भारत लगातार तीसरी बार अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन का अध्यक्ष चुना गया
अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन (International Solar Alliance, ISA) की शुरुआत भारत और फ़्रांस ने 2015 के पेरिस जलवायु सम्मेलन में की थी। 3 नवंबर 2026 को नई दिल्ली में इसकी सभा के नौवें सत्र में भारत को लगातार तीसरी बार अध्यक्ष चुना गया, और फ़्रांस फिर सह-अध्यक्ष बना। जानिए ISA क्या है, भारत की ऊर्जा और कूटनीति के लिए क्यों अहम है, और परीक्षा के लिए ज़रूरी तथ्य।

क्या हुआ
गठबंधन की सबसे बड़ी निर्णय संस्था ISA सभा का नौवाँ सत्र नई दिल्ली में भारत नवीकरणीय ऊर्जा शिखर सम्मेलन 2026 (2-5 नवंबर) के दौरान हुआ। 3 नवंबर को नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री प्रह्लाद जोशी ने घोषणा की कि भारत लगातार तीसरी बार ISA का अध्यक्ष चुना गया है, और फ़्रांस को फिर सह-अध्यक्ष चुने जाने पर बधाई दी।
जोशी ने अफ़्रीकी देशों में सौर निवेश लाने के लिए करीब 20 करोड़ डॉलर की अफ़्रीका सोलर फ़ैसिलिटी और सस्ती सौर बिजली तक पहुँच बढ़ाने के लिए भारत के करीब ₹225 करोड़ के योगदान का भी ज़िक्र किया, जैसा रिपोर्टों में बताया गया।
एक नज़र मेंअंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन: मुख्य तथ्य
| बिंदु | तथ्य |
|---|---|
| शुरुआत | 30 नवंबर 2015, पेरिस में COP21 के दौरान, भारत और फ़्रांस द्वारा |
| क़ानूनी आधार | ISA फ़्रेमवर्क समझौता, दिसंबर 2017 से लागू |
| मुख्यालय | गुरुग्राम, हरियाणा, भारत |
| सदस्यता | 2020 के संशोधन से सभी UN सदस्य देशों के लिए खुली; रिपोर्टों में करीब 130 हस्ताक्षरकर्ता और सदस्य देश |
| अध्यक्ष (2026) | भारत, लगातार तीसरा कार्यकाल |
| सह-अध्यक्ष (2026) | फ़्रांस |
| सबसे बड़ी संस्था | ISA सभा (नौवाँ सत्र, नई दिल्ली, नवंबर 2026) |
| मुख्य पहल | वन सन वन वर्ल्ड वन ग्रिड (OSOWOG); अफ़्रीका सोलर फ़ैसिलिटी |
अफ़्रीका, एशिया और लैटिन अमेरिका के कई धूप वाले देश महँगे क़र्ज़ और विशेषज्ञों की कमी की वजह से सौर बिजली नहीं लगा पाते। ISA एक ऐसा समूह है जहाँ ये देश मिलकर माँग रखते हैं, जानकारी बाँटते हैं और सौर परियोजनाओं के लिए सस्ता पैसा पाते हैं। भारत ने इसे शुरू किया, इसका दफ़्तर भारत में है, और अब भारत फिर इसकी अगुवाई कर रहा है।
🏠 रोज़मर्रा की मिसाल
यह किसानों की सहकारी समिति जैसा है: अकेला किसान एक ट्रैक्टर पूरी क़ीमत पर ख़रीदता है, पर सौ ट्रैक्टर ख़रीदने वाली समिति को छूट, मिस्त्री और बैंक क़र्ज़ तीनों मिल जाते हैं।
🇮🇳 असली भारतीय उदाहरण
मलावी का कोई गाँव बिजली की लाइन के लिए सालों इंतज़ार करने की जगह ISA की मदद और भारतीय प्रशिक्षण से सोलर मिनी-ग्रिड लगवा सकता है।
टाइमलाइनISA कैसे बढ़ा
- 12015
भारत और फ़्रांस ने पेरिस जलवायु सम्मेलन (COP21) में ISA शुरू किया।
- 22017
फ़्रेमवर्क समझौता लागू हुआ; ISA संधि पर आधारित संस्था बना।
- 32018
पहला ISA स्थापना सम्मेलन नई दिल्ली में हुआ।
- 42020
सदस्यता सिर्फ़ उष्णकटिबंधीय देशों के बजाय सभी UN सदस्य देशों के लिए खोली गई।
- 52021
ग्लासगो में COP26 पर ग्रीन ग्रिड्स इनिशिएटिव-वन सन वन वर्ल्ड वन ग्रिड शुरू हुआ।
- 62026
भारत तीसरी बार अध्यक्ष चुना गया; फ़्रांस सह-अध्यक्ष रहा।
मूल पाठअनुच्छेद 51 और 253: संविधान और भारत की संधियाँ
भारत का संविधान, अनुच्छेद 51. अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा की अभिवृद्धि।
राज्य (क) अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा की अभिवृद्धि का; (ख) राष्ट्रों के बीच न्यायसंगत और सम्मानपूर्ण संबंधों को बनाए रखने का; (ग) संगठित लोगों के एक-दूसरे से व्यवहारों में अंतरराष्ट्रीय विधि और संधि-बाध्यताओं के प्रति आदर बढ़ाने का; और (घ) अंतरराष्ट्रीय विवादों के माध्यस्थम् द्वारा निपटारे के लिए प्रोत्साहन देने का प्रयास करेगा।
अनुच्छेद 253. अंतरराष्ट्रीय करारों को प्रभावी करने के लिए विधान।
इस अध्याय के पूर्वगामी उपबंधों में किसी बात के होते हुए भी, संसद को किसी अन्य देश या देशों के साथ की गई किसी संधि, करार या अभिसमय अथवा किसी अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन, संगम या अन्य निकाय में किए गए किसी विनिश्चय के कार्यान्वयन के लिए भारत के संपूर्ण राज्यक्षेत्र या उसके किसी भाग के लिए कोई विधि बनाने की शक्ति है।
- ISA फ़्रेमवर्क समझौते में शामिल होना केंद्र की कार्यपालिका का काम है; ज़रूरत हो तो अनुच्छेद 253 संसद को संधि लागू करने का क़ानून बनाने देता है।
- अनुच्छेद 48A (नीति निदेशक तत्व) राज्य से पर्यावरण की रक्षा और सुधार को कहता है; स्वच्छ ऊर्जा कूटनीति इसमें मदद करती है।
- ISA भारत में मुख्यालय वाली पहली संधि-आधारित अंतरराष्ट्रीय अंतर-सरकारी संस्था है।
क्यों ज़रूरीISA: भारत के फ़ायदे बनाम चुनौतियाँ
भारत के फ़ायदे
- जलवायु कार्रवाई में ग्लोबल साउथ की अगुवाई
- भारतीय सोलर कंपनियों और इंजीनियरों के लिए बाज़ार
- अफ़्रीका में प्रशिक्षण और परियोजनाओं से सॉफ़्ट पावर
- 2030 तक 500 GW गैर-जीवाश्म लक्ष्य में मदद
चुनौतियाँ
- ज़रूरत के मुक़ाबले कम पैसा
- आयातित सोलर सेल और पैनल पर निर्भरता
- परियोजनाएँ ज़मीन पर धीरे पहुँचती हैं
- दूसरे जलवायु कोषों और समूहों से होड़
UPSC कॉर्नरUPSC प्रीलिम्स और मेन्स के लिए अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन
- प्रीलिम्स: ISA को भारत और फ़्रांस ने 2015 में पेरिस के COP21 में शुरू किया; मुख्यालय गुरुग्राम में है।
- प्रीलिम्स: 2020 से सभी UN सदस्य देश जुड़ सकते हैं, सिर्फ़ कर्क और मकर रेखा के बीच के देश नहीं।
- प्रीलिम्स: वन सन वन वर्ल्ड वन ग्रिड का मक़सद अलग-अलग टाइम ज़ोन में सौर बिजली को जोड़ना है।
- मेन्स (GS II/III): "अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन भारत की सबसे सफल जलवायु कूटनीति है।" आलोचनात्मक परीक्षण करें।
अभ्यास MCQख़ुद को परखें: सौर गठबंधन की कमान फिर भारत के हाथ
अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें: (1) इसे भारत और फ़्रांस ने पेरिस में COP21 के दौरान शुरू किया। (2) इसका मुख्यालय गुरुग्राम में है। (3) सिर्फ़ कर्क और मकर रेखा के बीच के देश ही इसके सदस्य बन सकते हैं। ऊपर दिए गए कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
शंका समाधानअक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
2026 में अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन का अध्यक्ष कौन है?
भारत, जो 3 नवंबर 2026 को लगातार तीसरी बार चुना गया। फ़्रांस सह-अध्यक्ष है।
ISA का मुख्यालय कहाँ है?
गुरुग्राम, हरियाणा में।
ISA कब शुरू हुआ?
30 नवंबर 2015 को पेरिस के COP21 जलवायु सम्मेलन में, भारत और फ़्रांस ने।
क्या कोई भी देश ISA में शामिल हो सकता है?
हाँ। 2020 के संशोधन के बाद सभी UN सदस्य देश शामिल हो सकते हैं।
वन सन वन वर्ल्ड वन ग्रिड क्या है?
ISA समर्थित एक विचार, जिसे 2021 में COP26 पर ब्रिटेन के साथ ग्रीन ग्रिड्स इनिशिएटिव के रूप में शुरू किया गया, ताकि अलग-अलग क्षेत्रों और टाइम ज़ोन के सौर ग्रिड जुड़ सकें।
स्रोत और आगे की पढ़ाईहमने जिन स्रोतों की जाँच की
तथ्य 4 नवंबर 2026 को नीचे दी गई रिपोर्टों से जाँचे गए। फ़ंडिंग के आँकड़े मंत्री के भाषण की रिपोर्टों के अनुसार हैं।