मूल पाठअनुच्छेद 38 का आधिकारिक पाठ
38. राज्य लोक कल्याण की अभिवृद्धि के लिए सामाजिक व्यवस्था बनाएगा—
(1) राज्य ऐसी सामाजिक व्यवस्था की, जिसमें सामाजिक, आर्थिक और राजनैतिक न्याय राष्ट्रीय जीवन की सभी संस्थाओं को अनुप्राणित करे, भरसक प्रभावी रूप में स्थापना और संरक्षण करके लोक कल्याण की अभिवृद्धि का प्रयास करेगा।
(2) राज्य, विशिष्टतया, आय की असमानताओं को कम करने का प्रयास करेगा और न केवल व्यष्टियों के बीच बल्कि विभिन्न क्षेत्रों में रहने वाले और विभिन्न व्यवसायों में लगे हुए लोगों के समूहों के बीच भी प्रतिष्ठा, सुविधाओं और अवसरों की असमानता समाप्त करने का प्रयास करेगा।
38(1): भारत एक लोक कल्याणकारी राज्य हो, जहाँ तीन तरह का न्याय, सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक, हर संस्था तक पहुँचे।
38(2): राज्य आय की असमानता कम करे।
वह प्रतिष्ठा, सुविधाओं और अवसरों की असमानता भी मिटाए, सिर्फ़ व्यक्तियों के बीच नहीं, बल्कि इलाक़ों (पहाड़ी ज़िला और महानगर) और पेशों (किसान और इंजीनियर) के बीच भी।
ये तीन तरह के न्याय वही हैं जो उद्देशिका (प्रस्तावना) में लिखे हैं।
🏠 रोज़मर्रा की मिसाल
घर का खाना सोचिए। अच्छी माँ सारा खाना सबसे ताक़तवर बच्चे को नहीं देती: सबको भरपेट मिलता है, और कमज़ोर बच्चे का थोड़ा ज़्यादा ध्यान रखा जाता है। अनुच्छेद 38 राज्य से ऐसी ही माँ बनने को कहता है।
🇮🇳 असली भारतीय उदाहरण
भारत में आयकर बढ़ती दर वाला है: बहुत कम कमाने वाला टैक्स नहीं देता, ज़्यादा कमाने वाला ऊँची दर से देता है। इसी पैसे से सरकारी स्कूल, अस्पताल और ग़रीबों का राशन चलता है। यही अनुच्छेद 38(2) है: आय का अंतर घटाना।
कैसे लागू होता हैअनुच्छेद 38: लोक कल्याणकारी राज्य की झलक
| न्याय का प्रकार / लक्ष्य | रोज़ का उदाहरण |
|---|---|
| सामाजिक न्याय | कमज़ोर वर्गों के लिए आरक्षण और छात्रवृत्ति |
| आर्थिक न्याय | बढ़ती दर वाला आयकर, न्यूनतम मज़दूरी, खाद्य सुरक्षा |
| राजनीतिक न्याय | सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार: एक व्यक्ति, एक वोट |
| सब इलाक़ों में बराबर सुविधा (38(2)) | पिछड़े ज़िलों के लिए आकांक्षी ज़िला कार्यक्रम (नीति आयोग, 2018) |
यह क्यों अहम है
- अनुच्छेद 38 एक छतरी है: अनुच्छेद 39 से 47 बताते हैं कि कल्याणकारी राज्य कैसे बने।
- इसे समाजवादी सिद्धांत माना जाता है (यह बँटवारा विद्वानों का है, संविधान में नहीं लिखा)।

त्वरित दोहराईयाद रखने योग्य मुख्य बातें
- अनुच्छेद 38 का लक्ष्य भारत को लोक कल्याणकारी राज्य बनाना है।
- न्याय: सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक, जैसा उद्देशिका में है।
- 38(2) 44वें संशोधन, 1978 से जुड़ा।
- 38(2): व्यक्तियों और समूहों (इलाक़ों, पेशों) के बीच असमानता घटाना।
- समाजवादी सिद्धांत; कोर्ट में लागू नहीं (अनुच्छेद 37)।
UPSC · राज्य PSC · न्यायपालिकाअनुच्छेद 38: परीक्षा कॉर्नर
- प्रीलिम्स जाल: "अनुच्छेद 38(2) 42वें संशोधन से जोड़ा गया।" ग़लत। यह 44वाँ संशोधन, 1978 है।
- तथ्य (SSC, स्कूल): अनुच्छेद 38(2) में आय की असमानता कम करने और प्रतिष्ठा, सुविधाओं और अवसरों की असमानता मिटाने की बात है।
- मेन्स (150 शब्द): "अनुच्छेद 38 लोक कल्याणकारी राज्य की आत्मा है।" क़ानूनों और योजनाओं के उदाहरण से चर्चा करें।
अभ्यास प्रश्नख़ुद को परखें: अनुच्छेद 38
किस संशोधन ने अनुच्छेद 38 में खंड (2) जोड़ा, जो राज्य से आय की असमानता कम करने को कहता है?
शंका समाधानअक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
भारतीय संविधान का अनुच्छेद 38 क्या है?
अनुच्छेद 38 राज्य से कहता है कि वह सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक न्याय पर टिकी सामाजिक व्यवस्था बनाकर लोक कल्याण करे, और आय, प्रतिष्ठा, सुविधाओं और अवसरों की असमानता कम करे।
'लोक कल्याणकारी राज्य' का क्या मतलब है?
लोक कल्याणकारी राज्य वह है जो सिर्फ़ क़ानून-व्यवस्था नहीं, बल्कि लोगों की बुनियादी ज़रूरतों जैसे भोजन, इलाज, पढ़ाई और काम का भी ध्यान रखे।
अनुच्छेद 38(2) किस संशोधन से जुड़ा?
44वें संशोधन, 1978 ने असमानता कम करने वाला खंड (2) जोड़ा।