भाग III ⚖️ मूल अधिकार लागू · संशोधित 1951, 2005, 2019

अनुच्छेद 15: धर्म, मूलवंश, जाति, लिंग या जन्मस्थान के आधार पर भेदभाव का निषेध

अनुच्छेद 14 कहता है "सबसे समान व्यवहार करो"। अनुच्छेद 15 उन पाँच चीज़ों के नाम लेता है जिनके अकेले आधार पर राज्य कभी किसी नागरिक से बुरा व्यवहार नहीं कर सकता: धर्म, मूलवंश, जाति, लिंग और जन्मस्थान। साथ ही यह पीछे छूट गए लोगों को विशेष मदद का रास्ता भी खोलता है।

मूल पाठअनुच्छेद 15 का आधिकारिक पाठ

हिन्दी · आधिकारिक पाठ

15. धर्म, मूलवंश, जाति, लिंग या जन्मस्थान के आधार पर विभेद का प्रतिषेध—

(1) राज्य, किसी नागरिक के विरुद्ध केवल धर्म, मूलवंश, जाति, लिंग, जन्मस्थान या इनमें से किसी के आधार पर कोई विभेद नहीं करेगा।

(2) कोई नागरिक केवल धर्म, मूलवंश, जाति, लिंग, जन्मस्थान या इनमें से किसी के आधार पर—(क) दुकानों, सार्वजनिक भोजनालयों, होटलों और सार्वजनिक मनोरंजन के स्थानों में प्रवेश, या (ख) पूर्णतः या भागतः राज्य-निधि से पोषित या साधारण जनता के प्रयोग के लिए समर्पित कुओं, तालाबों, स्नानघाटों, सड़कों और सार्वजनिक समागम के स्थानों के उपयोग, के संबंध में किसी भी निर्योग्यता, दायित्व, निर्बंधन या शर्त के अधीन नहीं होगा।

(3) इस अनुच्छेद की कोई बात राज्य को स्त्रियों और बालकों के लिए कोई विशेष उपबंध करने से निवारित नहीं करेगी।

(4) इस अनुच्छेद की या अनुच्छेद 29 के खंड (2) की कोई बात राज्य को सामाजिक और शैक्षिक दृष्टि से पिछड़े हुए नागरिकों के किन्हीं वर्गों की उन्नति के लिए या अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों के लिए कोई विशेष उपबंध करने से निवारित नहीं करेगी।

(5) इस अनुच्छेद की या अनुच्छेद 19 के खंड (1) के उपखंड (छ) की कोई बात राज्य को सामाजिक और शैक्षिक दृष्टि से पिछड़े हुए नागरिकों के किन्हीं वर्गों की उन्नति के लिए या अनुसूचित जातियों या अनुसूचित जनजातियों के लिए, विधि द्वारा, कोई विशेष उपबंध करने से निवारित नहीं करेगी, जहाँ तक ऐसे विशेष उपबंध, अनुच्छेद 30 के खंड (1) में निर्दिष्ट अल्पसंख्यक शिक्षा संस्थाओं से भिन्न, शिक्षा संस्थाओं में, जिनके अंतर्गत प्राइवेट शिक्षा संस्थाएँ भी हैं, चाहे वे राज्य से सहायता प्राप्त हैं या नहीं, प्रवेश से संबंधित हैं।

(6) इस अनुच्छेद या अनुच्छेद 19 के खंड (1) के उपखंड (छ) या अनुच्छेद 29 के खंड (2) की कोई बात राज्य को,—(क) खंड (4) और खंड (5) में उल्लिखित वर्गों से भिन्न नागरिकों के आर्थिक रूप से दुर्बल किन्हीं वर्गों की उन्नति के लिए कोई विशेष उपबंध करने से निवारित नहीं करेगी; और (ख) खंड (4) और खंड (5) में उल्लिखित वर्गों से भिन्न नागरिकों के आर्थिक रूप से दुर्बल किन्हीं वर्गों की उन्नति के लिए कोई विशेष उपबंध करने से निवारित नहीं करेगी, जहाँ तक ऐसे विशेष उपबंध, अनुच्छेद 30 के खंड (1) में निर्दिष्ट अल्पसंख्यक शिक्षा संस्थाओं से भिन्न, शिक्षा संस्थाओं में, जिनके अंतर्गत प्राइवेट शिक्षा संस्थाएँ भी हैं, चाहे वे राज्य से सहायता प्राप्त हैं या नहीं, प्रवेश से संबंधित हैं, जो आरक्षण की दशा में विद्यमान आरक्षणों के अतिरिक्त और प्रत्येक प्रवर्ग में कुल स्थानों के अधिकतम दस प्रतिशत के अधीन होंगे।

स्पष्टीकरण—इस अनुच्छेद और अनुच्छेद 16 के प्रयोजनों के लिए, "आर्थिक रूप से दुर्बल वर्ग" वे होंगे, जो राज्य द्वारा कुटुंब की आय और आर्थिक अलाभ के अन्य सूचकों के आधार पर समय-समय पर अधिसूचित किए जाएँ।

संशोधन: खंड (4) पहले संशोधन (1951) से, खंड (5) 93वें संशोधन (2005) से, और खंड (6) स्पष्टीकरण सहित 103वें संशोधन (2019) से जोड़ा गया। अनुच्छेद 15 केवल नागरिकों की रक्षा करता है।
In Simple Words / आसान शब्दों में

राज्य (सरकार, पुलिस, सरकारी स्कूल, नगर निगम का अस्पताल) केवल आपके धर्म, मूलवंश, जाति, लिंग या जन्मस्थान के कारण आपसे बुरा व्यवहार नहीं कर सकता।

"केवल" शब्द अहम है। अगर कोई नियम इनमें से किसी आधार के साथ कोई ठोस कारण भी रखता है, तो वह टिक सकता है। अन्य आधारों, जैसे निवास, पर भेदभाव अनुच्छेद 15 से प्रतिबंधित नहीं है (डी.पी. जोशी बनाम मध्य भारत राज्य, 1955)।

खंड (2) राज्य से आगे जाता है: निजी दुकान, होटल या भोजनालय भी इन आधारों पर आपको प्रवेश से मना नहीं कर सकते, और सार्वजनिक कुएँ, तालाब, घाट और सड़कें सबके लिए खुले हैं। इनमें बंधन नहीं लगाया जाएगा।

खंड (3) से (6) "सहारे का हाथ" हैं: अपवादजनक परिस्थितियों में राज्य महिलाओं, बच्चों, SC/ST, पिछड़े वर्ग (OBC) और आर्थिक रूप से पिछड़े वर्ग को सशक्त बनाने के लिए विशेष प्रावधान कर सकता है। इसे सकारात्मक भेदभाव कहते हैं, और यह समानता का हिस्सा है, उसका अपवाद नहीं।

🏠 रोज़मर्रा की मिसाल

स्कूल का खेल दिवस सोचिए। गेट का नियम है: किसी बच्चे को धर्म, जाति या लिंग के कारण नहीं रोका जाएगा (खंड 1 और 2)। लेकिन स्कूल छोटे बच्चों के लिए अलग दौड़ रखता है, लड़कियों की फ़ुटबॉल टीम बनाता है, और जिन परिवारों के पास पैसे नहीं उनके बच्चों को मुफ़्त जूते देता है (खंड 3 से 6)। पीछे से शुरू करने वालों की मदद निष्पक्षता नहीं तोड़ती; यह दौड़ को निष्पक्ष बनाती है।

🇮🇳 असली भारतीय उदाहरण

2024 तक कई राज्यों के जेल मैनुअल "निचली" जाति के कैदियों से शौचालय की सफ़ाई और झाड़ू लगवाते थे, जबकि "ऊँची" जाति के कैदी खाना बनाते थे। सुकन्या शांता बनाम भारत संघ (3 अक्टूबर 2024) में सुप्रीम कोर्ट ने इन नियमों को अनुच्छेद 14, 15, 17, 21 और 23 के तहत रद्द किया, और राज्यों से जेल रजिस्टरों से "जाति" का कॉलम हटाने को कहा।

खंड (1) और (2)अनुच्छेद 15 भेदभाव का निषेध: पाँच आधार और सार्वजनिक स्थान

अनुच्छेद 15 के संदर्भ में दिए गए प्रावधान एक नज़र में:

  • राज्य जाति, धर्म, लिंग, मूलवंश (Race) और जन्मस्थान के आधार पर भेदभाव नहीं करेगा।
  • दुकानों, होटल, भोजनालय, सार्वजनिक स्थल, मनोरंजन के स्थल, कुआँ, तालाब, स्नान घाट आदि तक पहुँच होगी, अर्थात इसमें बंधन नहीं लगाया जाएगा।
  • अपवादजनक परिस्थितियों में राज्य महिलाओं, बच्चों, SC/ST तथा पिछड़े वर्ग (OBC) एवं आर्थिक रूप से पिछड़े वर्ग को सशक्त बनाने के लिए भेदभाव कर सकता है, और यह भेदभाव सकारात्मक भेदभाव है।
खंडक्या कहता हैकिसने जोड़ा
15(1)राज्य किसी नागरिक से केवल धर्म, मूलवंश, जाति, लिंग, जन्मस्थान के आधार पर भेदभाव नहीं करेगामूल
15(2)दुकानों, सार्वजनिक भोजनालयों, होटलों, मनोरंजन स्थलों, कुओं, तालाबों, स्नानघाटों, सड़कों और सार्वजनिक स्थलों तक पहुँच पर कोई रोक नहींमूल
15(3)महिलाओं और बच्चों के लिए विशेष प्रावधानमूल
15(4)सामाजिक और शैक्षिक रूप से पिछड़े वर्ग (OBC), SC और ST के लिए विशेष प्रावधानपहला संशोधन, 1951
15(5)शिक्षा संस्थानों में प्रवेश में आरक्षण, निजी गैर-सहायता प्राप्त संस्थानों सहित (अल्पसंख्यक संस्थान नहीं)93वाँ संशोधन, 2005
15(6)EWS के लिए अधिकतम 10% (15(4)/(5) से बाहर के आर्थिक रूप से कमज़ोर वर्ग), प्रवेश में भी103वाँ संशोधन, 2019
किस पर लागू? खंड (1) राज्य पर लागू है। खंड (2) निजी व्यक्तियों पर भी लागू है: कोई निजी होटल किसी दलित मेहमान या मुस्लिम परिवार को कमरा देने से मना नहीं कर सकता। अनुच्छेद 17, 23 और 24 के साथ यह उन गिने-चुने अधिकारों में है जो क्षैतिज रूप से लागू होते हैं।

अदालतें "लिंग" और "केवल" को कैसे पढ़ती हैं

  • NALSA बनाम भारत संघ (2014): "लिंग" में लैंगिक पहचान शामिल है; ट्रांसजेंडर व्यक्ति संरक्षित हैं।
  • नवतेज सिंह जौहर (2018): "लिंग" में यौन अभिविन्यास भी आता है।
  • अनुज गर्ग (2008): महिलाओं को बार में काम करने से रोकने वाला कानून रद्द; रूढ़ियों पर आधारित "सुरक्षात्मक" नियम मान्य नहीं।
  • इंडियन यंग लॉयर्स एसोसिएशन (सबरीमाला, 2018): एक आयु-वर्ग की महिलाओं को मंदिर से बाहर रखना भेदभाव माना गया (बड़ी पीठ का संदर्भ लंबित)।
अनुच्छेद 15 चार्ट: धर्म, मूलवंश, जाति, लिंग, जन्मस्थान के आधार पर भेदभाव का निषेध, 15(2) दुकानें-होटल-कुएँ, और अपवाद 15(3) महिलाएँ-बच्चे, 15(4) SC/ST/OBC, 15(5) शिक्षा में आरक्षण, 15(6) EWS
अनुच्छेद 15 एक नज़र में: पाँच वर्जित आधार और विशेष प्रावधान वाले खंड।

खंड (3) से (6)अनुच्छेद 15(3), 15(4), 15(5) और 15(6): विशेष प्रावधान और शिक्षा में आरक्षण

15(3): महिलाएँ और बच्चे

बसों में महिलाओं की अलग सीटें और डिब्बे, लड़कियों की मुफ़्त शिक्षा, मातृत्व लाभ, पंचायतों में महिलाओं को 33% आरक्षण (अनुच्छेद 243घ) और नारी शक्ति वंदन अधिनियम (106वाँ संशोधन, 2023), जो अगले परिसीमन के बाद लोकसभा और विधानसभाओं की एक-तिहाई सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित करता है, सब इसी विचार से निकले हैं।

15(4): पहला संशोधन क्यों आया

मद्रास ने मेडिकल और इंजीनियरिंग सीटें समुदाय के आधार पर बाँटी थीं। मद्रास राज्य बनाम चंपकम दोराइराजन (1951) में सुप्रीम कोर्ट ने इसे रद्द किया, क्योंकि मूल अनुच्छेद 15 में पिछड़े वर्गों के लिए कोई खंड नहीं था। संसद ने तुरंत पहले संशोधन, 1951 से अनुच्छेद 15(4) जोड़ा।

15(5): निजी कॉलेजों में भी आरक्षण

पी.ए. इनामदार (2005) ने कहा कि राज्य निजी गैर-सहायता प्राप्त कॉलेजों पर आरक्षण नहीं थोप सकता; तब 93वें संशोधन (2005) ने 15(5) जोड़ा। इसी आधार पर केंद्रीय शैक्षिक संस्थान (प्रवेश में आरक्षण) अधिनियम, 2006 ने IIT, IIM और केंद्रीय विश्वविद्यालयों में 27% OBC सीटें दीं। अशोक कुमार ठाकुर (2008) में इसे सही ठहराया गया (क्रीमी लेयर बाहर), और निजी गैर-सहायता प्राप्त संस्थानों के लिए प्रमति एजुकेशनल ट्रस्ट (2014) में। अल्पसंख्यक संस्थान (अनुच्छेद 30) इससे बाहर हैं।

15(6): EWS

103वें संशोधन (2019) ने अनुच्छेद 15(6) शामिल करते हुए शिक्षा के संस्थानों में SC, ST, OBC से बाहर के आर्थिक रूप से कमज़ोर वर्ग (EWS) को अधिकतम 10% आरक्षण की अनुमति दी, किंतु इसमें अल्पसंख्यक शिक्षा संस्थान शामिल नहीं हैं। जनहित अभियान बनाम भारत संघ (7 नवंबर 2022) में 3:2 से वैध। पूरी शर्तें अनुच्छेद 16 में समझाई गई हैं।

अनुच्छेद 15 संशोधन टाइमलाइन: चंपकम दोराइराजन 1951, पहला संशोधन 15(4), पी.ए. इनामदार 2005, 93वाँ संशोधन 15(5), 103वाँ संशोधन 2019 15(6) EWS, जनहित अभियान 2022
खंड 15(4), 15(5) और 15(6) कैसे जुड़े, और उनके पीछे के मुकदमे।

अक्टूबर 2026 तक अद्यतनअनुच्छेद 15 चर्चा में: जेलों में जातिगत नियम, अधिवास कोटा और UGC समता नियम 2026

  • जेलों में जाति (3 अक्टूबर 2024): सुकन्या शांता में सुप्रीम कोर्ट ने जाति के आधार पर काम बाँटने वाले जेल मैनुअल के नियम रद्द किए और जेल रजिस्टरों से "जाति" का कॉलम हटाने का आदेश दिया। "केवल" जाति के आधार पर भेदभाव, परोक्ष रूप से भी, वर्जित है।
  • PG मेडिकल में अधिवास कोटा (29 जनवरी 2025): तन्वी बहल बनाम श्रेय गोयल में कोर्ट ने स्नातकोत्तर मेडिकल सीटों में निवास-आधारित आरक्षण को अनुच्छेद 14 के तहत अवैध माना; MBBS स्तर पर सीमित निवास वरीयता अब भी मान्य है।
  • UGC समता विनियम, 2026: परिसरों में जातिगत भेदभाव रोकने के लिए 13 जनवरी 2026 को अधिसूचित। 29 जनवरी 2026 को CJI सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने इन पर रोक लगा दी, यह कहते हुए कि जातिगत भेदभाव की परिभाषा (जो केवल SC, ST और OBC छात्रों को संरक्षण देती थी) अस्पष्ट और दुरुपयोग योग्य लगती है। फ़ैसला आने तक 2012 के विनियम लागू हैं।
  • महिला आरक्षण: 106वाँ संशोधन (2023) कागज़ पर लागू है, लेकिन इसकी सीटें उसके बाद होने वाली जनगणना और परिसीमन के बाद ही शुरू होंगी; जनगणना 2027 अभी चल रही है।

त्वरित दोहराईयाद रखने योग्य मुख्य बातें

  • पाँच वर्जित आधार: धर्म, मूलवंश, जाति, लिंग, जन्मस्थान; "केवल" शब्द अहम है।
  • अनुच्छेद 15 केवल नागरिकों की रक्षा करता है (अनुच्छेद 14 सभी व्यक्तियों की)।
  • 15(2) निजी व्यक्तियों पर भी लागू: दुकानें, होटल, कुएँ, घाट।
  • 15(3) महिलाएँ और बच्चे (मूल); 15(4) SEBC/SC/ST (पहला संशोधन, 1951)।
  • 15(5) निजी गैर-सहायता प्राप्त सहित प्रवेश (93वाँ संशोधन, 2005); अल्पसंख्यक संस्थान बाहर।
  • 15(6) EWS अधिकतम 10% (103वाँ संशोधन, 2019), जनहित अभियान (2022) में वैध।

मुकदमों की समयरेखाअनुच्छेद 15 पर मुख्य फ़ैसले

वर्षफ़ैसला और निष्कर्ष
1951मद्रास राज्य बनाम चंपकम दोराइराजन: सामुदायिक सीट कोटा रद्द; इसी से अनुच्छेद 15(4) आया।
1955डी.पी. जोशी: निवास "जन्मस्थान" नहीं है; निवास-आधारित फ़ीस नियम वैध।
1962एम.आर. बालाजी बनाम मैसूर राज्य: विशेष प्रावधान युक्तियुक्त हों, सामान्यतः 50% से कम।
2008अशोक कुमार ठाकुर: केंद्रीय संस्थानों में 27% OBC कोटा वैध, क्रीमी लेयर बाहर।
2014प्रमति एजुकेशनल ट्रस्ट: निजी गैर-सहायता प्राप्त संस्थानों के लिए अनुच्छेद 15(5) वैध।
2022जनहित अभियान: 103वाँ संशोधन और 10% EWS कोटा वैध (3:2)।
2024सुकन्या शांता: जेलों में जाति-आधारित काम रद्द।
2026UGC समता विनियमों पर सुप्रीम कोर्ट की रोक (29 जनवरी); 2012 के नियम जारी।

UPSC · राज्य PSC · न्यायपालिकाअनुच्छेद 15: UPSC परीक्षा कॉर्नर

  • प्रीलिम्स जाल: "उद्भव" और "निवास" अनुच्छेद 15 के आधार हैं। ग़लत। ये केवल अनुच्छेद 16(2) में हैं।
  • प्रीलिम्स जाल: "अनुच्छेद 15(5) अल्पसंख्यक शिक्षा संस्थानों पर लागू है।" ग़लत। उन्हें स्पष्ट रूप से बाहर रखा गया है।
  • मेन्स: "अनुच्छेद 15 के तहत सकारात्मक भेदभाव समानता का पहलू है, अपवाद नहीं।" एन.एम. थॉमस (1976) और इंद्रा साहनी (1992) के साथ चर्चा करें।
  • क्षैतिज पहुँच: अनुच्छेद 15(2), 17, 23 और 24 निजी व्यक्तियों के विरुद्ध भी लागू हो सकते हैं।
  • करंट: UGC समता विनियम 2026 पर रोक, सुकन्या शांता (2024), तन्वी बहल (2025)।

अभ्यास प्रश्नख़ुद को परखें: अनुच्छेद 15

किस संविधान संशोधन ने अनुच्छेद 15(5) जोड़ा, जिससे निजी गैर-सहायता प्राप्त शिक्षा संस्थानों में आरक्षण संभव हुआ?

शंका समाधानअक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भारतीय संविधान का अनुच्छेद 15 क्या है?

अनुच्छेद 15 राज्य को किसी नागरिक से केवल धर्म, मूलवंश, जाति, लिंग या जन्मस्थान के आधार पर भेदभाव करने से रोकता है, सार्वजनिक स्थानों तक पहुँच की गारंटी देता है, और महिलाओं, बच्चों, SC, ST, पिछड़े वर्गों और EWS के लिए विशेष प्रावधान की अनुमति देता है।

क्या अनुच्छेद 15 विदेशियों को उपलब्ध है?

नहीं। अनुच्छेद 15 "नागरिक" शब्द का प्रयोग करता है, इसलिए केवल भारतीय नागरिक इसका दावा कर सकते हैं।

अनुच्छेद 15(4) और अनुच्छेद 16(4) में क्या अंतर है?

अनुच्छेद 15(4) शिक्षा और अन्य क्षेत्रों में SEBC, SC और ST के लिए विशेष प्रावधान (आरक्षण सहित) की अनुमति देता है। अनुच्छेद 16(4) उन पिछड़े वर्गों के लिए सरकारी नौकरियों में आरक्षण की अनुमति देता है जिनका सेवाओं में पर्याप्त प्रतिनिधित्व नहीं है।

क्या कोई निजी होटल जाति के आधार पर प्रवेश से मना कर सकता है?

नहीं। दुकानों, सार्वजनिक भोजनालयों, होटलों और मनोरंजन स्थलों तक पहुँच के मामले में अनुच्छेद 15(2) निजी व्यक्तियों पर भी लागू है, और ऐसा इनकार सिविल अधिकार संरक्षण अधिनियम, 1955 के तहत अपराध भी हो सकता है।