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कोर्ट फ़ीस बनाम टैक्स: सुप्रीम कोर्ट केरल की बिना सीमा वाली कोर्ट फ़ीस की जाँच क्यों कर रहा है

सिविल कोर्ट में पैसे की वसूली का मुक़दमा करने से पहले कोर्ट फ़ीस देनी पड़ती है, आमतौर पर दावे की रक़म का एक प्रतिशत। केरल ने 2025 में कोर्ट फ़ीस बहुत बढ़ा दी और कई फ़ीस को बिना किसी ऊपरी सीमा के प्रतिशत में ही रखा। अक्टूबर 2026 में सुप्रीम कोर्ट एक तीखे सवाल की जाँच पर सहमत हुआ: जब फ़ीस की कोई सीमा न हो, तो क्या वह फ़ीस न रहकर टैक्स बन जाती है? जानिए केस, क़ानून और यह हर मुक़दमेबाज़ के लिए क्यों अहम है।

कोर्ट फ़ीस बनाम टैक्स: KHCAA याचिका पर सुप्रीम कोर्ट केरल की बिना सीमा वाली मूल्यानुसार कोर्ट फ़ीस जाँचेगा, अनुच्छेद 39क समान न्याय, अनुच्छेद 265, राज्य सूची प्रविष्टि 3, ज़ेनिथ लैंप 1973 और सेट्टी 1988 | court fee vs tax