भाग IV ⚖️ राज्य की नीति के निदेशक तत्व लागू · 42वें संशोधन, 1976 से जोड़ा गया

अनुच्छेद 48A: पर्यावरण, वन और वन्य जीवों की रक्षा

साफ़ हवा, साफ़ नदियाँ और हरे जंगल अपने आप नहीं बचते। अनुच्छेद 48A सरकार से कहता है: प्रकृति की रक्षा करो, और उसे बेहतर बनाओ।

मूल पाठअनुच्छेद 48A का आधिकारिक पाठ

हिन्दी · आधिकारिक पाठ

48क. पर्यावरण का संरक्षण तथा संवर्धन और वन तथा वन्य जीवों की रक्षा—

राज्य, देश के पर्यावरण के संरक्षण तथा संवर्धन का और वन तथा वन्य जीवों की रक्षा करने का प्रयास करेगा।

42वें संशोधन, 1976 से जोड़ा गया। इसी संशोधन ने नागरिक का कर्तव्य अनुच्छेद 51A(g) जोड़ा और वन तथा वन्य जीवों को समवर्ती सूची में डाला।
In Simple Words / आसान शब्दों में

राज्य पर्यावरण की रक्षा करेगा और उसे बेहतर भी बनाएगा।

देश के जंगलों और वन्य जीवों को बचाएगा।

यह नीति निदेशक तत्व है: सिर्फ़ 48A के बल पर केस नहीं होता, पर अदालतें इसे अनुच्छेद 21 (जीवन के अधिकार में साफ़ पर्यावरण शामिल) के साथ पढ़ती हैं।

इसका साथी है अनुच्छेद 51A(g): हर नागरिक का कर्तव्य कि प्रकृति की रक्षा करे और जीवों पर दया रखे।

🏠 रोज़मर्रा की मिसाल

देश को एक बड़ा साझा घर मानिए। अनुच्छेद 48A सरकार को उस घर का देखभाल करने वाला बनाता है जो बगीचा हरा और पानी की टंकी साफ़ रखे, और 51A(g) घर के हर सदस्य से कहता है कि कूड़ा न फैलाए।

🇮🇳 असली भारतीय उदाहरण

आगरा के पास फ़ैक्टरियों का धुआँ ताजमहल के सफ़ेद संगमरमर को पीला कर रहा था। एम.सी. मेहता (ताज ट्रैपेज़ियम) केस में सुप्रीम कोर्ट ने इन फ़ैक्टरियों से कहा कि प्राकृतिक गैस जैसा साफ़ ईंधन अपनाएँ या वहाँ से हटें। यही है अनुच्छेद 48A का असर।

क़ानून और केसअनुच्छेद 48A: पर्यावरण क़ानून और मुख्य केस

संसद ने अनुच्छेद 48A को लागू करने के लिए कई क़ानून बनाए हैं:

क़ानूनक्या करता है
वन्य जीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972संरक्षित जानवरों के शिकार पर रोक; राष्ट्रीय उद्यान और अभयारण्य
जल अधिनियम, 1974 और वायु अधिनियम, 1981प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड फ़ैक्टरियों और शहरों की जाँच करते हैं
वन (संरक्षण) अधिनियम, 1980केंद्र की मंज़ूरी के बिना जंगल की ज़मीन दूसरे काम में नहीं
पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986छाता क़ानून, भोपाल गैस कांड (1984) के बाद बना
राष्ट्रीय हरित अधिकरण अधिनियम, 2010पर्यावरण मामलों के लिए विशेष अदालत (NGT)

मुख्य केस

  • एम.सी. मेहता बनाम भारत संघ: गंगा, दिल्ली की हवा और ताजमहल पर कई केस।
  • टी.एन. गोदावर्मन थिरुमुलपाद बनाम भारत संघ (1996 से): "वन" का मतलब शब्दकोश वाला हर जंगल, चाहे मालिक कोई भी हो।
  • एम.के. रंजीतसिंह बनाम भारत संघ (2024): कोर्ट ने कहा कि लोगों को जलवायु परिवर्तन के बुरे असर से बचने का अधिकार है (अनुच्छेद 14 और 21), यह केस गोडावण (ग्रेट इंडियन बस्टर्ड) पक्षी पर था।
अनुच्छेद 48A पर्यावरण संरक्षण, वन और वन्य जीवों की रक्षा, 42वाँ संशोधन 1976, मौलिक कर्तव्य 51A(g), पर्यावरण संरक्षण अधिनियम 1986 और राष्ट्रीय हरित अधिकरण
एक नज़र में अनुच्छेद 48A: राज्य क्या करेगा, कब जोड़ा गया, और इसके पीछे के क़ानून।

त्वरित दोहराईयाद रखने योग्य मुख्य बातें

  • अनुच्छेद 48A: राज्य पर्यावरण की रक्षा और सुधार का प्रयास करेगा।
  • साथ ही वन और वन्य जीवों की रक्षा करेगा।
  • 42वें संशोधन, 1976 से जोड़ा गया, कर्तव्य 51A(g) के साथ।
  • अदालतें इसे अनुच्छेद 21 के साथ पढ़ती हैं: साफ़ पर्यावरण का अधिकार।
  • मुख्य क़ानून: पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986; विशेष अदालत: NGT (2010)।

UPSC · राज्य PSC · न्यायपालिकाअनुच्छेद 48A: परीक्षा कॉर्नर

  • प्रीलिम्स जाल: "अनुच्छेद 48A 1950 के मूल संविधान में था।" ग़लत। यह 42वें संशोधन, 1976 से आया।
  • तथ्य (SSC, स्कूल): 48A राज्य का कर्तव्य (DPSP) है; 51A(g) नागरिक का कर्तव्य (मौलिक कर्तव्य)। दोनों 1976 में आए।
  • मेन्स: "अदालतों ने अनुच्छेद 21 के ज़रिये अनुच्छेद 48A को लागू होने वाला अधिकार बना दिया है।" केसों के साथ चर्चा करें।

अभ्यास प्रश्नख़ुद को परखें: अनुच्छेद 48A

अनुच्छेद 48A (पर्यावरण, वन और वन्य जीवों की रक्षा) किस संशोधन से संविधान में जोड़ा गया?

शंका समाधानअक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भारतीय संविधान का अनुच्छेद 48A क्या है?

अनुच्छेद 48A एक नीति निदेशक तत्व है। इसके अनुसार राज्य पर्यावरण की रक्षा और सुधार का, और देश के वन तथा वन्य जीवों की रक्षा का प्रयास करेगा। इसे 1976 में जोड़ा गया।

अनुच्छेद 48A और अनुच्छेद 51A(g) में क्या अंतर है?

अनुच्छेद 48A राज्य का कर्तव्य है (भाग IV)। अनुच्छेद 51A(g) हर नागरिक का कर्तव्य है (भाग IVA) कि वह जंगल, झील, नदी और वन्य जीवों की रक्षा करे और जीवों पर दया रखे।

क्या अनुच्छेद 48A के तहत कोर्ट जा सकते हैं?

सिर्फ़ 48A के तहत नहीं, क्योंकि नीति निदेशक तत्व कोर्ट से लागू नहीं होते (अनुच्छेद 37)। पर अदालतें साफ़ पर्यावरण को अनुच्छेद 21 के जीवन के अधिकार का हिस्सा मानती हैं, इसलिए प्रदूषण के केस अनुच्छेद 21 के तहत सुने जाते हैं।