प्राइवेट संस्था की जानकारी RTI से: सुप्रीम कोर्ट ने कहा, जिन रिकॉर्ड तक सरकारी दफ़्तर पहुँच सकता है वे 'सूचना' हैं
क्या RTI से किसी सहकारी बैंक, प्राइवेट समिति या कंपनी के काग़ज़ मिल सकते हैं? अक्सर जवाब मिलता था "यह लोक प्राधिकारी नहीं है"। 26 अक्टूबर 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने दूसरा दरवाज़ा साफ़ कर दिया: अगर किसी सरकारी दफ़्तर के पास उन काग़ज़ों को मँगाने की क़ानूनी ताक़त है, तो आप उसी दफ़्तर से RTI में माँग सकते हैं, और उसे काग़ज़ मँगाकर देने होंगे। जानिए फ़ैसला आसान शब्दों में।

26 अक्टूबर 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने क्या तय किया
जस्टिस जे.बी. पारदीवाला और जस्टिस के. विनोद चंद्रन की बेंच ने 26 अक्टूबर 2026 को मुप्पथडम सर्विस को-ऑपरेटिव बैंक लिमिटेड बनाम राज्य मुख्य सूचना आयुक्त (2026 INSC 1153) का फ़ैसला सुनाया। केरलम के इस सहकारी बैंक के एक सदस्य ने सहकारी समितियों के संयुक्त रजिस्ट्रार (सामान्य) के ज़रिए बैंक का निर्माण अनुबंध और आम सभा की बैठकों की कार्यवाही (minutes) माँगी थी। सूचना आयोग और केरल हाई कोर्ट ने जानकारी देने का आदेश दिया, और बैंक अपील में गया।
सुप्रीम कोर्ट ने बैंक की अपीलें ख़ारिज कर दीं। कोर्ट ने कहा कि किसी प्राइवेट संस्था से जुड़ी जिस सामग्री तक कोई लोक प्राधिकारी किसी दूसरे क़ानून के तहत पहुँच सकता है, वह RTI अधिनियम की धारा 2(f) में "सूचना" है। रजिस्ट्रार के पास काग़ज़ पहले से होना या जाँच शुरू होना ज़रूरी नहीं: उन्हें मँगाने की क़ानूनी ताक़त ही काफ़ी है। बैंक की वाणिज्यिक गोपनीयता (धारा 8(1)(d)) और व्यक्तिगत सूचना (धारा 8(1)(j)) की दलीलें ख़ारिज हुईं, और संयुक्त रजिस्ट्रार को दस्तावेज़ मँगाकर सदस्य को दो हफ़्ते में देने को कहा गया। ख़बरों के अनुसार कोर्ट ने यह भी कहा कि समिति से कोई संबंध न रखने वाले बाहरी व्यक्ति को शायद यही नतीजा न मिले।
एक नज़र मेंएक नज़र में फ़ैसला: मुख्य तथ्य
| बिंदु | तथ्य |
|---|---|
| मामला | मुप्पथडम सर्विस को-ऑपरेटिव बैंक लिमिटेड बनाम राज्य मुख्य सूचना आयुक्त, 2026 INSC 1153 |
| तारीख़ और बेंच | 26 अक्टूबर 2026; जस्टिस जे.बी. पारदीवाला और जस्टिस के. विनोद चंद्रन |
| क्या माँगा गया | सहकारी बैंक का निर्माण अनुबंध और आम सभा की बैठकों की कार्यवाही |
| किससे माँगा | सहकारी समितियों के संयुक्त रजिस्ट्रार (सामान्य), जो लोक प्राधिकारी हैं |
| मुख्य सिद्धांत | प्राइवेट संस्था की जिस सामग्री तक लोक प्राधिकारी किसी भी क़ानून से पहुँच सकता है, वह धारा 2(f) में 'सूचना' है |
| छूट | धारा 8(1)(d) वाणिज्यिक गोपनीयता और 8(1)(j) व्यक्तिगत सूचना की दलीलें इस मामले में ख़ारिज |
| आदेश | दस्तावेज़ मँगाकर दो हफ़्ते में सदस्य को देने होंगे |
| पहले का क़ानून | थलप्पलम (2013): सहकारी समितियाँ आम तौर पर 'लोक प्राधिकारी' नहीं; सुभाष चंद्र अग्रवाल (2019): प्राइवेट संस्था की सूचना तक पहुँच |
प्राइवेट संस्था को ख़ुद RTI का जवाब नहीं देना होता। पर बहुत-सी प्राइवेट संस्थाओं को माँगने पर अपने रिकॉर्ड किसी सरकारी दफ़्तर को दिखाने पड़ते हैं: सहकारी समिति अपने रजिस्ट्रार को, बैंक RBI को, कंपनी रजिस्ट्रार ऑफ़ कंपनीज़ को। कोर्ट कहता है: अगर वह दफ़्तर क़ानूनन रिकॉर्ड मँगा सकता है, तो RTI आवेदक उस दफ़्तर से माँग सकता है, और "हमारे पास नहीं है" कोई जवाब नहीं है।
🏠 रोज़मर्रा की मिसाल
स्कूल के प्रिंसिपल की तरह समझिए, जो किसी भी क्लास टीचर से हाज़िरी रजिस्टर मँगा सकते हैं। अभिभावक टीचर को मजबूर नहीं कर सकते, पर प्रिंसिपल से माँग सकते हैं। प्रिंसिपल यह नहीं कह सकते कि "रजिस्टर क्लास में है, मेरे दफ़्तर में नहीं"; उनके पास उसे मँगाने की ताक़त है।
🇮🇳 असली भारतीय उदाहरण
केरल के किसी गाँव के सहकारी बैंक या राजस्थान की किसी डेयरी समिति का सदस्य, जिसे किसी महँगे भवन-अनुबंध पर शक हो, सहकारी समितियों के सहायक या संयुक्त रजिस्ट्रार को RTI देकर अनुबंध और बैठकों की कार्यवाही माँग सकता है।
कैसे इस्तेमाल करेंप्राइवेट संस्था के रिकॉर्ड के लिए RTI कैसे लगाएँ
- 1नियंत्रक दफ़्तर पहचानें
वह लोक प्राधिकारी ढूँढें जिसके पास संस्था पर क़ानूनी ताक़त है: सहकारी समितियों का रजिस्ट्रार, RBI, SEBI, रजिस्ट्रार ऑफ़ कंपनीज़, कोई नियामक या लाइसेंस देने वाला विभाग।
- 2उसके PIO को लिखें
उस दफ़्तर के लोक सूचना अधिकारी (PIO) को RTI दें। प्राइवेट संस्था का नाम और ठीक-ठीक दस्तावेज़ (तारीख़, बैठक, अनुबंध) लिखें।
- 3क़ानून का हवाला दें
धारा 2(f) लिखें: प्राइवेट संस्था से जुड़ी वह सूचना जिस तक लोक प्राधिकारी किसी क़ानून से पहुँच सकता है, और 26 अक्टूबर 2026 के सुप्रीम कोर्ट फ़ैसले का ज़िक्र करें।
- 4अपना संबंध बताएँ
आप सदस्य, जमाकर्ता या शेयरधारक हैं तो लिखें। फ़ैसला एक सदस्य के पक्ष में आया; बाहरी व्यक्ति को शायद यही नतीजा न मिले।
- 5मना हो तो अपील करें
PIO कहे "हमारे पास नहीं", तो 30 दिन में पहली अपील और फिर सूचना आयोग में दूसरी अपील करें।
मूल पाठRTI अधिनियम, 2005 की धारा 2(f), 2(j) और 8(1)
सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005, धारा 2(च)।
"सूचना" से किसी भी रूप में कोई भी सामग्री अभिप्रेत है, जिसमें अभिलेख, दस्तावेज़, ज्ञापन, ई-मेल, राय, सलाह, प्रेस विज्ञप्ति, परिपत्र, आदेश, लॉगबुक, संविदा, रिपोर्ट, काग़ज़पत्र, नमूने, मॉडल, किसी इलेक्ट्रॉनिक रूप में रखी गई आँकड़ा सामग्री और किसी प्राइवेट निकाय से संबंधित ऐसी सूचना शामिल है जिस तक तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य विधि के अधीन किसी लोक प्राधिकारी की पहुँच हो सकती है;
धारा 2(ञ)।
"सूचना का अधिकार" से इस अधिनियम के अधीन पहुँच योग्य ऐसी सूचना का अधिकार अभिप्रेत है जो किसी लोक प्राधिकारी द्वारा या उसके नियंत्रण में धारित है, और इसमें (i) कृति, दस्तावेज़ों, अभिलेखों का निरीक्षण; (ii) दस्तावेज़ों या अभिलेखों के टिप्पण, उद्धरण या प्रमाणित प्रतिलिपि लेना; (iii) सामग्री के प्रमाणित नमूने लेना; (iv) डिस्केट, फ़्लॉपी, टेप, वीडियो कैसेट या किसी अन्य इलेक्ट्रॉनिक रूप में या प्रिंटआउट के माध्यम से सूचना प्राप्त करने का अधिकार शामिल है;
धारा 8(1)(घ) और (ञ) (अंश)।
(घ) वाणिज्यिक विश्वास, व्यापार गोपनीयता या बौद्धिक संपदा सहित ऐसी सूचना, जिसके प्रकटन से किसी पर-व्यक्ति की प्रतियोगी स्थिति को हानि होती हो, जब तक सक्षम प्राधिकारी का समाधान न हो जाए कि व्यापक लोक हित में ऐसी सूचना का प्रकटन ज़रूरी है; ... (ञ) ऐसी व्यक्तिगत सूचना, जिसके प्रकटन का किसी लोक क्रियाकलाप या हित से कोई संबंध नहीं है, या जिससे व्यक्ति की निजता पर अनावश्यक अतिक्रमण होगा, जब तक ... व्यापक लोक हित ऐसी सूचना के प्रकटन को उचित न ठहराए।
- धारा 2(f) के दो हिस्से हैं: किसी भी रूप में सामग्री, और किसी प्राइवेट निकाय से जुड़ी सूचना जिस तक लोक प्राधिकारी किसी दूसरे क़ानून से पहुँच सकता है। यह मामला दूसरे हिस्से का है।
- धारा 2(j) लोक प्राधिकारी के "पास या नियंत्रण में" रखी सूचना की बात करती है। कोर्ट ने 'नियंत्रण' को धारा 2(f) के साथ पढ़ा: रिकॉर्ड मँगाने की क़ानूनी ताक़त भी गिनी जाएगी, भले काग़ज़ हाथ में न हों।
- धारा 8 की छूटें अब भी लागू हैं। असली व्यापारिक रहस्य या सचमुच निजी जानकारी रोकी जा सकती है, जब तक व्यापक लोक हित प्रकटन को उचित न ठहराए।
- RTI अधिनियम जानने के अधिकार को लागू करता है, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने अनुच्छेद 19(1)(a) (वाक् और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता) का हिस्सा माना है।
पृष्ठभूमिथलप्पलम से मुप्पथडम तक: क़ानून कैसे बना
| वर्ष | मामला और बिंदु |
|---|---|
| 12 अक्टूबर 2005 | RTI अधिनियम, 2005 पूरी तरह लागू। |
| 7 अक्टूबर 2013 | थलप्पलम सर्विस को-ऑपरेटिव बैंक बनाम केरल राज्य: सहकारी समितियाँ धारा 2(h) में 'लोक प्राधिकारी' नहीं, जब तक सरकार उनकी मालिक न हो, नियंत्रण न रखे या पर्याप्त पैसा न दे; पर जो सूचना रजिस्ट्रार क़ानूनन ले सकता है, वह रजिस्ट्रार से माँगी जा सकती है। |
| 13 नवंबर 2019 | CPIO, सुप्रीम कोर्ट बनाम सुभाष चंद्र अग्रवाल (संविधान पीठ): प्राइवेट संस्था की सूचना तक लोक प्राधिकारी की पहुँच पर पहले से शर्तें नहीं थोपी जानी चाहिए। |
| 26 अक्टूबर 2026 | मुप्पथडम: पहुँच की ताक़त काफ़ी है; रजिस्ट्रार को रिकॉर्ड मँगाकर देने होंगे। |
इस फ़ैसले से पहले
- रजिस्ट्रार अक्सर जवाब देते थे "इस दफ़्तर में उपलब्ध नहीं"
- समितियाँ अनुबंध को 'वाणिज्यिक' और कार्यवाही को 'व्यक्तिगत' बताती थीं
- सदस्यों को अदालत या सहकारिता विभाग के चक्कर लगाने पड़ते थे
इस फ़ैसले के बाद
- रिकॉर्ड मँगाने की ताक़त = RTI में सूचना
- रजिस्ट्रार को रिकॉर्ड मँगाकर देने होंगे
- छूट हर मामले में परखी जाएगी, आँख मूँदकर नहीं
क्यों ज़रूरीपारदर्शिता बनाम प्राइवेट संस्थाओं की गोपनीयता
फ़ायदे
- सहकारी बैंक और समितियों के सदस्य देख सकते हैं कि उनका पैसा कैसे ख़र्च हुआ
- नियामक 'हमारी फ़ाइल में नहीं' कहकर नहीं बच सकते
- महँगे अनुबंध और धोखाधड़ी जल्दी पकड़ में आएगी
- डूबे सहकारी बैंकों के जमाकर्ताओं के काम का
सीमाएँ और चिंताएँ
- प्राइवेट संस्थाओं के असली व्यापारिक रहस्य अब भी सुरक्षित
- संबंध न रखने वाले बाहरी व्यक्ति को मना किया जा सकता है
- सिर्फ़ वही रिकॉर्ड जिन तक दफ़्तर की क़ानूनी पहुँच है
- रजिस्ट्रार और नियामकों पर काम बढ़ेगा
UPSC कॉर्नरRTI और प्राइवेट संस्थाएँ: UPSC प्रीलिम्स और मेन्स के लिए
- प्रीलिम्स: धारा 2(f) 'सूचना' की परिभाषा है और इसमें प्राइवेट निकाय की वह सूचना शामिल है जिस तक लोक प्राधिकारी किसी दूसरे क़ानून से पहुँच सकता है।
- प्रीलिम्स: धारा 2(h) 'लोक प्राधिकारी' की परिभाषा है; थलप्पलम (2013) में सहकारी समितियाँ अपने आप लोक प्राधिकारी नहीं मानी गईं।
- प्रीलिम्स: सूचना का अधिकार अनुच्छेद 19(1)(a) का हिस्सा है; धारा 8(1)(j) निजी जानकारी बचाती है, जब तक व्यापक लोक हित न हो।
- मेन्स (GS II): "पारदर्शिता को सार्वजनिक धन और सार्वजनिक शक्ति के पीछे-पीछे प्राइवेट संस्थाओं तक जाना चाहिए।" हाल के RTI फ़ैसलों के संदर्भ में चर्चा करें।
अभ्यास MCQख़ुद को परखें: प्राइवेट संस्था और RTI: धारा 2(f) पर सुप्रीम कोर्ट
सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 के तहत इन कथनों पर विचार करें: (1) धारा 2(f) की 'सूचना' में प्राइवेट निकाय की वह सूचना शामिल है जिस तक लोक प्राधिकारी किसी दूसरे क़ानून से पहुँच सकता है। (2) सहकारी समिति धारा 2(h) में हमेशा 'लोक प्राधिकारी' होती है। (3) अक्टूबर 2026 के सुप्रीम कोर्ट फ़ैसले के अनुसार RTI में देने से पहले रिकॉर्ड रजिस्ट्रार के पास भौतिक रूप से होने चाहिए। ऊपर दिए गए कौन-से कथन सही हैं?
शंका समाधानअक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
क्या प्राइवेट कंपनी या समिति पर RTI लगा सकते हैं?
सीधे नहीं, जब तक वह लोक प्राधिकारी न हो। पर आप उस सरकारी दफ़्तर में RTI लगा सकते हैं जिसके पास उस पर क़ानूनी ताक़त है (सहकारी समितियों का रजिस्ट्रार, RBI, SEBI, रजिस्ट्रार ऑफ़ कंपनीज़ आदि) और प्राइवेट संस्था के वे रिकॉर्ड माँग सकते हैं जिन तक वह दफ़्तर पहुँच सकता है।
26 अक्टूबर 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने क्या तय किया?
मुप्पथडम सर्विस को-ऑपरेटिव बैंक बनाम राज्य मुख्य सूचना आयुक्त मामले में कोर्ट ने कहा कि प्राइवेट संस्था की जिस सामग्री तक लोक प्राधिकारी किसी क़ानून से पहुँच सकता है, वह धारा 2(f) में 'सूचना' है, और संयुक्त रजिस्ट्रार को बैंक का निर्माण अनुबंध और बैठकों की कार्यवाही मँगाकर दो हफ़्ते में सदस्य को देने को कहा।
क्या PIO कह सकता है कि रिकॉर्ड उसके दफ़्तर में नहीं हैं?
नहीं, अगर दफ़्तर के पास उन्हें मँगाने की क़ानूनी ताक़त है। कोर्ट ने कहा कि पहुँच की ताक़त और भौतिक क़ब्ज़ा अलग बातें हैं, और ताक़त ही काफ़ी है।
क्या सहकारी बैंक दस्तावेज़ों को व्यक्तिगत या वाणिज्यिक बताकर मना कर सकता है?
तभी, जब धारा 8 की कोई छूट सचमुच लागू हो। इस मामले में सदस्य के माँगे अनुबंध और आम सभा की कार्यवाही पर वाणिज्यिक गोपनीयता और व्यक्तिगत सूचना की दलीलें ख़ारिज हुईं।
क्या सहकारी समिति RTI में लोक प्राधिकारी है?
आम तौर पर नहीं। थलप्पलम (2013) में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वह तभी लोक प्राधिकारी है जब सरकार उसकी मालिक हो, नियंत्रण रखे या पर्याप्त पैसा दे। इसीलिए रजिस्ट्रार वाला रास्ता अहम है।
स्रोत और आगे की पढ़ाईहमने जिन स्रोतों की जाँच की
तथ्य 28 अक्टूबर 2026 को नीचे दी गई क़ानूनी ख़बरों से जाँचे गए; पूरा फ़ैसला हम नहीं पढ़ पाए, इसलिए सटीक शब्द सुप्रीम कोर्ट की प्रति (2026 INSC 1153) में देखें। धारा 2(f), 2(j) और 8(1) का हिंदी पाठ हमारा अनुवाद है; आधिकारिक हिंदी पाठ भारत संहिता (India Code) पर है।
- Verdictum: Material relating to private body which can be accessed by public authority can fall under 'information' under RTI Act: Supreme Court (2026 INSC 1153)
- LiveLaw: Cooperative society cannot deny RTI information to member as 'personal' if Registrar can access such records (Oct 2026)
- Law Trend: Co-operative society member can seek contract and general body minutes under RTI through Registrar
- TaxGuru: RTI Act covers private cooperative bank records accessible to Registrar: SC
- Indian Cooperative: SC upholds co-op member's right to bank records; dismisses appeal
- India Code: Right to Information Act, 2005