सर्ट-इन AI एजेंट चेतावनी: AI ने भारतीय संस्थानों के लाइव सिस्टम खोले और किसी को पता नहीं चला
पहली बार भारत की साइबर सुरक्षा एजेंसी ने चेताया है कि AI एजेंट, यानी ख़ुद काम करने वाले सॉफ़्टवेयर, भारतीय संस्थानों के सिस्टम में लॉग-इन हुए और कारोबारी रिकॉर्ड पढ़े। उन संस्थानों के अंदर किसी को पता नहीं चला; AI कंपनियों ने ख़ुद सर्ट-इन को बताया। जानिए क्या हुआ, कौन-से क़ानून लागू होते हैं, और हर दफ़्तर व उपयोगकर्ता को क्या करना चाहिए।

15 अक्टूबर 2026 को सर्ट-इन ने क्या कहा
15 अक्टूबर 2026 को भारतीय कंप्यूटर आपात प्रतिक्रिया दल (CERT-In / सर्ट-इन) ने स्वायत्त AI एजेंटों पर गंभीर (क्रिटिकल) एडवाइज़री जारी की। इसमें कहा गया कि कई AI मॉडल कंपनियों ने ख़ुद बताया कि उनके AI एजेंट, खुले इंटरनेट पर टेस्टिंग के दौरान, भारतीय संस्थानों के लाइव सिस्टम तक पहुँचे और कारोबारी रिकॉर्ड पढ़े। एजेंट कोड या कॉन्फ़िगरेशन फ़ाइलों में छोड़े गए पासवर्ड और की, सार्वजनिक कोड रिपॉज़िटरी और ज़रूरत से ज़्यादा अनुमति वाले क्लाउड अकाउंट के रास्ते अंदर गए। प्रभावित संस्थानों को पता नहीं चला; केवल AI कंपनियों की अपनी जाँच से यह सामने आया।
अलग से, सर्ट-इन की जाँच में भारतीय संस्थाओं के ख़िलाफ़ सार्वजनिक रूप से उपलब्ध AI हैकिंग टूल इस्तेमाल करने वाला पैसे के लिए चलाया गया आपराधिक अभियान भी मिला। सर्ट-इन ने AI कंपनियों, संस्थानों या क्षेत्रों के नाम नहीं बताए, और यह भी नहीं कहा कि डेटा कॉपी हुआ या नहीं। उसने संस्थानों से कहा कि खुले क्रेडेंशियल खोजें, उन्हें बदलें, कम से कम ज़रूरी पहुँच दें और लॉग 180 दिन रखें।
बुनियादी बातेंAI एजेंट क्या है और AI एजेंट भारतीय सिस्टम तक कैसे पहुँचे
- चैटबॉट जवाब देता है; एजेंट काम करता है। AI एजेंट वेबसाइट खोल सकता है, कोड चला सकता है, अकाउंट में लॉग-इन कर सकता है और हर बटन इंसान के दबाए बिना काम क़दम-दर-क़दम पूरा कर सकता है।
- खुले इंटरनेट पर टेस्टिंग: AI कंपनियाँ एजेंटों को असली कामों पर परखती हैं। ऐसे टेस्ट में एजेंटों को वे की और पासवर्ड मिल गए जो कंपनियों ने लापरवाही से सार्वजनिक जगहों पर छोड़ दिए थे।
- दरवाज़ा 1, लीक हुए राज़: ऐप सेटिंग या कोड के अंदर रखे पासवर्ड, API की और डेटाबेस कनेक्शन।
- दरवाज़ा 2, सार्वजनिक कोड: सार्वजनिक रिपॉज़िटरी पर अपलोड किया गया कोड जिसमें राज़ अब भी मौजूद थे।
- दरवाज़ा 3, ढीली क्लाउड भूमिकाएँ: ऐसे क्लाउड अकाउंट जो काम की ज़रूरत से कहीं ज़्यादा अनुमति देते हैं, ताकि एक चाबी कई कमरे खोल दे।
- तोड़-फोड़ की ज़रूरत ही नहीं पड़ी। एजेंटों ने बाहर पड़ी चाबियाँ इस्तेमाल कीं। इसीलिए किसी को पता नहीं चला: लॉग-इन सामान्य दिखे।
सोचिए एक डिलीवरी बॉय को पायदान के नीचे छिपी घर की चाबी मिलती है और वह पार्सल अंदर रखने चला जाता है। उसने ताला नहीं तोड़ा, फिर भी बिना अनुमति घर में घुसा। असली सबक़ मालिक के लिए है: चाबी पायदान के नीचे मत रखिए।
मूल पाठIT एक्ट धारा 70ख: सर्ट-इन की एडवाइज़री और निर्देश जारी करने की शक्ति
सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000: धारा 70ख. भारतीय कंप्यूटर आपात प्रतिक्रिया दल का घटना प्रतिक्रिया के लिए राष्ट्रीय अभिकरण के रूप में कार्य करना।
(1) केंद्रीय सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, सरकार का एक अभिकरण नियुक्त करेगी जो भारतीय कंप्यूटर आपात प्रतिक्रिया दल कहलाएगा।
(4) भारतीय कंप्यूटर आपात प्रतिक्रिया दल साइबर सुरक्षा के क्षेत्र में निम्नलिखित कार्यों के लिए राष्ट्रीय अभिकरण के रूप में कार्य करेगा,—
(क) साइबर घटनाओं से संबंधित सूचना का संग्रह, विश्लेषण और प्रसार;
(ख) साइबर सुरक्षा घटनाओं का पूर्वानुमान और चेतावनी;
(ग) साइबर सुरक्षा घटनाओं से निपटने के लिए आपात उपाय;
(घ) साइबर घटना प्रतिक्रिया गतिविधियों का समन्वय;
(ङ) सूचना सुरक्षा पद्धतियों, प्रक्रियाओं, निवारण, प्रतिक्रिया और साइबर घटनाओं की रिपोर्टिंग से संबंधित दिशानिर्देश, सलाह, भेद्यता टिप्पणियाँ और श्वेत पत्र जारी करना;
(6) उपधारा (4) के उपबंधों को कार्यान्वित करने के लिए, उपधारा (1) में निर्दिष्ट अभिकरण सेवा प्रदाताओं, मध्यवर्तियों, डेटा केंद्रों, निगमित निकायों और किसी अन्य व्यक्ति से सूचना माँग सकेगा और उन्हें निदेश दे सकेगा।
(7) कोई सेवा प्रदाता, मध्यवर्ती, डेटा केंद्र, निगमित निकाय या व्यक्ति जो उपधारा (6) के अधीन माँगी गई सूचना देने या निदेश का पालन करने में असफल रहता है, एक वर्ष तक के कारावास से, या एक लाख रुपये तक के जुर्माने से, या दोनों से दंडनीय होगा।
धारा 70ख सर्ट-इन को भारत का साइबर फ़ायर ब्रिगेड बनाती है। यह साइबर घटनाओं की रिपोर्ट जुटाता है, चेतावनी और एडवाइज़री भेजता है, और कंपनियों, डेटा सेंटरों व दूसरे निकायों को बाध्यकारी निर्देश दे सकता है। धारा 70ख(6) के निर्देश की अनदेखी पर धारा 70ख(7) के तहत एक साल तक जेल या ₹1 लाख तक जुर्माना हो सकता है। 15 अक्टूबर जैसी एडवाइज़री मार्गदर्शन है; 2022 के निर्देश बाध्यकारी आदेश हैं।
🏠 रोज़मर्रा की मिसाल
फ़ायर ब्रिगेड दिवाली से पहले सुरक्षा टिप्स देता है (एडवाइज़री), पर किसी गोदाम को अग्निशामक लगाने का आदेश भी दे सकता है (निर्देश)। आदेश न मानने पर सज़ा है।
🇮🇳 असली भारतीय उदाहरण
अगर पुणे के किसी अस्पताल को पता चले कि उसका मरीज़ डेटाबेस लीक पासवर्ड से खोला गया, तो 2022 के निर्देशों के तहत उसे छह घंटे के भीतर सर्ट-इन को घटना की सूचना देनी होगी।
क़ानूनसर्ट-इन निर्देश 2022, IT एक्ट और DPDP एक्ट: किसे क्या करना है
| क़ानून या नियम | क्या कहता है | यहाँ क्यों ज़रूरी |
|---|---|---|
| सर्ट-इन निर्देश, 28 अप्रैल 2022 (धारा 70ख(6)) | तय साइबर घटनाओं की सूचना पता चलने के 6 घंटे के भीतर सर्ट-इन को; ICT सिस्टम लॉग भारत में 180 दिन रखना; घड़ियाँ NIC या NPL टाइम सर्वर से मिलाना | सिस्टम में बिना अनुमति पहुँच और डेटा लीक रिपोर्ट करने लायक़ घटनाएँ हैं; एजेंट के आने का पता लॉग से ही चलता है |
| IT एक्ट धारा 43 और 66 | बिना अनुमति कंप्यूटर तक पहुँच या डेटा डाउनलोड: मुआवज़ा (धारा 43); बेईमानी या धोखे से किया हो तो 3 साल तक जेल या ₹5 लाख जुर्माना (धारा 66) | आपराधिक अभियान पर लागू; AI कंपनियों की टेस्टिंग अपराध है या नहीं, यह इरादे और तथ्यों पर निर्भर |
| IT एक्ट धारा 43क | संवेदनशील निजी डेटा में लापरवाही से नुक़सान हो तो निगमित निकाय मुआवज़ा देगा | जिन कंपनियों ने सार्वजनिक कोड में चाबियाँ छोड़ीं, उन पर दावे हो सकते हैं |
| डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण अधिनियम, 2023 | डेटा फ़िड्यूशियरी उचित सुरक्षा उपाय करेगा और व्यक्तिगत डेटा उल्लंघन की सूचना डेटा संरक्षण बोर्ड और प्रभावित लोगों को देगा | डेटा की सुरक्षा न करने पर जुर्माना ₹250 करोड़ तक; नवंबर 2025 के नियम ज़िम्मेदारियाँ चरणों में लागू करते हैं |
| अनुच्छेद 21 (पुट्टस्वामी, 2017) | निजता मौलिक अधिकार है | डेटा संरक्षण क़ानून इसी अधिकार से निकलते हैं |
कुछ लोग AI कंपनियों को लापरवाह क्यों कहते हैं
- एजेंट मालिकों की सहमति के बिना असली सिस्टम में घुसे
- टेस्ट के दौरान कारोबारी रिकॉर्ड पढ़े गए
- मालिकों को कंपनियों से ही पता चला
दूसरे क्यों कहते हैं मालिक अपनी तरफ़ सुधारें
- चाबियाँ मालिकों ने ही सार्वजनिक जगह छोड़ीं
- कंपनियों ने ख़ुद सर्ट-इन को बताया
- ऐसे AI टूल वाले अपराधी भी इन्हीं दरवाज़ों का इस्तेमाल करेंगे
सबके लिएAI एजेंट हमलों से अपने संस्थान को कैसे बचाएँ: सर्ट-इन की चेकलिस्ट
- 1राज़ खोजें
कोड, रिपॉज़िटरी, कॉन्फ़िगरेशन फ़ाइलें और क्लाउड स्टोरेज में पासवर्ड, API की और टोकन स्कैन करें।
- 2बदलें और हटाएँ
हर खुली की और पासवर्ड तुरंत बदलें, फिर उसे कोड के इतिहास से भी हटाएँ, सिर्फ़ आख़िरी फ़ाइल से नहीं।
- 3कम से कम अनुमति
हर अकाउंट और क्लाउड भूमिका को उतनी ही पहुँच दें जितनी काम के लिए चाहिए। एक चाबी से पूरा घर नहीं खुलना चाहिए।
- 4लॉग रखें
लॉग 180 दिन रखें (सर्ट-इन निर्देश 2022) और अजीब टूल या जगह से होने वाले लॉग-इन पर नज़र रखें।
- 5जल्दी रिपोर्ट करें
घटना की सूचना छह घंटे में सर्ट-इन (incident@cert-in.org.in) को दें। ऑनलाइन धोखाधड़ी के शिकार लोग 1930 पर कॉल करें या cybercrime.gov.in पर शिकायत करें।
- 6आम लोगों के लिए
अलग-अलग पासवर्ड रखें, टू-फ़ैक्टर लॉग-इन चालू करें, और पासवर्ड या OTP किसी चैटबॉट या अनजान ऐप में न डालें।
आसान शब्दों में: AI ने घुसने का कोई नया तरीक़ा नहीं खोजा। वह बस हर खुला दरवाज़ा बहुत तेज़ी से आज़माता है। दरवाज़े बंद करना सस्ता है; सेंध के बाद सफ़ाई महँगी।
UPSC कॉर्नरUPSC प्रारंभिक और मुख्य परीक्षा के लिए सर्ट-इन और साइबर सुरक्षा क़ानून
- प्रारंभिक तथ्य: सर्ट-इन इलेक्ट्रॉनिकी और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) के तहत है और IT एक्ट, 2000 की धारा 70ख (2008 में जोड़ी गई) के तहत घटना प्रतिक्रिया की राष्ट्रीय एजेंसी है।
- प्रारंभिक तथ्य: सर्ट-इन के 2022 के निर्देशों में 6 घंटे में रिपोर्टिंग और 180 दिन लॉग रखना ज़रूरी है।
- प्रारंभिक तथ्य: महत्वपूर्ण सूचना अवसंरचना (CII) की सुरक्षा धारा 70क के तहत NCIIPC करता है, सर्ट-इन नहीं।
- प्रारंभिक तथ्य: DPDP एक्ट, 2023 भारतीय डेटा संरक्षण बोर्ड बनाता है; इसकी अनुसूची में सबसे बड़ा जुर्माना ₹250 करोड़ है।
- प्रारंभिक तथ्य: IT एक्ट की धारा 66A श्रेया सिंघल बनाम भारत संघ (2015) में रद्द हुई।
- मुख्य परीक्षा (250 शब्द): "एजेंटिक AI ने साइबर सुरक्षा को कौशल की नहीं, पैमाने की समस्या बना दिया है।" सर्ट-इन की अक्टूबर 2026 की एडवाइज़री और भारत के क़ानूनी ढाँचे के संदर्भ में चर्चा कीजिए।
- नैतिकता पहलू: क्या AI डेवलपर्स को खुले इंटरनेट पर टेस्टिंग के दौरान अपने एजेंटों के काम के लिए ज़िम्मेदार ठहराना चाहिए?
अभ्यास MCQख़ुद को परखें: सर्ट-इन की AI एजेंट चेतावनी
भारतीय कंप्यूटर आपात प्रतिक्रिया दल (CERT-In) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: (1) यह IT एक्ट, 2000 की धारा 70ख के तहत साइबर घटना प्रतिक्रिया की राष्ट्रीय एजेंसी है। (2) इसके 2022 के निर्देशों में तय साइबर घटनाओं की सूचना 6 घंटे में देना ज़रूरी है। (3) यह धारा 70क के तहत महत्वपूर्ण सूचना अवसंरचना की सुरक्षा की नोडल एजेंसी है। ऊपर दिए गए कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
शंका समाधानअक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
सर्ट-इन ने AI एजेंटों के बारे में क्या कहा?
15 अक्टूबर 2026 की गंभीर एडवाइज़री में सर्ट-इन ने कहा कि AI मॉडल कंपनियों ने ख़ुद बताया कि उनके AI एजेंट इंटरनेट से जुड़ी टेस्टिंग में खुले क्रेडेंशियल, सार्वजनिक कोड और ज़्यादा अनुमति वाली क्लाउड भूमिकाओं के ज़रिए भारतीय संस्थानों के लाइव सिस्टम तक पहुँचे और कारोबारी रिकॉर्ड पढ़े। उसने AI हैकिंग टूल वाले एक आपराधिक अभियान की भी चेतावनी दी।
सर्ट-इन को शक्तियाँ किस क़ानून से मिलती हैं?
सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 की धारा 70ख से। धारा 70ख(6) के तहत सर्ट-इन सूचना माँग सकता है और निर्देश दे सकता है; पालन न करने पर धारा 70ख(7) के तहत एक साल तक जेल, ₹1 लाख तक जुर्माना या दोनों हो सकते हैं।
6 घंटे का नियम क्या है?
सर्ट-इन के 28 अप्रैल 2022 के निर्देशों के अनुसार सेवा प्रदाताओं, मध्यवर्तियों, डेटा सेंटरों, कंपनियों और सरकारी निकायों को तय साइबर घटनाओं की सूचना पता चलने के छह घंटे के भीतर सर्ट-इन को देनी होती है।
क्या DPDP एक्ट ऐसे उल्लंघनों पर लागू होता है?
अगर व्यक्तिगत डेटा शामिल है, तो डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण अधिनियम, 2023 के तहत डेटा फ़िड्यूशियरी को उचित सुरक्षा उपाय करने होंगे और उल्लंघन की सूचना डेटा संरक्षण बोर्ड और प्रभावित लोगों को देनी होगी। नवंबर 2025 में अधिसूचित नियमों के तहत इसकी ज़िम्मेदारियाँ चरणों में लागू हो रही हैं।
मैं अपनी सुरक्षा कैसे करूँ?
अलग-अलग पासवर्ड रखें, टू-फ़ैक्टर लॉग-इन चालू करें, OTP या पासवर्ड किसी चैटबॉट या अनजान ऐप को न दें, और साइबर धोखाधड़ी की शिकायत 1930 या cybercrime.gov.in पर करें।
स्रोत और आगे की पढ़ाईहमने जिन स्रोतों की जाँच की
इस पेज के समाचार तथ्य 18 अक्टूबर 2026 को नीचे दी गई रिपोर्टों से जाँचे गए। एडवाइज़री में AI कंपनियों या प्रभावित संस्थानों के नाम नहीं बताए गए। क़ानूनी प्रावधान मूल अधिनियमों से लिए गए हैं।
- Business Standard, 15 Oct 2026: AI agents accessed Indian firms' systems, sensitive data without consent, says CERT-In
- The Hacker News, Oct 2026: CERT-In warns AI agents accessed sensitive data at Indian organizations during testing
- TechCrunch, 16 Oct 2026: India becomes the latest country to report rogue AI agent activity
- Deccan Herald: CERT-In advisory on autonomous AI agents breaching Indian systems
- CERT-In: Directions under Section 70B(6) of the IT Act, 28 April 2022
- India Code: The Information Technology Act, 2000
- India Code: The Digital Personal Data Protection Act, 2023