भाग IV ⚖️ राज्य की नीति के निदेशक तत्व लागू · कभी संशोधित नहीं

अनुच्छेद 42: काम की न्यायसंगत और मानवोचित दशाएँ तथा प्रसूति सहायता

मज़दूर को जान की सुरक्षा और नौकरी में से एक चुनने को मजबूर नहीं होना चाहिए, और बच्चा होने पर माँ की नौकरी नहीं जानी चाहिए। अनुच्छेद 42 राज्य से यही दोनों पक्का करने को कहता है।

मूल पाठअनुच्छेद 42 का आधिकारिक पाठ

हिन्दी · आधिकारिक पाठ

42. काम की न्यायसंगत और मानवोचित दशाओं का तथा प्रसूति सहायता का उपबंध—

राज्य काम की न्यायसंगत और मानवोचित दशाओं को सुनिश्चित करने के लिए और प्रसूति सहायता के लिए उपबंध करेगा।

In Simple Words / आसान शब्दों में

काम न्यायसंगत (उचित) हालात में हो: सही घंटे, आराम और मज़दूरी।

काम मानवोचित हालात में हो: सुरक्षित, साफ़, पीने का पानी और शौचालय हों।

कामकाजी महिलाओं को बच्चा होने पर प्रसूति सहायता मिले: सवेतन छुट्टी और मदद।

यह भाग IV के सबसे छोटे अनुच्छेदों में से है: सिर्फ़ एक वाक्य।

🏠 रोज़मर्रा की मिसाल

अच्छा किसान अपने बैल को आराम, छाँव और पानी देता है, वरना वह बीमार पड़ जाता है। मज़दूर इंसान हैं, मशीन नहीं; अनुच्छेद 42 कहता है कि कार्यस्थल उनकी इससे कहीं ज़्यादा परवाह करे।

🇮🇳 असली भारतीय उदाहरण

कानपुर के एक दफ़्तर में काम करने वाली सुनीता को बच्चा होने पर 26 हफ़्ते की सवेतन छुट्टी मिलती है, और उसकी नौकरी सुरक्षित रहती है। लौटने पर वह बच्चे को दफ़्तर के क्रेच में छोड़ सकती है। यही अनुच्छेद 42 है।

इसे लागू करने वाले क़ानूनअनुच्छेद 42: काम की मानवोचित दशाओं और प्रसूति सहायता के क़ानून

क़ानूनक्या देता है
मातृत्व लाभ अधिनियम, 1961 (अब सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020 में)2017 से 26 हफ़्ते सवेतन मातृत्व अवकाश; 50 या अधिक कर्मचारियों वाली जगह पर क्रेच
व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य और कार्य दशा संहिता, 2020कार्यस्थल पर सुरक्षा, स्वास्थ्य, काम के घंटे और कल्याण; कारख़ाना अधिनियम, 1948 की जगह
चार श्रम संहिताएँ (21 नवंबर 2025 से लागू)मज़दूरी, सुरक्षा और सामाजिक सुरक्षा पर नए नियम एक साथ

मुख्य केस

  • दिल्ली नगर निगम बनाम महिला कर्मचारी (मस्टर रोल) (2000): नगर निगम में दिहाड़ी पर काम करने वाली महिलाओं को मातृत्व अवकाश नहीं दिया गया। सुप्रीम कोर्ट ने अनुच्छेद 42 के आधार पर कहा कि उन्हें भी मातृत्व लाभ मिलेगा।
अनुच्छेद 42 काम की न्यायसंगत और मानवोचित दशाएँ तथा प्रसूति सहायता: सुरक्षित कार्यस्थल, मातृत्व लाभ अधिनियम 1961, 26 हफ़्ते सवेतन छुट्टी, श्रम संहिताएँ 2025
एक नज़र में अनुच्छेद 42: उचित काम, सुरक्षित काम और कामकाजी माँओं की देखभाल।

त्वरित दोहराईयाद रखने योग्य मुख्य बातें

  • अनुच्छेद 42: काम की न्यायसंगत और मानवोचित दशाएँ और प्रसूति सहायता।
  • मातृत्व लाभ अधिनियम, 1961: 2017 के संशोधन से 26 हफ़्ते सवेतन छुट्टी।
  • अब श्रम संहिताओं में शामिल, 21 नवंबर 2025 से लागू।
  • दिल्ली नगर निगम बनाम महिला कर्मचारी (2000): दिहाड़ी महिलाओं को भी मातृत्व लाभ।
  • श्रेणी: समाजवादी सिद्धांत।

UPSC · राज्य PSC · न्यायपालिकाअनुच्छेद 42: परीक्षा कॉर्नर

  • प्रीलिम्स जाल: "प्रसूति सहायता भाग III का मूल अधिकार है।" ग़लत। यह अनुच्छेद 42 का निदेशक तत्व है; क़ानून इसे बाध्यकारी बनाते हैं।
  • तथ्य (SSC/स्कूल): मातृत्व लाभ अधिनियम में 2017 के संशोधन से सवेतन मातृत्व अवकाश 12 से 26 हफ़्ते हुआ।
  • मेन्स (150 शब्द): नई श्रम संहिताएँ असंगठित क्षेत्र के मज़दूरों के लिए अनुच्छेद 42 को कैसे लागू करती हैं?

अभ्यास प्रश्नख़ुद को परखें: अनुच्छेद 42

कौन सा नीति निदेशक तत्व काम की न्यायसंगत और मानवोचित दशाओं तथा प्रसूति सहायता से जुड़ा है?

शंका समाधानअक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भारतीय संविधान का अनुच्छेद 42 क्या है?

अनुच्छेद 42 एक नीति निदेशक तत्व है। यह राज्य से कहता है कि काम की न्यायसंगत और मानवोचित दशाओं और प्रसूति सहायता के लिए व्यवस्था करे।

भारतीय क़ानून में कितने हफ़्ते का मातृत्व अवकाश मिलता है?

मातृत्व लाभ (संशोधन) अधिनियम, 2017 से 26 हफ़्ते का सवेतन मातृत्व अवकाश। यह नियम अब सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020 में है।

क्या मज़दूर अनुच्छेद 42 के तहत कोर्ट जा सकता है?

सिर्फ़ अनुच्छेद 42 के आधार पर नहीं, क्योंकि निदेशक तत्व लागू नहीं कराए जा सकते (अनुच्छेद 37)। लेकिन इसे लागू करने वाले श्रम क़ानूनों के तहत मज़दूर कोर्ट जा सकता है, और कोर्ट उन क़ानूनों को समझने में अनुच्छेद 42 का सहारा लेते हैं।