भूजल में हेक्सावेलेंट क्रोमियम: उत्तर प्रदेश के प्रदूषण पर NGT की कार्रवाई और साफ़ पानी का आपका अधिकार
दशकों तक चमड़ा शोधन और क्रोम फ़ैक्टरियों का ज़हरीला कचरा उत्तर प्रदेश के खुले खेतों में फेंका गया। बारिश उसे ज़मीन के अंदर ले गई, और परिवार आज भी हैंडपंप से वही पानी निकालते हैं। इस महीने राष्ट्रीय हरित अधिकरण ने यह समस्या ख़ुद उठाई। जानिए हेक्सावेलेंट क्रोमियम क्या है, क़ानून क्या कहता है, और नागरिक क्या कर सकता है।

अक्टूबर 2026 में राष्ट्रीय हरित अधिकरण ने क्या किया
राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) ने द हिंदू की एक रिपोर्ट पर स्वतः संज्ञान लिया है, जिसमें बताया गया कि दशकों के औद्योगिक कचरे से उत्तर प्रदेश के तीन ज़िलों के कुछ हिस्सों में भूजल हेक्सावेलेंट क्रोमियम से दूषित हो गया है। अधिकरण ने 14 प्राधिकरणों को नोटिस भेजे, जिनमें उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव, राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन और एम्स, नई दिल्ली शामिल हैं, और अगली सुनवाई से पहले हलफ़नामे माँगे।
समस्या नई नहीं है। 2025 में NGT ने रनिया (कानपुर देहात), राखी मंडी (कानपुर नगर) और फ़तेहपुर के क्रोमियम ढेरों पर राज्य को बार-बार फटकारा था, साफ़ पीने का पानी, निवासियों को इलाज और ढेरों को जल्द हटाने का आदेश दिया था, और राज्य के क़दमों को अपर्याप्त पाया था। नया मामला ज़हर के फैलाव और वहाँ रहने वाले लोगों की सेहत पर है।
बुनियादी बातेंहेक्सावेलेंट क्रोमियम क्या है और यह ख़तरनाक क्यों है
- दो रूप: क्रोमियम-3 (ट्राइवेलेंट) भोजन में मिलता है और शरीर को बहुत थोड़ी मात्रा में चाहिए। क्रोमियम-6 (हेक्सावेलेंट) ज़्यादातर इंसान का बनाया और बेहद ज़हरीला है।
- कहाँ से आता है: चमड़ा शोधन (टैनरी), क्रोम प्लेटिंग, क्रोमियम रसायन फ़ैक्टरियाँ, पेंट और रंग। खुले में फेंका गया कीचड़ बारिश में इसे छोड़ता है।
- सेहत पर असर: क्रोमियम-6 ग्रुप 1 मानव कैंसरकारी (कैंसर करने वाला) माना गया है। सालों तक पीने से पेट और पाचन की बीमारी, त्वचा पर घाव, और लिवर व किडनी को नुक़सान जुड़ा है।
- पीने के पानी की सीमा: भारत का मानक IS 10500:2012 क्रोमियम की अधिकतम 0.05 मिलीग्राम प्रति लीटर सीमा देता है। पुराने ढेरों के पास जाँच में अक्सर इससे कई गुना ज़्यादा मात्रा मिली है।
- ठीक करना मुश्किल क्यों: भूजल में पहुँचने के बाद क्रोमियम-6 पानी के साथ फैलता है और सालों रहता है। जलभृत (एक्विफ़र) साफ़ करना धीमा और महँगा है, इसलिए पहले स्रोत रोकना और साफ़ पाइप वाला पानी देना ज़रूरी है।
सोचिए किसी ने छत की पानी की टंकी में स्याही गिरा दी। इमारत का हर नल नीला पानी देगा, और नल बदलने से कुछ नहीं होगा। आपको स्याही गिरना रोकना होगा, टंकी साफ़ करनी होगी और तब तक साफ़ पानी देना होगा। क्रोमियम के ढेर वही स्याही हैं, और जलभृत वह टंकी जिसे पूरा गाँव साझा करता है।
मूल पाठNGT एक्ट की धारा 14, 15 और 20, अनुच्छेद 48क और अनुच्छेद 51क(छ)
राष्ट्रीय हरित अधिकरण अधिनियम, 2010: धारा 14. अधिकरण द्वारा विवादों का निपटारा।
(1) अधिकरण को उन सभी सिविल मामलों पर अधिकारिता होगी जिनमें पर्यावरण से संबंधित कोई सारवान प्रश्न (पर्यावरण से संबंधित किसी विधिक अधिकार के प्रवर्तन सहित) अंतर्वलित है और ऐसा प्रश्न अनुसूची I में विनिर्दिष्ट अधिनियमितियों के कार्यान्वयन से उत्पन्न होता है।
धारा 15. अनुतोष, प्रतिकर और प्रत्यास्थापन।
(1) अधिकरण आदेश द्वारा,— (क) अनुसूची I में विनिर्दिष्ट अधिनियमितियों के अधीन उत्पन्न होने वाले प्रदूषण और अन्य पर्यावरणीय क्षति के पीड़ितों को अनुतोष और प्रतिकर (किसी परिसंकटमय पदार्थ के हथालन के समय होने वाली दुर्घटना सहित); (ख) नुक़सान हुई संपत्ति के प्रत्यास्थापन; (ग) ऐसे क्षेत्र या क्षेत्रों के पर्यावरण के प्रत्यास्थापन, जो अधिकरण ठीक समझे, का उपबंध कर सकेगा।
धारा 20. अधिकरण द्वारा कुछ सिद्धांतों का लागू किया जाना।
अधिकरण कोई आदेश, विनिश्चय या अधिनिर्णय पारित करते समय सतत विकास, एहतियाती सिद्धांत और प्रदूषक भुगतान सिद्धांत को लागू करेगा।
भारत का संविधान, अनुच्छेद 48क। राज्य देश के पर्यावरण के संरक्षण तथा संवर्धन का और वन तथा वन्य जीवों की रक्षा करने का प्रयास करेगा।
अनुच्छेद 51क(छ)। भारत के प्रत्येक नागरिक का यह कर्तव्य होगा कि वह प्राकृतिक पर्यावरण की, जिसके अंतर्गत वन, झील, नदी और वन्य जीव हैं, रक्षा करे और उसका संवर्धन करे तथा प्राणिमात्र के प्रति दयाभाव रखे।
NGT पर्यावरण की विशेष अदालत है। धारा 14 इसे जल अधिनियम, 1974 और पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 जैसे क़ानूनों के तहत पर्यावरण के किसी भी सारवान प्रश्न पर फ़ैसला करने देती है। धारा 15 इसे पीड़ितों को मुआवज़ा और बिगड़ी ज़मीन व पानी को ठीक करने का आदेश देने देती है। धारा 20 इसे तीन सिद्धांतों से बाँधती है: सतत विकास, एहतियात और प्रदूषक भुगतान। 2021 में सुप्रीम कोर्ट ने ग्रेटर मुंबई नगर निगम बनाम अंकिता सिन्हा में कहा कि NGT समाचार रिपोर्टों और पत्रों पर स्वतः संज्ञान ले सकता है।
🏠 रोज़मर्रा की मिसाल
प्रदूषक भुगतान हॉस्टल का सीधा नियम है: जो खिड़की तोड़ेगा वही काँच का पैसा देगा, न वार्डन, न बाक़ी छात्र।
🇮🇳 असली भारतीय उदाहरण
वेल्लोर सिटिज़न्स वेलफ़ेयर फ़ोरम बनाम भारत संघ (1996) में सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडु की टैनरियों से उनके क्रोमियम कचरे से खेतों और कुओं को हुए नुक़सान की भरपाई करवाई।
आपके अधिकारअनुच्छेद 21 के तहत साफ़ पानी का अधिकार: अदालतों ने क्या कहा
| मामला | वर्ष | क्या कहा |
|---|---|---|
| सुभाष कुमार बनाम बिहार राज्य | 1991 | अनुच्छेद 21 के जीवन के अधिकार में प्रदूषण-मुक्त पानी और हवा का अधिकार शामिल है |
| इंडियन काउंसिल फ़ॉर एनवायरो-लीगल एक्शन बनाम भारत संघ (बिछड़ी) | 1996 | प्रदूषक नुक़सान ठीक करने के लिए पूरी तरह उत्तरदायी है, चाहे लापरवाही हो या न हो |
| वेल्लोर सिटिज़न्स वेलफ़ेयर फ़ोरम बनाम भारत संघ | 1996 | एहतियाती और प्रदूषक भुगतान सिद्धांत भारतीय क़ानून का हिस्सा; टैनरी मामला |
| एम.सी. मेहता बनाम भारत संघ (कानपुर टैनरी) | 1987 | कानपुर में गंगा को प्रदूषित करने वाली टैनरियों को ट्रीटमेंट प्लांट लगाने या बंद होने का आदेश |
| ग्रेटर मुंबई नगर निगम बनाम अंकिता सिन्हा | 2021 | NGT के पास पर्यावरण के मुद्दे स्वतः उठाने की शक्ति है |
राज्य के कर्तव्य
- अनुच्छेद 21: सुरक्षित पानी और सेहत के अधिकार की रक्षा
- अनुच्छेद 47: लोक स्वास्थ्य में सुधार
- अनुच्छेद 48क: पर्यावरण का संरक्षण और संवर्धन
- जल अधिनियम, 1974 और परिसंकटमय अपशिष्ट नियम, 2016: कचरा फेंकना रोकना और सफ़ाई
प्रदूषकों और नागरिकों के कर्तव्य
- उद्योग: कचरे का उपचार, सफ़ाई और मुआवज़े का भुगतान (प्रदूषक भुगतान)
- नागरिक: अनुच्छेद 51क(छ) के तहत नदी और झीलों की रक्षा का कर्तव्य
- कचरा फेंकने की सूचना राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को दें
- प्राधिकरण नाकाम हों तो NGT या हाई कोर्ट जाएँ
नागरिकों के लिएपानी की सुरक्षा कैसे जाँचें और क्रोमियम प्रदूषण की शिकायत कैसे करें
- 1पानी की जाँच कराएँ
जल जीवन मिशन या ज़िले की जल परीक्षण प्रयोगशाला से अपने हैंडपंप या कुएँ की जाँच कराएँ। पीला पानी चेतावनी है, पर क्रोमियम-6 अक्सर दिखता नहीं।
- 2सुरक्षित पानी पिएँ
जाँच साफ़ आने तक केवल प्राधिकरणों का पाइप वाला या उपचारित पानी पिएँ। उबालने से क्रोमियम नहीं हटता।
- 3प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से शिकायत
औद्योगिक कीचड़ खुले में फेंकने की शिकायत फ़ोटो और जगह के साथ राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (उत्तर प्रदेश में UPPCB) को करें।
- 4सेहत की जाँच
प्रभावित गाँवों के लोग ज़िला स्वास्थ्य विभाग से जाँच माँग सकते हैं; NGT पहले भी निवासियों को इलाज का आदेश दे चुका है।
- 5NGT जाएँ
कोई भी प्रभावित व्यक्ति या समूह धारा 14 और 15 के तहत NGT में आवेदन दे सकता है। अनुच्छेद 226 के तहत हाई कोर्ट में भी पत्र या याचिका दी जा सकती है।
- 6RTI लगाएँ
अपने गाँव के पानी की जाँच के नतीजे और क्रोमियम ढेरों पर की गई कार्रवाई RTI से माँगें।
आसान शब्दों में: साफ़ पानी आपका मौलिक अधिकार है, कोई एहसान नहीं। अगर किसी फ़ैक्टरी ने उसे ज़हरीला किया, तो सफ़ाई का पैसा फ़ैक्टरी देगी, और तब तक सरकार को आपको सुरक्षित पानी देना होगा।
UPSC कॉर्नरUPSC प्रारंभिक और मुख्य परीक्षा के लिए हेक्सावेलेंट क्रोमियम, NGT और पर्यावरण क़ानून
- प्रारंभिक तथ्य: NGT की स्थापना 18 अक्टूबर 2010 को NGT अधिनियम, 2010 के तहत हुई; इसकी प्रधान पीठ नई दिल्ली में है।
- प्रारंभिक तथ्य: NGT अधिनियम की धारा 20 के तहत इसे सतत विकास, एहतियाती सिद्धांत और प्रदूषक भुगतान सिद्धांत लागू करने होते हैं।
- प्रारंभिक तथ्य: NGT वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 और वन अधिकार अधिनियम, 2006 के मामले नहीं सुनता; ये इसकी अनुसूची I में नहीं हैं।
- प्रारंभिक तथ्य: IS 10500:2012 के अनुसार पीने के पानी में कुल क्रोमियम की अनुमेय सीमा 0.05 mg/L है।
- प्रारंभिक तथ्य: अनुच्छेद 48क और 51क(छ) 42वें संशोधन अधिनियम, 1976 से जुड़े।
- मुख्य परीक्षा (250 शब्द): "पुराना औद्योगिक कचरा भारत का ख़ामोश जल संकट है।" उत्तर प्रदेश के क्रोमियम प्रदूषण और NGT की भूमिका के संदर्भ में चर्चा कीजिए।
- मुख्य परीक्षा (150 शब्द): भारतीय मामलों की मदद से प्रदूषक भुगतान और एहतियाती सिद्धांत समझाइए।
अभ्यास MCQख़ुद को परखें: हेक्सावेलेंट क्रोमियम और NGT
राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: (1) NGT अधिनियम, 2010 की धारा 20 अधिकरण को प्रदूषक भुगतान सिद्धांत लागू करने को कहती है। (2) सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि NGT पर्यावरण के मुद्दों पर स्वतः संज्ञान ले सकता है। (3) NGT वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 के विवाद सुनता है। ऊपर दिए गए कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
शंका समाधानअक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
उत्तर प्रदेश में हेक्सावेलेंट क्रोमियम पर NGT ने क्या किया?
NGT ने द हिंदू की उस रिपोर्ट पर स्वतः संज्ञान लिया जिसमें उत्तर प्रदेश के तीन ज़िलों के कुछ हिस्सों के भूजल में हेक्सावेलेंट क्रोमियम की बात थी, और यूपी के मुख्य सचिव, राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन और एम्स नई दिल्ली समेत 14 प्राधिकरणों को नोटिस भेजकर जवाब माँगा।
हेक्सावेलेंट क्रोमियम क्या है?
हेक्सावेलेंट क्रोमियम (क्रोमियम-6) क्रोमियम का ज़हरीला रूप है जो चमड़ा शोधन, क्रोम प्लेटिंग और क्रोमियम रसायन उद्योगों से निकलता है। यह कैंसरकारी माना गया है और पेट, त्वचा, लिवर और किडनी को नुक़सान पहुँचाता है।
भारत में पीने के पानी में क्रोमियम की सुरक्षित सीमा क्या है?
भारतीय मानक ब्यूरो के पीने के पानी के मानक IS 10500:2012 के अनुसार कुल क्रोमियम 0.05 मिलीग्राम प्रति लीटर से ज़्यादा नहीं होना चाहिए।
क्या साफ़ पानी मौलिक अधिकार है?
हाँ। सुभाष कुमार बनाम बिहार राज्य (1991) और बाद के मामलों में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अनुच्छेद 21 के जीवन के अधिकार में प्रदूषण-मुक्त पानी और हवा का अधिकार शामिल है।
क्रोमियम प्रदूषण की सफ़ाई का पैसा कौन देगा?
प्रदूषक भुगतान सिद्धांत के तहत, जो NGT अधिनियम की धारा 20 और वेल्लोर सिटिज़न्स वेलफ़ेयर फ़ोरम (1996) जैसे मामलों से लागू होता है, प्रदूषण करने वाला उद्योग सफ़ाई और मुआवज़े का पैसा देगा।
स्रोत और आगे की पढ़ाईहमने जिन स्रोतों की जाँच की
इस पेज के समाचार तथ्य 18 अक्टूबर 2026 को नीचे दी गई रिपोर्टों से जाँचे गए। NGT का ताज़ा आदेश हमें पूरा उपलब्ध नहीं था; उसका विवरण दैनिक समाचार सारांशों के अनुसार है। NGT के पिछले आदेश 2025 के हैं।
- Legacy IAS: The Hindu UPSC News Analysis, 17 October 2026 (NGT notices on hexavalent chromium report)
- Tribune: NGT raps UP Government over chromium contamination, directs Chief Secretary to act fast
- ANI, Apr 2025: Kanpur's chromium crisis, NGT pushes for immediate action on water supply
- Down To Earth, 17 Apr 2026: NGT flags Ganga pollution and sewerage gaps in Uttar Pradesh
- India Code: The National Green Tribunal Act, 2010
- Bureau of Indian Standards: IS 10500:2012 Drinking Water Specification