कॉलेज फ़ीस बीच में बढ़ोतरी: सुप्रीम कोर्ट बोला, छात्र को दाख़िले से पहले पूरी फ़ीस पता होनी चाहिए
आप चार साल के इंजीनियरिंग कोर्स में दाख़िला लेते हैं और दूसरे साल कॉलेज फ़ीस एक-तिहाई बढ़ा देता है। क्या यह जायज़ है? सुप्रीम कोर्ट ने कहा: सामान्यतः नहीं। छात्र को दाख़िले के समय ही पूरा ख़र्च पता होना चाहिए, और कोर्स के बीच बढ़ोतरी केवल असाधारण हालात में हो सकती है। जानिए मामला, निजी कॉलेजों की फ़ीस का क़ानून, और आपके साथ ऐसा हो तो क्या करें।

14 अक्टूबर 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने क्या तय किया
डॉ. बी.सी. रॉय इंजीनियरिंग कॉलेज बनाम पश्चिम बंगाल राज्य (2026 INSC 1120) में न्यायमूर्ति पी.एस. नरसिम्हा और आलोक अराधे की पीठ ने 14 अक्टूबर 2026 को कहा कि प्रोफ़ेशनल कोर्स की फ़ीस सामान्यतः दाख़िले से पहले पूरे कोर्स के लिए तय और घोषित होनी चाहिए। चार या पाँच साल के कोर्स में आने वाले छात्र को शुरुआत में ही अपनी वित्तीय ज़िम्मेदारी पता होनी चाहिए। कोर्स के बीच वृद्धि केवल असाधारण हालात में हो सकती है, जैसे ख़र्च में अप्रत्याशित बढ़ोतरी, असाधारण आर्थिक स्थिति या क़ानून में बदलाव।
विवाद तब शुरू हुआ जब राज्य ने अक्टूबर 2023 में स्ववित्तपोषित कॉलेजों की फ़ीस संशोधित की और कॉलेज ने दिसंबर 2023 में अपने 2023-27 बैच की फ़ीस लगभग 37.5% बढ़ा दी। कलकत्ता हाई कोर्ट ने 16 अक्टूबर 2023 से पहले दाख़िल छात्रों को रिफ़ंड का आदेश दिया था। सुप्रीम कोर्ट ने यह राहत बरक़रार रखी, पर अलग तर्क से: राज्य की अधिसूचना पिछली तारीख़ से लागू नहीं थी। कोर्ट ने फ़ीस संशोधन में सात साल की देरी के लिए राज्य और उसकी फ़ीस समिति को ज़िम्मेदार ठहराया।
फ़ैसलाकॉलेज फ़ीस बीच में बढ़ोतरी: सुप्रीम कोर्ट का फ़ीस निश्चितता नियम
- 1पहले बताइए
पूरे कोर्स की फ़ीस दाख़िले से पहले प्रॉस्पेक्टस या फ़ीस समिति के आदेश में पता होनी चाहिए।
- 2अचानक बढ़ोतरी नहीं
दाख़िले के बाद छात्र की फ़ीस रूटीन में कोर्स के बीच नहीं बढ़ाई जानी चाहिए।
- 3संकरे अपवाद
वृद्धि केवल असाधारण मामलों में: अप्रत्याशित ख़र्च, असाधारण आर्थिक हालात, क़ानूनी बदलाव या अन्य अनपेक्षित घटनाएँ।
- 4पुराना बैच सुरक्षित
राज्य की नई फ़ीस अधिसूचना उसके बाद दाख़िल छात्रों पर लागू होगी, पहले से पढ़ रहे छात्रों पर पिछली तारीख़ से नहीं।
- 5रिफ़ंड
16 अक्टूबर 2023 से पहले दाख़िल जिन छात्रों ने बढ़ी फ़ीस दी, उन्हें अतिरिक्त राशि लौटानी होगी, जैसा हाई कोर्ट ने कहा था।
ट्रेन का टिकट सोचिए। टिकट पर छपा किराया ही आप देते हैं, चाहे रेलवे अगले महीने किराया बढ़ा दे। दाख़िला चार साल के पूरे सफ़र का टिकट है। कॉलेज बीच रास्ते में ट्रेन रोककर ज़्यादा पैसे नहीं माँग सकता, जब तक सच में कुछ असाधारण न हो जाए।
🏠 रोज़मर्रा की मिसाल
तय क़ीमत पर फ़्लैट बेचने वाला बिल्डर आधी किश्तें भरने के बाद ख़रीदार से 35% ज़्यादा नहीं माँग सकता, सिर्फ़ इसलिए कि उसकी अपनी लागत बढ़ गई।
🇮🇳 असली भारतीय उदाहरण
बाँकुड़ा का एक छात्र 2022 में ₹80,000 सालाना फ़ीस पर बी.टेक में दाख़िला लेता है। अगर तीसरे साल कॉलेज 2023 की अधिसूचना के आधार पर ₹1.1 लाख माँगे, तो इस फ़ैसले के तहत अतिरिक्त राशि लौटानी होगी।
मूल पाठअनुच्छेद 19(1)(छ), अनुच्छेद 19(6) और अनुच्छेद 14: क्या निजी कॉलेज अपनी फ़ीस ख़ुद तय कर सकते हैं?
भारत का संविधान, अनुच्छेद 19. वाक्-स्वातंत्र्य आदि विषयक कुछ अधिकारों का संरक्षण।
(1) सभी नागरिकों को—
(छ) कोई वृत्ति, उपजीविका, व्यापार या कारबार करने का,
अधिकार होगा।
(6) उक्त खंड के उपखंड (छ) की कोई बात उक्त उपखंड द्वारा दिए गए अधिकार के प्रयोग पर साधारण जनता के हितों में युक्तियुक्त निर्बंधन जहाँ तक कोई विद्यमान विधि अधिरोपित करती है वहाँ तक उसके प्रवर्तन पर प्रभाव नहीं डालेगी या वैसे निर्बंधन अधिरोपित करने वाली कोई विधि बनाने से राज्य को निवारित नहीं करेगी, ...
अनुच्छेद 14. विधि के समक्ष समता।
राज्य, भारत के राज्यक्षेत्र में किसी व्यक्ति को विधि के समक्ष समता से या विधियों के समान संरक्षण से वंचित नहीं करेगा।
कॉलेज चलाना अनुच्छेद 19(1)(छ) के तहत "उपजीविका" है, इसलिए निजी कॉलेजों को संस्थान खोलने और उचित फ़ीस तय करने का अधिकार है। पर अनुच्छेद 19(6) राज्य को जनहित में युक्तियुक्त प्रतिबंध लगाने देता है। इसीलिए राज्य फ़ीस नियामक समितियाँ बनाते हैं: कॉलेज अपना ख़र्च निकाल सकता है और विकास के लिए उचित बचत रख सकता है, पर मुनाफ़ाख़ोरी या कैपिटेशन फ़ीस नहीं ले सकता। एक ही बैच के छात्रों से बिना कारण अलग बर्ताव अनुच्छेद 14 का भी उल्लंघन हो सकता है।
अदालती फ़ैसलेभारत में निजी कॉलेज फ़ीस नियमन: टी.एम.ए. पाई से मॉडर्न डेंटल कॉलेज तक
| मामला | वर्ष | क्या कहा |
|---|---|---|
| मोहिनी जैन बनाम कर्नाटक राज्य | 1992 | कैपिटेशन फ़ीस शिक्षा के अधिकार का उल्लंघन, जिसे तब अनुच्छेद 21 में पढ़ा गया |
| उन्नीकृष्णन बनाम आंध्र प्रदेश राज्य | 1993 | 14 साल तक शिक्षा का अधिकार मौलिक अधिकार; कैपिटेशन फ़ीस पर रोक (बाद में अनुच्छेद 21क, 2002) |
| टी.एम.ए. पाई फ़ाउंडेशन बनाम कर्नाटक राज्य (11 न्यायाधीश) | 2002 | निजी ग़ैर-सहायता प्राप्त कॉलेज अपनी फ़ीस तय कर सकते हैं, पर मुनाफ़ाख़ोरी और कैपिटेशन फ़ीस नहीं |
| इस्लामिक एकेडमी ऑफ़ एजुकेशन बनाम कर्नाटक राज्य | 2003 | फ़ीस मंज़ूरी के लिए राज्य सेवानिवृत्त हाई कोर्ट न्यायाधीश की अध्यक्षता में समितियाँ बनाएँ |
| पी.ए. इनामदार बनाम महाराष्ट्र राज्य (7 न्यायाधीश) | 2005 | फ़ीस समितियाँ सही; शिक्षा मुनाफ़े का कारोबार नहीं |
| मॉडर्न डेंटल कॉलेज बनाम मध्य प्रदेश राज्य | 2016 | फ़ीस और दाख़िले का राज्य नियमन अनुच्छेद 19(6) के तहत युक्तियुक्त प्रतिबंध |
| डॉ. बी.सी. रॉय इंजीनियरिंग कॉलेज बनाम पश्चिम बंगाल राज्य | 2026 | दाख़िले से पहले पूरी कोर्स फ़ीस पता हो; बीच में वृद्धि केवल असाधारण हालात में |
इन फ़ैसलों की एक सीधी बात है: कॉलेज स्ववित्तपोषित हो सकता है, पर शिक्षा कोई दुकान नहीं। 2026 का फ़ैसला छात्रों के लिए एक व्यावहारिक नियम जोड़ता है: निश्चितता। परिवार पूरे कोर्स के लिए लोन और बचत की योजना बनाते हैं, इसलिए क़ीमत बदलती नहीं रह सकती।
छात्रों के लिएअगर कॉलेज कोर्स के बीच फ़ीस बढ़ा दे तो क्या करें
- 1सबूत रखें
प्रॉस्पेक्टस, दाख़िला पत्र, फ़ीस रसीदें और अपने बैच का फ़ीस समिति आदेश सँभालकर रखें।
- 2लिखित में पूछें
कॉलेज को लिखें कि फ़ीस किस आदेश के तहत बढ़ी और क्या वह आपके बैच पर लागू है।
- 3फ़ीस समिति के पास जाएँ
हर राज्य में प्रोफ़ेशनल कोर्स की फ़ीस नियामक समिति या प्राधिकरण है; पहले वहाँ शिकायत करें।
- 4नियामक का सहारा
इंजीनियरिंग कॉलेज के लिए AICTE शिकायत पोर्टल; मेडिकल कॉलेज के लिए राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान आयोग; बाक़ी के लिए संबद्ध विश्वविद्यालय।
- 5अदालत जाएँ
बढ़ोतरी ग़ैरक़ानूनी हो तो हाई कोर्ट में अनुच्छेद 226 के तहत रिट याचिका उपाय है; इस 2026 फ़ैसले का हवाला दें।
कॉलेज लचीलापन क्यों चाहते हैं
- वेतन और ख़र्च हर साल बढ़ते हैं
- राज्य की फ़ीस समीक्षा अक्सर सालों टलती है
- गुणवत्ता के लिए पैसा चाहिए
छात्रों को निश्चितता क्यों चाहिए
- एजुकेशन लोन दाख़िले पर तय होता है
- बीच में छोड़ने से साल बर्बाद होते हैं
- दाख़िले के बाद बढ़ोतरी अनुचित सौदेबाज़ी है
UPSC कॉर्नरUPSC प्रारंभिक और मुख्य परीक्षा के लिए कॉलेज फ़ीस नियमन और शिक्षा का अधिकार
- प्रारंभिक तथ्य: शिक्षण संस्थान स्थापित करने और चलाने का अधिकार अनुच्छेद 19(1)(छ) के तहत उपजीविका है (टी.एम.ए. पाई, 2002); अनुच्छेद 30(1) अल्पसंख्यक संस्थानों की अलग से रक्षा करता है।
- प्रारंभिक तथ्य: सेवानिवृत्त हाई कोर्ट न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली फ़ीस नियामक समितियाँ इस्लामिक एकेडमी (2003) और पी.ए. इनामदार (2005) से निकलीं।
- प्रारंभिक तथ्य: अनुच्छेद 21क 86वें संशोधन अधिनियम, 2002 से जुड़ा; RTE एक्ट, 2009 6 से 14 साल के बच्चों पर लागू।
- प्रारंभिक तथ्य: उन्नीकृष्णन (1993) ने निःशुल्क शिक्षा के मौलिक अधिकार को 14 साल तक के बच्चों तक सीमित किया।
- प्रारंभिक तथ्य: अक्टूबर 2026 का फ़ैसला (नरसिम्हा और अराधे न्यायमूर्ति) दाख़िले से पहले पूरी कोर्स फ़ीस बताना ज़रूरी करता है।
- मुख्य परीक्षा (150 शब्द): "फ़ीस की निश्चितता शिक्षा में निष्पक्षता का हिस्सा है।" भारत में निजी प्रोफ़ेशनल कॉलेजों के नियमन के संदर्भ में चर्चा कीजिए।
अभ्यास MCQख़ुद को परखें: कॉलेज फ़ीस बीच में नहीं बढ़ेगी
भारत में निजी प्रोफ़ेशनल कॉलेजों की फ़ीस के नियमन के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: (1) टी.एम.ए. पाई फ़ाउंडेशन (2002) में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि निजी ग़ैर-सहायता प्राप्त संस्थान अपनी फ़ीस तय कर सकते हैं, पर कैपिटेशन फ़ीस या मुनाफ़ाख़ोरी नहीं कर सकते। (2) शिक्षण संस्थान स्थापित करने के अधिकार को अनुच्छेद 19(1)(छ) के तहत उपजीविका माना गया है। (3) अक्टूबर 2026 में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि कॉलेज बिना किसी औचित्य के हर साल कोर्स के बीच फ़ीस बढ़ा सकते हैं। ऊपर दिए गए कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
शंका समाधानअक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
क्या कॉलेज कोर्स के बीच फ़ीस बढ़ा सकता है?
सामान्यतः नहीं। सुप्रीम कोर्ट ने 14 अक्टूबर 2026 को कहा कि प्रोफ़ेशनल कोर्स की फ़ीस दाख़िले से पहले पूरे कोर्स के लिए तय होनी चाहिए। बीच में वृद्धि केवल असाधारण हालात में हो सकती है, जैसे ख़र्च में अप्रत्याशित बढ़ोतरी, असाधारण आर्थिक स्थिति या क़ानूनी बदलाव।
यह कौन-सा मामला है?
डॉ. बी.सी. रॉय इंजीनियरिंग कॉलेज बनाम पश्चिम बंगाल राज्य, 2026 INSC 1120, जिसका फ़ैसला न्यायमूर्ति पी.एस. नरसिम्हा और आलोक अराधे ने दिया। यह अक्टूबर 2023 की पश्चिम बंगाल फ़ीस अधिसूचना के बाद 2023-27 बैच की फ़ीस में लगभग 37.5% वृद्धि से निकला।
क्या छात्रों को रिफ़ंड मिलेगा?
इस मामले में, हाँ। सुप्रीम कोर्ट ने कलकत्ता हाई कोर्ट का निर्देश बरक़रार रखा कि 16 अक्टूबर 2023 से पहले दाख़िल छात्रों को बढ़ी हुई राशि लौटाई जाए, क्योंकि राज्य की अधिसूचना पिछली तारीख़ से लागू नहीं थी।
क्या यह सभी कॉलेजों पर लागू है?
फ़ैसला स्ववित्तपोषित कॉलेजों के प्रोफ़ेशनल कोर्स के बारे में है, पर फ़ीस निश्चितता और दाख़िले से पहले घोषणा का सिद्धांत पूरे भारत में फ़ीस समितियों और अदालतों का मार्गदर्शन करेगा। हर राज्य का फ़ीस क़ानून और समिति आदेश लागू रहेंगे।
ग़ैरक़ानूनी फ़ीस वृद्धि की शिकायत कहाँ करें?
पहले कॉलेज को लिखित में, फिर अपने राज्य की फ़ीस नियामक समिति, नियामक (AICTE, NMC या विश्वविद्यालय), और अंत में अनुच्छेद 226 के तहत रिट याचिका से हाई कोर्ट में।
स्रोत और आगे की पढ़ाईहमने जिन स्रोतों की जाँच की
इस पेज के समाचार तथ्य 19 अक्टूबर 2026 को नीचे दी गई रिपोर्टों से जाँचे गए। सटीक शब्दों के लिए पूरा फ़ैसला पढ़ें। संवैधानिक पाठ भारत के संविधान के हिंदी पाठ से लिया गया है।
- LiveLaw: Students' fees cannot be hiked midway through professional courses except in exceptional circumstances
- Bar & Bench: Fees for entire professional course must be notified before admission: Supreme Court
- Verdictum: Dr. B.C. Roy Engineering College v State of West Bengal, 2026 INSC 1120
- Raw Law: Supreme Court upholds refunds for engineering students facing 37.5% mid-course fee hike
- Advocatekhoj: Dr. B.C. Roy Engineering College Vs. State of West Bengal [October 14, 2026]
- Constitution of India (Legislative Department)