मूल पाठअनुच्छेद 24 का आधिकारिक पाठ
24. कारख़ानों आदि में बालकों के नियोजन का प्रतिषेध—
चौदह वर्ष से कम आयु के किसी बालक को किसी कारख़ाने या खान में काम करने के लिए नियोजित नहीं किया जाएगा या किसी अन्य परिसंकटमय नियोजन में नहीं लगाया जाएगा।
14 वर्ष से कम कोई बच्चा कारख़ाने, खान या किसी अन्य ख़तरनाक काम में नहीं लगाया जा सकता।
संविधान "ख़तरनाक" की परिभाषा नहीं देता। क़ानून और अदालतें इसे भरती हैं: खनन, पटाखे और माचिस, रसायन, विस्फोटक, ईंट भट्ठे और ऐसे काम।
2016 से 14 से कम आयु के बच्चे किसी भी काम में नहीं लगाए जा सकते, सिवाय स्कूल के बाद परिवार की मदद या बाल कलाकार के। 14 से 18 वर्ष के किशोर ख़तरनाक काम नहीं कर सकते।
अनुच्छेद 24 को अनुच्छेद 21क (6 से 14 वर्ष तक मुफ़्त शिक्षा) और अनुच्छेद 39(ङ) और (च) के नीति निदेशक तत्वों का सहारा है, जो बच्चों को शोषण और उम्र के अनुपयुक्त काम से बचाते हैं।
🏠 रोज़मर्रा की मिसाल
बचपन घर की नींव जैसा है। कंक्रीट जमने से पहले उस पर ईंटों का बोझ डालें तो वह चटक जाती है और पूरा घर ज़िंदगी भर कमज़ोर रहता है। अनुच्छेद 24 कहता है: पहले नींव जमने दो; अभी स्कूल, काम बाद में।
🇮🇳 असली भारतीय उदाहरण
तमिलनाडु का शिवकाशी भारत के ज़्यादातर पटाखे और माचिस बनाता है। 1990 के दशक में वहाँ बहुत से बच्चे काम करते थे, और हादसों में कई की मौत हुई। एम.सी. मेहता बनाम तमिलनाडु राज्य (1996) में सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया कि बाल श्रम कराने वाला हर नियोक्ता प्रति बच्चा ₹20,000 कल्याण कोष में जमा करे, ताकि बच्चा काम की जगह स्कूल जा सके। आज पटाखा इकाई में 13 साल का बच्चा नियोक्ता का अपराध है; वही बच्चा स्कूल के बाद परिवार की दुकान पर मदद करे तो यह अनुमति है।
अनुच्छेद 24 क्या कहता हैअनुच्छेद 24: बाल श्रम पर रोक का अर्थ और दायरा
- तीन जगहें: कारख़ाना, खान और "कोई अन्य ख़तरनाक नियोजन"। 1950 में घरेलू काम, खेत और ढाबे का नाम नहीं था, इसीलिए बाद में क़ानूनों की ज़रूरत पड़ी।
- 14 वर्ष की आयु: अनुच्छेद 21क (6 से 14 वर्ष) और 1950 के मूल अनुच्छेद 45 की मुफ़्त और अनिवार्य शिक्षा की आयु से मेल खाती है।
- "ख़तरनाक" परिभाषित नहीं। उदाहरण: खनन, पटाखे और माचिस बनाना, रासायनिक इकाइयाँ, विस्फोटक, काँच और ईंट भट्ठे, हानिकारक धूल वाली कालीन बुनाई।
- निजी नियोक्ताओं पर भी: अनुच्छेद 23 की तरह अनुच्छेद 24 निजी व्यक्तियों पर भी लागू है, और उल्लंघन क़ानून के तहत दंडनीय है।
- बड़ी योजना का हिस्सा: अनुच्छेद 39(ङ) (बच्चों की सुकुमार अवस्था का दुरुपयोग न हो), अनुच्छेद 39(च) (बच्चे स्वतंत्रता और गरिमा के साथ बढ़ें), अनुच्छेद 45 (प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल), अनुच्छेद 51क(ट) (6 से 14 वर्ष के बच्चों को स्कूल भेजना माता-पिता का कर्तव्य)।
क़ानून की सीढ़ीअनुच्छेद 24: 1948 से 2016 संशोधन तक बाल श्रम क़ानून
- कारख़ाना अधिनियम 1948 और खान अधिनियम 1952: 14 से कम कोई बच्चा कारख़ाने में नहीं; खानों में किशोरों पर कड़ी सीमाएँ।
- बाल श्रम (प्रतिषेध और विनियमन) अधिनियम 1986: 14 से कम बच्चों को सूचीबद्ध ख़तरनाक व्यवसायों और प्रक्रियाओं में रोका, और बाक़ी जगह कार्य दशाओं के ज़रिए उनके काम को नियंत्रित किया।
- एम.सी. मेहता बनाम तमिलनाडु राज्य (10 दिसंबर 1996): शिवकाशी केस। दोषी नियोक्ता प्रति बच्चा ₹20,000 एक बाल श्रम पुनर्वास-सह-कल्याण कोष में जमा करे; राज्य परिवार के एक वयस्क को नौकरी दे या ₹5,000 जोड़े; ब्याज से बच्चे की पढ़ाई हो।
- शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 (1 अप्रैल 2010 से लागू): 6 से 14 वर्ष तक मुफ़्त और अनिवार्य शिक्षा, यानी बच्चे की क़ानूनी जगह स्कूल है, काम की जगह नहीं।
- 2016 संशोधन: नया नाम बाल और किशोर श्रम (प्रतिषेध और विनियमन) अधिनियम; 14 से कम पर दो अपवादों के साथ पूरी रोक; 14 से 18 वर्ष के किशोरों पर ख़तरनाक काम की रोक; कड़ी सज़ा; अपराध संज्ञेय।
- 2017: भारत ने ILO अभिसमय 138 (न्यूनतम आयु) और 182 (बाल श्रम के सबसे बुरे रूप) की पुष्टि की; शिकायत और प्रवर्तन के लिए पेंसिल (PENCIL) पोर्टल शुरू हुआ।
2016 के बाद सज़ा
- नियोक्ता: 6 महीने से 2 साल की जेल, या ₹20,000 से ₹50,000 जुर्माना, या दोनों। दोबारा अपराध पर 1 से 3 साल।
- माता-पिता या अभिभावक: पहली बार कोई सज़ा नहीं; दोबारा होने पर जुर्माना।
- हर ज़िले में बचाए गए बच्चों और किशोरों के लिए पुनर्वास कोष।

आयु नियम और घंटेअनुच्छेद 24: 2016 अधिनियम के आयु नियम और कार्य दशाएँ
| आयु वर्ग | 2016 अधिनियम का नियम | अपवाद और शर्तें |
|---|---|---|
| बालक: 14 से कम | किसी भी व्यवसाय या प्रक्रिया में काम नहीं | स्कूल के बाद या छुट्टियों में परिवार या पारिवारिक उद्यम की ग़ैर-ख़तरनाक काम में मदद; फ़िल्म, टीवी, विज्ञापन, खेल में बाल कलाकार (पढ़ाई की क़ीमत पर नहीं) |
| किशोर: 14 से 18 | ख़तरनाक व्यवसायों या प्रक्रियाओं में काम नहीं (खान, ज्वलनशील पदार्थ या विस्फोटक, कारख़ाना अधिनियम की ख़तरनाक प्रक्रियाएँ) | नीचे दी गई कार्य दशाओं के साथ ग़ैर-ख़तरनाक काम की अनुमति |
| वयस्क: 18 और ऊपर | सामान्य श्रम क़ानून लागू |
अनुमत काम के लिए कार्य दशाएँ
| कार्य दशा (1986 अधिनियम, भाग III) | नियम |
|---|---|
| लगातार काम | 3 घंटे से अधिक नहीं, फिर कम से कम 1 घंटे का आराम |
| दिन का कुल फैलाव | आराम और प्रतीक्षा समय मिलाकर 6 घंटे से अधिक नहीं |
| रात का काम | शाम 7 से सुबह 8 बजे तक नहीं |
| ओवरटाइम | अनुमति नहीं; एक ही दिन दो जगह काम नहीं |
| साप्ताहिक छुट्टी | हर सप्ताह एक पूरे दिन की छुट्टी |
| रजिस्टर | नियोक्ता रजिस्टर रखे: नाम, जन्मतिथि, काम का प्रकार, घंटे और आराम |
- ये नियम 1986 में ग़ैर-ख़तरनाक काम करने वाले बच्चों के लिए बने थे। 2016 के बाद ये अनुमत काम में किशोरों (14 से 18) की रक्षा करते हैं।

बहस और आगे की राहअनुच्छेद 24: पारिवारिक अपवाद पर बहस और आगे की राह
- जनगणना 2011 में 5 से 14 वर्ष के लगभग 1 करोड़ (1.01 करोड़) काम करने वाले बच्चे गिने गए। दशकों में संख्या घटी है, पर बाल श्रम ख़त्म नहीं हुआ, ख़ासकर खेती, घर से होने वाले काम, घरेलू नौकरी और छोटे ढाबों में।
- 2016 का पारिवारिक उद्यम वाला अपवाद क़ानून का सबसे बहस वाला हिस्सा है।
UPSC उत्तरों में अक्सर लिखे जाने वाले बिंदु
- अपवाद के पक्ष में दिए जाने वाले तर्क: ग़रीब परिवार हर हाथ पर निर्भर हैं; बच्चे घर पर पारंपरिक हुनर सीखते हैं; ज़मीनी हक़ीक़त भूलकर पूरी रोक काम को छिपा सकती है; क़ानून फिर भी स्कूल को पहले रखता है।
- अपवाद के विरोध में दिए जाने वाले तर्क: "पारिवारिक उद्यम" की जाँच कठिन है और इसमें शोषण छिप सकता है; घर का काम भी लंबा और नुक़सानदेह हो सकता है; 14 की आयु किशोर न्याय अधिनियम और संयुक्त राष्ट्र बाल अधिकार अभिसमय की 18 वर्ष की सीमा से कम है; 2016 में ख़तरनाक कामों की सूची छोटी की गई।
- आगे की राह (परीक्षा दृष्टि): रोक को स्कूल उपस्थिति और मध्याह्न भोजन से जोड़ें, माता-पिता में जागरूकता बढ़ाएँ, बचाव और पुनर्वास का पैसा समय पर दें, पेंसिल पोर्टल और श्रम निरीक्षण का प्रयोग करें, और ख़तरनाक कामों की सूची की समीक्षा करते रहें।
त्वरित दोहराईयाद रखने योग्य मुख्य बातें
- 14 से कम कोई बच्चा कारख़ाने, खान या ख़तरनाक काम में नहीं।
- संविधान में "ख़तरनाक" परिभाषित नहीं; क़ानून ख़तरनाक कामों की सूची देते हैं।
- 2016 संशोधन: 14 से कम हर काम पर रोक (परिवार की मदद और बाल कलाकार अपवाद); 14 से 18 ख़तरनाक काम नहीं।
- एम.सी. मेहता (1996): दोषी नियोक्ता प्रति बच्चा ₹20,000 कल्याण कोष में दे।
- अनुच्छेद 21क, 39(ङ), 39(च), 45 और 51क(ट) से जुड़ा; ILO अभिसमय 138 और 182 की 2017 में पुष्टि।
समयरेखाअनुच्छेद 24 और बाल श्रम क़ानून: मुख्य तिथियाँ
| वर्ष | घटना |
|---|---|
| 1948 | कारख़ाना अधिनियम: 14 से कम बच्चे कारख़ाने में नहीं। |
| 1950 | अनुच्छेद 24 लागू। |
| 1952 | खान अधिनियम। |
| 1986 | बाल श्रम (प्रतिषेध और विनियमन) अधिनियम। |
| 1996 | एम.सी. मेहता (शिवकाशी): प्रति बच्चा ₹20,000 कल्याण कोष में। |
| 2002 | 86वाँ संशोधन: अनुच्छेद 21क, नया 45, 51क(ट)। |
| 2010 | शिक्षा का अधिकार अधिनियम लागू (1 अप्रैल)। |
| 2016 | संशोधन: 14 से कम पूरी रोक; 14 से 18 ख़तरनाक काम नहीं। |
| 2017 | ILO अभिसमय 138 और 182 की पुष्टि; पेंसिल पोर्टल। |
UPSC · राज्य PSC · न्यायपालिकाअनुच्छेद 24: UPSC परीक्षा कॉर्नर
- प्रीलिम्स जाल: "अनुच्छेद 24 14 से कम बच्चों के हर काम पर रोक लगाता है।" ग़लत: अनुच्छेद केवल कारख़ाने, खान और ख़तरनाक काम की बात करता है; लगभग पूरी रोक 2016 के क़ानून से आई।
- प्रीलिम्स जाल: "प्रति बच्चा ₹20,000 का नियम बाल श्रम अधिनियम 1986 में है।" यह एम.सी. मेहता बनाम तमिलनाडु राज्य (1996) से आया।
- प्रीलिम्स तथ्य: अनुच्छेद 24 नागरिकों और ग़ैर-नागरिकों दोनों को मिलता है और निजी नियोक्ताओं पर लागू है।
- मेन्स (150 शब्द): बाल और किशोर श्रम (प्रतिषेध और विनियमन) अधिनियम 2016 ने बाल श्रम क़ानून को कैसे बदला? क्या पारिवारिक उद्यम वाला अपवाद उचित है?
- मेन्स (250 शब्द): "बाल श्रम ग़रीबी का लक्षण भी है और कारण भी।" अनुच्छेद 21क और 24 के संदर्भ में चर्चा करें।
अभ्यास प्रश्नख़ुद को परखें: अनुच्छेद 24
2016 में संशोधित बाल और किशोर श्रम (प्रतिषेध और विनियमन) अधिनियम के अनुसार इनमें से क्या सही है? 1. 14 से कम बच्चा स्कूल के बाद ग़ैर-ख़तरनाक पारिवारिक उद्यम में मदद कर सकता है। 2. 16 वर्ष का किशोर खान में काम कर सकता है। 3. 14 से कम बच्चा सुरक्षा शर्तों के साथ टीवी धारावाहिक में कलाकार के रूप में काम कर सकता है।
शंका समाधानअक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
भारतीय संविधान का अनुच्छेद 24 क्या है?
अनुच्छेद 24 कहता है कि 14 वर्ष से कम किसी बच्चे को कारख़ाने या खान में या किसी अन्य ख़तरनाक काम में नहीं लगाया जाएगा। अनुच्छेद 23 के साथ यह शोषण के विरुद्ध अधिकार बनाता है।
क्या भारत में 14 से कम बच्चा कोई काम कर सकता है?
2016 के क़ानून में केवल दो स्थितियों में: स्कूल के बाद या छुट्टियों में ग़ैर-ख़तरनाक काम में परिवार या पारिवारिक उद्यम की मदद, और पढ़ाई पर असर डाले बिना फ़िल्म, टीवी या खेल में बाल कलाकार के रूप में।
बच्चे को काम पर रखने की सज़ा क्या है?
6 महीने से 2 साल की जेल, या ₹20,000 से ₹50,000 जुर्माना, या दोनों; दोबारा अपराध पर 1 से 3 साल। यह संज्ञेय अपराध है।
एम.सी. मेहता बनाम तमिलनाडु राज्य (1996) में सुप्रीम कोर्ट ने क्या आदेश दिया?
ख़तरनाक काम में बच्चे को रखने वाला नियोक्ता प्रति बच्चा ₹20,000 बाल श्रम पुनर्वास-सह-कल्याण कोष में दे; राज्य परिवार के एक वयस्क को नौकरी दे या ₹5,000 जोड़े; ब्याज से बच्चे की पढ़ाई हो।