केरलम ने विजिलेंस के सेक्शन RTI से बाहर किए: धारा 24(4) क्या इजाज़त देती है और क्या नहीं
22 अक्टूबर 2026 की एक अधिसूचना ने केरलम के सतर्कता और भ्रष्टाचार-निरोधक ब्यूरो (VACB) के T1 और T2 सेक्शन को सूचना के अधिकार क़ानून से बाहर वाली सूची में डाल दिया है। सरकार कहती है कि गुप्त जाँच के लिए गोपनीयता ज़रूरी है; आलोचक कहते हैं कि भ्रष्टाचार-निरोधक इकाई जासूसी एजेंसियों वाले प्रावधान के पीछे नहीं छिप सकती। जानिए क़ानून आसान शब्दों में।

अक्टूबर 2026 में केरलम ने क्या फ़ैसला किया
केरलम के सामान्य प्रशासन विभाग ने 22 अक्टूबर 2026 की राजपत्र अधिसूचना जारी की, जो 23 अक्टूबर को सामने आई। इसमें सतर्कता और भ्रष्टाचार-निरोधक ब्यूरो (VACB) निदेशालय के T1 और T2 सेक्शन को उन राज्य आसूचना और सुरक्षा संगठनों की सूची में जोड़ा गया जिन्हें RTI अधिनियम की धारा 24(4) के तहत छूट है। रिपोर्टों के अनुसार T1 संवेदनशील उच्च-स्तरीय जाँच और गुप्त फ़ाइलें देखता है, और T2 सूत्रों की रिपोर्ट, औचक जाँच और ख़ुफ़िया विश्लेषण।
गृह मंत्री रमेश चेन्नितला ने फ़ैसले का बचाव किया और कहा कि विजिलेंस के काम के लिए गोपनीयता ज़रूरी है। BJP नेता के. सुरेंद्रन और CPI(M) नेता पिनराई विजयन ने सरकार पर भ्रष्टाचार की फ़ाइलें छिपाने का आरोप लगाया। T ब्रांच को 2016 में ऐसी ही छूट मिली थी, जिसे केरल हाई कोर्ट में चुनौती के बाद 2022 में वापस ले लिया गया था। 25 अक्टूबर को जाँच के समय 2026 की अधिसूचना पर कोई अदालती आदेश नहीं मिला।
एक नज़र मेंएक नज़र में RTI अधिनियम की धारा 24: मुख्य तथ्य
| बिंदु | तथ्य |
|---|---|
| धारा 24(1) | दूसरी अनुसूची में दर्ज केंद्रीय आसूचना और सुरक्षा संगठन (IB, RAW, NSG आदि) क़ानून से बाहर हैं |
| धारा 24(4) | राज्य सरकार राजपत्र अधिसूचना से अपने आसूचना और सुरक्षा संगठनों को छूट दे सकती है |
| पहला परंतुक | भ्रष्टाचार और मानवाधिकार उल्लंघन के आरोपों की सूचना कभी नहीं रोकी जा सकती |
| मानवाधिकार वाले आवेदन | राज्य सूचना आयोग की मंज़ूरी से, 45 दिन के भीतर |
| धारा 24(5) | हर ऐसी अधिसूचना राज्य विधानमंडल के सामने रखनी होगी |
| केरलम 2026 | 22 अक्टूबर 2026 की अधिसूचना से VACB के T1 और T2 सेक्शन जोड़े गए |
RTI क़ानून को हर सरकारी दफ़्तर के चारों ओर शीशे की दीवार समझिए। धारा 24 कुछ कमरों, जैसे जासूसी और सुरक्षा एजेंसियों, को पर्दा लगाने देती है। पर उन कमरों में भी एक खिड़की साफ़ रहनी चाहिए: भ्रष्टाचार या मानवाधिकार उल्लंघन से जुड़ी हर बात। केरलम में बहस यह है कि क्या भ्रष्टाचार-निरोधक दफ़्तर को पर्दा मिलना चाहिए, और क्या वह साफ़ खिड़की अब भी काम करती है।
🏠 रोज़मर्रा की मिसाल
स्कूल परीक्षा-पत्र वाले कमरे पर ताला लगा सकता है ताकि पेपर लीक न हो। पर अगर कोई अभिभावक शिकायत करे कि प्रधानाचार्य ने दाख़िले के लिए रिश्वत ली, तो स्कूल यह कहकर मना नहीं कर सकता कि शिकायत की फ़ाइल ताले वाले कमरे में है।
🇮🇳 असली भारतीय उदाहरण
तिरुवनंतपुरम का कोई नागरिक पूछे कि किसी अफ़सर के ख़िलाफ़ विजिलेंस जाँच क्यों बंद हुई, तो वह तर्क दे सकता है कि सवाल भ्रष्टाचार के आरोप का है और धारा 24(4) के पहले परंतुक में आता है।
इतिहासकेरल विजिलेंस और RTI: 2005 से 2026 तक की टाइमलाइन
| वर्ष | घटना |
|---|---|
| 2005 | RTI क़ानून बना; धारा 24 केंद्र और राज्यों को आसूचना और सुरक्षा संगठनों को बाहर रखने देती है, भ्रष्टाचार और मानवाधिकार की सूचना छोड़कर। |
| 2006 | केरल ने धारा 24(4) के तहत छूट वाले राज्य संगठनों की पहली सूची अधिसूचित की। |
| 2016 | विजिलेंस की 'T' ब्रांच को RTI से छूट दी गई। |
| 2022 | केरल हाई कोर्ट में चुनौती के बाद राज्य ने 2016 की छूट वापस ली। |
| 25 अगस्त 2026 | केरल का आधिकारिक नाम केरलम हुआ। |
| 22-23 अक्टूबर 2026 | नई अधिसूचना से VACB के T1 और T2 सेक्शन छूट वाली सूची में जुड़े; राजनीतिक विवाद शुरू। |
मूल पाठसूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 की धारा 24(4), 24(5) और 8(1)(ज)
सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005, धारा 24(4)।
इस अधिनियम की कोई बात राज्य सरकार द्वारा स्थापित ऐसे आसूचना और सुरक्षा संगठनों पर लागू नहीं होगी, जिन्हें वह सरकार समय-समय पर राजपत्र में अधिसूचना द्वारा विनिर्दिष्ट करे:
परंतु भ्रष्टाचार और मानव अधिकारों के उल्लंघन के अभिकथनों से संबंधित सूचना इस उपधारा के अधीन अपवर्जित नहीं होगी:
परंतु यह और कि यदि माँगी गई सूचना मानव अधिकारों के उल्लंघन के अभिकथनों के संबंध में है, तो सूचना राज्य सूचना आयोग के अनुमोदन के बाद ही दी जाएगी, और धारा 7 में किसी बात के होते हुए भी ऐसी सूचना अनुरोध मिलने की तारीख़ से पैंतालीस दिन के भीतर दी जाएगी।
धारा 24(5)।
उपधारा (4) के अधीन जारी हर अधिसूचना राज्य विधानमंडल के समक्ष रखी जाएगी।
धारा 8(1)(ज)।
ऐसी सूचना जिससे अन्वेषण, अपराधियों को पकड़ने या उन पर अभियोजन की प्रक्रिया में अड़चन पड़े।
- सूचना का अधिकार अनुच्छेद 19(1)(क) की वाक् और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का हिस्सा है, जैसा सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश राज्य बनाम राज नारायण (1975) और एस.पी. गुप्ता बनाम भारत संघ (1981) में कहा।
- धारा 8(1)(ज) पहले से ही किसी भी दफ़्तर को ऐसी सूचना रोकने देती है जिससे जाँच में अड़चन आए, पूरी छूट के बिना।
- धारा 24(4) की अधिसूचना प्रत्यायोजित विधान है, इसलिए अगर यह क़ानून की सीमा से बाहर जाए तो इसे अनुच्छेद 226 के तहत हाई कोर्ट में चुनौती दी जा सकती है।
क्यों ज़रूरीकेरल विजिलेंस RTI छूट: सरकार बनाम आलोचक
सरकार का पक्ष
- गुप्त जाँच और सूत्रों की रिपोर्ट गोपनीय रहनी चाहिए
- लीक से आरोपी सतर्क हो सकते हैं और मुख़बिर ख़तरे में
- धारा 24(4) राज्य आसूचना इकाइयों को छूट की साफ़ अनुमति देती है
- क़ानून में भ्रष्टाचार वाला परंतुक फिर भी लागू है
आलोचकों का पक्ष
- VACB भ्रष्टाचार-निरोधक संस्था है, जासूसी या सुरक्षा एजेंसी नहीं
- इसकी ज़्यादातर फ़ाइलें भ्रष्टाचार की हैं, जिन्हें परंतुक खुला रखता है
- धारा 8(1)(ज) पहले से चल रही जाँच को बचाती है
- यही क़दम 2022 में अदालती चुनौती के बाद वापस हुआ था
- 1फिर भी आवेदन करें
VACB में RTI लगाएँ और साफ़ लिखें कि यह धारा 24(4) के पहले परंतुक के तहत भ्रष्टाचार के आरोप से जुड़ी है।
- 2पहली अपील
मना होने पर 30 दिन में अपीलीय अधिकारी के पास पहली अपील करें। देखें हमारा RTI पहली अपील का प्रारूप।
- 3दूसरी अपील
पहली अपील के फ़ैसले के 90 दिन के भीतर केरल राज्य सूचना आयोग जाएँ।
- 4अदालत
अधिसूचना को ख़ुद अनुच्छेद 226 के तहत हाई कोर्ट में चुनौती दी जा सकती है।
UPSC कॉर्नरRTI अधिनियम की धारा 24: UPSC प्रीलिम्स और मेन्स के लिए
- प्रीलिम्स: धारा 24 और दूसरी अनुसूची आसूचना और सुरक्षा संगठनों को बाहर रखती हैं, पर भ्रष्टाचार और मानवाधिकार की सूचना के लिए कभी नहीं।
- प्रीलिम्स: छूट वाले संगठन से मानवाधिकार की सूचना सूचना आयोग की मंज़ूरी से 45 दिन में मिलती है (30 में नहीं)।
- प्रीलिम्स: धारा 24(5): राज्य की अधिसूचनाएँ राज्य विधानमंडल के सामने रखी जाती हैं।
- मेन्स (GS II): "धारा 24 की छूट गोपनीयता का पिछला दरवाज़ा बनती जा रही है।" केरलम विजिलेंस के उदाहरण से चर्चा करें।
अभ्यास MCQख़ुद को परखें: केरल विजिलेंस RTI से बाहर: धारा 24(4)
सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 की धारा 24 के संदर्भ में इन कथनों पर विचार करें: (1) राज्य सरकार अपने बनाए आसूचना और सुरक्षा संगठनों को राजपत्र अधिसूचना से छूट दे सकती है। (2) छूट वाले संगठन के लिए भी भ्रष्टाचार के आरोपों की सूचना नहीं रोकी जा सकती। (3) राज्य की ऐसी अधिसूचनाएँ संसद के सामने रखनी होती हैं। ऊपर दिए गए कौन-से कथन सही हैं?
शंका समाधानअक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
क्या केरल ने विजिलेंस को RTI से हटा दिया है?
केरलम ने 22 अक्टूबर 2026 की अधिसूचना से RTI की धारा 24(4) के तहत सिर्फ़ सतर्कता और भ्रष्टाचार-निरोधक ब्यूरो के T1 और T2 सेक्शन को छूट दी है। ब्यूरो का बाक़ी हिस्सा RTI में है।
RTI अधिनियम की धारा 24(4) क्या है?
यह राज्य सरकार को राजपत्र अधिसूचना से अपने आसूचना और सुरक्षा संगठनों को RTI से बाहर रखने देती है, पर भ्रष्टाचार और मानवाधिकार उल्लंघन की सूचना को छोड़कर।
क्या मैं अब भी विजिलेंस से भ्रष्टाचार के मामलों की सूचना माँग सकता हूँ?
हाँ, क़ानूनन। धारा 24(4) का पहला परंतुक कहता है कि भ्रष्टाचार के आरोपों की सूचना नहीं रोकी जा सकती। जो ब्योरा चल रही जाँच में अड़चन डाले, उसे धारा 8(1)(ज) के तहत फिर भी रोका जा सकता है।
क्या ऐसा पहले भी हुआ था?
हाँ। विजिलेंस की T ब्रांच को 2016 में छूट दी गई थी, जो केरल हाई कोर्ट में चुनौती के बाद 2022 में वापस ली गई।
क्या अधिसूचना को चुनौती दी जा सकती है?
हाँ। प्रत्यायोजित विधान होने के कारण, अगर यह धारा 24(4) की सीमा से बाहर जाए, जैसे ऐसे संगठन को छूट देना जो असल में आसूचना या सुरक्षा संगठन नहीं है, तो इसे अनुच्छेद 226 के तहत हाई कोर्ट में चुनौती दी जा सकती है।
स्रोत और आगे की पढ़ाईहमने जिन स्रोतों की जाँच की
तथ्य 25 अक्टूबर 2026 को नीचे दी गई रिपोर्टों से जाँचे गए। अधिसूचना का पूरा पाठ जाँच के समय ऑनलाइन नहीं था; T1 और T2 सेक्शन का विवरण रिपोर्टों के अनुसार है।
- ThePrint: Keralam exempts Vigilance T sections from RTI Act; BJP alleges bid to shield corruption (23 Oct 2026)
- Onmanorama: Kerala takes Vigilance's T1, T2 sections out of RTI ambit (23 Oct 2026)
- The News Minute: Keralam govt exempts 'T' branch of Vigilance from RTI Act
- ThePrint: Vijayan slams Keralam govt over exemption of Vigilance sections from RTI (24 Oct 2026)
- India Code: Right to Information Act, 2005