मूल पाठअनुच्छेद 39A का आधिकारिक पाठ
39क. समान न्याय और निःशुल्क विधिक सहायता—
राज्य यह सुनिश्चित करेगा कि विधिक तंत्र इस प्रकार काम करे कि समान अवसर के आधार पर न्याय सुलभ हो और वह, विशिष्टतया, यह सुनिश्चित करने के लिए कि आर्थिक या किसी अन्य निर्योग्यता के कारण कोई नागरिक न्याय प्राप्त करने के अवसर से वंचित न रह जाए, उपयुक्त विधान या स्कीम द्वारा या किसी अन्य रीति से निःशुल्क विधिक सहायता की व्यवस्था करेगा।
क़ानूनी व्यवस्था ऐसी हो कि हर किसी को न्याय का बराबर मौक़ा मिले।
जो वकील का ख़र्च नहीं उठा सकते, उन्हें राज्य मुफ़्त क़ानूनी सहायता दे।
यह काम क़ानून, योजना या किसी और तरीक़े से किया जा सकता है।
किसी नागरिक को सिर्फ़ ग़रीबी या किसी और कमज़ोरी की वजह से न्याय से वंचित न होना पड़े।
🏠 रोज़मर्रा की मिसाल
अगर एक टीम के पास बल्ला हो और दूसरी के पास नहीं, तो मैच बराबरी का नहीं। मुफ़्त वकील ग़रीब खिलाड़ी के हाथ में बल्ला देता है, ताकि कोर्ट का मुक़ाबला बराबर हो।
🇮🇳 असली भारतीय उदाहरण
राजस्थान के एक गाँव की सीता बाई का ज़मीन का केस है, पर वकील की फ़ीस के पैसे नहीं हैं। वह ज़िला विधिक सेवा प्राधिकरण जाती है और उसे मुफ़्त वकील मिल जाता है। यही अनुच्छेद 39A है।
कैसे लागू होता हैअनुच्छेद 39A लागू कैसे होता है: भारत में मुफ़्त क़ानूनी सहायता
अनुच्छेद 39A को लागू करने के लिए संसद ने विधिक सेवा प्राधिकरण अधिनियम, 1987 बनाया। यह 9 नवंबर 1995 से लागू हुआ, इसलिए यह दिन राष्ट्रीय विधिक सेवा दिवस है।
| कौन | क्या करता है |
|---|---|
| NALSA (राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण) | पूरे देश के लिए क़ानूनी सहायता की नीति बनाता है |
| राज्य और ज़िला विधिक सेवा प्राधिकरण | हर राज्य और ज़िले में मुफ़्त वकील और सलाह देते हैं |
| लोक अदालत | आपसी समझौते से झगड़े जल्दी निपटाती है, कोई कोर्ट फ़ीस नहीं |
मुख्य केस
- एम.एच. होसकोट बनाम महाराष्ट्र राज्य (1978): ग़रीब क़ैदी को अपील करने के लिए मुफ़्त क़ानूनी मदद मिलनी चाहिए।
- हुसैनारा खातून बनाम बिहार राज्य (1979): हज़ारों विचाराधीन क़ैदी बिना मुक़दमे के सालों से जेल में थे। कोर्ट ने कहा कि मुफ़्त क़ानूनी सहायता अनुच्छेद 21 का हिस्सा है (न्यायपूर्ण प्रक्रिया)।

त्वरित दोहराईयाद रखने योग्य मुख्य बातें
- अनुच्छेद 39A: समान न्याय और निःशुल्क विधिक सहायता।
- 42वें संशोधन, 1976 से जोड़ा गया।
- विधिक सेवा प्राधिकरण अधिनियम, 1987 से लागू (NALSA, लोक अदालत)।
- हुसैनारा खातून (1979): मुफ़्त क़ानूनी सहायता अनुच्छेद 21 का हिस्सा।
- श्रेणी: समाजवादी सिद्धांत।
UPSC · राज्य PSC · न्यायपालिकाअनुच्छेद 39A: परीक्षा कॉर्नर
- प्रीलिम्स जाल: "अनुच्छेद 39A 1950 के मूल संविधान में था।" ग़लत। यह 42वें संशोधन, 1976 से आया।
- तथ्य (SSC/स्कूल): राष्ट्रीय विधिक सेवा दिवस 9 नवंबर को है; NALSA विधिक सेवा प्राधिकरण अधिनियम, 1987 के तहत काम करता है।
- मेन्स (150 शब्द): "ग़रीब के लिए देर से मिला न्याय, न्याय से इनकार है।" अनुच्छेद 39A ने विचाराधीन क़ैदियों की कैसे मदद की?
अभ्यास प्रश्नख़ुद को परखें: अनुच्छेद 39A
अनुच्छेद 39A (समान न्याय और निःशुल्क विधिक सहायता) संविधान में किस संशोधन से जोड़ा गया?
शंका समाधानअक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
भारतीय संविधान का अनुच्छेद 39A क्या है?
अनुच्छेद 39A एक नीति निदेशक तत्व है। यह राज्य से कहता है कि क़ानूनी व्यवस्था सबके लिए न्यायपूर्ण हो और मुफ़्त क़ानूनी सहायता दी जाए, ताकि ग़रीबी या किसी और कमज़ोरी के कारण कोई नागरिक न्याय से वंचित न हो।
अनुच्छेद 39A को कौन सा क़ानून लागू करता है?
विधिक सेवा प्राधिकरण अधिनियम, 1987। इसने NALSA, राज्य और ज़िला विधिक सेवा प्राधिकरण बनाए और लोक अदालतों को क़ानूनी आधार दिया।
अगर मुफ़्त क़ानूनी सहायता न मिले तो क्या कोर्ट जा सकते हैं?
अनुच्छेद 39A ख़ुद कोर्ट में लागू नहीं कराया जा सकता (अनुच्छेद 37)। लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने मुफ़्त क़ानूनी सहायता को अनुच्छेद 21 का हिस्सा माना है, इसलिए वकील न मिलने पर आरोपी अनुच्छेद 21 के तहत कोर्ट जा सकता है।