मूल पाठअनुच्छेद 37 का आधिकारिक पाठ
37. इस भाग में अंतर्विष्ट तत्वों का लागू होना—
इस भाग में अंतर्विष्ट उपबंध किसी न्यायालय द्वारा प्रवर्तनीय नहीं होंगे किंतु फिर भी इनमें अधिकथित तत्व देश के शासन में मूलभूत हैं और विधि बनाने में इन तत्वों को लागू करना राज्य का कर्तव्य होगा।
किसी कोर्ट द्वारा लागू नहीं: सिर्फ़ इसलिए केस नहीं कर सकते कि राज्य ने किसी निदेशक तत्व को नहीं माना।
शासन में मूलभूत: फिर भी देश चलाने के ये बुनियादी लक्ष्य हैं।
राज्य का कर्तव्य: संसद और विधानसभाओं को क़ानून बनाते समय इन्हें लागू करना है।
असली जाँच मतदाता करता है: जो सरकार इन्हें भूले, उसे चुनाव में जनता को जवाब देना पड़ता है।
🏠 रोज़मर्रा की मिसाल
माँ-बाप की सीख सोचिए: "अच्छे से पढ़ो, अच्छा खाओ, दूसरों की मदद करो।" न मानने पर पुलिस नहीं पकड़ेगी, पर अच्छी ज़िंदगी इसी पर बनती है। निदेशक तत्व सरकार के लिए संविधान की ऐसी ही सीख हैं।
🇮🇳 असली भारतीय उदाहरण
अनुच्छेद 47 राज्य से पोषण सुधारने को कहता है। सिर्फ़ अनुच्छेद 47 के आधार पर कोर्ट नई योजना का आदेश नहीं दे सकता, पर संसद ने राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम, 2013 बनाकर इसे लागू किया। अब राशन की दुकान से सस्ता अनाज उस क़ानून के तहत अधिकार है, जिसे माँगा जा सकता है।
निदेशक तत्व बनाम अधिकारअनुच्छेद 37: नीति निदेशक तत्व बनाम मूल अधिकार
| बिंदु | मूल अधिकार (भाग III) | नीति निदेशक तत्व (भाग IV) |
|---|---|---|
| कोर्ट | लागू कराए जा सकते हैं (अनुच्छेद 32, 226) | लागू नहीं कराए जा सकते (अनुच्छेद 37) |
| स्वभाव | राज्य पर रोक: "मत करो" | राज्य के लक्ष्य: "करने की कोशिश करो" |
| उद्देश्य | राजनीतिक लोकतंत्र | सामाजिक और आर्थिक लोकतंत्र |
| विचार का स्रोत | अमेरिका (बिल ऑफ़ राइट्स) | आयरलैंड (1937 का संविधान) |
कोर्ट ने क्या कहा
- मद्रास राज्य बनाम चंपकम दोराइराजन (1951): निदेशक तत्व और मूल अधिकार टकराएँ तो मूल अधिकार ऊपर रहेगा।
- मिनर्वा मिल्स बनाम भारत संघ (1980): भाग III और IV में तालमेल और संतुलन ज़रूरी है, और यह संतुलन मूल ढाँचे का हिस्सा है।
- कोर्ट अक्सर मूल अधिकारों और क़ानूनों को समझने के लिए निदेशक तत्वों की मदद लेते हैं।

त्वरित दोहराईयाद रखने योग्य मुख्य बातें
- निदेशक तत्व किसी कोर्ट द्वारा लागू नहीं कराए जा सकते (गैर-न्यायोचित)।
- ये देश के शासन में मूलभूत हैं।
- क़ानून बनाते समय इन्हें लागू करना राज्य का कर्तव्य है।
- चंपकम दोराइराजन (1951): टकराव में मूल अधिकार ऊपर।
- मिनर्वा मिल्स (1980): भाग III और IV का तालमेल मूल ढाँचा है।
UPSC · राज्य PSC · न्यायपालिकाअनुच्छेद 37: परीक्षा कॉर्नर
- प्रीलिम्स जाल: "निदेशक तत्व कोर्ट में लागू नहीं होते, इसलिए इनका कोई क़ानूनी महत्व नहीं।" ग़लत। अनुच्छेद 37 इन्हें शासन में मूलभूत कहता है, और कोर्ट क़ानूनों की व्याख्या में इनका उपयोग करते हैं।
- तथ्य (SSC, स्कूल): "देश के शासन में मूलभूत" शब्द अनुच्छेद 37 में हैं, और निदेशक तत्वों का विचार आयरलैंड के संविधान से आया।
- मेन्स (150 शब्द): "निदेशक तत्व गैर-न्यायोचित हैं, फिर भी मूलभूत।" मिनर्वा मिल्स के संदर्भ में यह विरोधाभास समझाइए।
अभ्यास प्रश्नख़ुद को परखें: अनुच्छेद 37
अनुच्छेद 37 के बारे में कथन: 1. निदेशक तत्व किसी कोर्ट द्वारा लागू नहीं कराए जा सकते। 2. निदेशक तत्व देश के शासन में मूलभूत हैं। कौन-सा/से सही है/हैं?
शंका समाधानअक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
भारतीय संविधान का अनुच्छेद 37 क्या है?
अनुच्छेद 37 कहता है कि भाग IV के निदेशक तत्व किसी कोर्ट द्वारा लागू नहीं कराए जा सकते, पर ये देश के शासन में मूलभूत हैं और क़ानून बनाते समय राज्य को इन्हें लागू करना है।
निदेशक तत्वों को कोर्ट में लागू न होने वाला क्यों बनाया गया?
1950 में भारत के पास इतना पैसा और साधन नहीं थे कि सबको एक साथ रोज़गार, इलाज और पढ़ाई की गारंटी दी जा सके। इसलिए इन्हें धीरे-धीरे पूरे होने वाले लक्ष्य बनाया गया, कोर्ट में माँगे जाने वाले अधिकार नहीं।
क्या कोई निदेशक तत्व कभी लागू कराया जा सकता है?
सीधे नहीं। पर जब संसद किसी निदेशक तत्व पर क़ानून बना देती है, जैसे राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम, 2013, तो उस क़ानून के अधिकार लागू कराए जा सकते हैं।