मूल पाठअनुच्छेद 48 का आधिकारिक पाठ
48. कृषि और पशुपालन का संगठन—
राज्य, कृषि और पशुपालन को आधुनिक और वैज्ञानिक प्रणालियों से संगठित करने का प्रयास करेगा और विशिष्टतया गायों और बछड़ों तथा अन्य दुधारू और वाहक ढोरों की नस्लों के परिरक्षण और सुधार के लिए और उनके वध का प्रतिषेध करने के लिए कदम उठाएगा।
राज्य खेती और पशुपालन को आधुनिक और वैज्ञानिक ढंग से चलाए।
गायों और दूसरे पशुओं की नस्लों को बचाए और सुधारे।
गाय, बछड़े और दूसरे दुधारू (दूध देने वाले) और वाहक (हल या गाड़ी खींचने वाले) पशुओं के वध पर रोक लगाए।
खेती और पशु राज्य सूची के विषय हैं, इसलिए हर राज्य गोरक्षा का अपना क़ानून बनाता है।
🏠 रोज़मर्रा की मिसाल
किसान के दो साथी सोचिए: अच्छा बीज और मिट्टी की जाँच (आधुनिक खेती), और स्वस्थ गाय और बैल (पशुपालन)। अनुच्छेद 48 कहता है कि राज्य दोनों का ध्यान रखे।
🇮🇳 असली भारतीय उदाहरण
हरियाणा के एक गाँव में रामप्रसाद अपनी गाय को पशु अस्पताल ले जाता है, जहाँ सरकार की मदद से देसी नस्ल सुधारने का काम होता है (राष्ट्रीय गोकुल मिशन, 2014)। उसका बेटा मिट्टी की जाँच कराकर सही खाद डालता है। यही "आधुनिक और वैज्ञानिक" खेती है जिसकी बात अनुच्छेद 48 करता है।
मुख्य केसअनुच्छेद 48: गोवध पर सुप्रीम कोर्ट के मुख्य केस
| केस | सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा |
|---|---|
| मोहम्मद हनीफ़ क़ुरैशी बनाम बिहार राज्य (1958) | गाय और बछड़ों के वध पर पूरी रोक सही है। पर बैल और भैंस के काम लायक़ न रहने के बाद भी वध पर रोक ज़्यादा है। |
| गुजरात राज्य बनाम मिर्ज़ापुर मोती कुरैशी कसाब जमात (2005, 7 न्यायाधीश) | गुजरात में गोवंश (बैल और साँड़ भी) के वध पर पूरी रोक को सही माना, बूढ़े होने पर भी। कोर्ट ने अनुच्छेद 48 को 48A और 51A(g) के साथ पढ़ा। |
अनुच्छेद 48 या 48A?
- अनुच्छेद 48 (1950 से): खेती, पशु, नस्लें, गोवध पर रोक।
- अनुच्छेद 48A (42वाँ संशोधन, 1976): पर्यावरण, वन और वन्यजीवों की रक्षा।

त्वरित दोहराईयाद रखने योग्य मुख्य बातें
- अनुच्छेद 48: कृषि और पशुपालन को आधुनिक और वैज्ञानिक ढंग से संगठित करना।
- नस्लों को बचाना और सुधारना; गाय, बछड़े, दुधारू और वाहक पशुओं के वध पर रोक।
- गोवध के क़ानून राज्य बनाते हैं (राज्य सूची)।
- मिर्ज़ापुर (2005, 7 न्यायाधीश) ने गोवंश के वध पर पूरी रोक को सही माना।
- श्रेणी: गांधीवादी (गोरक्षा) और उदार-बौद्धिक (वैज्ञानिक खेती)।
UPSC · राज्य PSC · न्यायपालिकाअनुच्छेद 48: परीक्षा कॉर्नर
- प्रीलिम्स जाल: "अनुच्छेद 48 वनों और वन्यजीवों की रक्षा के बारे में है।" ग़लत। वह अनुच्छेद 48A है, जो 1976 में जुड़ा। अनुच्छेद 48 खेती और पशुओं के बारे में है।
- तथ्य (SSC / स्कूल): अनुच्छेद 48 में "गाय" शब्द है; यह गाय, बछड़ों और दूसरे दुधारू और वाहक पशुओं के वध पर रोक की बात करता है।
- मेन्स: "अनुच्छेद 48 जितना गोरक्षा का है, उतना ही आधुनिक खेती का भी।" चर्चा करें।
अभ्यास प्रश्नख़ुद को परखें: अनुच्छेद 48
कौन सा निदेशक तत्व राज्य से कृषि और पशुपालन को आधुनिक और वैज्ञानिक ढंग से संगठित करने को कहता है?
शंका समाधानअक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
भारतीय संविधान का अनुच्छेद 48 क्या है?
अनुच्छेद 48 एक निदेशक तत्व है। यह राज्य से कहता है कि खेती और पशुपालन को आधुनिक और वैज्ञानिक ढंग से संगठित करे, पशुओं की नस्लें सुधारे, और गाय, बछड़े और दूसरे दुधारू और वाहक पशुओं के वध पर रोक लगाए।
क्या पूरे भारत में गोवध पर रोक है?
कोई एक राष्ट्रीय क़ानून नहीं है। अनुच्छेद 48 निदेशक तत्व है और यह विषय राज्य सूची में है, इसलिए हर राज्य ख़ुद तय करता है। कई राज्यों में पूरी रोक है, कुछ में आंशिक।
अनुच्छेद 48 और 48A में क्या अंतर है?
अनुच्छेद 48 खेती, पशुओं की नस्लों और गोरक्षा के बारे में है। अनुच्छेद 48A, जो 1976 में 42वें संशोधन से जुड़ा, पर्यावरण, वन और वन्यजीवों की रक्षा के बारे में है।