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न्यायालय की अवमानना: अनुच्छेद 129, आपराधिक अवमानना और वागले-राउत नोटिस

16 अक्टूबर 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने पत्रकार निखिल वागले और सांसद संजय राउत से पूछा कि मुख्य न्यायाधीश और न्यायपालिका पर की गई टिप्पणियों के लिए उनके ख़िलाफ़ आपराधिक अवमानना की कार्यवाही क्यों न शुरू की जाए। उचित आलोचना कहाँ ख़त्म होती है और अदालत को कलंकित करना कहाँ शुरू होता है? आसान भाषा में पूरा क़ानून समझिए।

न्यायालय की अवमानना: अनुच्छेद 129 और 215 के तहत अभिलेख न्यायालय की शक्ति, न्यायालय अवमान अधिनियम 1971 में आपराधिक अवमानना, उचित आलोचना बनाम अदालत को कलंकित करना, निखिल वागले और संजय राउत को नोटिस | Contempt of court in India Article 129