मूल पाठअनुच्छेद 46 का आधिकारिक पाठ
46. अनुसूचित जातियों, अनुसूचित जनजातियों और अन्य दुर्बल वर्गों के शिक्षा और अर्थ संबंधी हितों की अभिवृद्धि—
राज्य, जनता के दुर्बल वर्गों के, विशिष्टतया, अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों के शिक्षा और अर्थ संबंधी हितों की विशेष सावधानी से अभिवृद्धि करेगा और सामाजिक अन्याय और सभी प्रकार के शोषण से उनकी संरक्षा करेगा।
राज्य दुर्बल वर्गों का, ख़ासकर अनुसूचित जातियों (SC) और अनुसूचित जनजातियों (ST) का विशेष ध्यान रखे।
दो चीज़ें बढ़ाए: उनकी पढ़ाई और उनकी कमाई।
एक चीज़ रोके: किसी भी तरह का सामाजिक अन्याय और शोषण।
यह निदेशक तत्व है, इसलिए क़ानूनों और योजनाओं को राह दिखाता है, पर सीधे कोर्ट में लागू नहीं होता।
🏠 रोज़मर्रा की मिसाल
एक दौड़ में कुछ धावकों को सालों तक लाइन से बहुत पीछे खड़ा किया गया। अनुच्छेद 46 वह कोच है जो उन्हें अतिरिक्त अभ्यास, अच्छे जूते और बराबर का रास्ता देता है, ताकि दौड़ सच में बराबरी की हो।
🇮🇳 असली भारतीय उदाहरण
खेत मज़दूर की बेटी सुनीता अनुसूचित जनजाति से है। छात्रवृत्ति और सरकारी छात्रावास की मदद से वह नर्सिंग की पढ़ाई पूरी करती है। अगर कोई ठेकेदार उसके परिवार की ज़मीन हड़पने या उन्हें डराने की कोशिश करे, तो SC/ST (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 उनकी रक्षा करता है।
क़ानून और योजनाएँअनुच्छेद 46: SC, ST और दुर्बल वर्गों के लिए क़ानून और योजनाएँ
| अनुच्छेद 46 का हिस्सा | राज्य कैसे लागू करता है |
|---|---|
| शिक्षा | छात्रवृत्ति (जैसे SC छात्रों के लिए पोस्ट-मैट्रिक छात्रवृत्ति), छात्रावास, मुफ़्त कोचिंग |
| आर्थिक हित | सस्ता क़र्ज़, ज़मीन और हुनर की योजनाएँ; अनुच्छेद 16(4) के तहत नौकरियों में आरक्षण |
| अन्याय से रक्षा | सिविल अधिकार संरक्षण अधिनियम 1955; SC/ST (अत्याचार निवारण) अधिनियम 1989 |
मुख्य केस
- मद्रास राज्य बनाम चंपकम दोराइराजन (1951): मद्रास ने अनुच्छेद 46 का हवाला देकर कॉलेज की सीटें समुदाय के आधार पर बाँटी थीं। सुप्रीम कोर्ट ने इसे रद्द किया, क्योंकि निदेशक तत्व मूल अधिकार (अनुच्छेद 29(2)) से ऊपर नहीं हो सकता।
- तब संसद ने पहला संशोधन, 1951 करके अनुच्छेद 15(4) जोड़ा, जो SC, ST और पिछड़े वर्गों के लिए विशेष प्रावधान की अनुमति देता है। इसके पीछे की सोच अनुच्छेद 46 है।

त्वरित दोहराईयाद रखने योग्य मुख्य बातें
- अनुच्छेद 46: दुर्बल वर्गों के शिक्षा और आर्थिक हितों को विशेष सावधानी से बढ़ाना।
- नाम केवल SC और ST का; "दुर्बल वर्ग" परिभाषित नहीं।
- साथ ही: सामाजिक अन्याय और हर प्रकार के शोषण से रक्षा।
- चंपकम दोराइराजन (1951) से पहला संशोधन और अनुच्छेद 15(4) आया।
- श्रेणी: गांधीवादी। कभी संशोधित नहीं।
UPSC · राज्य PSC · न्यायपालिकाअनुच्छेद 46: परीक्षा कॉर्नर
- प्रीलिम्स जाल: "अनुच्छेद 46 में अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) का नाम है।" ग़लत। इसमें केवल SC और ST का नाम है, बाक़ी के लिए "दुर्बल वर्ग" कहा गया है।
- तथ्य (SSC / स्कूल): अनुच्छेद 46 को गांधीवादी तत्वों में रखा जाता है, क्योंकि ग़रीबों और वंचितों का उत्थान गांधी जी के भारत के सपने का केंद्र था।
- मेन्स: "अनुच्छेद 46 भारत के सामाजिक न्याय क़ानूनों का नैतिक आधार रहा है।" उदाहरण सहित समझाइए।
अभ्यास प्रश्नख़ुद को परखें: अनुच्छेद 46
अनुच्छेद 46 राज्य को दुर्बल वर्गों के किन हितों को बढ़ाने का निर्देश देता है?
शंका समाधानअक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
भारतीय संविधान का अनुच्छेद 46 क्या है?
अनुच्छेद 46 एक निदेशक तत्व है। यह राज्य से कहता है कि दुर्बल वर्गों, ख़ासकर SC और ST की शिक्षा और आर्थिक हितों को विशेष ध्यान से बढ़ाए और उन्हें अन्याय और शोषण से बचाए।
क्या आरक्षण अनुच्छेद 46 के तहत मिलता है?
सीधे नहीं। आरक्षण अनुच्छेद 15(4) और 16(4) जैसे मूल अधिकारों वाले प्रावधानों से आता है। अनुच्छेद 46 उनके पीछे की सोच है, पर ख़ुद कोर्ट से लागू नहीं होता।
कौन से क़ानून अनुच्छेद 46 को लागू करते हैं?
जैसे सिविल अधिकार संरक्षण अधिनियम 1955 और SC/ST (अत्याचार निवारण) अधिनियम 1989, साथ ही SC और ST छात्रों के लिए छात्रवृत्ति और छात्रावास की योजनाएँ।