मूल पाठअनुच्छेद 47 का आधिकारिक पाठ
47. पोषाहार स्तर और जीवन स्तर को ऊँचा करने तथा लोक स्वास्थ्य का सुधार करने का राज्य का कर्तव्य—
राज्य, अपने लोगों के पोषाहार स्तर और जीवन स्तर को ऊँचा करने और लोक स्वास्थ्य के सुधार को अपने प्राथमिक कर्तव्यों में मानेगा और राज्य, विशिष्टतया, मादक पेयों और स्वास्थ्य के लिए हानिकर ओषधियों का, औषधीय प्रयोजनों से भिन्न, उपभोग का प्रतिषेध करने का प्रयास करेगा।
राज्य के तीन प्राथमिक कर्तव्य: बेहतर पोषण, बेहतर जीवन स्तर और बेहतर लोक स्वास्थ्य।
ख़ास तौर पर राज्य शराब और हानिकारक नशीली चीज़ों के सेवन को रोकने का प्रयास करे।
दवा के रूप में इस्तेमाल की छूट है: डॉक्टर की लिखी दवा या खाँसी का सिरप प्रतिबंधित नहीं।
यह निदेशक तत्व है: शराबबंदी हर राज्य ख़ुद तय करता है। पूरे देश में एक साथ रोक नहीं है।
🏠 रोज़मर्रा की मिसाल
अनुच्छेद 47 राज्य से घर की समझदार माँ जैसा बर्ताव चाहता है: वह देखती है कि सब ठीक से खाएँ, बीमार बच्चे को डॉक्टर के पास ले जाती है, और शराब की बोतल घर में घुसने नहीं देती।
🇮🇳 असली भारतीय उदाहरण
बिहार के एक गाँव की सीमा कहती है कि शराबबंदी (2016) के बाद उसके पति की कमाई घर के खाने और बच्चों की पढ़ाई पर ख़र्च होती है। उसी गाँव में बच्चे स्कूल में मिड-डे मील खाते हैं और परिवार राशन की दुकान से सस्ता अनाज लेते हैं। ये सब अनुच्छेद 47 के काम हैं।
क़ानून और योजनाएँअनुच्छेद 47: पोषण, लोक स्वास्थ्य और मद्यनिषेध के क़ानून
| अनुच्छेद 47 का लक्ष्य | इसे लागू करने वाला क़ानून या योजना |
|---|---|
| पोषण | राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम 2013 (सस्ता राशन), पीएम पोषण (मिड-डे मील), आँगनवाड़ी का खाना |
| लोक स्वास्थ्य | सरकारी अस्पताल और स्वास्थ्य केंद्र, टीकाकरण अभियान |
| मद्यनिषेध | गुजरात, बिहार (2016), नागालैंड और मिज़ोरम में शराबबंदी; नशीली दवाओं पर NDPS अधिनियम |
अदालतों ने क्या कहा
- विंसेंट पानिकुरलंगरा बनाम भारत संघ (1987): सुप्रीम कोर्ट ने अनुच्छेद 47 को अनुच्छेद 21 के साथ पढ़कर कहा कि लोक स्वास्थ्य बनाए रखना जीवन के अधिकार का हिस्सा है, इसलिए राज्य को असुरक्षित दवाओं पर क़दम उठाना होगा।
- अदालतें आम तौर पर राज्यों की शराबबंदी को सही मानती रही हैं, क्योंकि अनुच्छेद 47 ख़ुद मद्यनिषेध की बात करता है।

त्वरित दोहराईयाद रखने योग्य मुख्य बातें
- पोषण, जीवन स्तर और लोक स्वास्थ्य राज्य के प्राथमिक कर्तव्यों में हैं।
- राज्य शराब और हानिकारक नशे के प्रतिषेध का प्रयास करेगा।
- अपवाद: औषधीय प्रयोजन।
- शराबबंदी वाले राज्य: गुजरात, बिहार, नागालैंड, मिज़ोरम।
- श्रेणी: समाजवादी (पोषण, स्वास्थ्य) और गांधीवादी (मद्यनिषेध)। कभी संशोधित नहीं।
UPSC · राज्य PSC · न्यायपालिकाअनुच्छेद 47: परीक्षा कॉर्नर
- प्रीलिम्स जाल: "अनुच्छेद 47 हर तरह की शराब पर, दवाओं में भी, रोक लगाता है।" ग़लत। दवा के रूप में छूट है, और यह केवल प्रयास करने को कहता है; ख़ुद कोई रोक नहीं लगाता।
- तथ्य (SSC / स्कूल): अनुच्छेद 47 पोषण, जीवन स्तर और लोक स्वास्थ्य को राज्य के "प्राथमिक कर्तव्य" कहता है, जो किसी निदेशक तत्व के लिए बहुत मज़बूत शब्द हैं।
- मेन्स: "शराबबंदी परिवारों को बचाती है पर राज्य की आमदनी घटाती है।" अनुच्छेद 47 के संदर्भ में चर्चा करें।
अभ्यास प्रश्नख़ुद को परखें: अनुच्छेद 47
अनुच्छेद 47 में मादक पेय और हानिकारक नशीली दवाओं के प्रतिषेध में कौन सा अपवाद है?
शंका समाधानअक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
भारतीय संविधान का अनुच्छेद 47 क्या है?
अनुच्छेद 47 एक निदेशक तत्व है। यह पोषण और जीवन स्तर ऊँचा करने और लोक स्वास्थ्य सुधारने को राज्य का प्राथमिक कर्तव्य बनाता है, और दवा के सिवाय शराब और हानिकारक नशे पर रोक का प्रयास करने को कहता है।
क्या अनुच्छेद 47 के तहत पूरे भारत में शराबबंदी है?
नहीं। अनुच्छेद 47 कोर्ट से लागू नहीं होता और हर राज्य ख़ुद फ़ैसला करता है। गुजरात, बिहार, नागालैंड और मिज़ोरम में शराबबंदी है; ज़्यादातर राज्य लाइसेंस और टैक्स के साथ शराब की अनुमति देते हैं।
कौन सी योजनाएँ अनुच्छेद 47 को लागू करती हैं?
राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम 2013 (राशन की दुकान), पीएम पोषण (मिड-डे मील) और आँगनवाड़ी का पोषण मुख्य हैं, साथ ही लोक स्वास्थ्य कार्यक्रम।