मूल पाठअनुच्छेद 49 का आधिकारिक पाठ
49. राष्ट्रीय महत्व के संस्मारकों, स्थानों और वस्तुओं का संरक्षण—
संसद द्वारा बनाई गई विधि द्वारा या उसके अधीन राष्ट्रीय महत्व वाले घोषित किए गए कलात्मक या ऐतिहासिक अभिरुचि वाले प्रत्येक संस्मारक या स्थान या वस्तु का, यथास्थिति, लुंठन, विरूपण, विनाश, अपसारण, व्ययन या निर्यात से संरक्षण करना राज्य की बाध्यता होगी।
यह कलात्मक या ऐतिहासिक महत्व के स्मारकों, स्थानों और वस्तुओं पर लागू है।
केवल वे जिन्हें संसद के क़ानून द्वारा या उसके अधीन राष्ट्रीय महत्व का घोषित किया गया हो।
राज्य इन्हें लूट, बिगाड़, विनाश, हटाने, बेचने या विदेश भेजने से बचाएगा।
ध्यान दें: इसमें राज्य की "बाध्यता" लिखा है, फिर भी यह कोर्ट से लागू नहीं होता।
🏠 रोज़मर्रा की मिसाल
दादी की पुरानी शादी वाली साड़ी संदूक में सँभालकर रखी जाती है, उसे काटकर पोंछा नहीं बनाते, न बेचते हैं। अनुच्छेद 49 राज्य से देश की धरोहर के साथ ऐसा ही करने को कहता है।
🇮🇳 असली भारतीय उदाहरण
दिल्ली में एक बिल्डर किसी संरक्षित मक़बरे के ठीक बगल में नई दुकान बनाना चाहता है। प्राचीन संस्मारक अधिनियम, 1958 (2010 में संशोधित) के तहत इसके 100 मीटर के भीतर नया निर्माण मना है। और जो किसी संरक्षित क़िले की दीवार पर नाम खुरचता है, वह अपराध करता है।
क़ानून और ASIअनुच्छेद 49: राष्ट्रीय स्मारकों की रक्षा करने वाले क़ानून
| क़ानून या संस्था | भूमिका |
|---|---|
| भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) | लाल क़िला, क़ुतुब मीनार जैसे केंद्र-संरक्षित स्मारकों की देखभाल |
| प्राचीन संस्मारक तथा पुरातत्वीय स्थल और अवशेष अधिनियम, 1958 | संसद स्मारकों को राष्ट्रीय महत्व का घोषित करती है; इन्हें नुक़सान पहुँचाना अपराध |
| 1958 के अधिनियम में 2010 का संशोधन | संरक्षित स्मारक के 100 मीटर के भीतर नया निर्माण नहीं (प्रतिबंधित क्षेत्र) |
| पुरावशेष तथा बहुमूल्य कलाकृति अधिनियम, 1972 | पुरानी मूर्तियाँ, सिक्के और चित्र बिना अनुमति विदेश नहीं भेजे जा सकते |
अनुच्छेद 49 और अनुच्छेद 51A(f)
अनुच्छेद 49 राज्य का काम है। अनुच्छेद 51A(f) हर नागरिक को अपनी मिली-जुली संस्कृति की समृद्ध धरोहर का मान करने और उसे बचाने का कर्तव्य देता है। यानी ASI क़िले की रखवाली करे, और घूमने वाले वहाँ कूड़ा न फैलाएँ, दीवारें न बिगाड़ें।

त्वरित दोहराईयाद रखने योग्य मुख्य बातें
- अनुच्छेद 49: राष्ट्रीय महत्व के स्मारकों, स्थानों और वस्तुओं की रक्षा राज्य की बाध्यता।
- "राष्ट्रीय महत्व" संसद के क़ानून द्वारा या उसके अधीन घोषित होता है।
- लूट, बिगाड़, विनाश, हटाने, बेचने या निर्यात से रक्षा।
- 7वें संशोधन, 1956 से शब्द बदले गए।
- मुख्य क़ानून: प्राचीन संस्मारक तथा पुरातत्वीय स्थल और अवशेष अधिनियम, 1958; संस्था: ASI।
UPSC · राज्य PSC · न्यायपालिकाअनुच्छेद 49: परीक्षा कॉर्नर
- प्रीलिम्स जाल: "अनुच्छेद 49 के तहत राज्य विधानमंडल राष्ट्रीय महत्व के स्मारक घोषित करते हैं।" ग़लत। यह संसद अपने क़ानून द्वारा या उसके अधीन करती है।
- तथ्य (SSC, स्कूल): अनुच्छेद 49 उदार-बौद्धिक नीति निदेशक तत्व है; नागरिक की ओर से इसका साथी मौलिक कर्तव्य 51A(f) है।
- मेन्स: "धरोहर की रक्षा राज्य और नागरिक का साझा काम है।" अनुच्छेद 49 और 51A(f) के संदर्भ में चर्चा करें।
अभ्यास प्रश्नख़ुद को परखें: अनुच्छेद 49
अनुच्छेद 49 के तहत किसी स्मारक को राष्ट्रीय महत्व का कौन घोषित करता है?
शंका समाधानअक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
भारतीय संविधान का अनुच्छेद 49 क्या है?
अनुच्छेद 49 एक नीति निदेशक तत्व है। इसके अनुसार संसद के क़ानून द्वारा या उसके अधीन राष्ट्रीय महत्व के घोषित हर कलात्मक या ऐतिहासिक स्मारक, स्थान या वस्तु को नुक़सान, विनाश, हटाने, बेचने या निर्यात से बचाना राज्य की बाध्यता है।
अनुच्छेद 49 को कौन सा क़ानून लागू करता है?
मुख्य रूप से प्राचीन संस्मारक तथा पुरातत्वीय स्थल और अवशेष अधिनियम, 1958, जिसे भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण लागू करता है। पुरावशेष तथा बहुमूल्य कलाकृति अधिनियम, 1972 पुरानी चीज़ों के निर्यात पर रोक लगाता है।
क्या अनुच्छेद 49 कभी संशोधित हुआ?
हाँ, एक बार। 7वें संशोधन, 1956 ने "संसद द्वारा विधि से घोषित" को "संसद द्वारा बनाई गई विधि द्वारा या उसके अधीन घोषित" कर दिया।