारी परिवर्तन नहीं किया जाएगा:
परंतु यह और कि किसी अन्य निर्वाचन आयुक्त या प्रादेशिक आयुक्त को मुख्य निर्वाचन आयुक्त की सिफ़ारिश पर ही पद से हटाया जाएगा, अन्यथा नहीं।
चुनाव को देश की सबसे बड़ी परीक्षा समझिए, जिसमें 97 करोड़ लोग एक सवाल का जवाब देते हैं: हम पर शासन कौन करे? चुनाव आयोग इस परीक्षा का स्वतंत्र परीक्षा बोर्ड है। वही तय करता है कि परीक्षा कौन दे सकता है (मतदाता सूची), नियम बनाता है, हर केंद्र चलाता है, नकल रोकता है और नतीजा घोषित करता है। उस समय की सरकार ख़ुद इस परीक्षा में उम्मीदवार है, इसलिए बोर्ड उसके आदेश नहीं ले सकता।
🏠 रोज़मर्रा की मिसाल
क्रिकेट का अंपायर किसी टीम का नहीं होता। अगर अंपायर को एक कप्तान चुने और वेतन दे, तो कोई नतीजे पर भरोसा नहीं करेगा। इसीलिए संविधान CEC की नौकरी को जज की तरह सुरक्षा देता है।
🇮🇳 असली भारतीय उदाहरण
2024 में आयोग ने लगभग 96.8 करोड़ मतदाताओं के लिए सात चरणों (19 अप्रैल से 1 जून) में लोकसभा चुनाव कराया, 10 लाख से ज़्यादा मतदान केंद्रों पर, लद्दाख के ऊँचे गाँवों से अंडमान के द्वीपों तक।
ढाँचाचुनाव आयोग का ढाँचा: निर्वाचन सदन से आपके बूथ तक
| स्तर | कौन | काम |
|---|---|---|
| राष्ट्रीय | चुनाव आयोग: CEC + 2 चुनाव आयुक्त, उप-चुनाव आयुक्तों और अधिकारियों के सचिवालय सहित | कार्यक्रम, नियम, चुनाव चिह्न, दलों की मान्यता तय करता है; हर चीज़ की निगरानी |
| राज्य | मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) | ECI के अधीन राज्य में चुनाव तंत्र चलाता है |
| ज़िला | ज़िला निर्वाचन अधिकारी (आम तौर पर कलेक्टर / DM) | मतदान कर्मचारी, EVM, मतदान केंद्र |
| निर्वाचन क्षेत्र | रिटर्निंग ऑफ़िसर (RO) और निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी (ERO) | RO: नामांकन, जाँच, मतगणना, नतीजा। ERO: मतदाता सूची |
| बूथ | बूथ स्तरीय अधिकारी (BLO) और पीठासीन अधिकारी | BLO: घर-घर मतदाता सूची का काम। पीठासीन अधिकारी: मतदान का दिन चलाता है |
इतिहासभारत निर्वाचन आयोग का इतिहास, 1950 से 2026 तक
- 1
🏛️ 25 जनवरी 1950: आयोग का जन्म
एक सदस्य वाली संस्था; 21 मार्च 1950 से सुकुमार सेन पहले CEC। 2011 से यही तारीख़ राष्ट्रीय मतदाता दिवस के रूप में मनाई जाती है।
- 2
🗳️ 1951-52: पहला आम चुनाव
25 अक्टूबर 1951 (चिनी, हिमाचल प्रदेश) से 21 फ़रवरी 1952 तक: 489 लोकसभा सीटें, लगभग 17.3 करोड़ मतदाता, अलग-अलग मतपेटियों पर चित्र-चिह्न ताकि जो पढ़ नहीं सकते वे भी वोट दे सकें।
- 3
🖲️ 1982-1989: मशीन का आगमन
मई 1982 में परवूर (केरल) में EVM का पहला प्रयोग। 1984 में सुप्रीम कोर्ट ने वह नतीजा रद्द किया क्योंकि कोई क़ानून मशीन की अनुमति नहीं देता था; 1988 में संसद ने लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 में धारा 61A जोड़ी।
- 4
👥 1989-1993: एक से तीन सदस्य
16 अक्टूबर 1989 को दो चुनाव आयुक्त जोड़े गए और 1 जनवरी 1990 को हटा दिए गए। 1 अक्टूबर 1993 से आयोग स्थायी रूप से तीन सदस्यीय बना; सुप्रीम कोर्ट ने टी. एन. शेषन बनाम भारत संघ (1995) में इसे सही माना, फ़ैसले बहुमत से।
- 5
🪪 1990 का दशक: शेषन का दौर
आदर्श आचार संहिता सख़्ती से लागू हुई, 1993 में मतदाता पहचान पत्र (EPIC) शुरू हुए और हर क्षेत्र में पर्यवेक्षक भेजे गए।
- 6
🧾 2004-2019: EVM, NOTA, VVPAT
2004: पहला आम चुनाव पूरी तरह EVM से। 2013: NOTA (PUCL फ़ैसले के बाद) और पहली VVPAT। 2019: हर मतदान केंद्र पर VVPAT।
- 7
⚖️ 2023: अंपायर कौन चुने?
2 मार्च 2023 को सुप्रीम कोर्ट (अनूप बरनवाल) ने संसद के क़ानून बनने तक CJI को चयन समिति में रखा। संसद के दिसंबर 2023 के अधिनियम ने CJI की जगह एक केंद्रीय मंत्री रखा।
- 8
📋 2025-2026: SIR और विवाद
19 फ़रवरी 2025 को ज्ञानेश कुमार CEC बने। मतदाता सूचियों का विशेष गहन पुनरीक्षण बिहार (जून 2025) से शुरू होकर दूसरे राज्यों तक फैला, जिससे याचिकाएँ, प्रदर्शन और संसद में हटाने का नोटिस आया।
सभी CECभारत के मुख्य चुनाव आयुक्तों की सूची (1950-2026)
यह है 1950 से 2026 तक भारत के सभी मुख्य चुनाव आयुक्तों की पूरी सूची, कार्यकाल और हर एक की ख़ास बात के साथ। ज्ञानेश कुमार 26वें और वर्तमान मुख्य चुनाव आयुक्त हैं।
| क्रम | नाम | कार्यकाल | ख़ास बात |
|---|---|---|---|
| 1 | सुकुमार सेन | 21 मार्च 1950 – 19 दिसंबर 1958 | ICS अधिकारी। पहले दो आम चुनाव (1951-52 और 1957) कराए, जब न मतदाता सूची थी, न नक़ल करने को कोई मॉडल, और ज़्यादातर मतदाता पढ़ नहीं सकते थे; सूडान का पहला चुनाव (1953) भी कराया। |
| 2 | के. वी. के. सुंदरम | 20 दिसंबर 1958 – 30 सितंबर 1967 | पूर्व केंद्रीय विधि सचिव। 1962 और 1967 के आम चुनाव कराए; बाद में भारत के विधि आयोग के अध्यक्ष बने। |
| 3 | एस. पी. सेन वर्मा | 1 अक्टूबर 1967 – 30 सितंबर 1972 | 1971 का मध्यावधि लोकसभा चुनाव कराया, जो पहली बार ज़्यादातर राज्यों के चुनाव से अलग हुआ। |
| 4 | डॉ. नागेंद्र सिंह | 1 अक्टूबर 1972 – 6 फ़रवरी 1973 | विधिवेत्ता; बाद में अंतरराष्ट्रीय न्यायालय के जज और अध्यक्ष (1985-88) बने। |
| 5 | टी. स्वामीनाथन | 7 फ़रवरी 1973 – 17 जून 1977 | आपातकाल के बाद मार्च 1977 का आम चुनाव कराया। |
| 6 | एस. एल. शकधर | 18 जून 1977 – 17 जून 1982 | लोकसभा के पूर्व महासचिव। 1980 का आम चुनाव कराया; भारत में EVM का पहला प्रयोग (परवूर, केरल, मई 1982) इन्हीं के कार्यकाल में हुआ। |
| 7 | आर. के. त्रिवेदी | 18 जून 1982 – 31 दिसंबर 1985 | 1984-85 का आम चुनाव कराया; बाद में गुजरात के राज्यपाल बने। |
| 8 | आर. वी. एस. पेरी शास्त्री | 1 जनवरी 1986 – 25 नवंबर 1990 | 1989 का आम चुनाव कराया; इन्हीं के समय आयोग पहली बार बहु-सदस्यीय बना (अक्टूबर 1989 से जनवरी 1990)। पद पर रहते निधन हुआ। |
| 9 | वी. एस. रमा देवी | 26 नवंबर 1990 – 11 दिसंबर 1990 | पहली और अब तक की एकमात्र महिला मुख्य चुनाव आयुक्त (16 दिन)। बाद में हिमाचल प्रदेश और कर्नाटक की राज्यपाल बनीं। |
| 10 | टी. एन. शेषन | 12 दिसंबर 1990 – 11 दिसंबर 1996 | आदर्श आचार संहिता को सख़्ती से लागू किया, मतदाता पहचान पत्र (EPIC, 1993 से) शुरू करवाए और बूथ कैप्चरिंग पर लगाम लगाई। रेमन मैग्सेसे पुरस्कार, 1996। |
| 11 | डॉ. एम. एस. गिल | 12 दिसंबर 1996 – 13 जून 2001 | 1998 और 1999 के आम चुनाव कराए और EVM का प्रयोग बढ़ाया; बाद में केंद्रीय मंत्री बने। |
| 12 | जे. एम. लिंगदोह | 14 जून 2001 – 7 फ़रवरी 2004 | पूर्वोत्तर (मेघालय) से पहले मुख्य चुनाव आयुक्त। 2002 के जम्मू-कश्मीर और गुजरात चुनाव कराए; रेमन मैग्सेसे पुरस्कार, 2003। |
| 13 | टी. एस. कृष्णमूर्ति | 8 फ़रवरी 2004 – 15 मई 2005 | 2004 का आम चुनाव कराया, जो पहली बार सभी 543 सीटों पर पूरी तरह EVM से हुआ। |
| 14 | बी. बी. टंडन | 16 मई 2005 – 29 जून 2006 | अक्टूबर-नवंबर 2005 का बिहार का दोबारा चुनाव और 2006 के राज्य चुनाव कराए। |
| 15 | एन. गोपालस्वामी | 30 जून 2006 – 20 अप्रैल 2009 | जनवरी 2009 में चुनाव आयुक्त नवीन चावला को हटाने की सिफ़ारिश की; सरकार ने इसे नहीं माना। |
| 16 | नवीन चावला | 21 अप्रैल 2009 – 29 जुलाई 2010 | 2009 का आम चुनाव कराया। |
| 17 | डॉ. एस. वाई. क़ुरैशी | 30 जुलाई 2010 – 10 जून 2012 | राष्ट्रीय मतदाता दिवस (25 जनवरी, 2011 से) शुरू किया और मतदाता जागरूकता अभियान बढ़ाए। |
| 18 | वी. एस. संपत | 11 जून 2012 – 15 जनवरी 2015 | 2013 में NOTA और पहली VVPAT (नोकसेन, नागालैंड) आई; 2014 का आम चुनाव कराया। |
| 19 | एच. एस. ब्रह्मा | 16 जनवरी 2015 – 18 अप्रैल 2015 | असम के बोडो समुदाय से, पूर्वोत्तर से दूसरे मुख्य चुनाव आयुक्त। राष्ट्रीय मतदाता सूची शुद्धिकरण अभियान (मार्च 2015) शुरू किया। |
| 20 | डॉ. नसीम ज़ैदी | 19 अप्रैल 2015 – 5 जुलाई 2017 | खुला 'EVM चैलेंज' (जून 2017) रखा, जिसमें दलों को छेड़छाड़ साबित करने का न्योता दिया। |
| 21 | अचल कुमार जोती | 6 जुलाई 2017 – 22 जनवरी 2018 | 2017 का गुजरात चुनाव कराया; दिल्ली के 20 विधायकों (लाभ का पद) पर आयोग की जनवरी 2018 की राय इन्हीं के समय आई। |
| 22 | ओम प्रकाश रावत | 23 जनवरी 2018 – 1 दिसंबर 2018 | आचार संहिता उल्लंघन की शिकायत के लिए नागरिक ऐप cVIGIL 2018 में शुरू हुआ। |
| 23 | सुनील अरोड़ा | 2 दिसंबर 2018 – 12 अप्रैल 2021 | 2019 का आम चुनाव (हर बूथ पर VVPAT) और महामारी में पहला बड़ा चुनाव, बिहार 2020, कराया। |
| 24 | सुशील चंद्रा | 13 अप्रैल 2021 – 14 मई 2022 | IRS अधिकारी; 2022 में उत्तर प्रदेश, पंजाब, उत्तराखंड, गोवा और मणिपुर के चुनाव कराए। |
| 25 | राजीव कुमार | 15 मई 2022 – 18 फ़रवरी 2025 | 2024 का आम चुनाव कराया, दुनिया का सबसे बड़ा चुनाव, लगभग 96.8 करोड़ पंजीकृत मतदाताओं के साथ। |
| 26 | ज्ञानेश कुमार | 19 फ़रवरी 2025 – अब तक | IAS (1988, केरल कैडर)। 2023 के अधिनियम के तहत चुने गए पहले मुख्य चुनाव आयुक्त; कार्यकाल 26 जनवरी 2029 तक। 2025 से मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) का नेतृत्व, जिसे अभी सुप्रीम कोर्ट में चुनौती है। |
आजवर्तमान मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनाव आयुक्त (2026)
| पद | नाम | पद पर कब से |
|---|---|---|
| मुख्य चुनाव आयुक्त | ज्ञानेश कुमार | 19 फ़रवरी 2025 (मार्च 2024 से चुनाव आयुक्त); कार्यकाल 26 जनवरी 2029 तक |
| चुनाव आयुक्त | डॉ. सुखबीर सिंह संधू | मार्च 2024 |
| चुनाव आयुक्त | डॉ. विवेक जोशी | 19 फ़रवरी 2025 |
आपस में जोड़ेंआगे पढ़ें: चुनाव आयोग सीरीज़
- आयोग क्या कर सकता है और क्या नहीं: चुनाव आयोग के कार्य और शक्तियाँ।
- CEC को कौन चुनता है: मुख्य चुनाव आयुक्त की नियुक्ति, अनूप बरनवाल और 2023 का अधिनियम।
- CEC को कैसे हटाया जाता है: मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने की प्रक्रिया।
- मतदाता सूची में आपका नाम: मतदाता सूची और SIR, और 2027 का विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण।
- CEC की आजीवन क़ानूनी छूट, अब सुप्रीम कोर्ट में: 2023 अधिनियम की धारा 16।
- स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव संविधान के मूल ढाँचे का हिस्सा हैं।
झटपट दोहरावएक-लाइन रिवीज़न पॉइंट (परीक्षा के लिए)
- ECI अनुच्छेद 324, भाग XV (अनुच्छेद 324-329) के तहत बना है।
- स्थापना 25 जनवरी 1950: 2011 से राष्ट्रीय मतदाता दिवस।
- पहले CEC: सुकुमार सेन (1950-58), पहला आम चुनाव 1951-52।
- एकमात्र महिला CEC: वी. एस. रमा देवी (1990, 16 दिन)।
- 1 अक्टूबर 1993 से बहु-सदस्यीय; टी. एन. शेषन बनाम भारत संघ (1995) में सही माना गया।
- मैग्सेसे पुरस्कार: टी. एन. शेषन (1996) और जे. एम. लिंगदोह (2003)।
- वर्तमान (26वें) CEC: ज्ञानेश कुमार, 19 फ़रवरी 2025 से, 2023 के अधिनियम के तहत पहले।
- पंचायत और नगरपालिका चुनाव: राज्य निर्वाचन आयोग, ECI नहीं।
अभ्यास MCQअभ्यास MCQ (उत्तर सहित): भारत निर्वाचन आयोग
भारत के पहले मुख्य चुनाव आयुक्त कौन थे?
भारत निर्वाचन आयोग की स्थापना किस तारीख़ को हुई?
भारत की मुख्य चुनाव आयुक्त बनने वाली एकमात्र महिला कौन हैं?
किस फ़ैसले ने बहु-सदस्यीय चुनाव आयोग को सही ठहराया?
विचार करें: 1. ECI पंचायत चुनाव कराता है। 2. ECI उपराष्ट्रपति का चुनाव कराता है। कौन-सा/से सही है/हैं?
शंका समाधानअक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
भारत के वर्तमान मुख्य चुनाव आयुक्त कौन हैं?
ज्ञानेश कुमार, 26वें CEC, 19 फ़रवरी 2025 से। उनका कार्यकाल 26 जनवरी 2029 को ख़त्म होगा।
भारत में अब तक कितने मुख्य चुनाव आयुक्त हुए हैं?
छब्बीस, सुकुमार सेन (1950) से ज्ञानेश कुमार (2025) तक।
चुनाव आयोग में कितने सदस्य होते हैं?
तीन: मुख्य चुनाव आयुक्त और दो चुनाव आयुक्त। संविधान राष्ट्रपति को संख्या तय करने देता है; 1993 से यह तीन है।
राष्ट्रीय मतदाता दिवस कब है?
हर साल 25 जनवरी, चुनाव आयोग का स्थापना दिवस, 2011 से मनाया जाता है।
सबसे प्रसिद्ध मुख्य चुनाव आयुक्त कौन थे?
टी. एन. शेषन (1990-96) सबसे चर्चित हैं, आदर्श आचार संहिता को सख़्ती से लागू करने और मतदाता पहचान पत्र लाने के लिए।
स्रोत और आगे की पढ़ाईहमने जिन स्रोतों की जाँच की
तथ्य 21 अक्टूबर 2026 को जाँचे गए। कार्यकाल की तारीख़ें चुनाव आयोग की पूर्व CEC सूची के अनुसार हैं; दूसरी सूचियों में एक-आध दिन का अंतर मिलता है। अदालती मामलों की स्थिति 15 अक्टूबर 2026 तक की रिपोर्टों के अनुसार है।
- Election Commission of India (official website)
- All India Radio News, 18 Feb 2025: Gyanesh Kumar appointed Chief Election Commissioner
- All India Radio News, 6 Apr 2026: Speaker and Chairman reject notice of motion against CEC
- Bar & Bench, 15 Oct 2026: Supreme Court issues notice to ECI, CEC on pleas challenging SIR
- Supreme Court Observer: challenges to the Election Commissioners Act, 2023
- Constitution of India, Part XV (Legislative Department)