UNSC सुधार 2026: भारत क्यों कहता है "1945 अब पैमाना नहीं हो सकता"
22 अक्टूबर 2026 को भारत ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में कहा कि 80 साल पहले लड़े गए युद्ध के नतीजे पर बनी सुरक्षा परिषद अपनी वैधता खो रही है। भारत नई स्थायी सीटें चाहता है, सिर्फ़ बारी-बारी वाली सीटें नहीं। जानिए भारत ने क्या कहा, परिषद कैसे काम करती है, सुधार इतना मुश्किल क्यों है, और भारत के लिए इसका मतलब क्या है।

22 अक्टूबर 2026 को भारत ने UN में क्या कहा
संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि राजदूत पी. हरीश ने गुरुवार, 22 अक्टूबर 2026 को महासभा की "सुरक्षा परिषद में न्यायसंगत प्रतिनिधित्व और सदस्यता वृद्धि का प्रश्न" विषय पर बहस में भाषण दिया। उन्होंने कहा कि आठ दशक पहले की जीत से मिला अधिकार आज की अप्रतिनिधिक परिषद की वैधता की कमी को पूरा नहीं कर सकता, और 1945 आज के UN का पैमाना नहीं रह सकता।
भारत ने स्थायी और अस्थायी दोनों श्रेणियों में विस्तार माँगा और चेताया कि सिर्फ़ बारी-बारी वाली सीटें जोड़ने से यथास्थिति और मज़बूत होगी। वीटो पर उन्होंने कहा कि जब तक यह है, सभी स्थायी सदस्यों के पास होना चाहिए, नए और पुराने दोनों, क्योंकि दो दर्जे की स्थायी सदस्यता असमानता को संस्था बना देगी। उन्होंने बताया कि एशिया-प्रशांत में दुनिया की 60% से ज़्यादा आबादी है पर स्थायी सदस्य सिर्फ़ एक, और अंतर-सरकारी वार्ता की आलोचना की जो 15 साल से ज़्यादा समय से बिना किसी मसौदे के चल रही है। उन्होंने उम्मीद जताई कि 81वाँ सत्र इस प्रक्रिया को "एक मसौदा, एक समय-सीमा और एक मंज़िल" देगा। रिपोर्टों में शब्द थोड़े अलग हैं; सुधार पर कोई फ़ैसला नहीं हुआ।
एक नज़र मेंएक नज़र में सुरक्षा परिषद: 2026 के मुख्य तथ्य
| बिंदु | तथ्य |
|---|---|
| सदस्य | 15: 5 स्थायी (P5) + 10 अस्थायी, दो साल के लिए चुने जाते हैं |
| P5 (वीटो शक्ति) | चीन, फ़्रांस, रूस, ब्रिटेन, अमेरिका |
| चुनाव | अस्थायी सदस्यों को महासभा दो-तिहाई बहुमत से चुनती है |
| वीटो | अनुच्छेद 27(3): अहम फ़ैसलों के लिए 9 वोट चाहिए, जिनमें P5 की सहमति हो (परंपरा से अनुपस्थिति वीटो नहीं मानी जाती) |
| पिछला विस्तार | 1965 (11 से 15 सदस्य); स्थायी सीटें कभी नहीं बदलीं |
| भारत का रिकॉर्ड | आठ बार अस्थायी सदस्य, आख़िरी बार 2021-22; 2028-29 के लिए उम्मीदवार |
सुरक्षा परिषद को 1945 में बनी एक हाउसिंग सोसाइटी की प्रबंध समिति की तरह समझिए। बड़ी लड़ाई जीतने वाले पाँच परिवार स्थायी सदस्य बन गए और हर एक को ऐसी चाबी मिली जो कोई भी फ़ैसला रोक सकती है। आज सोसाइटी में चार गुना ज़्यादा फ़्लैट हैं, और सबसे बड़े परिवारों में से एक, भारत, को समिति में दो साल बैठने के लिए हर बार चुनाव लड़ना पड़ता है।
🏠 रोज़मर्रा की मिसाल
अगर किसी क्रिकेट बोर्ड ने 1945 में स्थायी चयनकर्ता चुन लिए होते और फिर कभी नहीं बदले, तो नई टीमों के खिलाड़ियों की कोई स्थायी आवाज़ नहीं होती, चाहे वे कितने भी मैच जीतें। परिषद को लेकर भारत की शिकायत यही है।
🇮🇳 असली भारतीय उदाहरण
भारत कांगो से दक्षिण सूडान तक UN शांति सेना में सबसे ज़्यादा सैनिक भेजने वाले देशों में है, फिर भी जब परिषद तय करती है कि वे सैनिक कहाँ जाएँगे, तब भारत की कोई स्थायी राय नहीं होती।
इतिहाससुरक्षा परिषद सुधार की टाइमलाइन: 1945 से 2026 की बहस तक
| वर्ष | घटना |
|---|---|
| 1945 | सैन फ़्रांसिस्को में UN चार्टर पर हस्ताक्षर; 11 सदस्यों वाली सुरक्षा परिषद बनी: 5 स्थायी (वीटो के साथ) और 6 अस्थायी। भारत संस्थापक सदस्य है। |
| 1963-65 | अब तक का एकमात्र विस्तार: महासभा ने अनुच्छेद 23 बदला; 1965 से परिषद में 15 सदस्य हैं (10 अस्थायी)। |
| 1971 | पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ़ चाइना को चीन की सीट, स्थायी सीट समेत, मिली। |
| 2005 | G4 (भारत, ब्राज़ील, जर्मनी, जापान) ने सुधार योजना रखी; अफ़्रीकी संघ ने एज़ुलविनी सहमति अपनाई; यूनाइटिंग फ़ॉर कंसेंसस (इटली, पाकिस्तान आदि) नई स्थायी सीटों का विरोध करता है। |
| 2009 | महासभा में परिषद सुधार पर अंतर-सरकारी वार्ता (IGN) शुरू हुई। |
| 2021-22 | अस्थायी सदस्य के रूप में भारत का आठवाँ कार्यकाल। |
| जनवरी 2026 | G4 ने IGN में अपना मॉडल रखा: 25-26 सदस्यों की परिषद, जिसमें छह नई स्थायी सीटें हों। |
| 22 अक्टूबर 2026 | भारत ने महासभा में कहा कि 1945 अकेला पैमाना नहीं रह सकता, और एक मसौदा, समय-सीमा और मंज़िल माँगी। |
मूल पाठUN चार्टर के अनुच्छेद 23 और 108, और संविधान का अनुच्छेद 51
संयुक्त राष्ट्र चार्टर, अनुच्छेद 23(1)।
सुरक्षा परिषद में संयुक्त राष्ट्र के पंद्रह सदस्य होंगे। चीन गणराज्य, फ़्रांस, सोवियत समाजवादी गणराज्य संघ, ग्रेट ब्रिटेन और उत्तरी आयरलैंड का यूनाइटेड किंगडम, और संयुक्त राज्य अमेरिका सुरक्षा परिषद के स्थायी सदस्य होंगे। महासभा संयुक्त राष्ट्र के दस अन्य सदस्यों को सुरक्षा परिषद के अस्थायी सदस्य चुनेगी, जिसमें सबसे पहले अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा बनाए रखने तथा संगठन के अन्य उद्देश्यों में सदस्यों के योगदान का, और न्यायसंगत भौगोलिक वितरण का विशेष ध्यान रखा जाएगा।
अनुच्छेद 108. संशोधन।
इस चार्टर के संशोधन संयुक्त राष्ट्र के सभी सदस्यों पर तब लागू होंगे जब उन्हें महासभा के दो-तिहाई सदस्यों के मत से स्वीकार किया जाए और सुरक्षा परिषद के सभी स्थायी सदस्यों सहित संयुक्त राष्ट्र के दो-तिहाई सदस्य अपनी-अपनी संवैधानिक प्रक्रिया के अनुसार उनका अनुसमर्थन कर दें।
भारत का संविधान, अनुच्छेद 51. अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा की अभिवृद्धि।
राज्य (क) अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा की अभिवृद्धि का; (ख) राष्ट्रों के बीच न्यायसंगत और सम्मानपूर्ण संबंधों को बनाए रखने का; (ग) संगठित लोगों के एक-दूसरे से व्यवहारों में अंतरराष्ट्रीय विधि और संधि-बाध्यताओं के प्रति आदर बढ़ाने का; और (घ) अंतरराष्ट्रीय विवादों के माध्यस्थम् द्वारा निपटारे के लिए प्रोत्साहन देने का प्रयास करेगा।
अनुच्छेद 253. अंतरराष्ट्रीय करारों को प्रभावी करने के लिए विधान।
इस अध्याय के पूर्वगामी उपबंधों में किसी बात के होते हुए भी, संसद को किसी अन्य देश या देशों के साथ की गई किसी संधि, करार या अभिसमय अथवा किसी अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन, संगम या अन्य निकाय में किए गए किसी विनिश्चय के कार्यान्वयन के लिए भारत के संपूर्ण राज्यक्षेत्र या उसके किसी भाग के लिए कोई विधि बनाने की शक्ति है।
- अनुच्छेद 108 असली बाधा है: किसी भी नई स्थायी सीट के लिए 193 सदस्यों में से दो-तिहाई का वोट और दो-तिहाई का अनुसमर्थन चाहिए, जिसमें पाँचों स्थायी सदस्य शामिल हों। यानी हर P5 देश सुधार रोक सकता है।
- अनुच्छेद 23 में आज भी "चीन गणराज्य" और "सोवियत संघ" लिखा है; ये सीटें बिना संशोधन के पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ़ चाइना (1971) और रूस (1991) को मिल गईं।
- हमारे संविधान का अनुच्छेद 51(क) और (ग) राज्य से अंतरराष्ट्रीय शांति और अंतरराष्ट्रीय विधि के सम्मान को बढ़ाने को कहता है: भारत की UN कूटनीति का आधार। यह नीति निदेशक तत्व है, अदालत में लागू नहीं होता।
क्यों ज़रूरीस्थायी सीट पर भारत का दावा: ताक़त बनाम बाधाएँ
भारत की ताक़त
- दुनिया का सबसे ज़्यादा आबादी वाला देश और शीर्ष-5 अर्थव्यवस्था
- UN शांति सेना में लंबा योगदान
- संस्थापक सदस्य; परिषद में आठ कार्यकाल
- अलग-अलग समय पर अमेरिका, ब्रिटेन, फ़्रांस और रूस का खुला समर्थन
बाधाएँ
- अनुच्छेद 108 में हर P5 की सहमति चाहिए, और चीन ने भारत का समर्थन नहीं किया
- इटली के नेतृत्व वाला यूनाइटिंग फ़ॉर कंसेंसस, जिसमें पाकिस्तान है, नई स्थायी सीटों का विरोधी
- नए सदस्यों के वीटो पर मतभेद
- IGN के पास अब भी कोई वार्ता-मसौदा नहीं
- 1मसौदा
IGN के सदस्य अलग-अलग पत्रों की जगह एक साझा वार्ता-मसौदे पर सहमत हों।
- 2महासभा में वोट
193 सदस्यों में से दो-तिहाई (129) चार्टर संशोधन को स्वीकार करें।
- 3अनुसमर्थन
पाँचों स्थायी सदस्यों समेत दो-तिहाई सदस्य अपनी संवैधानिक प्रक्रिया से अनुसमर्थन करें।
- 4नई परिषद
तभी नई सीटें लागू होंगी, जैसा 1965 के विस्तार में हुआ था।
UPSC कॉर्नरसुरक्षा परिषद सुधार: UPSC प्रीलिम्स और मेन्स के लिए
- प्रीलिम्स: परिषद में 15 सदस्य; 10 अस्थायी सदस्य महासभा के दो-तिहाई वोट से दो साल के लिए चुने जाते हैं; कार्यकाल पूरा करने वाला सदस्य तुरंत दोबारा नहीं चुना जा सकता।
- प्रीलिम्स: चार्टर संशोधन अनुच्छेद 108 से: दो-तिहाई स्वीकृति और सभी P5 सहित दो-तिहाई अनुसमर्थन।
- प्रीलिम्स: G4 = भारत, ब्राज़ील, जर्मनी, जापान; एज़ुलविनी सहमति = अफ़्रीकी संघ का रुख़ (2005)।
- मेन्स (GS II): "सुरक्षा परिषद 1945 की दुनिया दिखाती है, आज की नहीं।" स्थायी सदस्यता पर भारत के दावे और उसकी बाधाओं की जाँच करें।
अभ्यास MCQख़ुद को परखें: UNSC सुधार: भारत की स्थायी सीट की दावेदारी
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के संदर्भ में इन कथनों पर विचार करें: (1) इसमें 10 अस्थायी सदस्य दो साल के लिए चुने जाते हैं। (2) UN चार्टर में संशोधन के लिए सुरक्षा परिषद के सभी स्थायी सदस्यों सहित दो-तिहाई UN सदस्यों का अनुसमर्थन चाहिए। (3) 1945 के बाद परिषद का दो बार विस्तार हुआ है। ऊपर दिए गए कौन-से कथन सही हैं?
शंका समाधानअक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
22 अक्टूबर 2026 को भारत ने सुरक्षा परिषद सुधार पर क्या कहा?
राजदूत पी. हरीश ने महासभा में कहा कि 1945 आज के UN का पैमाना नहीं रह सकता, नई स्थायी और अस्थायी सीटें माँगीं, और कहा कि जब तक वीटो है, वह नए-पुराने सभी स्थायी सदस्यों के पास हो।
भारत के पास स्थायी सीट क्यों नहीं है?
पाँच स्थायी सीटें 1945 में तय हुईं। नई सीट के लिए अनुच्छेद 108 के तहत चार्टर संशोधन चाहिए, जिसका पाँचों स्थायी सदस्यों समेत दो-तिहाई UN सदस्यों को अनुसमर्थन करना होता है।
कौन-से देश भारत की स्थायी सीट का समर्थन करते हैं?
अमेरिका, ब्रिटेन, फ़्रांस और रूस ने अलग-अलग समय पर भारत का खुला समर्थन किया है। चीन ने नहीं किया, और पाकिस्तान व इटली वाला यूनाइटिंग फ़ॉर कंसेंसस गुट किसी भी नई स्थायी सीट का विरोध करता है।
G4 क्या है?
भारत, ब्राज़ील, जर्मनी और जापान का समूह, जो स्थायी सीट के लिए एक-दूसरे का समर्थन करता है। जनवरी 2026 में इसने 25-26 सदस्यों और छह नई स्थायी सीटों वाली परिषद का मॉडल रखा।
IGN क्या है?
अंतर-सरकारी वार्ता, जो 2009 से UN महासभा में परिषद सुधार पर चल रही है। भारत का कहना है कि इसके पास अब भी कोई वार्ता-मसौदा, समय-सीमा या लक्ष्य नहीं है।
स्रोत और आगे की पढ़ाईहमने जिन स्रोतों की जाँच की
तथ्य 25 अक्टूबर 2026 को नीचे दी गई रिपोर्टों से जाँचे गए। भारत के बयान के सटीक शब्द रिपोर्टों में थोड़े अलग हैं; हूबहू पाठ के लिए UN का रिकॉर्ड देखें।
- ANI: "1945 cannot remain reference point for today's UN": India calls for meaningful UNSC reforms (23 Oct 2026)
- ETV Bharat: Organisation founded 80 years ago struggling to deliver peace today: India on need for UNSC reforms (23 Oct 2026)
- News On AIR: G4 nations present model for early action to restructure UNSC (22 Jan 2026)
- News On AIR: India sharpens demand for United Nations Security Council reform (21 Feb 2026)
- United Nations: Charter of the United Nations, Chapter V (Security Council) and Chapter XVIII (Amendments)