मूल पाठअनुच्छेद 44 का आधिकारिक पाठ
44. नागरिकों के लिए एक समान सिविल संहिता—
राज्य, भारत के समस्त राज्यक्षेत्र में नागरिकों के लिए एक समान सिविल संहिता प्राप्त कराने का प्रयास करेगा।
यहाँ सिविल संहिता का मतलब निजी मामले हैं: विवाह, तलाक़, उत्तराधिकार, गोद लेना।
आज ये ज़्यादातर पर्सनल लॉ से चलते हैं, जो हिंदू, मुस्लिम, ईसाई, पारसी और दूसरों के लिए अलग हैं।
अनुच्छेद 44 राज्य से सभी नागरिकों के लिए एक संहिता का प्रयास करने को कहता है।
यह नीति निदेशक तत्व है: कोई कोर्ट सरकार को UCC बनाने का आदेश नहीं दे सकता।
🏠 रोज़मर्रा की मिसाल
सोचिए एक स्कूल में परीक्षा के नियम सब कक्षाओं के लिए एक हैं, पर खेल दिवस के नियम हर कक्षा के अलग हैं। UCC का मतलब होगा कि "खेल दिवस", यानी परिवार से जुड़े मामलों, के लिए भी एक ही नियम-पुस्तिका हो।
🇮🇳 असली भारतीय उदाहरण
गोवा में पुराने पुर्तगाली सिविल कोड पर आधारित पारिवारिक क़ानून वहाँ सभी धर्मों के लोगों पर लागू है। उत्तराखंड में 27 जनवरी 2025 से राज्य का UCC विवाह, तलाक़ और उत्तराधिकार के साझा नियम बनाता है, और विवाह व लिव-इन संबंधों का पंजीकरण माँगता है।
समयरेखाअनुच्छेद 44: समान नागरिक संहिता की समयरेखा और बहस
| वर्ष | घटना |
|---|---|
| 1950 | अनुच्छेद 44 भाग IV में नीति निदेशक तत्व के रूप में रखा गया, मूल अधिकार के रूप में नहीं |
| 1954 से 1956 | विशेष विवाह अधिनियम (कोई भी चाहे तो सिविल विवाह); हिंदू विवाह अधिनियम और हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम |
| 1985 | शाह बानो: सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि साझा सिविल संहिता राष्ट्रीय एकता में मदद करेगी |
| 1995 | सरला मुद्गल: कोर्ट ने सरकार से अनुच्छेद 44 पर विचार करने को कहा |
| 2018 | 21वाँ विधि आयोग: UCC "इस समय न ज़रूरी है न वांछनीय" |
| 2023 | 22वें विधि आयोग ने फिर से जनता की राय माँगी |
| 27 जनवरी 2025 | उत्तराखंड में UCC लागू (अनुसूचित जनजातियाँ इससे बाहर) |
| 2026 | गुजरात UCC विधेयक पारित (24 मार्च), राष्ट्रपति की मंज़ूरी मिली; लागू होने की तारीख़ अभी अधिसूचित नहीं |
दोनों पक्ष, संक्षेप में
- समर्थकों का कहना है कि एक संहिता से क़ानून के सामने बराबरी, महिलाओं को न्याय और राष्ट्रीय एकता मज़बूत होगी, और क़ानून आसान होंगे।
- चिंता जताने वाले अनुच्छेद 25 (धर्म की स्वतंत्रता), रीति-रिवाज़ों की विविधता, ख़ासकर जनजातीय समुदायों में, की बात करते हैं और कहते हैं कि बदलाव व्यापक सलाह-मशविरे से हो।
- परीक्षा में आमतौर पर तथ्य (पाठ, केस, गोवा, उत्तराखंड) पूछे जाते हैं, और मेन्स में दोनों पक्षों का संतुलन चाहिए।

त्वरित दोहराईयाद रखने योग्य मुख्य बातें
- अनुच्छेद 44: राज्य नागरिकों के लिए समान सिविल संहिता का प्रयास करेगा।
- निजी मामले: विवाह, तलाक़, उत्तराधिकार, गोद लेना।
- गोवा में साझा पारिवारिक क़ानून (पुर्तगाली सिविल कोड); उत्तराखंड UCC 27 जनवरी 2025 से लागू।
- मुख्य केस: शाह बानो (1985), सरला मुद्गल (1995)।
- उदार-बौद्धिक सिद्धांत माना जाता है।
UPSC · राज्य PSC · न्यायपालिकाअनुच्छेद 44: परीक्षा कॉर्नर
- प्रीलिम्स जाल: "समान नागरिक संहिता एक मूल अधिकार है।" ग़लत। यह नीति निदेशक तत्व है (अनुच्छेद 44, भाग IV)।
- तथ्य (SSC / स्कूल): आज़ादी के बाद अपना UCC लागू करने वाला पहला राज्य उत्तराखंड (2025) है; गोवा की साझा संहिता उसके भारत में शामिल होने से पहले की है।
- मेन्स: "समान नागरिक संहिता की संवैधानिक स्थिति और इसके पक्ष-विपक्ष के मुख्य तर्कों की चर्चा करें।"
अभ्यास प्रश्नख़ुद को परखें: अनुच्छेद 44
समान नागरिक संहिता का उल्लेख भारतीय संविधान के किस भाग में है?
शंका समाधानअक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
भारतीय संविधान का अनुच्छेद 44 क्या है?
अनुच्छेद 44 एक नीति निदेशक तत्व है। यह कहता है कि राज्य पूरे भारत में नागरिकों के लिए समान सिविल संहिता का प्रयास करेगा, यानी विवाह, तलाक़, उत्तराधिकार और गोद लेने पर साझा नियम।
किन राज्यों में समान नागरिक संहिता है?
गोवा में लंबे समय से पुर्तगाली सिविल कोड पर आधारित साझा पारिवारिक क़ानून है। उत्तराखंड का UCC 27 जनवरी 2025 से लागू है। गुजरात के UCC क़ानून को 2026 में राष्ट्रपति की मंज़ूरी मिल गई है, पर लागू होने की तारीख़ अभी अधिसूचित नहीं हुई।
क्या सुप्रीम कोर्ट सरकार को समान नागरिक संहिता बनाने का आदेश दे सकता है?
नहीं। अनुच्छेद 44 नीति निदेशक तत्व है और अनुच्छेद 37 के तहत किसी कोर्ट में लागू नहीं कराया जा सकता। कोर्ट ने केवल सरकार से आग्रह किया है, जैसे सरला मुद्गल (1995) में। UCC बनाना विधायिका का काम है।