इज़राइल चुनाव 2026 नतीजे: त्रिशंकु नेसेट और भारत के लिए इसका मतलब
इज़राइल में 27 अक्टूबर 2026 को आम चुनाव हुआ, 7 अक्टूबर 2023 के हमास हमले के बाद पहली बार। सारे वोट गिने जा चुके हैं: प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के गुट को 120 में से 53 सीटें मिलीं, जबकि सरकार के लिए 61 चाहिए। गादी आइज़नकोट के नेतृत्व वाले विरोधी गुट को 48 और अरब पार्टियों को रिकॉर्ड 19 सीटें मिलीं। जानिए इज़राइल में अब सरकार कैसे बनेगी, उसकी व्यवस्था भारत से कैसे अलग है, और यह नतीजा भारत के लिए क्यों अहम है।

30 अक्टूबर 2026 तक की स्थिति
27 अक्टूबर 2026 के नेसेट चुनाव की गिनती 29 अक्टूबर को पूरी हुई। रिपोर्ट की गई सीटें: नेतन्याहू गुट 53 (लिकुड 27, अब भी सबसे बड़ी अकेली पार्टी, साथ में धुर-दक्षिणपंथी और अति-रूढ़िवादी सहयोगी), आइज़नकोट के नेतृत्व वाला बदलाव गुट 48 (आइज़नकोट की यशार 21, नफ़्ताली बेनेट की बेयाखद 12 और अन्य) और अरब पार्टियाँ 19 (जॉइंट लिस्ट 11, रा'आम 8)। कोई गुट 61 तक नहीं पहुँचा।
मतदान लगभग 78% रहा, 1999 के बाद सबसे ज़्यादा, और अरब मतदाताओं का मतदान लगभग 80% बताया गया (2022 में 53%)। केंद्रीय चुनाव समिति जाँच के बाद आधिकारिक नतीजा प्रकाशित करेगी; फिर राष्ट्रपति इसहाक हर्ज़ोग पार्टियों से बात करके किसी एक सदस्य को सरकार बनाने का ज़िम्मा देंगे। इज़राइल की ख़ुफ़िया एजेंसी शिन बेत अरब इलाक़ों के मतदान के पीछे विदेशी पैसे के आरोपों की जाँच कर रही है; अधिकारियों ने बड़े पैमाने पर गड़बड़ी के दावे ख़ारिज किए हैं। हमारी जाँच तक भारत के विदेश मंत्रालय ने नतीजे पर कोई बयान नहीं दिया था।
एक नज़र मेंइज़राइल चुनाव 2026 नतीजे: मुख्य तथ्य
| बिंदु | तथ्य |
|---|---|
| चुनाव | 26वीं नेसेट (इज़राइल की संसद), मतदान 27 अक्टूबर 2026 |
| कुल सीटें / बहुमत | 120 सीटें; बहुमत के लिए 61 |
| नेतन्याहू गुट | 53 सीटें (लिकुड 27, सबसे बड़ी पार्टी) |
| बदलाव गुट (गादी आइज़नकोट) | 48 सीटें (यशार 21, बेनेट की बेयाखद 12, अन्य) |
| अरब पार्टियाँ | 19 सीटें, अब तक का रिकॉर्ड (जॉइंट लिस्ट 11, रा'आम 8) |
| मतदान | लगभग 78%, 1999 के बाद सबसे ज़्यादा |
| व्यवस्था | पार्टी-सूची आनुपातिक प्रतिनिधित्व, पूरा देश एक निर्वाचन क्षेत्र, 3.25% की न्यूनतम सीमा |
| अगला क़दम | राष्ट्रपति इसहाक हर्ज़ोग पार्टियों से सलाह करके सरकार बनाने का जनादेश देंगे |
इज़राइल में भारत की 543 लोक सभा सीटों जैसे निर्वाचन क्षेत्र नहीं होते। लोग पार्टी की सूची को वोट देते हैं, और 3.25% से ज़्यादा वोट पाने वाली हर पार्टी को वोट के अनुपात में सीटें मिलती हैं। इसलिए कई छोटी पार्टियाँ संसद में पहुँचती हैं और आज तक किसी अकेली पार्टी ने 61 सीटें नहीं जीतीं। सरकार हमेशा गठबंधन की बनती है।
🏠 रोज़मर्रा की मिसाल
मान लीजिए 120 सदस्यों वाली हाउसिंग सोसाइटी कमेटी है, जहाँ कोई भी फ़ैसला 61 वोट से पास होता है। सबसे बड़े ग्रुप के पास 53 दोस्त हैं और विरोधी ग्रुप के पास 48, तो बाक़ी 19 सदस्य, जो किसी ग्रुप में नहीं, तय करेंगे कि सचिव कौन बनेगा।
🇮🇳 असली भारतीय उदाहरण
भारत में 1989, 1996 और 1998 में ऐसा ही हुआ था, जब किसी पार्टी को लोक सभा में बहुमत नहीं मिला और राष्ट्रपति को परखना पड़ा कि स्थिर सरकार कौन बना सकता है।
कैसे काम करता हैत्रिशंकु नेसेट के बाद इज़राइल में सरकार कैसे बनती है
- 1आधिकारिक नतीजे
केंद्रीय चुनाव समिति जाँच के बाद अंतिम नतीजे प्रकाशित करती है।
- 2राष्ट्रपति से सलाह
राष्ट्रपति इसहाक हर्ज़ोग नई नेसेट की हर पार्टी से मिलकर पूछते हैं कि वे प्रधानमंत्री के लिए किसका नाम देती हैं।
- 3जनादेश
वे एक सदस्य को, आमतौर पर जिसके पक्ष में सबसे ज़्यादा सिफ़ारिशें हों, गठबंधन बनाने के लिए 28 दिन देते हैं, जो 14 दिन और बढ़ सकते हैं।
- 4दूसरा मौक़ा
नाकाम रहने पर राष्ट्रपति किसी दूसरे सदस्य को ज़िम्मा दे सकते हैं, या नेसेट ख़ुद किसी उम्मीदवार का समर्थन कर सकती है।
- 5नया चुनाव
अगर कोई भी 61 सदस्यों का भरोसा न जीत सके तो इज़राइल में फिर चुनाव होता है।
- 6शपथ
नेसेट में विश्वास मत पास होने पर सरकार कार्यभार संभालती है।
यहाँ इज़राइल के राष्ट्रपति की भूमिका वैसी ही है जैसी त्रिशंकु लोक सभा के बाद भारत के राष्ट्रपति की: बहुमत जुटा सकने वाले व्यक्ति को बुलाया जाता है, और फिर उसे सदन में बहुमत साबित करना होता है।
क्यों ज़रूरीइज़राइल चुनाव का भारत के लिए मतलब
- रक्षा: इज़राइल भारत के सबसे बड़े रक्षा आपूर्तिकर्ताओं और साझेदारों में है (मिसाइल, ड्रोन, रडार, DRDO के साथ बना बराक-8 वायु रक्षा)। ये रिश्ते इज़राइल की हर सरकार में, चाहे वाम हो या दक्षिण, चलते रहे हैं।
- व्यापार समझौता: भारत और इज़राइल ने नवंबर 2025 में मुक्त व्यापार समझौते की संदर्भ की शर्तों पर हस्ताक्षर किए और 2026 में बातचीत के दो दौर हुए। लंबा गठबंधन-गतिरोध इस बातचीत को धीमा कर सकता है।
- निवेश: सितंबर 2025 में हुआ द्विपक्षीय निवेश समझौता निवेशकों को सुरक्षा और मध्यस्थता देता है; यह सरकार बदलने पर निर्भर नहीं।
- कामगार: 2023-24 से सरकार-से-सरकार व्यवस्था के तहत हज़ारों भारतीय निर्माण और देखभाल कामगार इज़राइल गए हैं।
- पश्चिम एशिया: I2U2 और भारत-मध्य पूर्व-यूरोप आर्थिक गलियारा (IMEC) जैसी परियोजनाओं को क्षेत्र में शांति चाहिए; नई इज़राइली सरकार की ग़ाज़ा और क्षेत्र पर नीति अहम होगी।
- भारत का संतुलन: भारत इज़राइल से मज़बूत रिश्ते रखता है और साथ ही स्वतंत्र फ़िलिस्तीन वाले दो-राष्ट्र समाधान का समर्थन करता है; चुनाव से यह नीति नहीं बदलती।
| वर्ष | भारत-इज़राइल पड़ाव |
|---|---|
| 1950 | भारत ने इज़राइल को मान्यता दी (17 सितंबर 1950)। |
| 1992 | पूर्ण राजनयिक संबंध बने (29 जनवरी 1992)। |
| 2017 | नरेंद्र मोदी इज़राइल जाने वाले पहले भारतीय प्रधानमंत्री बने; रिश्ते रणनीतिक साझेदारी तक पहुँचे। |
| 2021 | I2U2 (भारत, इज़राइल, UAE, अमेरिका) समूह बना; पहला नेता-स्तरीय सम्मेलन जुलाई 2022 में। |
| सितंबर 2025 | भारत और इज़राइल ने नई दिल्ली में द्विपक्षीय निवेश समझौते पर हस्ताक्षर किए। |
| नवंबर 2025 | भारत-इज़राइल मुक्त व्यापार समझौते की संदर्भ की शर्तों (ToR) पर हस्ताक्षर। |
| 25 फ़रवरी 2026 | PM मोदी ने यरुशलम में नेसेट के विशेष सत्र को संबोधित किया। |
| फ़रवरी और जुलाई 2026 | FTA बातचीत के पहले और दूसरे दौर नई दिल्ली में हुए। |
| 27 अक्टूबर 2026 | इज़राइल में 26वीं नेसेट के लिए मतदान; किसी गुट को बहुमत नहीं। |
मूल पाठअनुच्छेद 51 और अनुच्छेद 253: संविधान में भारत की विदेश नीति
भारत का संविधान, अनुच्छेद 51. अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा की अभिवृद्धि।
राज्य (क) अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा की अभिवृद्धि का; (ख) राष्ट्रों के बीच न्यायसंगत और सम्मानपूर्ण संबंधों को बनाए रखने का; (ग) संगठित लोगों के एक-दूसरे से व्यवहारों में अंतरराष्ट्रीय विधि और संधि-बाध्यताओं के प्रति आदर बढ़ाने का; और (घ) अंतरराष्ट्रीय विवादों के माध्यस्थम् द्वारा निपटारे के लिए प्रोत्साहन देने का प्रयास करेगा।
अनुच्छेद 253. अंतरराष्ट्रीय करारों को प्रभावी करने के लिए विधान।
इस अध्याय के पूर्वगामी उपबंधों में किसी बात के होते हुए भी, संसद को किसी अन्य देश या देशों के साथ की गई किसी संधि, करार या अभिसमय अथवा किसी अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन, संगम या अन्य निकाय में किए गए किसी विनिश्चय के कार्यान्वयन के लिए भारत के संपूर्ण राज्यक्षेत्र या उसके किसी भाग के लिए कोई विधि बनाने की शक्ति है।
- विदेशी मामले, राजनयिक संबंध और संधियाँ संघ सूची के विषय हैं (प्रविष्टि 10 और 14), इसलिए इज़राइल या किसी भी देश से सिर्फ़ केंद्र सरकार ही व्यवहार करती है।
- अनुच्छेद 51 (नीति निदेशक तत्व) भारत से अंतरराष्ट्रीय शांति बढ़ाने और "राष्ट्रों के बीच न्यायसंगत और सम्मानपूर्ण संबंध" रखने को कहता है; इसीलिए भारत पश्चिम एशिया में सभी पक्षों से बात करता है।
- अनुच्छेद 75(3): भारत में भी, इज़राइल की तरह, मंत्रिपरिषद निचले सदन के प्रति सामूहिक रूप से ज़िम्मेदार है, इसलिए सरकार तभी तक टिकती है जब तक उसके पास बहुमत है।
तुलनाइज़राइल की नेसेट बनाम भारत की लोक सभा
इज़राइल (नेसेट)
- 120 सदस्य, एक ही सदन
- पार्टी-सूची आनुपातिक प्रतिनिधित्व
- पूरा देश एक निर्वाचन क्षेत्र
- सीट पाने के लिए 3.25% वोट ज़रूरी
- लिखित संविधान नहीं; उसकी जगह बुनियादी क़ानून (Basic Laws)
भारत (लोक सभा)
- 543 निर्वाचित सदस्य, साथ में राज्य सभा
- हर क्षेत्र में 'सबसे ज़्यादा वोट वाला जीते' प्रणाली
- 543 निर्वाचन क्षेत्र
- कोई न्यूनतम सीमा नहीं; सीट पर सबसे ज़्यादा वोट वाला जीतता है
- लिखित संविधान, दुनिया का सबसे लंबा
UPSC कॉर्नरइज़राइल चुनाव 2026: UPSC प्रीलिम्स और मेन्स के लिए
- प्रीलिम्स: नेसेट = इज़राइल की एक-सदनीय संसद, 120 सदस्य, बहुमत 61, पार्टी-सूची आनुपातिक प्रतिनिधित्व और 3.25% सीमा से चुनाव।
- प्रीलिम्स: इज़राइल का कोई एक लिखित संविधान नहीं; उसके बुनियादी क़ानून (Basic Laws) यह काम करते हैं।
- प्रीलिम्स: भारत ने 1950 में इज़राइल को मान्यता दी और 1992 में पूर्ण राजनयिक संबंध बनाए; I2U2 = भारत, इज़राइल, UAE, अमेरिका।
- प्रीलिम्स: मोदी 2017 में इज़राइल जाने वाले पहले भारतीय प्रधानमंत्री बने और 25 फ़रवरी 2026 को नेसेट को संबोधित किया।
- मेन्स (GS II): "भारत की पश्चिम एशिया नीति इज़राइल से रणनीतिक रिश्तों और फ़िलिस्तीन के समर्थन के बीच संतुलन है।" 2026 के इज़राइली चुनाव के संदर्भ में परखिए।
अभ्यास MCQख़ुद को परखें: इज़राइल चुनाव 2026: त्रिशंकु नेसेट
अक्टूबर 2026 में हुए इज़राइल के आम चुनाव के संदर्भ में इन कथनों पर विचार करें: (1) नेसेट में 120 सदस्य हैं और बहुमत के लिए 61 चाहिए। (2) भारत की तरह सदस्य एक-सदस्यीय क्षेत्रों से 'सबसे ज़्यादा वोट वाला जीते' प्रणाली से चुने जाते हैं। (3) अरब पार्टियों ने रिकॉर्ड संख्या में सीटें जीतीं। ऊपर दिए गए कौन-से कथन सही हैं?
शंका समाधानअक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
इज़राइल चुनाव 2026 किसने जीता?
किसी को बहुमत नहीं मिला। नेतन्याहू की लिकुड 27 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी है और उनके गुट के पास 120 में से 53 सीटें हैं। आइज़नकोट गुट के पास 48 और अरब पार्टियों के पास 19। सरकार के लिए 61 चाहिए।
इज़राइल में चुनाव कब हुआ?
26वीं नेसेट के लिए मतदान 27 अक्टूबर 2026 को हुआ। गिनती 29 अक्टूबर 2026 को पूरी हुई।
त्रिशंकु नेसेट के बाद क्या होता है?
राष्ट्रपति इसहाक हर्ज़ोग सभी पार्टियों से सलाह करके एक सदस्य को गठबंधन बनाने के लिए 28 दिन देते हैं, जो 14 दिन और बढ़ सकते हैं। कोई 61 वोट न जुटा पाए तो फिर चुनाव हो सकता है।
क्या इज़राइल चुनाव से भारत-इज़राइल रिश्ते बदलेंगे?
बुनियादी तौर पर नहीं। रक्षा, तकनीक, खेती और व्यापार के रिश्ते इज़राइल की हर तरह की सरकार में चलते रहे हैं। लंबा गतिरोध भारत-इज़राइल FTA बातचीत को धीमा कर सकता है।
इज़राइल की चुनाव प्रणाली भारत से कैसे अलग है?
इज़राइल में पूरा देश एक निर्वाचन क्षेत्र है और 3.25% सीमा के साथ पार्टी-सूची आनुपातिक प्रतिनिधित्व है। भारत में 543 एक-सदस्यीय क्षेत्र हैं जहाँ सबसे ज़्यादा वोट पाने वाला उम्मीदवार जीतता है।
स्रोत और आगे की पढ़ाईहमने जिन स्रोतों की जाँच की
तथ्य 30 अक्टूबर 2026 को नीचे दी गई रिपोर्टों से जाँचे गए। सीटें पूरी गिनती के बाद की रिपोर्टों के अनुसार हैं; इज़राइल की केंद्रीय चुनाव समिति के आधिकारिक प्रकाशन में मामूली बदलाव हो सकता है। सरकार बनने पर हम यह पेज अपडेट करेंगे।
- Israel Hayom: Israel's 2026 election results released (29 Oct 2026)
- ANI: Israel election, 100% of votes counted, Netanyahu bloc gets 53 seats, Likud largest party (30 Oct 2026)
- Times of Israel: Netanyahu bloc has 53 seats, Eisenkot's 48; Arab parties surge to 19
- Al Jazeera: Israel election turnout hits 77.7%, highest since 1999 (27 Oct 2026)
- CNN: The final Israeli election results are in. Netanyahu hasn't won (28 Oct 2026)
- PIB: India and Israel conclude second round of negotiations for proposed Free Trade Agreement (July 2026)
- News On AIR: India, Israel sign Bilateral Investment Agreement in New Delhi (8 Sep 2025)