मूल पाठअनुच्छेद 18 का आधिकारिक पाठ
18. उपाधियों का अंत—
(1) राज्य, सेना या विद्या संबंधी सम्मान के सिवाय और कोई उपाधि प्रदान नहीं करेगा।
(2) भारत का कोई नागरिक किसी विदेशी राज्य से कोई उपाधि स्वीकार नहीं करेगा।
(3) कोई व्यक्ति, जो भारत का नागरिक नहीं है, राज्य के अधीन लाभ या विश्वास के किसी पद को धारण करते हुए किसी विदेशी राज्य से कोई उपाधि राष्ट्रपति की सहमति के बिना स्वीकार नहीं करेगा।
(4) राज्य के अधीन लाभ या विश्वास का पद धारण करने वाला कोई व्यक्ति किसी विदेशी राज्य से या उसके अधीन किसी रूप में कोई भेंट, उपलब्धि या पद राष्ट्रपति की सहमति के बिना स्वीकार नहीं करेगा।
राज्य महाराजा या राय बहादुर जैसी उपाधियाँ नहीं बना सकता। वह केवल सैन्य (जनरल, परमवीर चक्र) और शैक्षणिक (डॉक्टर, प्रोफ़ेसर) सम्मान दे सकता है।
भारत का नागरिक किसी विदेशी देश से उपाधि स्वीकार नहीं कर सकता।
भारत सरकार में काम करने वाले विदेशी को विदेशी उपाधि लेने के लिए राष्ट्रपति की अनुमति चाहिए; ऐसे पद पर बैठे किसी भी व्यक्ति को विदेशी राज्य से भेंट, वेतन या पद लेने के लिए यह अनुमति चाहिए।
"उपाधि" परिभाषित नहीं है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि राष्ट्रीय पुरस्कार उपाधि नहीं हैं, बशर्ते उन्हें नाम के साथ न जोड़ा जाए।
🏠 रोज़मर्रा की मिसाल
उपाधि एक ताज जैसी है जो सिर पर रहकर सबको बताती है कि आप उनसे ऊपर हैं। पुरस्कार एक अच्छी दौड़ के मेडल जैसा है: आप उस पर गर्व कर सकते हैं, पर उसे अपने नाम का हिस्सा नहीं बनाते।
🇮🇳 असली भारतीय उदाहरण
पद्म श्री पाने वाली डॉक्टर अपने परिचय में "डॉ. मीरा राव, पद्म श्री से सम्मानित" लिखती हैं। यह ठीक है। लेकिन फ़िल्म के पोस्टर पर "पद्म श्री मीरा राव" लिखना पुरस्कार को उपाधि की तरह इस्तेमाल करना है। 2013 में आंध्र प्रदेश हाई कोर्ट ने अभिनेता मोहन बाबू और ब्रह्मानंदम से नाम के आगे "पद्म श्री" न लगाने को कहा था।
चार खंडअनुच्छेद 18: उपाधियों के अंत के चार खंड
| खंड | किस पर | नियम |
|---|---|---|
| 18(1) | राज्य | सेना या विद्या संबंधी सम्मान के सिवाय कोई उपाधि नहीं देगा |
| 18(2) | भारत के नागरिक | किसी विदेशी राज्य से कोई उपाधि स्वीकार नहीं करेंगे |
| 18(3) | राज्य के अधीन लाभ या विश्वास का पद धारण करने वाले विदेशी | विदेशी उपाधि के लिए राष्ट्रपति की सहमति ज़रूरी |
| 18(4) | राज्य के अधीन लाभ या विश्वास का पद धारण करने वाला कोई भी व्यक्ति (नागरिक या विदेशी) | विदेशी राज्य से कोई भेंट, उपलब्धि या पद लेने के लिए राष्ट्रपति की सहमति ज़रूरी |
लाभ या विश्वास का पद
- खंड (3) और (4) राज्य के अधीन लाभ या विश्वास का पद धारण करने वाले व्यक्ति पर लागू हैं: ऐसा सरकारी पद जिसमें वेतन या भत्ते मिलते हों, या भरोसे का पद।
- यह विचार विधायकों के लिए भी अहम है: अनुच्छेद 102 और 191 के तहत लाभ का पद रखने वाला सांसद या विधायक अयोग्य हो जाता है, जब तक संसद उस पद को संसद (निरर्हता निवारण) अधिनियम, 1959 में छूट न दे। जया बच्चन बनाम भारत संघ (2006) में कसौटी यह थी कि पद से आर्थिक लाभ मिल सकता है या नहीं, न कि सचमुच पैसा लिया गया या नहीं।
- खंड (4) के कारण ही अधिकारियों को मूल्यवान विदेशी उपहार घोषित करने और अक्सर सरकारी तोशाख़ाने में जमा करने होते हैं।

पुरस्कार बनाम उपाधिक्या भारत रत्न और पद्म पुरस्कार उपाधि हैं? बालाजी राघवन केस
- 1954: भारत रत्न और पद्म पुरस्कार शुरू हुए (2 जनवरी 1954)।
- 1977: जनता सरकार ने इन्हें अनुच्छेद 18 की भावना के विरुद्ध बताकर बंद किया।
- 1980: इंदिरा गांधी सरकार ने इन्हें फिर शुरू किया।
- 1992: केरल और मध्य प्रदेश हाई कोर्ट में जनहित याचिकाओं से चुनौती दी गई; कुछ समय के लिए पुरस्कारों पर रोक लगी।
- 15 दिसंबर 1995: बालाजी राघवन बनाम भारत संघ में पाँच न्यायाधीशों की पीठ ने कहा कि राष्ट्रीय पुरस्कार अनुच्छेद 18 के तहत उपाधि नहीं हैं। ये योग्यता और सेवा को मान्यता देते हैं और कोई वंशानुगत दर्जा नहीं बनाते। लेकिन इन्हें नाम के आगे या पीछे नहीं लगाया जा सकता; दुरुपयोग पर पुरस्कार वापस लिया जा सकता है। कोर्ट ने निष्पक्ष चयन प्रक्रिया और संख्या की सीमा की भी बात कही। (नोट्स में 1996 लिखा है; फ़ैसला 15 दिसंबर 1995 को आया।)
| उपाधि (निषिद्ध) | पुरस्कार (मान्य) |
|---|---|
| दर्जा या वंशानुगत हैसियत बनाती है: राजा, राय बहादुर, सर, दीवान बहादुर | सेवा या योग्यता को मान्यता: भारत रत्न, पद्म विभूषण, पद्म भूषण, पद्म श्री |
| नाम का हिस्सा बनकर धारक को दूसरों से ऊपर रखती है | नाम के आगे या पीछे प्रयोग नहीं किया जा सकता |
| समता (अनुच्छेद 14) और बंधुत्व के विरुद्ध | समता के अनुकूल, जैसा सुप्रीम कोर्ट ने 1995 में कहा |
| मान्य अपवाद: सैन्य (परमवीर चक्र, जनरल) और शैक्षणिक (डॉक्टर, प्रोफ़ेसर) | दुरुपयोग पर वापस लिया जा सकता है |
2024 से 2026
- भारत रत्न 2024 पाँच लोगों को मिला, एक वर्ष में सबसे अधिक: कर्पूरी ठाकुर, लालकृष्ण आडवाणी, चौधरी चरण सिंह, पी.वी. नरसिंह राव और एम.एस. स्वामीनाथन। सामान्य परंपरा एक वर्ष में अधिकतम तीन की है।
- पद्म पुरस्कार 2026 की घोषणा 25 जनवरी 2026 को हुई: 131 पुरस्कार (5 पद्म विभूषण, 13 पद्म भूषण, 113 पद्म श्री)। 2016 से नामांकन जनता के लिए ऑनलाइन खुले हैं, जो चयन को व्यापक बनाने का क़दम है और बालाजी राघवन की भावना के अनुरूप है।
- भारतीय नेता और नागरिक अक्सर विदेशी नागरिक सम्मान पाते हैं। इन्हें दर्जा बनाने वाली उपाधि नहीं, सम्मान माना जाता है; फिर भी लाभ या विश्वास का पद धारण करने वाले के लिए खंड (4) के तहत विदेशी राज्य से भेंट या पद लेने में राष्ट्रपति की सहमति ज़रूरी है।

त्वरित दोहराईयाद रखने योग्य मुख्य बातें
- राज्य सेना या विद्या संबंधी सम्मान के सिवाय कोई उपाधि नहीं देगा।
- नागरिक विदेशी उपाधि स्वीकार नहीं कर सकते।
- लाभ के पद पर बैठे लोगों को विदेशी उपाधि (विदेशी) और विदेशी भेंट या पद (सभी) के लिए राष्ट्रपति की सहमति चाहिए।
- "उपाधि" परिभाषित नहीं; अनुच्छेद 18 में दंड प्रावधान नहीं।
- बालाजी राघवन (1995): भारत रत्न और पद्म पुरस्कार उपाधि नहीं, पर नाम के साथ प्रयोग नहीं।
समयरेखाअनुच्छेद 18 और राष्ट्रीय पुरस्कार: मुख्य तिथियाँ
| वर्ष | घटना |
|---|---|
| 1950 | अनुच्छेद 18 से उपाधियों का अंत; अंग्रेज़ी उपाधियों का क़ानूनी अर्थ समाप्त। |
| 1954 | भारत रत्न और पद्म पुरस्कार शुरू। |
| 1959 | संसद (निरर्हता निवारण) अधिनियम: छूट वाले लाभ के पद। |
| 1977 | जनता सरकार ने पुरस्कार बंद किए। |
| 1980 | पुरस्कार फिर शुरू। |
| 1992 | हाई कोर्ट में जनहित याचिकाएँ; पुरस्कारों पर रोक। |
| 1995 | बालाजी राघवन (15 दिसंबर): पुरस्कार उपाधि नहीं; नाम के आगे-पीछे नहीं। |
| 2006 | जया बच्चन: लाभ के पद की कसौटी। |
| 2024 | एक वर्ष में पाँच भारत रत्न। |
| 2026 | 131 पद्म पुरस्कारों की घोषणा (25 जनवरी)। |
UPSC · राज्य PSC · न्यायपालिकाअनुच्छेद 18: UPSC परीक्षा कॉर्नर
- प्रीलिम्स जाल: "राज्य के अधीन लाभ का पद धारण करने वाला विदेशी कभी विदेशी उपाधि नहीं ले सकता।" ग़लत। राष्ट्रपति की सहमति से ले सकता है।
- प्रीलिम्स जाल: "भारत रत्न अनुच्छेद 18 के तहत उपाधि है।" ग़लत (बालाजी राघवन, 1995)।
- प्रीलिम्स तथ्य: अनुच्छेद 18 केवल सैन्य और शैक्षणिक सम्मान की अनुमति देता है; यह कभी संशोधित नहीं हुआ।
- मेन्स (150 शब्द): "राष्ट्रीय पुरस्कार समता के सिद्धांत के अनुकूल हैं।" अनुच्छेद 18 के संदर्भ में चर्चा करें।
अभ्यास प्रश्नख़ुद को परखें: अनुच्छेद 18
राज्य अनुच्छेद 18 का उल्लंघन किए बिना इनमें से क्या दे सकता है? 1. सैन्य सम्मान 2. शैक्षणिक सम्मान 3. राय बहादुर जैसी वंशानुगत उपाधि
शंका समाधानअक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
भारतीय संविधान का अनुच्छेद 18 क्या है?
अनुच्छेद 18 उपाधियों का अंत करता है। राज्य सैन्य या शैक्षणिक सम्मान के सिवाय कोई उपाधि नहीं दे सकता, नागरिक विदेशी उपाधि नहीं ले सकते, और लाभ के पद वालों को विदेशी उपाधि, भेंट या पद के लिए राष्ट्रपति की सहमति चाहिए।
क्या भारत रत्न एक उपाधि है?
नहीं। बालाजी राघवन बनाम भारत संघ (15 दिसंबर 1995) में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि भारत रत्न और पद्म पुरस्कार उपाधि नहीं हैं, पर इन्हें नाम के आगे या पीछे नहीं लगाया जा सकता।
क्या भारतीय नागरिक विदेशी पुरस्कार ले सकता है?
नागरिक विदेशी उपाधि नहीं ले सकता। नागरिक सम्मानों को सामान्यतः उपाधि नहीं माना जाता, पर लाभ या विश्वास का पद धारण करने वाले को विदेशी राज्य से भेंट, उपलब्धि या पद लेने के लिए राष्ट्रपति की सहमति चाहिए।