भाग IV ⚖️ राज्य की नीति के निदेशक तत्व लागू · कभी संशोधित नहीं

अनुच्छेद 43: कर्मकारों के लिए निर्वाह मज़दूरी

सिर्फ़ नौकरी काफ़ी नहीं, अगर तनख़्वाह से बस दो वक़्त की रोटी ही आए। अनुच्छेद 43 राज्य से कहता है कि हर कर्मकार इतना कमाए कि इज़्ज़त से जी सके, और उसे आराम का समय भी मिले।

मूल पाठअनुच्छेद 43 का आधिकारिक पाठ

हिन्दी · आधिकारिक पाठ

43. कर्मकारों के लिए निर्वाह मजदूरी आदि—

राज्य, उपयुक्त विधान या आर्थिक संगठन द्वारा या किसी अन्य रीति से कृषि के, उद्योग के या अन्य प्रकार के सभी कर्मकारों को काम, निर्वाह मजदूरी, शिष्ट जीवन स्तर और अवकाश का संपूर्ण उपभोग सुनिश्चित करने वाली काम की दशाएँ तथा सामाजिक और सांस्कृतिक अवसर प्राप्त कराने का प्रयास करेगा और विशिष्टतया ग्रामों में कुटीर उद्योगों को वैयक्तिक या सहकारी आधार पर बढ़ाने का प्रयास करेगा।

In Simple Words / आसान शब्दों में

यह सभी कर्मकारों पर लागू है: खेतिहर मज़दूर, कारख़ाने के मज़दूर और बाक़ी सब।

राज्य उन्हें काम और निर्वाह मज़दूरी देने का प्रयास करे, सिर्फ़ न्यूनतम मज़दूरी नहीं।

काम की दशाएँ ऐसी हों कि अच्छा जीवन, फ़ुर्सत और सामाजिक-सांस्कृतिक मौक़े मिलें।

गाँवों में राज्य कुटीर उद्योगों को बढ़ावा दे, चाहे एक व्यक्ति चलाए या सहकारी समिति।

🏠 रोज़मर्रा की मिसाल

न्यूनतम मज़दूरी ऐसे टायर जैसी है जिसमें बस चलने भर की हवा हो। निर्वाह मज़दूरी पूरी हवा वाला टायर है, जिससे परिवार आराम से चले और आगे के लिए कुछ बोझ भी उठा सके।

🇮🇳 असली भारतीय उदाहरण

सुनीता लुधियाना की एक फ़ैक्टरी में काम करती है। मज़दूरी संहिता, 2019 (21 नवंबर 2025 से लागू) उसे क़ानूनी न्यूनतम मज़दूरी और तय काम के घंटे देती है। उसका भाई गाँव में खादी और ग्रामोद्योग आयोग (KVIC) की मदद से चरखा चलाकर खादी बनाता है: यही अनुच्छेद 43 का कुटीर उद्योग वाला हिस्सा है।

निर्वाह मज़दूरीअनुच्छेद 43: निर्वाह मज़दूरी बनाम न्यूनतम मज़दूरी

उचित मज़दूरी समिति (1948) ने मज़दूरी के तीन स्तर बताए। अनुच्छेद 43 सबसे ऊँचे स्तर का लक्ष्य रखता है।

मज़दूरी का स्तरइसमें क्या आता है
न्यूनतम मज़दूरीबस गुज़ारा: खाना, कपड़ा, मकान, और थोड़ा इलाज व पढ़ाई
उचित मज़दूरीदोनों के बीच, उद्योग की देने की क्षमता से जुड़ी
निर्वाह मज़दूरी (अनुच्छेद 43)अच्छा जीवन: सुविधा, बच्चों की पढ़ाई, इलाज, कुछ बचत, सामाजिक जीवन

अनुच्छेद 43 को लागू करने वाले क़ानून और संस्थाएँ

  • चार श्रम संहिताएँ (21 नवंबर 2025 से लागू): मज़दूरी संहिता, 2019 ने न्यूनतम मज़दूरी अधिनियम, 1948 और दूसरे मज़दूरी क़ानूनों की जगह ली; बाक़ी संहिताएँ सामाजिक सुरक्षा और सुरक्षित काम की दशाओं पर हैं।
  • खादी और ग्रामोद्योग आयोग (1956 के अधिनियम से बना) गाँव और कुटीर उद्योगों की मदद करता है।
  • अनुच्छेद 43 एक नीति निदेशक तत्व है: सिर्फ़ इसके आधार पर कोई कर्मकार "निर्वाह मज़दूरी" के लिए कोर्ट नहीं जा सकता, पर कोर्ट श्रम क़ानूनों को कर्मकारों के पक्ष में पढ़ने में इसका सहारा लेते हैं।
अनुच्छेद 43 कर्मकारों के लिए निर्वाह मज़दूरी: सभी कर्मकारों को काम, निर्वाह मज़दूरी, शिष्ट जीवन स्तर, अवकाश और गाँवों में कुटीर उद्योग, राज्य के नीति निदेशक तत्व
हर कर्मकार के लिए अनुच्छेद 43 के चार वादे।

त्वरित दोहराईयाद रखने योग्य मुख्य बातें

  • अनुच्छेद 43 सभी कर्मकारों पर लागू: कृषि, उद्योग या अन्य।
  • लक्ष्य: काम, निर्वाह मज़दूरी, अच्छा जीवन, फ़ुर्सत, सामाजिक-सांस्कृतिक अवसर।
  • निर्वाह मज़दूरी, न्यूनतम और उचित मज़दूरी से ऊँची है।
  • ख़ास ज़िम्मेदारी: गाँवों में कुटीर उद्योग बढ़ाना (वैयक्तिक या सहकारी)।
  • स्वरूप में समाजवादी (निर्वाह मज़दूरी) और गांधीवादी (कुटीर उद्योग) दोनों।

UPSC · राज्य PSC · न्यायपालिकाअनुच्छेद 43: परीक्षा कॉर्नर

  • प्रीलिम्स जाल: "अनुच्छेद 43 न्यूनतम मज़दूरी का वादा करता है।" ग़लत शब्द। इसमें निर्वाह मज़दूरी है। (समान काम के लिए समान वेतन अनुच्छेद 39(d) में है।)
  • तथ्य (SSC / स्कूल): गाँवों में कुटीर उद्योग अनुच्छेद 43 में हैं; सहकारी समितियों के लिए अलग अनुच्छेद 43B 2011 में जुड़ा।
  • मेन्स: "न्यूनतम मज़दूरी और निर्वाह मज़दूरी का अंतर बताता है कि अनुच्छेद 43 हक़ीक़त से कितना दूर है।" चर्चा करें।

अभ्यास प्रश्नख़ुद को परखें: अनुच्छेद 43

संविधान का कौन-सा अनुच्छेद राज्य से गाँवों में कुटीर उद्योग बढ़ाने को कहता है?

शंका समाधानअक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भारतीय संविधान का अनुच्छेद 43 क्या है?

अनुच्छेद 43 एक नीति निदेशक तत्व है। यह राज्य से कहता है कि सभी कर्मकारों को काम, निर्वाह मज़दूरी, अच्छी काम की दशाएँ और फ़ुर्सत मिले, और गाँवों में कुटीर उद्योग बढ़ें।

न्यूनतम मज़दूरी और निर्वाह मज़दूरी में क्या अंतर है?

न्यूनतम मज़दूरी से बस ज़रूरी चीज़ें पूरी होती हैं। निर्वाह मज़दूरी, जो अनुच्छेद 43 का लक्ष्य है, पढ़ाई, इलाज, सुविधा और कुछ बचत भी देती है, ताकि कर्मकार इज़्ज़त से जी सके।

क्या कर्मकार अनुच्छेद 43 के तहत कोर्ट जा सकता है?

सीधे नहीं। अनुच्छेद 37 के अनुसार नीति निदेशक तत्व किसी कोर्ट में लागू नहीं कराए जा सकते। कर्मकार मज़दूरी संहिता जैसे श्रम क़ानूनों के तहत कोर्ट जाते हैं, जो अनुच्छेद 43 को अमल में लाते हैं।