राज्यपाल की नियुक्ति अनुच्छेद 155: छह राज्यों में नए राज्यपाल, जानिए यह पद कैसे काम करता है
12 अक्टूबर 2026 को राष्ट्रपति ने एक साथ छह राज्यों के राज्यपाल तय किए: दो तबादले और चार नए चेहरे। राज्यपाल को कौन चुनता है, कितने समय के लिए, और क्या राज्यपाल को कभी भी हटाया जा सकता है? संविधान का जवाब आसान शब्दों में, उन अदालती मामलों और विधेयक विवाद के साथ जो इस पद को ख़बरों में रखते हैं।

12 अक्टूबर 2026 को किसकी नियुक्ति हुई
12 अक्टूबर 2026 की राष्ट्रपति भवन विज्ञप्ति में छह राज्यों के राज्यपालों की घोषणा हुई। सिक्किम के राज्यपाल ओम प्रकाश माथुर अब केरलम जाएँगे, और केरलम के राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर तमिलनाडु जाएँगे, जहाँ उनके पास 12 मार्च 2026 से अतिरिक्त प्रभार था। चार नए राज्यपाल: डॉ. सुधा यादव (कर्नाटक), ब्रज मोहन राम (ओडिशा), डॉ. ढाल सिंह बिसेन (उत्तराखंड) और दुष्यंत गौतम (सिक्किम)।
नियुक्तियाँ उस तारीख़ से लागू होंगी जब नियुक्त व्यक्ति पद ग्रहण करेंगे। हर नया राज्यपाल अनुच्छेद 159 के तहत राज्य के हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के सामने शपथ लेता है। केरल (नाम परिवर्तन) अधिनियम, 2026 के 25 अगस्त 2026 से लागू होने के बाद केरल का आधिकारिक नाम केरलम है।
मूल पाठअनुच्छेद 153, 155, 156 और 157: राज्यपाल की नियुक्ति, कार्यकाल और योग्यता
भारत का संविधान, भाग 6, अध्याय 2: कार्यपालिका। राज्यपाल।
153. राज्यों के राज्यपाल। प्रत्येक राज्य के लिए एक राज्यपाल होगा: परंतु इस अनुच्छेद की कोई बात एक ही व्यक्ति को दो या अधिक राज्यों के लिए राज्यपाल नियुक्त किए जाने से निवारित नहीं करेगी।
155. राज्यपाल की नियुक्ति। राज्य के राज्यपाल को राष्ट्रपति अपने हस्ताक्षर और मुद्रा सहित अधिपत्र द्वारा नियुक्त करेगा।
156. राज्यपाल की पदावधि। (1) राज्यपाल, राष्ट्रपति के प्रसादपर्यंत पद धारण करेगा।
(2) राज्यपाल, राष्ट्रपति को संबोधित अपने हस्ताक्षर सहित लेख द्वारा अपना पद त्याग सकेगा।
(3) इस अनुच्छेद के पूर्वगामी उपबंधों के अधीन रहते हुए, राज्यपाल अपने पदग्रहण की तारीख से पाँच वर्ष की अवधि तक पद धारण करेगा: परंतु राज्यपाल, अपने पद की अवधि समाप्त हो जाने पर भी, तब तक पद धारण करता रहेगा जब तक उसका उत्तराधिकारी अपना पद ग्रहण नहीं कर लेता है।
157. राज्यपाल नियुक्त होने के लिए अर्हताएँ। कोई व्यक्ति राज्यपाल नियुक्त होने का पात्र तभी होगा जब वह भारत का नागरिक है और पैंतीस वर्ष की आयु पूरी कर चुका है।
हर राज्य में एक राज्यपाल होता है, जो राज्य का संवैधानिक प्रमुख है, जैसे संघ के लिए राष्ट्रपति। राष्ट्रपति हस्ताक्षर और मुहर वाले अधिपत्र से राज्यपाल नियुक्त करते हैं, जिसका व्यवहार में अर्थ है केंद्रीय मंत्रिपरिषद की सलाह पर। सामान्य कार्यकाल पाँच साल है, पर राज्यपाल "राष्ट्रपति के प्रसादपर्यंत" पद पर रहते हैं, इसलिए केंद्र उन्हें पहले भी बदल या हटा सकता है। एक व्यक्ति दो राज्य सँभाल सकता है, जैसे आर्लेकर ने तमिलनाडु सँभाला।
🏠 रोज़मर्रा की मिसाल
राज्यपाल किसी शाखा स्कूल में भेजे गए प्रधानाचार्य के प्रतिनिधि जैसे हैं: नियुक्ति मुख्यालय से होती है, पर शाखा को उसी की नियम-पुस्तिका, यानी राज्य की चुनी हुई सरकार, के हिसाब से चलाना होता है।
🇮🇳 असली भारतीय उदाहरण
जब ओम प्रकाश माथुर गंगटोक से तिरुवनंतपुरम जाते हैं, तो किसी चुनाव या वोट की ज़रूरत नहीं होती; अनुच्छेद 155 के तहत राष्ट्रपति का अधिपत्र काफ़ी है।
पद कैसे काम करता हैराज्यपाल: योग्यता, शपथ, उन्मुक्ति और शक्तियाँ एक नज़र में
| बिंदु | अनुच्छेद | अर्थ |
|---|---|---|
| योग्यता | 157 | भारत का नागरिक, कम से कम 35 साल की आयु |
| शर्तें | 158 | संसद या राज्य विधानमंडल का सदस्य नहीं; कोई दूसरा लाभ का पद नहीं; राजभवन का निःशुल्क उपयोग; कार्यकाल में वेतन घटाया नहीं जा सकता |
| शपथ | 159 | हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश (या वरिष्ठतम न्यायाधीश) के सामने |
| क्षमादान | 161 | राज्य क़ानूनों के विरुद्ध अपराधों में सज़ा माफ़ या कम कर सकते हैं |
| सलाह पर काम | 163 | मुख्यमंत्री की अध्यक्षता वाली मंत्रिपरिषद की सलाह पर काम, सिवाय जहाँ संविधान विवेक देता है |
| मुख्यमंत्री की नियुक्ति | 164 | मुख्यमंत्री और उनकी सलाह पर दूसरे मंत्रियों की नियुक्ति |
| विधेयक | 200 | स्वीकृति दे सकते हैं, रोक सकते हैं, विधेयक लौटा सकते हैं (धन विधेयक नहीं) या राष्ट्रपति के लिए आरक्षित कर सकते हैं |
| उन्मुक्ति | 361 | सरकारी कामों के लिए किसी अदालत को जवाबदेह नहीं; कार्यकाल में कोई आपराधिक मामला नहीं |
चुनाव नहीं: संविधान सभा ने चुने हुए राज्यपाल का विचार छोड़ दिया, ताकि संसदीय व्यवस्था में दो निर्वाचित प्रमुखों में टकराव न हो। केरल का नाम केरलम कैसे हुआ, यह हमारे अनुच्छेद 3 (नए राज्य और नाम) पेज पर पढ़ें।
अदालती फ़ैसलेक्या राज्यपाल को कभी भी हटाया जा सकता है? बी.पी. सिंघल मामला और प्रसादपर्यंत सिद्धांत
- बी.पी. सिंघल बनाम भारत संघ (2010, पाँच न्यायाधीश): राष्ट्रपति का प्रसाद कभी भी और बिना कारण बताए वापस लिया जा सकता है, पर मनमाने ढंग से या दुर्भावना से नहीं। केंद्र में नई पार्टी आने या उसकी नीतियों से मेल न खाने भर से राज्यपाल को नहीं हटाया जा सकता। मनमाने हटाने को अदालत में चुनौती दी जा सकती है।
- सरकारिया आयोग (1988): राज्यपाल राज्य के बाहर का प्रतिष्ठित व्यक्ति हो, हाल में सक्रिय राजनीति में न रहा हो, और मुख्यमंत्री से सलाह के बाद नियुक्त हो; ठोस कारण के बिना पाँच साल का कार्यकाल न घटाया जाए।
- पुंछी आयोग (2010): पाँच साल का निश्चित कार्यकाल और महाभियोग की तरह राज्य विधानमंडल के प्रस्ताव से ही हटाने का सुझाव दिया। इसे अपनाया नहीं गया।
- शमशेर सिंह बनाम पंजाब राज्य (1974): राज्यपाल संवैधानिक प्रमुख हैं जो विवेक के सीमित क्षेत्रों को छोड़कर मंत्रिपरिषद की सलाह पर काम करते हैं।
"प्रसादपर्यंत" सुनकर लगता है कि राज्यपाल को मनमर्ज़ी से घर भेजा जा सकता है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा, नहीं: प्रसाद मनमर्ज़ी नहीं है। जैसे मैनेजर कर्मचारी का तबादला कभी भी कर सकता है पर निजी रंजिश से नहीं, वैसे ही केंद्र के पास असली और प्रासंगिक कारण होना चाहिए।
ख़बरों मेंराज्यपाल और राज्य के विधेयक: अनुच्छेद 200, तमिलनाडु मामला और राष्ट्रपति संदर्भ
राज्य शिकायत क्यों करते हैं
- राज्यपालों ने विधेयक महीनों या सालों तक रोके रखे
- नियुक्त राज्यपाल चुनी हुई सरकार की रफ़्तार धीमी कर सकते हैं
- तमिलनाडु, केरल और पंजाब जैसे विपक्ष-शासित राज्य अदालत गए
केंद्र इस पद का बचाव क्यों करता है
- राज्यपाल केंद्र और राज्य के बीच कड़ी हैं
- अनुच्छेद 200 असली विकल्प देता है, जिसमें विधेयक राष्ट्रपति के लिए आरक्षित करना भी है
- संविधान में तय समय-सीमा लिखी नहीं है
- तमिलनाडु राज्य बनाम तमिलनाडु के राज्यपाल (8 अप्रैल 2025): दो न्यायाधीशों की पीठ ने कहा कि राज्यपाल विधेयकों पर अनिश्चित काल तक नहीं बैठ सकते, और फ़ैसले के लिए समय-सीमा तय की।
- अनुच्छेद 143 के तहत राष्ट्रपति संदर्भ (20 नवंबर 2025 की राय): पाँच न्यायाधीशों की पीठ ने सलाह दी कि अदालतें तय समय-सीमा या "मानी गई स्वीकृति" नहीं थोप सकतीं, पर लंबी और बिना कारण की निष्क्रियता की सीमित जाँच हो सकती है।
- अक्टूबर 2026 के बदलाव क्यों अहम: तमिलनाडु, कर्नाटक और केरलम में राज्यपाल-राज्य टकराव तीखा रहा है, इसलिए विधेयकों की स्वीकृति और विश्वविद्यालय नियुक्तियों पर नए राज्यपालों पर नज़र रहेगी।
आसान शब्दों में: राज्यपाल को रेफ़री होना है, खिलाड़ी नहीं। ज़्यादातर समय रेफ़री नियम-पुस्तिका (मंत्रिपरिषद की सलाह) मानता है। परेशानी तब शुरू होती है जब रेफ़री गेंद बहुत देर तक पकड़े रहता है।
UPSC कॉर्नरUPSC प्रारंभिक और मुख्य परीक्षा के लिए राज्य का राज्यपाल
- प्रारंभिक तथ्य: अनुच्छेद 155: राष्ट्रपति हस्ताक्षर और मुद्रा सहित अधिपत्र से राज्यपाल नियुक्त करते हैं; अनुच्छेद 156: राष्ट्रपति के प्रसादपर्यंत पद, सामान्यतः पाँच साल।
- प्रारंभिक तथ्य: अनुच्छेद 153 का परंतुक (7वाँ संशोधन, 1956) एक व्यक्ति को दो या अधिक राज्यों का राज्यपाल बनने देता है; तब अनुच्छेद 158(3क) वेतन राज्यों में बाँटता है।
- प्रारंभिक तथ्य: राज्यपाल को शपथ हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश दिलाते हैं (अनुच्छेद 159), राष्ट्रपति नहीं।
- प्रारंभिक तथ्य: संविधान में राज्यपाल पर महाभियोग की कोई प्रक्रिया नहीं है।
- प्रारंभिक तथ्य: केरल का नाम अनुच्छेद 3 के तहत केरल (नाम परिवर्तन) अधिनियम, 2026 से केरलम हुआ, जो 25 अगस्त 2026 से लागू है।
- मुख्य परीक्षा (250 शब्द): "राज्यपाल का पद भारतीय संघवाद में टकराव का बिंदु बन गया है।" बी.पी. सिंघल (2010) और विधेयकों की स्वीकृति पर 2025 के फ़ैसलों के संदर्भ में चर्चा कीजिए।
- मुख्य परीक्षा (150 शब्द): राज्यपालों की नियुक्ति और हटाने पर सरकारिया और पुंछी आयोग की सिफ़ारिशों का परीक्षण कीजिए।
अभ्यास MCQख़ुद को परखें: राज्यपाल की नियुक्ति: अनुच्छेद 155
भारत में राज्य के राज्यपाल के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: (1) राज्यपाल की नियुक्ति राष्ट्रपति अपने हस्ताक्षर और मुद्रा सहित अधिपत्र द्वारा करते हैं। (2) राज्यपाल को पद की शपथ भारत के राष्ट्रपति दिलाते हैं। (3) एक ही व्यक्ति को दो या अधिक राज्यों का राज्यपाल नियुक्त किया जा सकता है। ऊपर दिए गए कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
शंका समाधानअक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
राज्य के राज्यपाल की नियुक्ति कौन करता है?
भारत के राष्ट्रपति, अपने हस्ताक्षर और मुद्रा सहित अधिपत्र द्वारा (अनुच्छेद 155)। व्यवहार में राष्ट्रपति प्रधानमंत्री की अध्यक्षता वाली केंद्रीय मंत्रिपरिषद की सलाह पर काम करते हैं।
राज्यपाल का कार्यकाल कितना होता है?
पद ग्रहण की तारीख़ से पाँच साल (अनुच्छेद 156(3)), पर राज्यपाल राष्ट्रपति के प्रसादपर्यंत पद पर रहते हैं, इसलिए तबादले, हटाने या इस्तीफ़े से कार्यकाल पहले ख़त्म हो सकता है। उत्तराधिकारी के पद ग्रहण तक राज्यपाल बने रहते हैं।
क्या राष्ट्रपति राज्यपाल को कभी भी हटा सकते हैं?
हाँ, प्रसाद बिना कारण बताए वापस लिया जा सकता है, पर बी.पी. सिंघल बनाम भारत संघ (2010) में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इसका इस्तेमाल मनमाने, अनुचित या दुर्भावनापूर्ण ढंग से नहीं हो सकता, जैसे सिर्फ़ इसलिए कि केंद्र में नई पार्टी सत्ता में आई।
अक्टूबर 2026 में किन राज्यों को नए राज्यपाल मिले?
12 अक्टूबर 2026 को: ओम प्रकाश माथुर (केरलम), राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर (तमिलनाडु), डॉ. सुधा यादव (कर्नाटक), ब्रज मोहन राम (ओडिशा), डॉ. ढाल सिंह बिसेन (उत्तराखंड) और दुष्यंत गौतम (सिक्किम)।
राज्यपाल को शपथ कौन दिलाता है?
राज्य पर अधिकारिता रखने वाले हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश, या उनकी अनुपस्थिति में उस कोर्ट के वरिष्ठतम न्यायाधीश (अनुच्छेद 159)।
स्रोत और आगे की पढ़ाईहमने जिन स्रोतों की जाँच की
इस पेज के समाचार तथ्य 19 अक्टूबर 2026 को नीचे दी गई रिपोर्टों से जाँचे गए। हर नियुक्ति नियुक्त व्यक्ति के पद ग्रहण करने पर लागू होती है। संवैधानिक पाठ भारत के संविधान के हिंदी पाठ से लिया गया है।
- Business Today, 12 Oct 2026: President Murmu names new governors for Kerala, Tamil Nadu, Odisha and 3 other states
- All India Radio News: President Murmu appoints Governors in six states
- ANI, 13 Oct 2026: OBC-Dalit representation in focus as President Murmu appoints six Governors
- Manorama Yearbook, 13 Oct 2026: President Murmu appoints 6 Governors
- Onmanorama, 26 Aug 2026: It's official, Kerala is now Keralam as Centre notifies name change
- Constitution of India (Legislative Department)