भाग IV ⚖️ राज्य की नीति के निदेशक तत्व लागू · कभी संशोधित नहीं · भाग IV का अंतिम अनुच्छेद

अनुच्छेद 51: अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा की अभिवृद्धि

अच्छा परिवार अपने पड़ोसियों से मिल-जुलकर रहता है। अनुच्छेद 51, आख़िरी नीति निदेशक तत्व, भारत से पूरी दुनिया का अच्छा पड़ोसी बनने को कहता है।

मूल पाठअनुच्छेद 51 का आधिकारिक पाठ

हिन्दी · आधिकारिक पाठ

51. अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा की अभिवृद्धि—

राज्य,—

(क) अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा की अभिवृद्धि का,

(ख) राष्ट्रों के बीच न्यायसंगत और सम्मानपूर्ण संबंधों को बनाए रखने का,

(ग) संगठित लोगों के एक दूसरे से व्यवहारों में अंतरराष्ट्रीय विधि और संधि-बाध्यताओं के प्रति आदर बढ़ाने का, और

(घ) अंतरराष्ट्रीय विवादों के माध्यस्थम् द्वारा निपटारे के लिए प्रोत्साहन देने का,

प्रयास करेगा।

In Simple Words / आसान शब्दों में

भारत दुनिया में शांति और सुरक्षा के लिए काम करे।

भारत हर देश से न्यायपूर्ण और सम्मानजनक संबंध रखे।

भारत अंतरराष्ट्रीय क़ानून और अपनी संधियों का आदर करे।

देशों के झगड़े युद्ध से नहीं, मध्यस्थता से सुलझें।

🏠 रोज़मर्रा की मिसाल

गाँव में दो परिवारों में मेड़ को लेकर झगड़ा हो, तो समझदारी पंचायत बुलाने में है, पत्थर फेंकने में नहीं। अनुच्छेद 51 देशों से यही कहता है: बात करो, वादे निभाओ और निष्पक्ष पंच से फ़ैसला करवाओ।

🇮🇳 असली भारतीय उदाहरण

विशाखा बनाम राजस्थान राज्य (1997) के समय काम की जगह पर यौन उत्पीड़न पर कोई भारतीय क़ानून नहीं था। सुप्रीम कोर्ट ने भारत द्वारा स्वीकार किए गए अंतरराष्ट्रीय समझौते (CEDAW) का सहारा लिया, अनुच्छेद 51(ग) और 253 के आधार पर, और ऐसे दिशानिर्देश बनाए जो हर दफ़्तर को मानने थे।

चार खंडअनुच्छेद 51: अंतरराष्ट्रीय शांति के चार खंड

खंडमतलबउदाहरण
51(क)दुनिया में शांति और सुरक्षा के लिए कामभारत के सैनिक संयुक्त राष्ट्र शांति सेना में जाते हैं
51(ख)सब देशों से न्यायपूर्ण और सम्मानजनक संबंधपंचशील (1954): शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व के पाँच सिद्धांत
51(ग)अंतरराष्ट्रीय क़ानून और संधियों का आदरसंधि लागू करने के लिए संसद क़ानून बना सकती है (अनुच्छेद 253)
51(घ)झगड़े मध्यस्थता से सुलझानालड़ने की जगह किसी निष्पक्ष पंच से बात करना

भाग IV का अंत

अनुच्छेद 51 भाग IV का अंतिम अनुच्छेद है। इसके ठीक बाद भाग IVA में अनुच्छेद 51A आता है, नागरिकों के मौलिक कर्तव्य, जो 42वें संशोधन, 1976 से जुड़े। दोनों को न मिलाएँ: 51 विदेश मामलों में राज्य का लक्ष्य है, 51A नागरिक का कर्तव्य।

अनुच्छेद 51 अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा की अभिवृद्धि, चार खंड: शांति, राष्ट्रों के बीच न्यायपूर्ण संबंध, अंतरराष्ट्रीय विधि और संधियों का आदर, विवादों का मध्यस्थता से निपटारा, भाग IV का अंतिम अनुच्छेद
एक नज़र में अनुच्छेद 51: संविधान में भारत की विदेश नीति के चार लक्ष्य।

त्वरित दोहराईयाद रखने योग्य मुख्य बातें

  • अनुच्छेद 51: राज्य अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा बढ़ाने का प्रयास करेगा।
  • चार खंड: शांति, न्यायपूर्ण संबंध, क़ानून और संधियों का आदर, मध्यस्थता।
  • यह भाग IV का अंतिम अनुच्छेद है; अनुच्छेद 51A (भाग IVA) अलग चीज़ है।
  • अदालतों ने 51(ग) के सहारे अंतरराष्ट्रीय समझौते लागू किए (विशाखा, 1997)।
  • कभी संशोधित नहीं; उदार-बौद्धिक नीति निदेशक तत्व।

UPSC · राज्य PSC · न्यायपालिकाअनुच्छेद 51: परीक्षा कॉर्नर

  • प्रीलिम्स जाल: "अनुच्छेद 51 में मौलिक कर्तव्य हैं।" ग़लत। वे भाग IVA के अनुच्छेद 51A में हैं; अनुच्छेद 51 अंतरराष्ट्रीय शांति का निदेशक तत्व है।
  • तथ्य (SSC, स्कूल): अनुच्छेद 51 में चार खंड (क) से (घ) हैं; खंड (घ) मध्यस्थता की बात करता है।
  • मेन्स: "अनुच्छेद 51 भारत की विदेश नीति के आदर्श दिखाता है।" उदाहरणों के साथ चर्चा करें।

अभ्यास प्रश्नख़ुद को परखें: अनुच्छेद 51

अनुच्छेद 51 में इनमें से किसका उल्लेख है? 1. अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा बढ़ाना 2. अंतरराष्ट्रीय विवादों को मध्यस्थता से सुलझाना 3. किसी सैन्य गठबंधन में शामिल होना

शंका समाधानअक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भारतीय संविधान का अनुच्छेद 51 क्या है?

अनुच्छेद 51 आख़िरी नीति निदेशक तत्व है। यह राज्य से कहता है कि अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा बढ़ाए, देशों के बीच न्यायपूर्ण और सम्मानजनक संबंध रखे, अंतरराष्ट्रीय क़ानून और संधियों का आदर करे, और झगड़ों को मध्यस्थता से सुलझाने को बढ़ावा दे।

अनुच्छेद 51 और अनुच्छेद 51A में क्या अंतर है?

अनुच्छेद 51 (भाग IV) अंतरराष्ट्रीय शांति का निदेशक तत्व है, जो 1950 से संविधान में है। अनुच्छेद 51A (भाग IVA) में नागरिकों के मौलिक कर्तव्य हैं और यह 1976 में जोड़ा गया।

अदालतों ने अनुच्छेद 51 का उपयोग कैसे किया है?

जब किसी विषय पर भारतीय क़ानून न हो और अंतरराष्ट्रीय समझौता उससे न टकराए, तो अदालतों ने अनुच्छेद 51(ग) के सहारे उस समझौते को भारतीय क़ानून में पढ़ा है, जैसे विशाखा बनाम राजस्थान राज्य (1997) में।